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मंगलवार, 24 जनवरी 2017

जयंती पर विशेष

जब हाजत पहुँच गये जननायक

- डा. निहोरा प्रसाद यादव

बात १९८२ की है। पूरे बिहार में सुखाड़ से अकाल पड़ गया था। इस अवस्था में पूरे देश के प्रेजायडिंग आॅफिसर्स का सम्मेलन बिहार में रखा गया था । इस सम्मेलन में करोडों रुपये पानी की तरह बहाये जा रहे थे। पटना को दुल्हन की तरह सजाया गया था। एक तरफ अकाल से बिहार की जनता परेशान थी वहीं दूसरी तरफ सम्मेलन पर पैसे पानी की तरह बहाए जा रहे थे। ऐसा महसूस हो रहा था कि यह सम्मेलन अकाल पीड़ितों को चिढ़ा रहा हो।

सरकार को सूचना थी कि ऐसे समय में कराये जा रहे सम्मेलन का विरोध हो सकता है। इसलिए पटना प्रशासन को सख्त निर्देश था कि ऐसी व्यवस्था की जाय ताकि इसके विरोध में परिन्दा भी पंख न मार सके। चारों तरफ प्रशासन सर्तक। जिन दलों एवं नेताओं पर संदेह था उस पर प्रशासन की कड़ी नजरे थी। ऐसी स्थिति में इस सम्मेलन का विरोध करना काफी कठिन कार्य हो गया था। जहाँ कहीं चार पांच कार्यकर्ता एकत्रित देखे जाते प्रशासन वहां पर मौजूद हो जाता। मुझे युवा लोक दल में महासचिव की जिम्मेदारी दी गई थी। हमने भी मन बना लिया था कि चाहे जो भी परिणाम हो जनहित में इस सम्मेलन का विरोध आवश्यक है े ताकि संदेश बिहार के आम आवाम में जाये कि बिहार के इस संकट कि स्थिति में किस तरह संकट से उवारने के बजाय अनावश्यक रूप से करोडों रूपयों का खर्च किया जा रहा है।

उस दिन दिनभर हमलोग भी चौकस रहे। कहाँ और किस तरह विरोध किया जाय। नीतियाँ तय करते रहे। तय हुआ कि सूर्यास्त होते ही हम सभी एक-एक कर जीपीओ गोलंबर के पास इकठठे होंगे, क्योकि संध्या समय प्रशासन भी मान लेगा कि अब विरोध नहीं होगा। इसी नीति क तहत हमलोग सैकड़ों की संख्या में एकत्रित हुए। वहीं से सम्मेलन के विरोध में नारा लगते आगे बढ़ने लगे ज्योही थोडा कदम आगे बढे प्रशासन आकर घेरे में लेकर गिरफ्तार कर ली। कोतवाली थाना लाया गया। अपराधियों की तरह हाजत में डाल दिया गया। रात भर हाजत में ही रहे जब कर्पूरी ठाकुर को जानकारी मिली कि हम लोगों को हाजत में बंद रखा है ? प्रात: काल अचानक कर्पूरी जी हाजत के सामने खड़े दिखे। विश्वास नहीं हो रहा था कि इतने बड़े राजनेता हाजत के सामने आकर हमलोगों की पीड़ा को सहलायेंगे। ऐसा सोचा भी नहीं था। बड़े भावुक मन से उन्होंने कहा कि आपलोगों को हाजत में बंद कर दिया गया है यह न्यायोचित नहीं है।

जो नेता कार्यकतार्ओं के पीड़ा में शामिल होने हाजत पहुंच जाय, वह मामूली नहीं महान नेता हो सकते हैं। उनके इस व्यवहार से कार्यकर्ताओं के प्रति आगाध प्रेम झलकता था। कार्यकर्तार्ओं की पीड़ा देखने के बाद कर्पूरी जी के चेहरे पर पीड़ा स्पष्ट दिखाई देने लगती थी। हर संभव उनके पीड़ा को दूर करने की कोशिश करते थे। यही कारण रहा की कार्यकर्ता कर्पूरी जी को मात्र नेता ही नहीं अभिभावक भी मानते थे।

दृढ निश्चयी बिहार का दृढ निश्चय

- प्रवीण बागी

कौन कहता है आकाश में सुराख हो नहीं सकता / एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों । दुष्यंत कुमार की ये कालजयी पंक्तियाँ बिहार में शराबबंदी के पक्ष में बनी मानव श्रंखला को देखकर दिमाग में अनायास ही कौंध गई। 21 जनवरी 17 को बनी यह मानव श्रृंखला अभूतपूर्व और ऐतिहासिक थी। बिहार जैसे राज्य में शराबबंदी के पक्ष में 3 करोड़ से ज्यादा लोगों का सड़क पर आना किसी चमत्कार से कम नहीं। बिहार में ऐसे चमत्कार होते रहते हैं। ऐसे चमत्कार यह उम्मीद जगाते हैं कि बिहार भी बदल सकता है। बशर्ते कोई सही नेतृत्वकर्त्ता मिले।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वह कर दिखाया जो दुनिया में आज तक नहीं हुआ था।

कहते हैं कि आजतक दुनिया में इतनी लंबी और इतने अधिक लोगों की मानव श्रृंखला नहीं बनी थी। नीतीश कुमार द्वारा शुरू की गई शराबबंदी की मुहिम को सभी दलों ने समर्थन दिया। हाल में अपने पटना दौरे के समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी नीतीश की इस मुहिम का पुरजोर समर्थन किया। इससे शराबबंदी के अभियान को और बल मिला। जब नीतीश कुमार ने शराबबंदी लागू की थी ,उस समय अलग -अलग वजहों से इसकी आलोचना की जा रही थी। लेकिन नीतीश आलोचनाओं से घबराये नहीं, डटे रहे। अपनी हर सभा में शराबबंदी के पक्ष में दलीलें देते रहे। इसका असर भी हुआ। शराबबंदी से गांवों में भी माहौल बदला।लोगों को समझ में आने लगा की शराब से फायदा नहीं है। और फिर कारवां बढ़ता गया। जिसका नतीजा 21 जनवरी को दिखा।

यह मानव श्रृंखला 11 हजार 400 किलोमीटर लंबी थी। हालाँकि कई जगह लोग दो -दो -तीन -तीन लाइन लगाए हुए थे। 45 मिनट से अधिक समय तक पूरे बिहार में लोग एक दूसरे का हाथ पकडे खड़े रहे। पटना के गांधी मैदान में नीतीश कुमार लालू प्रसाद का हाथ पकडे मानव श्रृंखला का हिस्सा बने। उधर सिवान में केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव ,बीजेपी नेता सुशील मोदी, विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रेम कुमार ,सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल आदि नेता मानव श्रृंखला का हिस्सा बने।

आम लोगों में उत्साह था। पश्चिम चंपारण में एक डेयरी संचालक जय सिंह और यश सिंह ने ने 600 लीटर दूध की चाय बनाकर मानव श्रृंखला में शामिल लोगों को मुफ्त में पिलाई । यह भाव बता रहा था कि बिहार में अब शराब का दौर गुजरे जमाने की बात हो गई है। हालांकि कई जगह कुछ बच्चे -बच्चियां बेहोश हो गए। शुक्र है की इलाज से वे तुरंत ठीक हो गए।

इस ऐतिहासिक घटना को रिकार्ड करने के लिए 5 सेटेलाइटों से तस्वीर ली गई। इसके अलावा 40 ड्रोन ,कई हेलीकॉप्टर भी इस काम में लगे हुए थे। सभी तस्वीरों और रेकॉर्डिंग की पुष्टि के बाद गिनीज बुक में इसे दर्ज किया जायेगा। इतनी लंबी मानव श्रृंखला दुनिया ने नहीं देखी थी. बिहार ने अरसे बाद अपनी ताकत दिखाई है। यह जज्बा बना रहे तो बिहार को आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता।(लेखक सूबे के वरिष्ठ टीवी पत्रकार हैं)

विषमताओं के बावजूद घरेलू कामगारों का जीवन सुधारने की मुहिम, मुजफ्फरपुर की संगीता सुभाषिणी की संघर्ष यात्रा

दोस्तों, मुजफ्फरपुर शहर की रहने वाली संगीता सुभाषिणी की खासियत यही है कि अपनी निजी जिंदगी में तमाम प्रतिकूलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी है। अपनी निजी जिंदगी की परेशानियों के समानांतर उन्होंने समाज के उस तबके के विकास का अभियान शुरू किया, जिसकी उपयोगिता तो हर संभ्रांत परिवार में है, लेकिन कद्र कोई नहीं करता है। वह संगीता ही हैं, जिनके कारण मुजफ्फरपुर शहर में चूल्हा-चौका करने वाली करीब चार हजार महिलायें आज न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि समाज में अपनी उपस्थिति भी पूरी मजबूती के साथ स्थापित कर रही हैं।

संगीता बताती हैं कि पहले घरों में काम करने वाली महिलाओं को मुजफ्फरपुर शहर में हेय दृष्टि से देखा जाता था। इसके अलावा उन्हें नियमित रूप से मजदूरी का भुगतान भी नहीं किया जाता था। जबकि यह सभी जानते हैं कि कोई भी महिला किसी दूसरे के घर के में चूल्हा-चौका जैसा काम किस हालात में करती है। सामाजिक रूप से यह पेशा कभी सम्मानजनक पेशा नहीं माना गया। इस पेशे को अपनाने वाली महिलाओं में अधिकांश वंचित तबके की होती हैं जिनके पास रोजगार का कोई विकल्प नहीं होता है। संगीता बताती हैं कि वर्ष 2008 में उन्होंने 'संबल' संस्था की स्थापना की। तब मकसद यही था कि ऐसी महिलाओं को सशक्त बनाया जाय।

लेकिन यह रास्ता इतना आसान नहीं था। जिन घरों में महिलायें दाई का काम करती थीं, उनके मालिकों का व्यवहार एकदम क्रूर था। यहां तक कि स्थानीय पुलिस प्रशासन भी ऐसी महिलाओं की शिकायत पर ध्यान नहीं देती थी। चुनौती यही थी कि ऐसी महिलाओं को उनका अधिकार सम्मान के साथ दिलाया जाय। संबल के बैनर तले महिलायें एकजुट होती गयीं और फिर अहिंसात्मक तरीके से अन्याय के खिलाफ आंदोलन छेड़ा गया।

संगीता के मुताबिक आज उनके संगठन में चार हजार से अधिक महिलायें जुड़ी हैं। इसके अलावा आसपास के इलाकों में उन्होंने अपने प्रशिक्षित प्रतिनिधियों को जिम्मेवारी दे रखी है। ये प्रतिनिधि अपने-अपने इलाकों में घरेलू नौकरानियों एवं दाईयों, आदि का पूरा रिकार्ड रखती हैं। साथ ही उनके साथ होने वाले किसी भी प्रकार के अन्याय के खिलाफ सूचना मिलने पर पूरी जानकारी संगीता सुभाषिणी को देती हैं। इसके बाद सुभाषिणी महिलाओं को एकजुट कर आपस में रणनीति तय करती हैं। इसके बाद ही अहिंसात्मक तरीके से कार्रवाई की जाती है।

संगीता ने बताया कि वर्ष 2012 से पहले उन्होंने संबल नामक अपनी संस्था का पंजीकरण नहीं कराया था। इसके पीछे की वजह बताते हुए वे कहती हैं कि उनकी मंशा महिलाओं को एकजुट कर उन्हें जागरूक बनाना था। किसी तरह का लाभ कमाना उनका उद्देश्य नहीं था। लेकिन इसका एक दुष्परिणाम यह हुआ कि स्थानीय प्रशासन द्वारा संबल के द्वारा उठाये गये सवालों को नजर अंदाज किया जाने लगा। अंत में सभी महिला सदस्यों ने आपस में मिलकर स्वयंसेवी संस्था के रूप में पंजीकृत कराने का निर्णय लिया।

अपने द्वारा किये गये प्रयासों के परिणाम के बारे में संगीता बताती हैं कि अब स्थिति पूरी तरह बदल गयी है। अब तो उनके पास वे महिलायें भी आती हैं, जो मालकिन कहलाती हैं और अपनों के द्वारा विभिन्न प्रकार की हिंसा की शिकार होती हैं। हमारी संस्था से जुड़ी महिलायें उनका उत्साह बढ़ाती हैं और अन्याय के खिलाफ उनका साथ देती हैं। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक सुकून देने वाली बात यह है कि अब दाई के रूप में काम करने वाली महिलायें 'अप्प दीपो भव' की तर्ज पर स्वयं जागरूक होती जा रही हैं। वे अब अपनी आय का अधिक हिस्सा अपने बच्चों को पढ़ाने-लिखाने में खर्च करती हैं।

बहरहाल संगीता सुभाषिणी का निजी जीवन भी अनगिनत चुनौतियों का पर्याय रहा है। हालांकि उनका जन्म मुजफ़्फरपुर के बड़े उद्यमियों में से एक स्व प्रह्लाद दास अग्रवाल के घर में हुआ था। उनके पिता उत्तर बिहार में कंक्रीट के ह्यूम पाईप का उत्पादन करने वाले पहले उद्यमी थे। इसके अलावा वे मुजफ़्फरपुर नगर कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे थे। समाज के प्रति उनके समर्पण और जनता से उनका लगाव इस कदर था कि वे आजीवन मुजफ़्फरपुर नगर निगम की स्थायी समिति के सदस्य रहे। इसके अलावा वे मुजफ़्फरपुर नगर निगम के अध्यक्ष भी निर्वाचित हुए थे।

इस तरह एक उच्च आयवर्गीय परिवार में जन्म लेने के बावजूद संगीता को समाज सेवा अपने पिता से विरासत में मिली। मुजफ़्फरपुर शहर में ही प्राथमिक शिक्षा और इसी शहर के बिहार यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा हासिल की। इकोनामिक्स उनका पसंदीदा विषय रहा। लेकिन उन दिनों ही समाज के साथ खड़े होने की भावना प्रबल हो उठी और संगीता ने कानून की पढाई की। संगीता बताती हैं कि उन दिनों ही उनके एकमात्र भाई की हत्या कर दी गयी। इस कारण परिवार पर संकट का पहाड़ टूट पड़ा।

विषमता के समानांतर संगीता ने अपने जीवन का एक नया रास्ता चुना। उन्होंने मुजफ़्फरपुर से प्रकाशित दैनिक "प्रात: कमल" में पत्रकार के रुप में काम करना शुरू किया। यह वह समय था जब मुजफ़्फरपुर जैसे शहर में लड़कियों के लिए नौकरी करने की बात सोचना भी कल्पना के परे था। अपने पत्रकारिक जीवन में संगीता ने अपनी रिपोर्टों से पूरे शहर का ध्यान आकृष्ट किया। खासकर एक दबंग नेता के द्वारा एक महिला के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या को लेकर संगीता के द्वारा की गयी रिपोर्टिंग ने उन्हें एक मुकम्मिल पत्रकार के रुप में स्थापित किया। उन दिनों ही उनकी मुलाकात अक्खड़ स्वभाव के पत्रकार अनिल गुप्ता से हुई। वे भी प्रात: कमल के लिए काम करते थे। फिर एक दिन ऐसा भी आया जब संगीता और अनिल ने शादी कर अपनी दुनिया बसा ली। संगीता बताती हैं कि यह एक नये जीवन की शुरूआत थी। अनिल गुप्ता के साथ देश के कई शहरों में उन्होंने पत्रकार के रुप में अनेक पत्र-पत्रिकाओं के लिए काम किया। लेकिन उनका दिल मुजफ़्फरपुर में बसता था और तबसे उनका संघर्ष जारी है। वे कहती हैं कि जबतक उनके शरीर में रक्त का एक कतरा भी शेष है, वे अपने उद्देश्य की पूर्ति हेतु प्रयत्नशील रहेंगी। हालांकि वे चाहती हैं कि सरकार और समाज सभी महिलाओं के अस्तित्व को पूर्णता में स्वीकार करें और उन्हें अपना जीवन जीने दे। इसी में समाज की बेहतरी है।

उल्लेखनीय है कि जून ,२०११ में जेनेवा में हुए अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के १००वें अधिवेशन में घरेलू कामगार स्त्रियों के संगठन का भी कन्वेंशन हुआ औरदुनिया भर में १० करोड़ के आसपास घरेलू कामगार महिलाओं को सम्मानजनक श्रममूल्य और वातावरण दिलाने का संकल्प लिया गया. इसके बाद भारत में भी इन महिलाओं की सुध लेने की सरकारी कोशिशें तेज हुईं . तमिलनाडु , महाराष्ट्र , कर्नाटक, केरला आदि राज्यों में सीमित अर्थों में ही सही इन महिलाओं के लिए सरकारी प्रयास सुनिश्चित हुए, हालांकि सम्मानजनक भुगतान और दूसरी सुरक्षाओं की लड़ाई अभी जारी है. धीरे झ्रधीरे केंद्र सरकार पर भी दवाब बन रहा है कि वह इन महिलाओं के लिए एक मुक्कमल बिल लेकर आये. इस सब के बीच मुजफ्फरपुर की ये महिलाएं, जिन्हें २०० से ५०० रुपये तक एक घर से मिलता है चौका वर्तन के लिए , देश और दुनिया भर में चल रही अपने लिए लडाइयो को नहीं जानती हैं. उन्हें भरोसा है तो अपनी सुभाषिणी दीदी पर , जिन्होंने इन महिलाओं के लिए एक नया नाम भी दिया है , दमिता.यह नाम दलित नाम के करीब इस मायने में है कि ये लगभग उतने ही हाशिये पर जीती है और अलग इस मायने में कि दलितों के साथ जुड़ा छुआ झ्रछूत इनके साथ नहीं है . चौका -बर्तन करे में कहीं १०० रूपया मिलअइछइ त कहीं २००, इतना में केना पेट भरतइ अ केना अपन बाल बच्चा के पढ़बइ. अब दीदी के सहयोग से हम सब भी अपन हक ला आवाज उठावे के चाहिछिअइ, शायद हामरो सब के परिवर्तन आ जतइ यह विश्वास सिर्फ राजवती देवी के साथ उन दर्जनों महिलाओं को हैं , जो संबल में सुभाषिणी जी के साथ सक्रिय हैं.

अपनी कार्यकतार्ओं को सुभाषिणी न सिर्फ उनके हक के लिए लड़ना सिखा रही है, बल्कि सामजिक बुराइयों के खिलाफ भी खड़ा कर रही है, जिसका असर मुजफ्फरपुर के चर्चित शराब बंदी आन्दोलन में दिखा . जिला स्तर पर सरकारी सुविधाओं को हासिल करने में भी इन ने एकजुटता दिखाई है. अपने संसाधनों से संचालित यह संगठन एक लम्बी लड़ाई लड़ने की स्थिति में नहीं है लेकिन लम्बी लड़ाई के जज्बे से भरा है . सुभाषिणी जी हालांकि प्रदेश सरकार और खासकर मुख्यमंत्री से अपील करती हैं कि दूसरे राज्यों की तरह बिहार में भी वे दमिताओं के हक में कुछ कदम उठाएं . वे देश के दूसरे हिस्सों में चल रही इस लड़ाई से इन महिलाओं को जोड़ने की तैयारी में भी हैं.(साभार : स्त्रीकाल डाट काम)

याद जयपाल सिंह मुंडा की...

- प्रवीण बागी

जो समाज अपने सपूतों को याद नहीं रखना, उनपर गर्व नहीं करता, वह अपनी जडों से कट जाता है। वह अपनी परंपरा, संस्कृति और धरोहर को भूल जाता है। झारखंड इसका ताजा उदाहरण है। 3 जनवरी जयपाल सिंह मुंडा की जयंती है। नयी पीढी शायद उनके नाम से अवगत न हो, लेकिन आदिवासी संस्कृति की दुहाई देनेवाले और आदिवासियों के नाम पर राजनीति' करनेवाले उन्हें जरूर जानते हैं। क्योंकि वे उन्हीं की कमाई खा रहे हैं। जयपाल सिंह मुंडा ने ही सबसे पहले आदिवासियों के लिए झारखंड नाम से अलग प्रदेश बनाने की मांग बुलंद की थी। उन्होंने झारखंड पार्टी बनाई थी। वे आक्सफोर्ड विवि से पढे थे। संविधान सभा के सदस्य थे।. प्रथम लोकसभा के सदस्य रहे।लगातार चुनाव जीतते रहे। एक समय बिहार विधानसभा में झारखंड पार्टी के 23 विधायक जीत कर पहुंचे थे। दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह को राज्यसभा में भेजनेवाले जयपाल सिंह ही थे। आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा और विधायिका तथा सरकारी नौकरियों में आरक्षण, जयपाल सिंह मुंडा की ही देन है। संविधान सभा में उन्होंने इसके लिए जोरदार बहस की थी। इसलिए लोगों ने उन्हें 'मरांग गोमके' का नाम दिया था, यानी सर्वोच्च नेता।यह उपाधी फिर किसी दूसरे नेता को नहीं मिली।

वे हॉकी के बेहतरीन खिलाडी थे। 1928 में एम्सटर्डम ओलंपिक में इन्हीं के कैप्टनशिप में भारत ने गोल्ड जीता था। हॉकी के जादूगर कहे जानेवाले मेजर ध्यानचंद उस टीम के हिस्सा थे। उन्हीं के चलते झारखंड में आज भी हॉकी लोकप्रिय है। गांव- गांव में लडके- लडकियां हॉकी खेलते दिख जाते हैं। 20 मार्च 1970 को उनका निधन हुआ था। जिस रांची में जयपाल सिंह का जन्म हुआ था, आज वहां उनका कोई स्मारक नहीं है। उनके नाम पर सिर्फ एक स्टेडियम है, जिसमें उनकी प्रतिमा है। उस प्रतिमा पर आज फूल चढाना चाहिये, इसकी जरूरत न सरकार को महसूस हुई न दूसरे राजनेताओं को । सिर्फ रांची की मेयर आशा लकडा को यह समझ में आया कि जयपाल सिंह क्या थे। उन्होंने श्रद्धांजलि दी। ऐसे राजनेताओं और समाज को आप क्या कहेंगे ?

जयपाल सिंह आदिवासियों के धर्मान्तरण के भी खिलाफ थे। उनकी शिक्षा इसाई मिशन के सहयोग से हुई थी।9 वीं क्लास के बाद ही मिशन की ओर से उन्हें पढने के लिए इंग्लैंड भेज दिया गया था।आक्सफोर्ड में पढने का खर्च भी मिशन ने ही उठाया था।जब वे लौटकर आये तो मिशन ने उन्हें इसाईयत के प्रचार- प्रसार के काम में लगाना चाहा, पर उन्होंने दृढतापूर्वक मना कर दिया। लेकिन अफसोस कि हिन्दू धर्म के ध्वजाधारकों को भी उनकी याद नहीं आयी। हम शमिंर्दा हैं मरांग गोमके'...... (लेखक वरिष्ठ टीवी पत्रकार हैं)

आदमियत की दुखती रग के निर्दोष राग को ढूँढ़ने का नया तरीका

- शहंशाह आलम

मेरा मानना है कि हर लेखक किसी पहाड़ी कबीले का सदस्य होता है। तभी तो हर लेखक जीवन को, जीवन से जुड़े संघर्ष को इतने निकट से देख पाता है। यह सही भी है। एक सच्चे लेखक का जीवन क्या है, कैसा है, कैसा होना चाहिए जैसे सवाल जब कभी मेरे भीतर उठे हैं, तो मुझे उत्तर यही मिलता रहा है कि हर लेखक को पहाड़ी कबीले का सदस्य होना चाहिए। इसलिए कि इस जीवन को कोई दूर किसी छोटे इलाके में रहकर अगर जीता है, तो असल जीवन तो वही है। वही जीवन जीवन के असल महत्व को दशार्ता है। जहाँ ऊँच-नीच का लफड़ा है भी तो उस लफड़े में मासूमियत रहती है। जबकि शहरी अथवा महानगरीय तामझाम ने जो छीना-झपटी हमें दी है, वह हमारा नाश करने के लिए काफी है। इस छीना-झपटी से मुक्ति तभी संभव है, जब हम कई सौ मील जाकर अपनी जड़ों से जुड़ेंगे और अपने असली जीवन को आत्मसात् करेंगे। कम-अज-कम हम लेखकों को ऐसा जरूर करना चाहिए। तभी हमारा लेखन हमारे अंतस का लेखन सिद्ध होगा। मैंने अपने समय के बेहद महत्वपूर्ण लेखकों में एक जाबिर हुसेन को अपने लेखन को सच्ची धार देने के लिए उस जीवन को जीते देखा है, जो जीवन बिना किसी शोर के धरती के उस टुकड़े से जुड़ा रहता आया है, धरती का जो टुकड़ा अपनी एक नई तरह के तीव्र संघर्ष से जुड़ा रहा और जीतता आया है। जाबिर हुसेन ऐसे जीवन के बारे में कहते हुए लिखते हैं, 'मैं चाक पर फैली रेत के समान हूँ। मुझे पता है, इस रेत से चाक पर कोई उपयोगी वस्तु आकार नहीं ले सकती। मैं खुद भी अपने जीवन में कोई आकार कहाँ ले पाया।' अब आप ही कहिए, एक चाक, जो एक कुम्हार के हाथों गति पाते हुए, मिट्टी-पानी पाते हुए कितनी ही चमत्कारिक वस्तुएँ देता है, एक लेखक अपनी कलम से उस चाक से कहीं अधिक चमत्कारिक रचनाएँ देता है। मैंने पहले ही लिखा है कि जाबिर हुसेन एक महत्वपूर्ण लेखक हैं और उनका महत्व इससे स्पष्ट होता है कि उन्होंने अपने आस-पास के जीवन से जो लिया, उससे कहीं ज्यादा उस जीवन को वापस लौटाया है। अभी-अभी छपकर आई उनकी किताब 'चाक पर रेत' को पढ़कर आप भी यही कहेंगे बिना कोई शक किए। 256 पृष्ठों की यह किताब इस रेत से भरे समय से हमारे काम लायक बहुत सारा बढ़िया छानकर एक नया दरिया-बहाती है :

मछुआरों को पता है

समुद्र में

कब आएगा तूफान

कब आएगी लहरों में उछाल

कितनी ऊँची उठेंगी लहरें

कितनी दूर भीगेगी रेत

तहस-नहस होंगे कितने किनारे

मछुआरों को पता है, सब

जाल में फँसी मछलियों ने

बता दिया है उन्हें, सबकुछ

खतरों से

आगाह कर दिया है, उन्हें

मछुआरे नहीं बेचते हैं

अपना नमक

हमेशा ख़्याल रखते हैं

अपने 'शुभ-चिंतकों' का

तभी तो

समुद्री तूफान से पहले

मछुआरे

ढीले कर देते हैं, अपने जाल

और मछलियों को

दे देते हैं

समुद्र में लौटने की छूट ( 'मछुआरों को पता है', पृ.254 )।

जाबिर हुसेन 'चाक पर रेत' में शामिल अपनी गद्य-रचनाओं को अपने जीवन की रचनाएँ कहते हैं। उनकी ये रचनाएँ बिहार के बहाने अपने भारत के उन अभिशप्त गाँवों की हैं, जहाँ हिंसा है, प्रतिहिंसा है, यातनाएँ हैं, गैर-बराबरी का नंगा नाच है। वे अपनी रचनाओं के बारे में कहते हैं, 'ये सारी तहरीरें उस समय लिखी जाती रहीं, जब बिहार के गाँवों की जमीन दरक रही थी और सामाजिक रिश्तों की बुनियादें ढह रही थीं। गाँव के खेतिहर मजदूर, भवन-निर्माण से जुड़े कामगार, छोटे-मोटे व्यवसायी, दलित और उपेक्षित वर्गों के लोग, इन सब की आवाज बनकर आगे बढ़ना अपने आप में एक जोखिम भरा अभियान था।' यहाँ पर मुझे एक कंबोडियन कहावत याद आ रही है। वह कहावत कुछ यूँ है कि जब शीशा टूटकर पानी पर तैरने लगे तो बुराई जीत जाती है। मेरे ख़्याल से अभी बुराई हम पर भारी है। सच्चाई यह भी है कि जाबिर हुसेन की रचनाएँ बुराई को हराती रही हैं। सच्चाई यह भी है कि देश का और विश्व का सामान्य वर्ग किसी असहाय, रक्षा चाहने वाला जीवन जी रहा है। इनके दर्द का मरुथल आप जाबिर हुसेन का साहित्य पढ़कर महसूस सकते हैं। उनकी रचनाएँ कभी भी कुछ लोगों के अच्छे जीवन का उत्सव न मनाकर उनके अच्छे जीवन के लिए संघर्ष करती रही हैं, जिन्हें ठेल-ठालकर हमेशा पंक्ति में सबसे पीछे खड़ा किया जाता रहा है। असल बात यही है कि जाबिर हुसेन की रचनाएँ जलते लोकतंत्र का सीधा, साफ-सुथरा बयान हैं। सौ से अधिक गद्य-रचनाएँ और चार कविताओं के माध्यम से इस 'चाक पर रेत' में व्यक्ति-चित्र और हमारे जीने के रोजमर्रा के दिन से लिए गए आत्मविश्वास से लेखक द्वारा जो कुछ लिखा-रचा गया है, वह अद्भुत है और अपने पढ़ने वालों को संतुष्ट करता है। (लेखक सूबे के सुविख्यात युवा कवि हैं)

दंगल : एक आंच की रह गयी कसर

- नवल किशोर कुमार

हरियाणा के भिवानी शहर की महिला पहलवान बबीता फोगाट और गीता फोगाट की कामयाबी की कहानी आमिर खान ने अपनी फिल्म दंगल में बखूबी चित्रित किया है। हालांकि इसमें कई तरह की मनोरंजन के लिहाज से स्वीकार्य नाटकीयता है जो महावीर फोगाट के वास्तविक जीवन से मेल नहीं खाती हैं। इसके बावजूद इस फिल्म की खासियत यही है कि इस फिल्म में स्त्री पक्ष के साथ कई दृश्यों में नाइंसाफी की गयी है। नाइंसाफी का एक प्रमाण तो यह भी कि मुख्य पोस्टर में आमिर यानी महावीर फोगाट अपनी बेटियों के साथ नजर तो आते हैं लेकिन उनकी पत्नी शोभा कौर(साक्षी तंवर) को जगह भी नहीं मिलती है। इस नाइंसाफी की एक बड़ी वजह समाज का पुरूष प्रधान होना है।

फिल्म में महावीर फोगाट को एक कुंठित पिता के रूप में दिखाया गया है। चार बच्चियों का पिता कुंठित हो और वह अपनी बेटियों को पहलवान बनाये, आश्चर्य पैदा करता है। आश्चर्य इसलिए भी कि महावीर फोगाट मूल रूप से जाट हैं और जाटों के हर गोत्र के अपने खाप हैं। इन खापों में महिलाओं की स्थिति क्या होती है, यह किसी से छुपी हुई बात नहीं है। पूरी फिल्म में दो हिस्से हैं। एक हिस्सा महावीर फोगाट की महानता है तो दूसरा हिस्सा उसकी बेटियों की कामयाबी है। फिल्मकार ने दोनों हिस्सों को फिल्माने में सावधानी बरती है। यह भी कहा जा सकता है कि फिल्मकार की ईमानदारी के पीछे फोगाट परिवार की जीवटता है।

बहरहाल एक फिल्म के रूप में दंगल एक कामयाब प्रयास है। उम्मीद की जानी चाहिए कि स्त्री पक्ष के फिल्मांकन में फिल्मकार इसी तरह की ईमानदारी दिखायेंगे। कम से कम पिंक के फिल्मकार की आधी अधूरी ईमानदारी जैसी तो बिल्कुल भी नहीं।

नाम से ही बिदक रहे संस्कृति के ठेकेदार

- मुसाफिर बैठा

सबका ठेका लेकर बात कहना बड़ी बीमारी है जो करीना-सैफ के नवजात बेटे के तैमूरनाम को लेकर फेसबुक-ट्विटर जैसे सोशल मीडिया पर अनेक बेहूदे राष्ट्रवादियों पर तारी है।

तैमूर नाम मात्र से उन्हें भी परेशानी है जिन्हें इतिहास का मात्र कखग ज्ञात है। तैमूरलंग ने उस समय हमारी भौगोलिक भूमि पर आक्रमण किया और लूटपाट की जब हमारा समाज असभ्य था, हम एक राष्ट्र न थे, हमारी राष्ट्रीयता थी तो अलग अलग थी, खण्ड खण्ड थी, (वैसे, प्रैक्टिकली अभी भी हम एक राष्ट्र कहाँ हैं, हो भी नहीं सकते!) सामन्तों एवं राजाओं तथा हिन्दू ऊँच नीच वाला समाज था। हमारे शासक भी आम लोगों के लिए कमोवेश उतने ही क्रूर थे, जालिम थे जितना कि तैमूर लंग था। तैमूर लंग जैसों की विजय कमजोर साबित क्रूर शासकों पर एक बलशाली शासक का आधिपत्य था। ब्राह्मणी एवं सवर्णी व्यवस्था जो तैमूर जैसे विदेशी आक्रमणकारियों के पहले से चली आ रही है, उस पर इन बेहूदों को क्यों परेशान नहीं कर रही है जो तैमूर नाम मात्र से परेशान हैं?

ऐसे 'देशभक्त' क्या यह सर्टिफाई करेंगे कि उनकी वंश परंपरा में अत्याचारी-व्यभिचारी-जातिवादी लोग नहीं हुए हैं? अगर स्वीकार करेंगे तो उनके पास अपने बेहूदे पूर्वजों के लिए क्या आलोचना है?

फिर, जहाँ लाखों लोग भगवान के नाम पर अपना नाम रखे हुए हैं और अनेक तरह के कुकर्मों में लगे हैं उनके प्रति इन तैमूर-घृणागिरों के क्या विचार हैं? आप ईश्वर से जुड़ा नाम रखकर भी कुकर्म और अपराध करें तो आपके लिए क्या सजा हो?

नरेंद्र माने नरों का इंद्र अथवा ईश्वर है। तो क्या गुजरात कत्लेआम के समय प्रदेश का मुख्यमंत्री रहे इस नाम के व्यक्ति को आप सीधे कठघरे में रखेंगे? क्या एक मुख्यमंत्री के रहते राज्य में नरसंहार हो जाए तो उसे इसका दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए?

घृणा योग्य लोग ही ऐसी बेहूदी घृणा पालते हैं कि किसी नाम पर भी ओछा वितंडा खड़ा कर देते हैं।

मेरे नाम और सरनेम 'मुसाफिर' और 'बैठा' को लेकर अबतक अनेक बुद्धिजीवियों (राजेंद्र यादव शामिल) तक ने बेहूदगी भरा मजाक और परिहास किया है। राजेंद्र यादव से यदि मैं पूछता कि आपके नाम में 'राजा' और 'इंद्र' जो लगा है वह आपके कर्म और आचरण को किस तरह क्वालीफाई करता है, तो उन्हें कैसा लगता? मैं उनसे कह सकता था कि आप नास्तिक होकर भी इंद्र क्यों हो, क्यों विरोधाभास को साथ लेकर जी रहे हैं, अपनी बुद्धिजीविता और नास्तिकता की हानि कर रहे हैं।

जब किसी अपराधी का बच्चा नेक हो सकता है, जब नेक का बच्चा बदनेक और अपराधी हो सकता है तो किसी नाम को किसी मिथकीय, ऐतिहासिक अथवा वर्तमान व्यक्तियों के नाम-बदनाम होने से अच्छा-बुरा ठहरा देना कुबुद्धि है। ऐसे ही कुबुद्धि जन पत्थर को भी भगवान मानते हैं एवं कोरी कल्पना की मिथक कथाओं को इस वैज्ञानिक युग में भी जीते हैं। ऐसे दुर्बुद्धि से हम फेसबुक पर नाता न रखें, उन्हें अपनी वॉल पर बेहूदगी न उगलने दे। बेहूदे चिकना घड़ा होते हैं। काम से मतलब रखिये, नाम से नहीं। नाम जैसा भी हो काम अच्छा होना चाहिए। मोल करो तलवार का, पड़ी रहन दो म्यान! (लेखक सूबे के चर्चित युवा कवि हैं)

सनक में लिया गया है नोटबंदी का निर्णय...

- शिवानंद तिवारी

गत आठ नवंबर को प्रधानमंत्री जी ने पाँच और हजार के नोट रद्द किए जाने की घोषणा की थी।रिजर्व बैंक के मुताबिक उस दिन देश मे पाँच और हजार के 15.44 करोड़ नोट चलन में थे।आज एक महीना बाद रद्द किए गए नोटों मे से कल तक 11.5 करोड़ यानी कुल रद्द नोटों का 80 प्रतिशत बैंकों में वापस आ चुका है।भारत सरकार के राजस्व सचिव के मुताबिक इस माह के अंत तक यानी रद्द नोटों को बैंकों मे जमा करने की अंतिम मोहलत तक लगभग सारे रद्द नोट बैंकों में वापस आ सकते हैं।इसका अर्थ हुआ कि नगदी में काला धन होने का जो दावा किया जा रहा था वह गलत साबित हुआ।या वह कालाधन कम था जो भ्रष्ट बैंक पदाधिकारियों की सहायता से सफेद कर लिया गया।इस तरह नोटों को रद्द किए जाने का जो मुख्य मकसद प्रधानमंत्री जी ने बताया था वह गलत साबित हो रहा है।

नोटबंदी के पहले देश की आर्थिक हालत ठीकठाक थी।स्वंय सरकार का दावा था कि हम दुनिया में सबसे तेज गति से विकास करने वाले देश हैं।हमारी विकास की गति चीन से भी तेज है।पिछले दो-तीन वर्षों से देश का बड़ा हिस्सा सुखा से प्रभावित था।कुछ इलाकों मे तो पीने के पानी तक का संकट उपस्थित हो गया था।लेकिन इस वर्ष बारिश बहुत अच्छी हुई।खरीफ की बहुत अच्छी फसल हुई है।रबी की फसल भी अच्छी होगी इसकी संभावना दिखाई दे रही थी।

जब अर्थ व्यवस्था बिलकुल स्वस्थ हालत में दिखाई दे रही थी तो प्रधानमंत्री जी द्वारा उठाए गए इस कदम का औचित्य समझ के बाहर है।रिजर्व बैंक द्वारा देश मे जारी कुल मुद्रा का 86 प्रतिशत पाँच और हजार रूपए के नोटों के रूप में ही था।ठीकठाक चल रही अर्थव्यवस्था से इतनी बड़ी राशि निकाल लेना एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर से 86 प्रतिशत खून निकाल कर उसे अधमरा बना दिए जाने के समान है।

सनक में उठाए गए कदम से देश की अर्थव्यवस्था को कुल कितना नुकसान पहुँचा है इसका अंतिम आकलन तो बाद में होगा।लेकिन रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने कल जो आकलन बताया उसके अनुसार देश का विकास दर 7.6 से 7.1 प्रतिशत पर आ जाने की संभावना है।यानी राष्ट्रीय आमदनी में 0.5 प्रतिशत की गिरावट आएगी।ए. एन. सिंहा संस्थान, पटना के अर्थशास्त्र के प्रो. डी. एम दिवाकर के अनुसार आर्थिक सर्वे के आधार पर 2015-6 के वर्तमान मूल्य के आधार पर हमारा सकल राष्ट्रीय आय 1,34,09,892 करोड़ रू. था। इसमे 0.5 प्रतिशत की गिरावट अर्थ है सकल घरेलू आय में 67,04,946 करोड़ की कमी या सकल घरेलू उत्पाद में यह 67,83,596 करोड़ है।दिवाकर जी के मुताबिक नोटों की छपाई तथा देश भर में उनको पहुँचाने की लागत लगभग 1,28,000 करोड़ तक आ सकती है। मनमोहन सिंह जी ने नोटबंदी के इस कदम से सकल राष्ट्रीय उत्पाद में दो प्रतिशत गिरावट की आशंका व्यक्त की है।

अत: यह कहा जा सकता है किसी सकारात्मक आर्थिक सोच के आधार पर नोटबंदी का यह निर्णय नहीं लिया गया है।इस फैसले के द्वारा मोदीजी गरीबों से तप करा रहे हैं और अमीरों को मौज। आगे आनेवाले दिनों में इस कदम का पुरा प्रभाव जब प्रत्यक्ष होगा तो जो भक्त आज उनका जयकारा लगा रहे हैं वही उनके प्राण के पीछे लगे दिखाई देंगे। (लेखक राज्यसभा के पूर्व सांसद हैं)

जननायक कर्पूरी ठाकुर किस तरह का बिहार चाहते थे, यह कल्पना करना कोई मुश्किल काम नहीं है। शर्त बस इतनी है कि कोई जननायक के उन प्रयासों को समझने का प्रयास करे जो उन्होंने उस समय क्रियान्वित करने की कोशिश की जब बिहार में सामाजिक बदलाव निर्णायक हो रहा था। सामंती ताकतें अपना अस्तित्व बचाये रखने के लिए अपना सर्वस्व दांव पर लगा रही थीं। ऐसे माहौल में भी जननायक ने विकसित बिहार का सपना देखा था। एक ऐसा बिहार जहां सही मायनों में संविधान की प्रस्तावना में निहित "हम भारत के लोग" निवास करते हैं। एक ऐसा बिहार जिसका हर गांव आर्थिक विकास का नायाब उदाहरण और शहर गांवों का अनुगामी हो।

जननायक के सपनों के बिहार की खोज की मेरी यात्रा बहुत पुरानी है। शुरुआत पटना के वीरचंद पटेल पथ के नंदलाल होटल से हुई या फ़िर कर्पूरी ग्राम से, यह कहना अधिक जटिल है। मेरे लिये ये दोनों स्थान प्रस्थान बिंदू हैं। नंदलाल का होटल आज भी जिंदा है। बड़ी संख्या में राजनीतिक वर्कर अब भी यहां अपनी भूख मिटाते हैं। कभी कर्पूरी ठाकुर सीएम रहने के बावजूद इस दुकान पर आते थे और वह भी बिना किसी सुरक्षात्मक तामझाम के। आज भी यहां कई लोग जननायक को रोजाना याद करते हैं।

पितौंझिया यानी कर्पूरी ग्राम तो मेरे लिए तीर्थ स्थल से कम नहीं रहा। हालांकि वहां जाने का मौका वर्ष 2015 में विधानसभा चुनाव के पहले मिला था। संयोग था कि सांसद रामनाथ ठाकुर स्वयं मौजूद थे उस दिन। वजह यह भी थी कि उसी दिन समस्तीपुर में नीतीश कुमार की चुनावी सभा थी। खैर उस दिन रामनाथ ठाकुर ने अपने मुंह से अपने पिता की कहानी सुनायी, यह महत्वपूर्ण था। वैसे उनकी कहानी की कृत्रिमता उसी समय स्पष्ट हो गयी थी जब उन्होंने जननायक की जन्मस्थली "झोपड़ी" को महल में तब्दील करने की कोई ठोस वजह नहीं बतायी।

वैसे सुविधा के लिहाज से पितौंझिया एक आदर्श प्रस्थान स्थान है। पूरा गांव आदर्श गांव की कहानी कहता है। चमचमाती सड़क, पक्के नाली और हर घर तक जाने के लिए पक्की गली। गांव में वे लोग भी मिले जिनके पुरखों ने कभी जननायक को "हज्जाम" से अधिक कुछ नहीं माना था। वह घर भी मिला, जिसके मालिक ने जननायक के पिता को उस समय बेंत से पीटा था जब जननायक सीएम थे।

यकीनन जननायक के सपनों के बिहार में पांकी भी जरुर शामिल रहा होगा। पलामू जिले का पांकी तब झारखंड नहीं बिहार का हिस्सा रहा होगा। वर्ष 2016 में ही एक यात्रा के दौरान पलामू के इस प्रखंड के एक गांव में एक बुजुर्ग ने मुझसे कर्पूरी ठाकुर के बारे में पूछा था। उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी कि जननायक का निधन हो गया है। मेरा चौंकना सहज था। लेकिन उस बुढे आदिवासी ने जननायक से जुड़ी अपनी यादें साझा करते हुए बताया था कि जननायक ने पलामू के कई गांवों में जनजागरुकता के कई प्रयास किये थे। सीएम बनने पर भी उन्होंने पलामू को नहीं भूला था। क्रमशः जारी

खास खबर : दोष केंद्र का, जुर्माना भरेगी राज्य सरकार

पटना(अपना बिहार, 23 जनवरी 2017) - पहले से ही गरीब राज्यों में शुमार बिहार जहां एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 1 लाख 65 हजार लाख करोड़ रुपए के महा पैकेज का इंतजार कर रहा है वहीं दूसरी ओर पूर्व से चल रही योजनाओं के मामले में भी उसे केंद्र की उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा है। हालत यह है कि केंद्र सरकार की लेटलतीफी के कारण परियोजनाओं की कीमतें बार-बार पुनरीक्षित हो रही हैं और इसका नुकसान राज्य सरकार को उठाना पड़ रहा है। मसलन नेपाल बॉर्डर से सटे इलाके में 552 किलोमीटर लंबी टू लेन सड़क का निर्माण होना था। प्रारंभ में निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण में 900 करोड़ खर्च होने की संभावना थी। लेकिन अब सड़क निर्माण में देरी होने से जमीन अधिग्रहण का काम अब नये दर से तय होगा। सरकार को नयी दर को लेकर अब किसानों को चार गुना मुआवजा देना पड़ेगा। यानी अब इसके लिए राज्य सरकार को 2300 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे।

बताते चलें कि बिहार में यह सड़क पश्चिमी चंपारण जिले में यूपी से सटे बॉर्डर इलाके मदनपुर गोबरहिया से आरंभ होकर सात जिले से गुजरते हुए किशनगंज के गलगलिया तक जायेगी। सड़क निर्माण का काम भारत सरकार को करना है, जबकि सड़क निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण पर खर्च राज्य सरकार को करना है। नेपाल से सटे बॉर्डर इलाके में सड़क निर्माण का शिलान्यास यूपीए सरकार के तत्कालीन गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने किया था।

विभागीय जानकारी के मुताबिक समय पर जमीन नहीं मिलने से सड़क निर्माण में देरी हुई है। इससे लागत खर्च बढ़ने के साथ जमीन अधिग्रहण में भी अधिक राशि खर्च होगी। जानकारों के अनुसार सड़क निर्माण पर लगभग 3900 करोड़ खर्च होंगे। सड़क निर्माण के लिए केंद्र सरकार 1655 करोड़ मंजूर की है। राज्य कैबिनेट ने हाल ही में यह राशि मंजूर की है। पश्चिम चंपारण जिले में 111 किलोमीटर सड़क का निर्माण होना है। सड़क निर्माण के लिए 196 एकड़ जमीन अधिग्रहण हुआ है। पूर्वी चंपारण में जिले में 77 किलोमीटर सड़क निर्माण होना है। सड़क निर्माण के लिए 237 एकड़ जमीन उपलब्ध करायी गयी है। इसके अलावा सड़क का निर्माण सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया व किशनगंज जिले में होना है।

जमीन से लेकर आसमान तक बना बिहार के संकल्प का गवाह

पटना(अपना बिहार, 22 जनवरी 2017) - देश की राजनीति और इतिहास में बिहार की अहम भूमिका रही है। बात चाहे आज के शराबबंदी की हो या फिर विश्व के पहले लोकतंत्र की। पूरे विश्व को अहिंसा का संदेश देने वाले जैन धर्म और बौद्ध धर्म की शुरूआत हो या फिर आजादी के बाद देश में लोकतांत्रिक तानाशाही के खिलाफ शंखनाद। शनिवार को एक बार फिर बिहार ने इतिहास रचा। सरकारी आंकड़ों और दावों को उनके हाल पर छोड़ भी दें तो शनिवार को जो नजारा बिहार की धरती पर दिखा, वह पूरे विश्व के लिए किसी अजूबे से कम नहीं था। इस ऐतिहासिक जन संकल्प का गवाह आसमान भी बना जब इसरो के सेटेलाइट ने इसकी तस्वीर अपनी सर्वाधिक शक्तिशाली कैमरे के जरिए सुरक्षित कर लिया।

राजधानी पटना के लिए शनिवार की सुबह सामान्य दिनों की सुबह के जैसी ही थी। लेकिन पहली किरण के साथ ही गांव-शहर सभी जगहों पर सुगबुगाहट तेज हो गयी। जैसे-जैसे सूरज की गर्मी बढ़ती गयी, लोग अपने-अपने घरों से निकलने लगे। मानों सभी शराबबंदी के समर्थन में अपनी एकजुटता जाहिर करने की प्रतिबद्ध थे। जिसे जहां जगह मिला, वहीं खड़ा होने लगा। सबसे अधिक उत्साह स्कूली बच्चों में रहा। अपने ही स्वच्छंद अंदाज में जब बच्चे बड़ी संख्या में निकले तो बड़े-बुढ़ों का उत्साह भी दुगना हो गया।

उधर प्रशासन की तैयारी भी बड़ी दिलचस्प रही। खासकर सभी मुख्य मार्गों पर किसी तरह की कोई दुर्घटना या परेशानी न हो, चप्पे-चप्पे पर पुलिसकर्मी तैनात रहे। हालांकि सड़कों पर अराजक स्थिति भी बनती दिखी लेकिन लोग शराबबंदी के पक्ष में अपने संकल्प के प्रति प्रतिबद्धता दिखाते हुए स्वयं ही किनारे हो रहे थे। पटना के गांवों से ऐतिहासिक गांधी मैदान तक का नजारा एक जैसा रहा। सड़क किनारे लोग और सभी के मन में शराबबंदी के प्रति संकल्प।

बहरहाल गांधी मैदान एक बार फिर ऐतिहासिक गवाह बना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राजद प्रमुख लालू प्रसाद, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव सहित अनेक गणमान्य लोगों के साथ आम जनता भी मानव श्रृंखला में शामिल हुए। गांधी मैदान के बीचों -बीच काली पट्टी पर सफेद रंग से दमक रहा बिहार इसरो के सेटेलाइट के लिए फोकस प्वार्इंट रहा। बिहार का नक्शा बनाता जनसमुदाय बिना थकान की परवाह किये कतार में खड़ा रहा। हालांकि बेहतर होता कि इस ऐतिहासिक जुटान में विपक्ष के राजनेता भी राजनीति छोड़ एक साथ खड़े होते तो नजारा और दिलचस्प होता। वैसे सबसे अधिक महत्वपूर्ण यह कि बिहार के ऐतिहासिक संकल्प का गवाह महात्मा गांधी की गगनचुंबी प्रतिमा भी रही। वहीं महात्मा गांधी जिन्होंने शराबबंदी को लेकर देश में सबसे पहले सामाजिक आंदोलन किया था।

मुख्य सचिव की पत्नी का रोब : खतरे में दलित नौजवान का भविष्य

पटना (अपना बिहार, 21 जनवरी 2017) - मामला बहुत गंभीर है। गंभीर इसलिए नहीं कि एक बार फ़िर अदालत का जनविरोधी चेहरा उजागर हुआ है। बल्कि गंभीर इसलिए कि एक दलित नौजवान जिसने बड़ी मुश्किल से स्नातक के बाद उच्च शिक्षा हासिल कर रहा है। आगामी 29 जनवरी से उसकी परीक्षा है और चीफ़ सेक्रेटरी अंजनी कुमार सिंह की पत्नी की शिकायत पर पुलिस ने उसे आनन-फ़ानन में गिरफ़्तार कर लिया और शुक्रवार को अदालत ने उसकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया।

दरअसल मामला बीते 18 जनवरी का है। चीफ सेक्रेटरी अंजनी कुमार सिंह की पत्नी एएन कालेज में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने स्थानीय थाने में पीड़ित छात्र रौशन रजक पर आरोप लगाया कि जब वह अपने कालेज कार्य का निष्पादन कर रहीं थीं कि एमए का छात्र रौशन कुमार अचानक कमरे में घुस गया एवं असम्मानजनक शब्दों का प्रयोग किया। हालांकि चीफ़ सेक्रेटरी की प्रोफ़ेसर पत्नी ने अपनी प्राथमिकी में इसका उल्लेख अवश्य किया कि रौशन रजक उनसे उपस्थिति मेमो मांग रहा था। उनका कहना था कि रौशन प्रैक्टिकल परीक्षा में अनुपस्थित था। चीफ़ सेक्रेटरी की प्रोफेसर पत्नी ने एसके पुरी में प्राथमिकी दर्ज करायी थीं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी रौशन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

इसके बाद आरोपी रौशन कुमार ने नियमित जमानत के लिए न्यायिक दंडाधिकारी प्रवीण कुमार के कोर्ट में याचिका दाखिल किया। बचाव पक्ष के वकील ने आरोपी रौशन कुमार के बचाव में कहां कि उसके उपर लगाये गये आरोप बेबुनियाद एवं झूठे हैं और 29 जनवरी से परीक्षा होने वाली है। अतः छात्र के भविष्य को देखते हुए जमानत दी जाय। इस कथन का अभियोन पदाधिकारी विजय कुमार ने विरोध किया और कोर्ट को बताया कि जमानत मिलने से समाज में गलत संदेश जाएगा। केस में पर्याप्त साक्ष्य हैं। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनते हुए आरेपी रौशन कुमार को फिलहाल जमानत नहीं दिया और पुलिस से केस डायरी सहित आरोपी का आपराधिक इतिहास की मांग की। इस मामले में अगली सुनवाई 23 जनवरी को पुनः होगी।

प्रकाश पर्व पर टेंट सिटी के लिए किसानों द्वारा दी गयी 90 एकड़ जमीन वापस करे सरकार

पटना (अपना बिहार, 21 जनवरी 2017) - बिहार विधान सभा में विपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार ने कहा कि राज्य में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार पूरी तरह से किसान विरोधी बन गयीं है। सरकार को किसानों को कभी भी चिंता नहीं रहीं है। राजधानी में गुरु गोविंद सिंह जी महाराज का 350 वां प्रकाश पर्व बीते पंद्रह दिन हो गये हैं। पटना सिटी में टेंट सिटी के निर्माण में सरकार ने किसानों से ली गयी 90 एकड़ खेती वाली जमीन थीं, उस जमीन को अभी तक वापस नहीं करने से किसान खेती कैसे करेंगे, सरकार बताएं।

डा. कुमार ने कहा कि प्रकाश पर्व के लिए पटना सिटी स्थित टेंट सिटी के निर्माण के लिए किसानों से 90 एकड़ खेती वाले जमीन ली थीं और प्रकाश पर्व भी समाप्त हुए 15 दिनों से ज्यादा समय हो गया है, लेकिन सरकार ने किसानों को खेती वाली 90 एकड़ जमीन अभी तक नहीं लौटायीं है, जिस कारण किसाना खेती नहीं कर पा रहें हैं।

डा. कुमार ने कहा टेंट सिटी के लिए 100 किसानों से जमीन का मुआवजा तक नहीं दिया गया है। सरकार ने किसानों को 15 जनवरी तक जमीन वापस करने के वादे से किसानों से जमीन ली थीं, लेकिन अब तक जमीन वापस नहीं की गयीं और न ही किसानों को जमीन का मुआवजा ही दिया गया। जिस कारण किसान आक्रोशित है और अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन व धरना देने की तैयारी कर ली है।

अपनी बात : "जन नेता" बनने का नीतीश फ़ार्मूला

दोस्तों, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का व्यक्तित्व एक आयामी नहीं बल्कि बहुआयामी है। यह कोई खास बात नहीं है। हर व्यक्ति के साथ यही होता है। जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में व्यक्तित्व का अलग होना स्वभाविक है। लेकिन राजनीति की बात अलग है। खासकर जनता के लिए हर राजनेता का व्यक्तित्व मायने रखता है। मसलन कोई मिलनसार है या नहीं। या फ़िर कोई दुख-दर्द सुनने वाला है या नहीं। आम जनता को इससे भी फ़र्क पड़ता है कि उनके उपर राज करने वाला शख्स उनकी तकलीफ़ों को दूर करने के प्रति किस तरह की पहल करता है। जबकि राजनेता अपनी महत्वकांक्षा को पूरा करने के साथ-साथ आम जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश करे और उसकी कोशिश आम जनता को प्रभावित करे तो माना जाता है कि वह राजनेता एक सफ़ल राजनेता है। इसे लोकतांत्रिक राजनेता की एक कसौटी मानी जानी चाहिए। नीतीश कुमार इस कसौटी पर कितने खरे उतरते हैं, इसका एक अनुमान इसी मात्र से लगाया जा सकता है कि शराबबंदी जैसे नेक पहल के लिए भी उन्हें तुगलकी फ़रमान सुनाना पड़ रहा है। सवाल उठता है कि जब पहल जनता के लाभ के लिए है और जनता भी यह सच मानती है तब तानाशाह बनने की जरुरत ही क्या है?

दरअसल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गिनीज बुक आफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स में बिहार के बहाने अपना नाम दर्ज कराने के लिए आगामी 21 जनवरी को विश्व का सबसे बड़ा ह्यूमैन चेन बनाने का निर्णय लिया है। आधार शराबबंदी को बनाया गया है,जिसे बिहार की जनता ने खुले दिल से स्वीकारा है। राज्य सरकार के मुताबिक यह मानव शृंखला करीब साढे ग्यारह हजार किलोमीटर लंबी होगी। पटना के गांधी मैदान से चार कतारें निकलेंगी जो चारों दिशाओं में राज्य की सीमा तक अटूट होंगी। इसे अटूट बनाने के लिए तमाम तरह के निर्देश भी जारी किये गये हैं। मसलन सारे स्कूलों के बच्चे इसमें भाग लेंगे। उपस्थिति कम होने की सजा शिक्षकों और शिक्षा अधिकारियों को भुगतनी पड़ेगी। इसके अलावा सभी मुख्य मार्गों पर वाहनों का परिचालन बंद रहेगा। कल्पना करिए कि यदि कोई इमरजेंसी हो तो क्या होगा। सबसे दुखद यह है कि एम्बूलेंस जैसी अति महत्वपूर्ण सेवा भी बंद रहेगी।

सरकारी कर्मियों को भी इसी तरह के आदेश दिये गये हैं। पटना हाईकोर्ट तक ने सरकार के इस आचरण पर सवाल खड़ा किया है। जिस तरह की तैयारी सरकार ने अपने स्तर से किया है, कहा जा सकता है कि वह सरकार के खिलाफ़ टिप्प्णी भले कर दे लेकिन वह सरकार के फ़ैसले को रद्द करने का साहस तो नहीं ही दिखायेगी।

बहरहाल अपने अरमान को पूरा करने के लिए सरकार खजाना भी दोनों हाथों से लूटा रही है। अखबारों को विज्ञापन के रुप में लाखों की कमाई हो रही है। वे भी सरकार के वंदना में जुटे हैं। सरकारी कर्मी मजबूर हैं। पत्रकारिता, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बाद विधायिका की हालत भी सांप-छुछुंदर वाली है। वह चाहकर भी इसका विरोध नहीं कर सकती है। राजनीतिक पार्टियां भी इस उम्मीद में कि शराबबंदी का श्रेय अकेले केवल नीतीश कुमार को न मिल जाय, ह्यूमैन चेन का हिस्सा बनने को बेकरार हैं। रही बात आम जनता की तो उसके पास विश्व रिकार्ड की नौटंकी देखने के अलावा कोई विकल्प भी नहीं है।

इंसाफ की बाट जोहते-जोहते मर गया सूचक, मामला बथानी टोला नरसंहार का

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - देश में इंसाफ की प्रक्रिया कितनी जटिल है, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि 11 जुलाई 1996 को रणवीर सेना द्वारा बथानी टोला में 21 दलितों की हत्या मामले में अभी तक इंसाफ नहीं हो सका है। त्रासदी यह है कि इंसाफ की बाट जोहते-जोहते इस मामले के मुख्य सूचक श्रीकिशुन चौधरी की मौत हो गयी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या पीड़ितों को मरणोपरांत इंसाफ मिलेगा।

बताते चलें कि 11 जुलाई 1996 को घटित बथानी टोला नरसंहार के दौरान हत्यारों ने श्रीकिशुन चौधरी की पत्नी और दुधमुंही बेटी की हत्या कर दी थी। इस मामले में प्रमुख गवाह रहे नईमुद्दीन ने बताया कि बीते 8 जनवरी को करीब 40 वर्षीय श्रीकिशुन चौधरी की मौत हो गयी। वे बड़हरा में स्वास्थ्य केंद्र में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी थे।

उल्लेखनीय है कि बथानी टोला मामले में निचली अदालत में 24 मार्च 2000 को 64 अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया। आरा की निचली अदालत ने 5 मई 2010 को ऐतिहासिक फैसले में तीन अभियुक्तों को फांसी और 20 अभियुक्तों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाया था। फांसी की सजा का आदेश पाने वालों में अजय सिंह सिंह भी शामिल था जिसके उपर श्रीकिशुन चौधरी की मासूम बच्ची की हत्या का आरोप था। दो अन्य आरोपियों में मनोज सिंह और नरेंद्र सिंह शामिल था।

निचली अदालत के द्वारा फैसला सुनाये जाने के बाद आरोपियों ने अदालत के फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी। 17 अप्रैल 2012 को पटना हाईकोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश नवनीति प्रसाद सिंह और अश्विनी कुमार सिंह की खंडपीठ ने निचली अदालत के फैसले को खारिज करते हुए सभी आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया। सूबे के राजनीतिक गलियारे में हाईकोर्ट के फैसले का व्यापक विरोध हुआ और यही कारण रहा कि राज्य सरकार ने एक दिन बाद यानी 18 अप्रैल 2012 को ही हाईकोर्ट के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने का एलान किया। इसके अलावा सूचक स्व. श्रीकिशुन चौधरी और मो. नइमुद्दीन ने भी अपनी तरफ से हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी। इनलोगों के प्रयास के कारण 16 जुलाई 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया और तबसे यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है।

बहरहाल मामले की सुनवाई में हो रही देरी के संबंध में मो. नईमुद्दीन ने बताया कि अब पीड़ित परिवारों की हिम्मत टूटने लगी है। उन्होंने कहा कि जब वे लोग ही नहीं रहेंगे जिनके अपनों की हत्या रणवीर सेना के हत्यारों ने कर दी थी, फिर यदि इंसाफ मिलेगा तो उससे क्या होगा।

दलाई लामा ने नीतीश को सराहा

पटना(अपना बिहार, 17 जनवरी 2017) - करीब एक पखवारे तक बोधगया में आायोजित 34वें कालचक्र पूजा के सफल आयोजन के लिए तिब्बतियों के धर्मगुरू दलाई लामा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति आभार व्यक्त किया है और उनकी सराहना की। मुख्यमंत्री को भेजे अपने पत्र में श्री लामा ने कहा कि यह एक बहुत बड़ा आयोजन था जिसमें विश्व भर के बौद्ध धर्मावलम्बि जुटे थे। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पूरे आयोजन में श्री कुमार ने हर पहलू का सबसे बेहतर प्रबंधन किया और उनके प्रयासों के कारण ही कालचक्र पूजा भव्य स्वरूप धारण कर सका। दलाई लामा ने अपने पत्र में बिहारवासियों के प्रति भी आभार व्यक्त किया।

सैनिकों का मनोबल तोड़ रहे सेना अध्यक्ष : मीसा

पटना(अपना बिहार, 17 जनवरी 2017) - राजद सांसद डा. मीसा भारती ने कहा है कि थल सेना प्रमुख विपिन रावत जवानों की शिकायत पर ध्यान देने के बजाय उनका मनोबल तोड़ रह रहे हैं। अपने बयान में उन्होंने कहा कि थल सेना अध्यक्ष ने सेवादारी/सहायक की शर्मनाक परम्परा को खत्म करने को लेकर एक शब्द नहीं कहा। उल्टा फरमान जारी कर दिया कि कोई सिपाही अन्याय के विरुद्ध सोशल मीडिया पर बोलेगा तो सजा होगी। यानि कल जो दुश्मन के विरुद्ध दहाड़ेंगे, आज चुपचाप अपनों से ही, बिना आवाज उठाए, कठपुतली बनकर, अन्याय अपमान सहें।

डा. भारती ने कहा कि हमारी संस्कृति में शहीदों को भगवान के बराबर स्थान दिया गया है। आज जो जवान किसी के कुत्ते घुमा रहे हैं, जूते चमका रहे हैं, गाड़ी धो रहे हैं, सब्जी ला रहे हैं, कल देश की सेवा करते शहीद भी हो सकते हैं। क्या हम देश के प्रहरियों को सम्मान भरा जीवन, बेहतर भोजन और अन्यायपूर्ण व्यवस्था व भ्रष्ट अफसरों से सुरक्षा भी सुनिश्चित नहीं कर सकते?

उन्होंने कहा कि थल सेना अध्यक्ष जवानों को शिकायत-सुझाव पेटी का उपयोग करने की सलाह दे रहे हैं जबकि ऐसे पेटियों की क्या हालत होती है और उसपर क्या कार्रवाई होती है, वह भी सब जानते हैं। जाहिर है, स्थानीय अफसर की ही इसपर कार्रवाई की जिम्मेदारी होती है। जब अधिकतर शिकायत उनके विरुद्ध ही होगी तो इंसाफ की उम्मीद करना बेमानी ही है।

दलित महिला को पूर्व वार्ड पार्षद ने जिंदा जलाया

पटना(अपना बिहार, 16 जनवरी 2017) - मुजफ्फरपुर जिले के काँटी थाना क्षेत्र में अपराध थमने का नाम नही ले रहा है। काँटी क्षेत्र के टरमा चौक के समीप दलित बस्ती में बिन्देश्वर चौधरी की पत्नी राजकली देवी नामक महिला को घर में जिन्दा जला दिया गया। घटना के बारे में मृतक के पुत्र का कहना है की पूर्व से भी दुकान हटाने हेतु विश्वनाथ चौधरी नामक वयक्ति से झगड़ा होता रहा है और उक्त व्यक्ति के द्वारा महिला का हाथ भी तोड़ दिया गया था। आसपास के लोगों की मानें तो देर रात लगभग 11 बजे घटना स्थल से गोलीबारी की आवाज आ रही थी। जब लोगों ने देखा तो फूस की दुकान सहित महिला पूरी तरह से जल चुकी थी। घटना स्थल से बरामद रस्सी तथा महिला के अवशेष को देखते हुए महिला के पुत्र का कहना है की जिन्दा अवस्था में महिला के हाथ पैर बांध कर जला दिया गया है। सूत्रों के अनुसार विश्वनाथ चौधरी समेत 5 पर नामजद प्राथमिकी दर्ज करायी गयी जिसमे से 1 पूर्व जिला पार्षद प्रेम चौधरी की गिरफ़्तारी होने की सुचना है। अब सवाल यह उठता है की क्या काँटी में पुलिस अपराधियो से डरती है क्या जो रात के घटना पर सुबह के 7 बजे पहुँची। मामले के बारे में स्थानीय थानाप्रभारी चुप्पी तोड़ने का नाम नही ले रहे है जिससे पुलिस भी सन्देह के घेरे में दिखती नजर आ रही है।

संपादकीय : कब संवेदनशील होगी सरकार?

दोस्तों, सरकारी लापरवाही के कारण दुखद घटनायें होती हैं। सरकार मातम भी मनाती है। औपचारिकता के लिए विशेष टीम के द्वारा घटनाओं की जांच भी करायी जाती है। लेकिन फ़लाफ़ल कुछ नहीं निकलता है। सरकारी अमला असंवेदनशील बना रहता है। यकीन नहीं आता है कि वही पटना जिसने दशमेश गुरु श्री गुरुगोविन्द सिंह के 350वें जन्मोत्सव को इतने धुमधाम के साथ मनाया कि पूरी दुनिया में बिहार के साथ-साथ नीतीश कुमार को प्रशंसा मिली। उसी पटना में 24 लोग बेमौत ही काल के गाल में समा गये।

सवाल उठता है कि क्या सरकार यह नहीं जानती थी कि पतंगोत्सव में बड़ी संख्या में लोग गंगा नदी के उस पार जाते हैं। जबकि पतंगोत्सव का कार्यक्रम सरकारी था। सरकार की ओर से यह विशेष अवसर उपलब्ध कराया गया था। इसके बावजूद सुरक्षा को लेकर कोई तैयारी नहीं थी। हादसा हुआ और लोग देखते ही देखते मरने लगे। संभव था कि यदि मौके पर सुरक्षा का इंतजाम होता तो लोगों को बचाया जा सकता था, लेकिन सरकारी अमला कुंभकर्णी निद्रा में सोया रहा।

यह पहला मौका नहीं है जब स्थानीय प्रशासन की लापरवाही से पटनावासियों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इससे पहले छठ हादसा, गांधी मैदान में रावण वध के दौरान हुआ हादसा सरकारी तंत्र की खामियों को उजागर कर चुका है। इसके बावजूद यदि तंत्र संवेदनशील नहीं हो रहा है तो इसके पीछे सबसे बड़ी वजह कसूरवारों को सजा नहीं दिया जाना है। इसके पूर्व हुए हादसों के लिए किसी को भी प्रत्यक्ष तौर पर कसूरवार नहीं माना गया और न ही किसी को सजा मिली। यदि सरकार ने अपने तंत्र के कसूरवारों को पहले ही सजा दिया होता तो संभव था कि वे संवेदनशील होते और हादसे के शिकार लोगों को बचाया जा सकता था।

बहरहाल सरकार और सरकारी अमला दोनों संवेदनशीलता के बजाय हादसे के होने का इंताजार करने के आदी हो चुके हैं। किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि इस नाव हादसे के लिए भी किसी को जिम्मेवार नहीं माना जाय और जिला प्रशासन व सरकार दोनों अपने आंखों पर पट्टियां बांध लें। रही बात जनता की तो हादसों में जनता का बेमौत मरना नियति बन चुकी है।

खास खबर : रहस्यमयी है नीतीश कुमार का 21 जनवरी

दोस्तों, आगामी 21 जनवरी को बिहारवासी एक नया कीर्तिमान बनायेंगे। यह कीर्तिमान होगा शराबबंदी के पक्ष में खड़े होने का। मख्यमंत्री नीतीश कुमार के आहवान पर राज्य के सभी जिलों में मानव श्रृंखला का निर्माण किया जाएगा। सबसे दिलचस्प यह है कि 21 जनवरी का राजनीतिक इतिहास क्या है और यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है, कोई नहीं जानता है। यहां तक कि सत्तासीन जदयू के वरिष्ठ नेतागण भी यह नहीं जानते हैं कि आखिर इसी दिन शराबबंदी के पक्ष में मानव श्रृंखला का निर्माण क्यों किया जा रहा है।

गौरतलब है कि भारत के राजनीतिक इतिहास में 21 जनवरी एक सामान्य दिन की तरह दर्ज है। अलबत्ता अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कई महत्वपूर्ण घटनायें घटित हुई हैं लेकिन किसी भी घटना का शराब से कोई लेना-देना नही है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि तीन दिनों के बाद यानी 24 जनवरी को ही जननायक कर्पूरी ठाकुर की जयंती है जिन्होंने बिहार में पहली बार शराबबंदी लागू की थी। हालांकि जदयू के ही नेतागण यह मानते हैं कि 21 जनवरी को होने वाले कार्यक्रम का जननायक की जयंती से कोई लेना-देना नहीं है। वहीं विश्लेषक भी यह मानते हैं कि जननायक की शराबबंदी नीतीश कुमार की शराबबंदी से पूर्णतया अलग थी। इसलिए उनकी स्मृति में मानव श्रृंखला का निर्माण कर नीतीश कुमार स्वयं को इतिहास पुरूष साबित करने के अवसर से चूकना नहीं चाहेंगे।

वहीं इसी महीने की 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस और 30 जनवरी को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती है। इतिहास में इन दोनों तारीखों का उल्लेखनीय महत्व है। 30 जनवरी का महत्व इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि बिहार इस वर्ष को चंपारण सत्याग्रह के शताब्दी वर्ष के रूप में मना रहा है। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से खास तैयारी भी की गयी है। इसके अलावा महात्मा गांधी ने भी शराबबंदी के खिलाफ अभियान चलाया था। विश्लेषक मानते हैं कि नीतीश कुमार की मानव श्रृंखला का प्रत्यक्ष तौर पर महात्मा गांधी से भी कोई लेना-देना नहीं है।

बहरहाल विश्व में सबसे लंबी मानव श्रृंखला 11 दिसंबर 2004 को बांग्लादेश में बनायी गयी थी। तब बांग्लादेश आवामी लीग के नेतृत्व में 14 पार्टियों ने चुनाव कराने की मांग को लेकर मानव श्रृंखला का निर्माण किया था। यह मानव श्रृंखला 1050 किलोमीटर लंबी थी और इसमें पचास लाख लोग शामिल हुए थे।

संपादकीय : प्रकाश पर्व की लख-लख बधाई...

कहने की आवश्यकता नहीं है कि दुनिया के सभी धर्मों में एक साझी खासियत यही है कि सभी धर्म जीवन का मार्ग दिखाते हैं। सभी धर्मों के अपनी-अपनी संस्कृति अपने पर्व त्यौहार हैं। इन त्यौहारों के अपने महत्व भी हैं। ऐसा ही एक आनंददायक पर्व है दशमेश गुरू, श्री गुरू गोविन्द सिंह जी का 350वां प्रकाश पर्व। इस पांच दिवसीय आयोजन का जिस तरह से गुरू की धरती पाटलिपुत्र में किया गया, वह न केवल काबिलेतारीफ है, बल्कि आने वाले समय में इसे एक मिसाल के रूप में याद किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार और उसका पूरा तंत्र बधाई की पात्र है।

अब यदि गुरू गोविन्द सिंह की महिमा की बात करें तो तथाकथित उनके चमत्कारों को छोड़ दें तो यह एक निर्विवाद सत्य है कि उन्होंने हिन्दू समाज में आयी जड़ता को समाप्त किया था। उनका खालसा पंथ तत्कालीन सामाजिक व्यवस्था के खिलाफ विद्रोह था तो श्रम के सहारे जीने वाले वंचित तबकों के नवजागरण की प्रक्रिया भी। अपने पंथ के सहारे गुरू गोविन्द सिंह ने यह साबित किया कि समाज में जातिपाति सब सत्ता हड़पने का हथियार मात्र है और यही वजह रही कि उनके पंच प्यारों में सब के सब दलित व पिछड़े समाज के थे। सिक्ख धर्म की इसी विशेषता संविधान निर्माता बाबा साहब डा. भीम राव आंबेडकर को उस समय प्रभावित किया था जब उन्होंने धर्म बदलना चाहा था। लेकिन उस समय तक सिक्ख धर्म में भी जाति व्यवस्था के विकार आ गये थे, जिसके कारण बाबा साहब ने बौद्ध धर्म को चुना।

असल में गुरू गोविन्द सिंह ने भारतीय सामाजिक व्यवस्था को एक नया आयाम दिया जो बाद में आजादी के बाद अपने पूर्ण रूप में सामने आया। उन्होंने यह स्थापित किया कि देश की बागडोर केवल द्विज और क्षत्रिय नहीं बल्कि वे भी संभाल सकते हैं जो असाध्य श्रम करते हैं। आज पूरा सिक्ख धर्म इसी बुनियाद पर टिका है। श्रम के सहारे सिक्ख धर्मावलम्बियों ने अपने आपको न केवल देश में बल्कि दुनिया के हर हिस्से में स्थापित किया है। इनकी उद्यमिता उस समय मिसाल बनी जब देश अन्नाभाव से गुजर रहा था। देश में पहली हरित क्रांति सिक्ख धर्मावलम्बियों के प्रांत पंजाब में हुआ तो इसकी वजह उनकी उद्यमिता ही रही।

बहरहाल गुरू गोविन्द सिंह ने आम इंसानों को सदियों से आ रही संर्कीणता को समाप्त करने की पहल की। ऐसे अदम्य साहस वाले इंसान की 350वीं जयंती पर पूरे देश को बधाई और यह उम्मीद कि आने वाले समय में हम सभी देशवासी गुरू गोविन्द सिंह की जातिविहीन सामाजिक व्यवस्था का निर्माण करेंगे और उनके द्वारा बतायी गयी उद्यमिता को आधार बनाकर राष्ट्र के नवनिर्माण में अपनी भूमिका का निर्वहन करेंगे।

गुरू गोविन्द सिंह के 350वें प्रकाश पर्व की लख-लख बधाई

धर्मनिरपेक्षता की पहचान बना दशमेश गुरू का 350वां प्रकाश पर्व

दोस्तों, बिहार की राजधानी पटना का अपना शानदार इतिहास रहा है। कभी मगध की राजधानी रही इस धरती पर अनेक सभ्यता और संस्कृतियां पनपीं। 1984 के सिक्ख दंगे और अपवाद स्वरूप हुए सांप्रदायिक हिंसक झड़पों को छोड़ दें तो राजधानी पटना का स्वरूप हमेशा से धर्मनिरपेक्ष रहा है। फिर चाहे वह छठ का अनुष्ठान हो, नवरात्र का उत्सव हो या फिर मकदुम साहब का उर्स। हर धर्म-मजहब के लोग एक-दूसरे के आयोजन में हाथ बढ़ाते हैं। यहीं नजारा एक बार फिर दशमेश गुरू श्री गुरू गोविन्द सिंह के 350वें प्रकाश पर्व के मौके पर देखने को मिल रहा है।

यहां तक कि गुरूद्वारे में जाकर शीश नवाने वालों में भी गैर सिख धर्मावलम्बियों की संख्या फिलहाल अधिक है। राज्य सरकार द्वारा किये गये अनेक प्रयासों के कारण पूरी राजधानी प्रकाशपर्व के रंग में रंग गयी है। गैर सिख धर्मावलम्बी भी गुरूद्वारे में जाकर स्वयं को ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनाने को उतर गये हैं। सूबे के जाने-माने गांधीवादी चिंतक डा. रजी अहमद के मुताबिक आजादी के बाद यह सबसे बड़ा आयोजन है जिसमें एक साथ लाखों लोग भाग ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि 50 वर्ष पहले जब गुरू गोविन्द सिंह जी का 300वां प्रकाश पर्व मनाया गया था तब पटना सिटी के इलाके में भीड़ थी, लेकिन शेष पटना इससे अछूता ही था। लेकिन इस बार मानों पूरा पंजाब उतर आया है। डा. रजी के मुताबिक सफल आयोजन के लिए राज्य सरकार बधाई की पात्र है।

सबसे अधिक दिलचस्प यह है कि पटना सिटी जाने के लिए मुख्य मार्ग के दोनों किनारों पर कई बड़े मुहल्ले हैं जहां मुसलमान रहते हैं। लेकिन प्रकाश पर्व के श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी न हो, इसके लिए उनलोगों ने भी अपने हिसाब से सड़क को साफ रखने से लेकर श्रद्धालुओं को हर प्रकार की सहायता उपलब्ध करा रहे हैं। आलमगंज निवासी मो. निशात के मुताबिक पूरा पटना सिटी ही धर्म निरपेक्ष भारत का वास्तविक स्वरूप पेश करता है। जिस स्थान पर तख्त श्री हरिमंदिर है, वहीं बगल में मुगलकालीन मस्जिद भी है और बगल में ही एक जैन मंदिर भी। उन्होंने बताया कि इनके इलाके में बड़ी संख्या में अलग-अलग धर्मों के लोग एक साथ बिना किसी क्लेश अथवा विवाद के रहते हैं। छठ के मौके पर हम सड़क साफ करने से लेकर घाट तक की सफाई करते हैं। इसी प्रकार हमारे हिन्दू पड़ोसी ईद के मौके पर हमारे साथ होते हैं।

बहरहाल प्रकाश पर्व अपने पूरे परवान पर है। आगामी 5 जनवरी को गुरू गोविन्द सिंह की जयंती के बाद इसका समापन होगा। राज्य सरकार के इंतजाम मेहमानों को आकर्षित कर रहे हैं तो दूसरी ओर पटना सिटी की धर्म निरपेक्षता उन्हें सबसे अधिक प्रभावित भी कर रही है। यह स्थिति जब है जबकि प्रकाश पर्व को लेकर राज्य सरकार ने पटना सिटी के इलाके में सुरक्षा के लिहाज से तमाम तरह के उपाय कर रखे हैं और इस कारण स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है। अपने परेशानी को उसके हाल पर छोड़ पटना सिटी के लोग फिलहाल अपना धर्म-मजहब की बंदिशों को छोड़ मेहमानबाजी में जुटे हैं।

सीएम ने किया जन सुझावों का स्वागत, झपकी लेते रहे माननीय

पटना(अपना बिहार, 3 जनवरी 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरूवार को मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद सभाकक्ष में लोक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर पथ निर्माण कार्य, भवन निर्माण, ऊर्जा, ग्रामीण विकास, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण, नगर विकास एवं आवास, पंचायती राज, जल संसाधन, लघु जल संसाधन, उद्योग, गन्ना उद्योग, विज्ञान एवं प्रावैधिकी, सूचना प्रावैधिकी एवं पर्यटन विभाग से संबंधित मामलों पर लगभग 20 लोगों द्वारा मुख्यमंत्री को अपना सुझाव दिया गया और मुख्यमंत्री ने उनके सुझावों का स्वागत किया। खास बात यह रही कि जब श्री कुमार लोगों से सुझाव ले रहे थे तभी उनके कबीना सहयोगी मसलन शिक्षा मंत्री डा अशोक चौधरी, उद्योग मंत्री जय कुमार सिंह और ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार आदि नींद की झपकी ले रहे थे।

मुख्यमंत्री ने सर्वप्रथम सभी को नववर्ष की बधाई एवं शुभकामनायें दी। आयोजित लोक संवाद कार्यक्रम में बांका से अरशद-उल-कादरी अंश, मुजफ्फरपुर से जितेन्द्र कुमार, भोजपुर से राजेन्द्र प्रसाद, नालंदा से अजीत कुमार सिन्हा, नवादा से अजीत कुमार, नालंदा से सुरेन्द्र कुमार सिंह, मधुबनी से गणेश साह, बोधगया से संजय कुमार, पटना से मधुसूदन कुमार सिन्हा, पटना से रंजीत कुमार, मुजफ्फरपुर से धनंजय कुमार श्रीवास्तव, लखीसराय से मो. कमाल हसन, पटना से अमृता सिंह, पटना से विरेन्द्र दयाल, पश्चिम चम्पारण से दीपू मधेशिया, सीतामढ़ी से गोविन्द शर्मा सहित अन्य ने अपने-अपने सुझाव एवं राय मुख्यमंत्री को दिये। प्राप्त सुझाव एवं राय पर संबंधित विभाग के प्रधान सचिव/सचिव ने वस्तुस्थिति को स्पष्ट किया। लोगों से प्राप्त सुझाव एवं राय पर मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों के प्रधान सचिव/सचिव को कार्रवाई करने हेतु निर्देषित किया। लोगों से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक शिकायत निवारण कानून लागू किया गया हैं। लोगों को अगर शिकायत हो तो अनुमंडल एवं जिला में बनाये गये लोक शिकायत निवारण केन्द्र पर जाये और अपना षिकायत दर्ज करायें। षिकायतों का तुरंत निष्पादन होगा। उद्योग विभाग से संबंधित चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्यमी अच्छा उत्पाद बनायें। उद्योग लगाने के लिये सरकार सभी संभव सहायता देगी। आप गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बनायें। सरकार उत्पादों के ब्रांडिंग में मदद करेगी।

लोक संवाद कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी, जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, उद्योग मंत्री जयकुमार सिंह, ग्रामीण कार्य मंत्री शैलेश कुमार, नगर विकास एवं आवास मंत्री महेश्वर हजारी, पंचायती राज मंत्री कपिलदेव कामत, गन्ना उद्योग मंत्री खुर्षीद उर्फ फिरोज अहमद, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री कृष्ण नंदन प्रसाद वर्मा, पर्यटन मंत्री अनीता देवी, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, प्रधान सचिव मंत्रिमण्डल समन्वय ब्रजेश मेहरोत्रा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव अतीश चन्द्रा, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा सहित संबंधित विभागों के प्रधान सचिव/सचिव उपस्थित थे।

प्रकाश पर्व में सभी करें सहयोग : मुख्यमंत्री

पटना(अपना बिहार, 3 जनवरी 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दशमेश गुरू, गुरू गोविन्द सिंह जी के 350वें प्रकाश पर्व के सफलतापूर्वक आयोजन में सभी से सहयोग मांगा है। गुरूवार को लोक संवाद कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रकाष पर्व में आप सभी का सहयोग चाहिये। उन्होंने कहा कि देश भर से और यहां तक कि देश के बाहर से लोग आ रहे हैं। बिहार के बारे में अच्छी सोच के साथ वे लौटें इसमें सबका सहयोग अपेक्षित है और आप सब से भी यही हमारी अपेक्षा है और आग्रह है। उन्होंने कहा कि श्री गुरू गोविन्द सिंह जी के 350वें जन्म उत्सव के अवसर पर दुनिया भर से लोग आये हुये हैं, मेरी यही इच्छा है कि पूरे बिहार को प्रकाशपर्व मय बना दें।

कहां से आती और कहां जाती है राजनेताओं की कमाई?

नीतीश कुमार की कमाई का हिसाब

पटना(अपना बिहार, 3 जनवरी 2017) - राजनीति में दिखावा करना भी एक अति महत्वपूर्ण उपक्रम है। इसका एक प्रमाण यह भी कि दस लाख का सूट पहनने वाले प्रधानमंत्री अभी भी अपने आपको गरीब ही बताते हैं। वहीं दिखावे की इस राजनीति में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी कम नहीं हैं। उनके ही द्वारा दिये गये आंकड़े उनके दिखावे की कलई खोलती है। यह अत्यंत ही दिलचस्प है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की संपत्ति पिछले साल की तुलना में दो लाख कम हो गयी है, जबकि बेटे निशांत की संपत्ति में 13 लाख रुपये की कमी आयी है।

मसलन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी संपत्ति विवरणी में इस बार बताया है कि उनके पास वर्तमान में कुल 56 लाख रुपये की चल-अचल संपत्ति है, इसमें दिल्ली में 1000 वर्गफुट में बने एक फ्लैट, जिसकी वर्तमान कीमत 40 लाख रुपये है, के अलावा 10 गायें और पांच बछड़े हैं।

जबकि वर्ष 2004 में जब वे लोकसभा का चुनाव लड़ रहे थे और तब जो उन्होंने अपनी संपत्ति का विवरण चुनाव आयोग को दिया था, उसके अनुसार तब उनके पास करीब 43 लाख रुपए की संपत्ति थी। इसमें उनका वह घर भी शामिल है जो उन्होंने दिल्ली के संसद विहार कालोनी में खरीदा था। उस समय इस मकान की कीमत 11 लाख 69 हजार रुपए थी। जबकि वर्तमान में नीतीश कुमार इसकी कीमत 40 लाख बता रहे हैं। इस प्रकार यदि श्री कुमार की संपत्ति में से इस मकान को हटा दें तो उनके पास केवल 16 लाख रुपए की चल-अचल संपत्ति है। वहीं 2004 में उनके द्वारा दिये विवरणी में से इस मकान को हटा दें तब भी उनकी संपत्ति करीब 32 लाख रुपए थी।

चल अचल संपत्ति के साथ ही नकदी, आभूषण आदि का खेल भी बहुत निराला है मसलन जारी दस्तावेज के मुताबिक मुख्यमंत्री के पास 42566 रुपये नकद हैं. यह पिछले साल की तुलना में यह करीब दो हजार रुपये अधिक है। उनके तीन बैंक खातों में लगभग 78 हजार रुपये जमा हैं। उनके पास दो गाड़ियां (एक इको स्पोर्ट्स और एक हुंडइ की आइ 10 कार) हैं। जबकि वर्ष 2004 में उनके पास केवल 9500 रुपए थे। इसके अलावा 12,200 रुपए के स्वर्णाभूषण और केवल एक मारूति कार 800 थी। दिलचस्प यह कि जहां एक ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सीएम होने के बावजूद अपनी संपत्ति के हिसाब से गरीब होते दिखते हैं तो दूसरी ओर उनके बेटे निशांत हैं जो बिना किसी रोजी-रोजगार के ही अपने पिता से अमीर हैं। इनके बेटे के पास एक करोड़ 11 लाख रुपये की चल-अचल संपत्ति है। मुख्यमंत्री के नाम पर न तो कहीं खेतिहर जमीन वर्ष 2004 में थी और न ही वर्तमान में है। यहां तक कि पटना में भले ही उनके नाम से दो-दो शानदार बंगला है, लेकिन अपने लिए एक धुर जमीन भी नहीं है।

करें सकारात्मक पहल : ड्रामेबाज पीएम से देश को करायें आजाद

दोस्तों, नया साल आ चुका है। आइये इसका स्वागत इस सकारात्मक पहल के साथ करें कि हम अपने प्यारे देश को ड्रामेबाज पीएम की ड्रामेबाजी से मुक्त करायें। वर्ष 2016 में देश और दुनिया ने कई बदलाव देखे। एक बड़ा बदलाव डोनाल्ड ट्रंप के रुप में सामने आया। हालांकि इसका नफ़ा और नुकसान दोनों इस नये वर्ष में पता चलेगा। लेकिन हिन्दुस्तान कराह रहा है। नोटबंदी के तुगलकी फ़रमान के बाद पूरे देश में हाहाकार मची है। किसान, मजदूर से लेकर मध्यम वर्ग तक सभी ड्रामेबाज पीएम नरेंद्र मोदी के ड्रामे से परेशान है।

यह नरेंद्र मोदी का ड्रामा ही है कि उन्होंने वर्ष 2016 के अंतिम दिन देश को संबोधित किया। कदापि इसका एक मकसद यह भी रहा कि नये साल की पहली सुबह जब लोग अखबार खोलें तो लोगों को पीएम की ड्रामेबाजी दिखायी दे। वैसे यह पूरे तरीके से हास्यास्पद रहा कि पीएम ने नववर्ष की पूर्व संध्या पर देश का आम बजट लोगों के सामने रख दिया। उन्होंने नोटबंदी के पचास दिन के बाद अपनी विफ़लताओं को अपने नये ड्रामे से ढंकने की कोशिश की। मसलन प्रधानमंत्री मोदी ने गर्भवती महिलाओं के लिए 6 हजार रुपये की आर्थिक मदद की घोषणा की। उन्होंने कहा कि ये पैसे उनके खातों में सिधे जमा कराया जाएगा। नोटबंदी की चर्चा करते हुए ड्रामेबाज पीएम ने कहा कि यह देश के लिए शुद्धि यज्ञ था। भ्रष्ट्राचार, कालाधन और जाली नोटों के जाल ने साधारण आदमी को भी मजबूरन घूस देना पड़ता था। करोड़ों देशवासी इससे बाहर निकलना चाहते थे।

वित्त मंत्र अरुण जेटली को व्यर्थ साबित करते हुए पीएम मोदी ने आम जनता को फ़िर से झांसा देते हुए कहा कि स्वतंत्रता के इतने साल के बाद भी लाखों गरीबों के पास अपना घर नहीं है। मध्यम वर्ग की पहुंच से भी घर दूर हो गया था। ये घर खरीद सकें इसके लिए सरकार ने आवास योजना में दो बड़े फैसले लिये हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नये घर देने के लिए दो नयी स्कीम बनायी गयी है। इसके तहत 2017 में 9 लाख के कर्ज में 4 फीसदी और 12 लाख के कर्ज पर 3 फीसदी की छूट मिलेगी। शहरों में रहने वालों को झांसा देने के बाद पीएम ने गांव के लोगों को भी झांसा दिया और कहा कि गांवों में बनने वाले घरों की संख्या को बढ़ा दिया गया है। जितने घर बनने वाले थे उससे 33 फीसदी ज्यादा घर बनेंगे। 2017 में जो लोग गांव में अपने घर का निर्माण करना चाहते हैं। उन्हें 2 लाख रुपये तक के ऋण में 3 प्रतिशत ब्याज की छूट दी जायेगी।

बहरहाल मामला देश का है और देश के लिए सकारत्मकता इसी में है कि इसे ड्रामेबाजी करने वाले पीएम के आतंक से मुक्त करायें। लोकतांत्रिक पद्धति में पांच वर्ष की मजबूरी है लिहाजा ढाई वर्ष तक पीएम की ड्रामेबाजी पूरे देश को बर्दाश्त करनी होगी। लेकिन यह समय भी कट जायेगा और देश ड्रामेबाजी से अलग विकास की असली राह पर अग्रसर होगा। इस सकारात्मक उम्मीद के साथ आप सभी को अपना बिहार परिवार की ओर से नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें

सड़क दुर्घटना में चार की मौत

औरंगाबाद जिले में अलग-अलग सड़क हादसों में चार लोगों की मौत हो गयी जबकि सात लोग घायल हो गए। जम्होर थाना क्षेत्र में एनएच 98 पर 24 घंटे के भीतर दूसरे सड़क हादसे में तीन लोगों की जान चली गई। इससे पहले रविवार को टेंपो के ट्रैक्टर टेलर से टकरा जाने के कारण दो लोगों की मौत हो गई थी। सोमवार की अहले सुबह अनुग्रह नारायण स्टेशन जा रही सिटी राइड बस ने एनएच 98 पर चित्रगोपी गांव के एक ट्रक में पीछे से टक्कर मार दी। घटना में बस पर सवार कुटुंबा थाना के बसडीहा गांव निवासी 35 वर्षीय प्रमोद सिंह और देव थाना क्षेत्र के बाला पोखर गांव निवासी मो सिकंदर की मौत घटनास्थल पर ही हो गई। इधर घायल हुए मिल्की पीएचसी में पोस्टेड डॉ ओबैदुल्लाह अंसारी की मौत भी कुछ देर बाद इलाज के क्रम में सदर अस्पताल में हो गयी।

महागठबंधन में कोई गांठ नहीं : मुख्यमंत्री, हर महीने के चौथे सोमवार को होगा कार्यकर्ता दरबार का आयोजन : लालू, सरकार कर रही अच्छा काम : सीपी जोशी, कार्यकर्ता दरबार में मिला आश्वासन, जल्द गठित होंगी बीस सूत्री कमेटियां, आयोग

पटना(अपना बिहार, 24 जनवरी 2017) - सूबे में सत्तासीन महागठबंधन के घटक दलों के कार्यकर्ताओं के संयुक्त बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि महागठबंधन में कोई गांठ नहीं है. उनहोंने कहा कि महागठबंधन कार्यकतार्ओं को जल्द ही शासन-प्रशासन में हिस्सेदारी मिलेगी. राज्य, जिला से लेकर प्रखंड स्तर तक 20 सूत्री कमेटियों का जल्द ही गठन किया जायेगा. सोमवार को महागठबंधन के तीनों दलों जदयू-राजद-कांग्रेस के जिलाध्यक्षों के सम्मेलन में श्री कुमार ने कहा कि प्रदेश में महागठबंधन की सरकार है. यह एकजुट है. कुछ लोगों द्वारा बीच-बीच में भ्रम फैलाने की कोशिश की जाती है, लेकिन उनसे सचेत रहने की जरूरत है. महागठबंधन सरकार के गठन के बाद पहली बार हुई इस बैठक में राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद, जदयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव और कांग्रेस के बिहार प्रभारी सीपी जोशी समेत सरकार के सभी मंत्री उपस्थित हुए.

श्री कुमार ने कहा कि राज्य स्तर की 20 सूत्री कमेटी में जदयू, राजद व कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष उपाध्यक्ष के रूप में होंगे. वहीं, जिलों में सरकार के मंत्री अध्यक्ष व तीनों दलों के जिलाध्यक्ष उपाध्यक्ष होंगे. इसके अलावा प्रखंड में संबंधित विधानसभा क्षेत्र से महागंठबंधन के जिस दल का प्रत्याशी विधानसभा चुनाव में खड़ा हुआ होगा उस दल के अध्यक्ष होंगे और महागंठबंधन के बाकी दोनों दलों के उपाध्यक्ष होंगे.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि महागठबंधन की सरकार एक साल पूरे कर चुकी है और पूरे एकता के साथ आगे भी चार साल का सफर पूरा करेगी. महागंठबंधन की एकता का यह कार्यकर्ता सम्मेलन एक बड़ा उदाहरण है. हर महीने के चौथे सोमवार को महागंठबंधन के कार्यकतार्ओं का सम्मेलन होगा और वे पूरे मंत्रिमंडल के सामने अपने क्षेत्र की समस्याएं रख सकेंगे. अगली बार से जिलाध्यक्ष अपने साथ दो-दो कार्यकतार्ओं को भी साथ लाये और जनहित से जुड़ी जो समस्याएं हैं उसे संबंधित विभाग को दे दें. उस पर त्वरित कार्रवाई की जायेगी. भ्रष्टाचार पर मुख्यमंत्री ने चुटकी ली और मजाकिया लहजे रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियों को दोहराया कि थाना में दारोगा, ट्रेन में टीटीइ और जेल में वार्डन कभी सुधरने वाला नहीं है. नीतीश कुमार ने कहा कि भ्रष्टाचार को खत्म करने में हमें लगे रहना होगा. इसमें सुधार के लिए जो भी काम होंगे, सरकार करेगी.

वहीं महागंठबंधन कार्यकतार्ओं के सम्मेलन में राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने कहा कि इस बैठक के साथ कार्यकर्ता और मंत्रिमंडल के बीच संवाद की शुरूआत हो गयी. हर महीने के चौथे सोमवार को इस तरह का कार्यकर्ता दरबार होगा. कई कार्यकतार्ओं ने अपनी समस्याएं रखी है. सभी समस्याओं का सरकार निवारण करेगी. जबकि जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सह सांसद शरद यादव ने कहा कि लोक संवाद कार्यक्रम के तहत तीनों दलों के नेता मौजूद थे. महागंठबंधन में कोई दरार नहीं है और चट्टानी एकता है.

कांग्रेस के बिहार के प्रभारी सीपी जोशी ने कहा कि महागंठबंधन की सरकार प्रदेश में अच्छा काम कर रही है. जनता ने जिस विश्वास के साथ सरकार को समर्थन दिया था, उस पर वे खरे उतर रहे हैं. एक-एक कर कई काम जो सरकार बनने से पहले करने का वादा किया गया था, पहले साल ही शुरू कर दिया गया है.

गैंगमैन की सर्तकता से बाल-बाल बची पैसेंजर ट्रेन

पटना(अपना बिहार, 24 जनवरी 2017) - रविवार की देर रात बिहार में एक और बड़ा रेल हादसा टल गया। सोनपुर रेल मंडल के बरौनी समस्तीपुर सेक्शन पर यात्रियों से भरी मुजफ्फरपुर भागलपुर पैसेंजर डिरेल होने से बाल-बाल बच गई। ट्रेन नंबर 13420 को दुर्घटनाग्रस्त कराने के लिए शातिरों ने रेल ट्रैक पर दो-दो स्लीपर बिछा रखे थे। हालांकि ट्रेन डाउन लाइन से गुजर रही थी और शातिरों ने अप लाइन के रेलवे ट्रैक पर स्लीपर रख दिया था।

रेल अधिकारी की मानें तो अप लाइन पर मालगाड़ी गुजरने वाली थी। ट्रैक की पेट्रोलिंग कर रहे दो गैंगमैन रमेश कुमार प्रजापति और मो. मंजूर आलम की होशियारी से मुजफ्फरपुर भागलपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस को ट्रेन को दलसिंह सराय स्टेशन पर रोका गया । रेल अधिकारियों की मानें तो अगर इस पुलिया के पास से उस समय ट्रेन गुजरती तो भारी जानमाल का नुकसान तय था। साजिश उजागर होने के बाद रेल पुलिस, आरपीएफ व जिला पुलिस मामले की गहराई से छानबीन कर रही है।

पूर्व मध्य रेल के जीएम डीके गायेन ने सोमवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि रविवार की देर रात चार पांच अपराधी ट्रैक पर स्लीपर रखकर ट्रेन को डिरेल करना चाहते थे। पोखरायां व कानपुर देहात व ओडिशा में हुए रेल हादसे के बाद पटरियों की निगरानी बढ़ा दी गई है। ऐसे में साठाजगत और दलसिंहसराय स्टेशन के बीच 20 नंबर पुलिया से आगे पोल नंबर 9/9 व 9/11 और गुमती नंबर 29 और 30 के बीच रेलवे ट्रैक पर उन्हें स्लीपर नजर आया। हादसे का जखीरा देख जब वे उसे हटाने लगे तो चार से पांच की संख्या में अपराधियों ने दो कर्मियों रमेश कुमार प्रजापति और मो. मंजूर आलम को जान से मारने की धमकी दी और गाली गलौज कर वहां से भगा दिया।ट्रेन को दलसिंहसराय में रोका गया दोनों कर्मी आनन-फानन में दलसिंह सराय स्टेशन पहुंचे और आरपीएफ एवं जीआरपी को सूचना दी। इस दौरान मुजफफरपुर भागलपुर एक्सप्रेस को रात 12.40 से रात 1.22 तक दलसिंहसराय स्टेशन पर जबकि दो मालगाड़ी को दूसरे स्टेशन पर रोका गया।

जीएम ने बताया कि मौके पर स्थानीय पुलिस, जीआरपी, आरपीएफ के अधिकारी पहुंचे और किसी तरह उस स्लीपर को ट्रैक पर से हटाया गया। उन्होंने कहा कि मौके पर अगर गैंग मैन की नजर नहीं पड़ती तो एक बड़ा रेल हादसा हो सकता था। इधर दोनों कर्मियों को मंगलवार को रेल मुख्यालय बुलाया गया है जहां जीएम के द्वारा उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा।मुख्य सचिव व डीजीपी को दी जानकारीरेल हादसों से आतंकी संगठनों के तार जुड़े होने की हालिया आशंका से डरे रेल अधिकारियों में इस घटना के बाद हड़कंप मच गया। आनन फानन में जीएम ने मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह और डीजीपी पीके ठाकुर को इसकी सूचना दी।

रेलवे जीएम ने बताया कि अपराधियों की धरपकड़ और मामले की जांच का आश्वासन दोनों आलाधिकारियों ने दिया है। सुबह इस घटना को लेकर रेलवे महकमे में खलबली मच गयी। बरौनी के आरपीएफ कमांडेंट वाईके मंडल, दलसिंहसराय डीएसपी संतोष कुमार, आरपीएफ के प्रभारी निरीक्षक सुशील कुमार, इंस्पेक्टर ईश्वर प्रसाद यादव व दलसिंहसराय थानाध्यक्ष नरेश पासवान मौके पर पहुंचे और मामले की छानबीन की।मामला दर्ज इधर, इस मामले में बरौनी रेल थाने में दोनों पेट्रोलिंग मैन के बयान पर अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गयी है।

सूबे में शौचालय निर्माण का कार्य धीमा : सुमो

पटना(अपना बिहार, 24 जनवरी 2017) - पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि केरल और हिमाचल जहां हर घर में शौचालय बनवा कर खुले में शौच से मुक्ति का सौ फीसद लक्ष्य पूरा कर चुके हैं और गुजरात, बंगाल में 51 प्रतिशत तथा हरियाणा में 84 फीसद लक्ष्य हासिल हो चुका है, वहीं बिहार स्वच्छता मिशन के आखिरी पायदान पर है। जिस सुस्ती से राज्य में शौचालय बन रहे हैं, उससे तो 25 साल में भी खुले में शौच से मुक्ति नहीं मिलेगी।

उन्होंने कहा कि चार साल में 8,343 पंचायतों को स्वच्छ बनाने के लक्ष्य की जगह अभी मात्र 152 पंचायतों में शौचालय बन पाये। 2015-16 में 28 लाख 37 हजार परिवारों के लिए शौचालय बनने थे। सिर्फ 4 लाख 27 हजार शौचालय बनवा कर मात्र 15 फीसद लक्ष्य हासिल हो सका।

श्री मोदी ने कहा कि चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष में बापू के स्वच्छता संबंधी आग्रहों को ताख पर रख दिया गया है। 2016-17 में 50 लाख 76 हजार शौचालय बनवाने के लक्ष्य की तुलना में केवल 3 लाख 19 हजार शौचालय बने। बाकी के दो माह में क्या सरकार 47 लाख 57 हजार शौचालय बनवा सकती है? मुख्यमंत्री बतायें कि क्या वे दो साल में डेढ़ करोड़ परिवारों को खुले में शौच से मुक्ति दिला कर अपना वादा पूरा कर पाएंगे?

राजनीति : जननायक जयंती मनाने की होड़

पटना(अपना बिहार, 24 जनवरी 2017) - राजनीति में सबकुछ जायज है। यही कहावत चरितार्थ करते हुए मंगलवार को सूबे के अनेक राजनीतिक जननायक कर्पूरी ठाकुर की जयंती मनायेंगी। सबसे दिलचस्प यह है कि स्व. ठाकुर की स्मृति में भव्य समारोह का आयोजन करने वालों में वे पार्टियां भी शामिल हैं जिनके कारण स्व. ठाकुर अपना मुख्यमंत्रीत्व काल एक बार नहीं बल्कि दो-दो बार पूरा नहीं कर सके। वैसे यह जननायक की राजनीति और आज की राजनीति में अति पिछड़ा वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका का ही परिणाम है कि राजद और जदयू के अलावा भाजपा जैसी पार्टियां भी जननायक की जयंती मनाने को लेकर होड़ कर रही हैं।

इस क्रम में एक महत्वपूर्ण आयोजन राजद के प्रदेश कार्यालय में की जाएगी, जिसमें स्वयं राजद प्रमुख लालू प्रसाद भाग लेंगे। इसके अलावा जदयू के अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मेश्वर राय और प्रभारी विधान पार्षद चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी ने कहा कि शराबबंदी के समर्थन में हुई मानव शृंखला की सफलता के बाद अब कर्पूरी ठाकुर की जयंती मनायी जायेगी। पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में इसका आयोजन किया जायेगा. यह समारोह ऐतिहासिक होगा। इसमें पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सह सांसद शरद यादव, सांसद हरिवंश नारायण सिंह, पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव केसी त्यागी और पूर्व सांसद सांसद पवन वर्मा भी भाग लेंगे। इनके अलावा सांसद रामनाथ ठाकुर, अली अनवर अंसारी, कहकशां परवीन, मंत्री कपिलदेव कामत, शैलेश कुमार व मदन सहनी आदि भी शामिल होंगे।

उधर पटना के एसके मेमोरियल हॉल में जननायक की जयंती मनाने की भाजपा की योजना पर इस बार भी ग्रहण लग गया। पार्टी को हॉल एलॉट नहीं हो पाया। भाजपा अतिपिछड़ा मंच इस बार 24 को पार्टी मुख्यालय में ही समारोह आयोजित करेगा। समारोह में केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह, रामकृपाल यादव, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय आदि शामिल होंगे।

देश को दिग्भ्रमित कर रहे पीएम : जोशी

पटना(अपना बिहार, 24 जनवरी 2017) - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को दिग्भ्रमित कर रहे हैं। ये बातें प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सी.पी. जोशी ने सोमवार को बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी द्वारा आयोजित राज्यस्तरीय जनवेदना सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि नोटबन्दी के बाद देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा धक्का लगा है। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी देश में घूम-घूम कर कहते हैं कि कांग्रेस के शासनकाल में देश में 60 साल में कुछ नहीं हुए। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी भूल गये हैं कि जब देश स्वतंत्र हुआ था उस समय देश में एक सूई का निर्माण भी नहीं होता था। उन्होंने कहा कि आज देश में जितने कल-कारखाने बने, देश में न्यूक्लियर पावर का विकास हुआ, अन्तरिक्ष के क्षेत्र में जो प्रगति हुई, सड़कों का विकास हुआ, सब कांग्रेस पार्टी की देन है।

इस मौके पर पूर्व सांसद माणिक टैगोर, रोकीबुल हुसैन, उपनेता असम कांग्रेस विधान मण्डल दल तथा अन्य समन्वयक, कांग्रेस विधायक दल के नेता सदानन्द सिंह, राज्य सरकार में कांग्रेस के मंत्री अवधेश कुमार सिंह, डा. मदन मोहन झा, अब्दुल जलील मस्तान एवं कांग्रेस विधायक मौजूद थे। जन वेदना सम्मेलन की अध्यक्षता बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष एवं राज्य के शिक्षा मंत्री डा. अशोक चौधरी ने की।

महागठबंधन कार्यकर्त्ताओं का दरबार एक सराहनीय पहल : सदानंद

पटना(अपना बिहार, 24 जनवरी 2017) - बिहार विधनासभा के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने महागठबंधन कार्यकतार्ओं के दरबार में सरकार कार्यक्रम को एक सराहनीय पहल बताया है। उन्होंने कहा कि यह एक नवीन और अनोखा कार्यक्रम है जिससे घटक दलों के कार्यकतार्ओं की समस्याएँ सीधे सरकार तक पहुँचेंगी। श्री सिंह ने स्वयं इस कार्यक्रम में शिरकत किया और कहा कि इस कार्यक्रम के अनेक फायदे हैं। महागठबंधन के घटक दलों के कार्यकतार्ओं के बीच न तो समन्वय की कमी रहेगी और न ही विपक्षी दलों को हमारी एकता पर प्रश्न उठाने का मौका मिलेगा। इससे महागठबंधन की एकता में दरार डालने के विपक्षी दलों के मंसूबे पर पानी जरुर फिरेगा। ऐसे कार्यक्रमों से सरकार में शामिल दलों की मजबूत पकड़ अपने जमीनी स्तर के कार्यकतार्ओं पर बढ़ेगी। कार्यकर्ता गठबंधन की मजबूती के लिए कार्य करने को प्रेरित होंगे। यह कार्यक्रम सरकार के लिए आईडिया बैंक के रूप में भी विकसित होगा।

आरक्षण का कोटा तय करे सरकार : शर्मा

पटना(अपना बिहार, 24 जनवरी 2017) - देश में आरक्षण की हदबंदी समाप्त करके आरक्षण का कोटा चाहिए। आबादी के अनुपात में आरक्षण की व्यवस्था करना होगा। ये बातें दलित अतिपिछड़ा वंचित मोर्चा द्वारा जननायक कर्पूरी ठाकुर की जयन्ती की पूर्व संध्या पर आयोजित संकल्प सभा में लोजपा के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. सत्यानन्द शर्मा ने कही। उन्होंने कहा कि कि दलित/आदिवासी और पिछड़ों की आबादी 62 प्रतिशत है। फिर भी आरक्षण को हदबंदी कर दी गयी और साजिश की गई। कहा गया कि आरक्षण 50 प्रतिशत् से बढ़ नहीं सकता। बढ़ेगा तो आसमान फट जायेगा। उन्होंने कहा कि आरक्षण भीख नहीं है। बल्कि संवैधानिक अधिकार है। अधिकार मांगने से नहीं मिलता है, इसे प्राप्त करने के लिए संघर्ष करना पड़़ता है। डा. शर्मा ने कहा कि जननायक ने यही सिखाया था, हमलोगों को। पूरे जीवन पर सामाजिक विषमता के खिलाफ लड़ते रहे। अब इस लड़ाई को हम सबों को साथ लड़ना है। समारोह को विधायक संजीव चौरसिया ने भी संबोधित किया। जबकि अध्यक्षता पटना जिला दलित अतिपिछड़ा वंचित मोर्चा के अध्यक्ष नन्द किशोर यादव ने किया।

जेपी और वीर कुंवर सिंह विवि में नये कुलपति

पटना(अपना बिहार, 24 जनवरी 2017) - राज्यपाल राम नाथ कोविन्द ने बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976(अद्यतन संशोधित) की सुसंगत धाराओं में अंतर्निहित अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा एवं वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा के लिए नये कुलपतियों की नियुक्ति कर दी है। कुलाधिपति ने इन विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्ति के लिए गठित सर्च कमिटी की अनुशंसा के आलोक में राज्य सरकार से प्रभावी एवं सार्थक विमर्श तथा पैनल में व्यक्तियों से पारस्परिक बातचीतके आधार पर जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के कुलपति के रूप में प्रो. हरिकेश सिंह और वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में प्रो. सैयद मुमताजुद्दीन ि२ तीन वर्षों लिए नियुक्ति की गयी है।

नोटबंदी और मंदी के बावजूद बजट में बीस फीसदी की वृद्धि, बजट बनाने में जुटे सिद्दीकी करेंगे समीक्षा

पटना(अपना बिहार, 23 जनवरी 2017) - देश में नोटबंदी के बाद आर्थिक मंदी के बावजूद राज्य के बजट पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। अगले वित्तीय वर्ष 2017-18 में बिहार के बजट आकार में 20 फीसदी वृद्धि होने का अनुमान है। राज्य सरकार बजट को अंतिम रूप देने में जुट गई है। 27 फरवरी को वित्त मंत्री अब्दुलबारी सिद्दिकी विधान मंडल में बजट पेश करेंगे। बताते चलें कि वर्तमान वर्ष में बजट का आकार 1.45 लाख करोड़ रखा गया था। अगले साल यह 1.75 लाख करोड़ से अधिक का होने का अनुमान है। पिछले दस साल की तुलना करे तो राज्य के बजट आकार में छह गुना वृद्धि हुई है। वर्ष 2009 में 32 हजार 795 करोड़ का बजट बना था, जो अगले वर्ष एक लाख 75 हजार करोड़ से अधिक होगा। इसके अलावा बिहार में न सिर्फ योजना का आकार बढ़ा है, बल्कि कुल बजट में योजना के खर्च का प्रतिशत भी बढ़ा है। यह वृद्धि बताती है कि राज्य में नए निर्माण पर अधिक खर्च हो रहा है। 2005-06 में कुल बजट की 31.71 प्रतिशत राशि योजना मद में रखी गई थी, जो 2016-17 में 49 फीसदी हो गई है। अगले साल के बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और बिजली समेत सात निश्चय के तहत होने वाले कार्य प्राथमिकता में होंगे। बजट तैयार करने में इन विषयों का खास ख्याल रखा जा रहा है।

मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2017-18 के बजट को लेकर विभिन्न पेशे से जुड़े लोगों की राय सोमवार को सरकार जानेगी। इसको लेकर वित्त विभाग ने अधिवेशन भवन में बैठक बुलायी है। इस बैठक में पटना, मगध और भागलपुर प्रमंडल के लोग रहेंगे। सबकी राय जानने के बाद सरकार आवश्यकतानुसार इसे अगले बजट में जगह देगी। वित्त मंत्री अब्दुलबारी सिद्दिकी इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे।

बिहार को अपने स्रोतों से होने वाली आय में निरंतर वृद्धि हो रही है। 2015-16 में 28 हजार करोड़ की आय हुई थी। इस बार का लक्ष्य 32 हजार करोड़ से अधिक। पिछले वर्षों की बात करें तो 2010-11 में 10 हजार 800 करोड़, 2011-12 में 13 हजार 500 करोड़, 2012-13 में 17 हजार 400 करोड़, 2013-14 में 21 हजार 500 करोड़ और 2014-15 में 22 हजार 300 करोड़ की आय हुई थी।

रेल के प्रति केंद्र गैर जिम्मेदार : तेजस्वी

पटना(अपना बिहार, 23 जनवरी 2017) - आंध्र प्रदेश में हुए रेल हादसे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि यह घटना काफी दुखद है. तेजस्वी यादव ने रविवार को आरोप लगाते हुए कहा कि भारत सरकार गैर जिम्मेदार तरीके से रेलवे को चला रही है. रेल सुरक्षा और यात्री सुविधा में लगातार कटौती की जा रही है. उन्होंने कहा, पीएम मोदी को इन सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए. डिप्टी सीएम ने कहा कि बजट और सुरक्षा पर लालू प्रसाद कई बार पत्र लिख चुके हैं लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं देता है. उन्होंने कहा कि रेल हादसे के लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. तेजस्वी यादव ने कहा कि लालू जी के समय रेलवे मुनाफा में थी और टिकट भी सस्ती थी. अब महंगे टिकट होने के बावजूद लगातार इस तरह के हादसे हो रहे हैं. जिसपर केंद्र सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए.

घटक दलों के साथ अपनी सरकार की समीक्षा करेंगे सीएम, मुख्यमंत्री आवास में आज होगी बैठक, एजेंडे में नोटबंदी के बाद वित्तीय संकट पर विचार विमर्श की संभावना, बोर्ड और आयोगों को लेकर सुलझेगा विवाद

पटना(अपना बिहार, 23 जनवरी 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सोमवार को अपने सरकारी आवास में महागठबंधन के घटक दलों की संयुक्त बैठक में हाल के दिनों में देश और प्रदेश की कई घटनाओं पर विचार विमर्श करेंगे। इस बैठक में राजद की ओर से उपमुख्यमंत्री नीतीश कुमार और कांग्रेस की तरफ से शिक्षा मंत्री डा. अशोक चौधरी शामिल होंगे। जबकि इस बैठक में तीनों घटक दलों के जिला स्तर के अधिकारियों को आने का निर्देश दिया गया है। हालांकि इस बैठक के एजेंडों के बारे में अभी तक किसी प्रकार का ख्ुालासा नहीं किया गया है। हाल ही में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान इस संबंध में पूछे गये एक सवाल पर मुख्यमंत्री ने आपत्ति व्यक्त की थी।

उधर विश्वसनीय सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार बैठक के मुख्य विषयों में आयोगों में सदस्यों के मनोनयन आदि का सवाल भी महत्वपूर्ण होगा। बताते चलें कि राज्य सरकार के तमाम आयोग फिलहाल भंग की अवस्था में हैं। हालांकि इसके लिए महागठबंधन के घटक दलों के बीच फार्मूला पहले से ही तय है। इसी फार्मूले के आधार पर बीस सूत्री कमेटियों का गठन किया जा रहा है।

बैठक के अन्य विषयों के संबंध में जानकारों का कहना है कि महागठबंधन सरकार के कामकाज की समीक्षा के अलावा सात निश्चयों को लागू करने एवं इसका लाभ जनता को मिले, इस विषय पर भी विचार विमर्श संभव है। साथ ही नोटबंदी के बाद की स्थिति को लेकर भी बैठक में विचार किया जा सकता है। बताते चलें कि केंद्र सरकार की नोटबंदी का नीतीश कुमार और जदयू ने समर्थन किया है जबकि राजद और कांग्रेस के द्वारा इसका लगातार विरोध किया जा रहा है। संभावना जतायी जा रही है कि बैठक में नोटबंदी के कारण देश में आयी आर्थिक मंदी और इसके कारण बिहार को हो रहे नुकसान पर भी चर्चा होगी।

रेल दुर्घटना पर नीतीश-लालू ने जताया दुख

पटना(अपना बिहार, 23 जनवरी 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने आन्ध्रप्रदेश के विजयनगरम के पास कुनेरू में हुये जगदलपुर-भुवनेश्वर हीराखण्ड एक्सप्रेस रेल दुर्घटना को दुखद बताया है। बताते चलें कि इस घटना में 24 लोग मारे गये हैं और दर्जनों घायल हैं। अपने शोक संदश में मुख्यमंत्री ने हादसे में मृत लोगों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है एवं दुख की इस घड़ी में मृतक के शोक संतप्त परिजनों को धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है। वहीं दुर्घटना पर दुख व्यक्त करते हुए पूर्व रेल मंत्री सह राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने कहा कि केंद्र सरकार को हर हाल में रेल परिचालन में सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि लोग बिना किसी भय के अपनी यात्रा कर सकें। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ी है। लिहाजा केंद्र सरकार को रेल सुरक्षा के प्रति गंभीरतापूर्वक पहल करनी चाहिए। श्री प्रसाद ने मारे गये लोगों के प्रति दुख व्यक्त किया तथा उनके परिजनों को समुचित मुआवजा दिये जाने की मांग केंद्र सरकार से की।

राजद ने मांगा रेल मंत्री से इस्तीफा

पटना ब्यूरो । राजद के प्रदेश प्रवक्ता मनीष यादव ने आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले में जगदलपुर भुवनेश्वर हीराखंड एक्सप्रेस ट्रेन हादसे में मारे गये 32 लोगों की मौत पर मृतक के परिजनों एवं शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने इसके लिए रेल मंत्रालय के कसूरवार बताया और रेल मंत्री सुरेश प्रभु से इस्तीफे की मांग की।

श्री यादव ने कहा कि देश में लगातार बढ़ते रेल हादसे ने रेलवे की दिशाहीन कार्यप्रणाली की कलई खोल दी है। एक तरफ रेलवे यात्री किराए एवं माल भाड़ा में लगातार वृद्धि कर आम आदमी की कमर तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ा है वहीं दूसरी तरफ बढ़ती रेल दुर्घटना प्रधानमंत्री के बुल्लेट ट्रेन के झांसे की असलियत बयां करता है। नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में आम आदमी की सवारी रेलवे अब हादसों की सवारी बनती जा रही है। श्री यादव ने कहा कि विदेश प्रवास के आदि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को देश में रहकर आम जनता की मूलभूत समस्याओं पर भी ध्यान देना चाहिए और उनके दु:ख-दर्द को समझने की कोशिश करनी चाहिए। नैतिकता का तकाजा है कि लगातार घट रही रेल हादसों की उच्च स्तरीय समीक्षा होने तक और रेलमंत्री तत्काल इस्तीफा दें। श्री यादव ने रेल हादसे की समयबद्ध उच्च स्तरीय जांच कर मृतकों के परिजनों को बीस-बीस लाख रूपया मुआवजा और घायलों को उचित मुआवजा एवं मुफ्त ईलाज की मांग की।

खर्च करने में सरकार विफल : प्रेम

पटना(अपना बिहार, 23 जनवरी 2017) - विपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार ने कहा कि बिहार सरकार पूरे साल में विकास की राशि नहीं खर्च की पाई। अब चालू वित्तीय वर्ष समाप्त होने में मात्र दो महीने दस दिन का समय बचा है। ऐसे में विकास योजनाओं पर 44 हजार करोड़ रुपये कैसे खर्च होगा? उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि सरकार बीते 9 महीनों में योजना बजट के मात्र 38 फीसदी राशि ही खर्च कर पाती है तो बिहार का विकास कैसे होगा? डा. कुमार ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2016-2017 अब दो महीने में समाप्त हो जाएगी नीतीश कुमार सिर्फ बड़े बजट का एलान करते हैं लेकिन राशि खर्च नहीं करते हैं जब सरकार ने बीते 9 महीनों में मात्र 38 फीसदी राशि ही खर्च कर पायी है तो दो महीने दस दिन में 62 फीसदी राशि कैसे खर्च कर पायेंगी?

भाजपा के युवा नेताओं ने ली राजद की सदस्यता

पटना(अपना बिहार, 23 जनवरी 2017) - युवा राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष मो कारी सोहैब साहब के नेतृत्व में बड़ी संख्या में भाजपा से जुड़े युवाओं ने उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव एवं स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताज यादव को युवाओं का आदर्श मानते हुए भाजपा को छोड़कर युवा राजद की सदस्यता ग्रहण की। सदस्यता ग्रहण करने वालो में कवि प्रकाश सिंह, रवि कुमार, बीट्टु यादव, मो इन्तखाव अहमद, पंकज सिंह, प्रियव्रत प्रिय, मो. इस्तेयाक अहमद, के साथ और भी हजारो युवाओ ने सदस्यता ग्रहण किया। इस मौके पर युवा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता रणविजय साहू, प्रवक्ता प्रमोद सिन्हा, प्रवक्ता इकवाल अहमद, मुकेश यादव, युवा राजद के पटना महानगर महासचिव मो. शब्बर अली, शिवेन्द्र तांती, सिवान के युवा राजद के मीडिया प्रभारी सुमीत यादव, रवि यादव, राजीव रंजन, रामकृष्ण, आलोक गुप्ता एवं इम्दाद अहमद सैकड़ों लोग उपस्थित थे।

नित्यानंद कर रहे अनर्गल बयानबाजी : भारती

पटना(अपना बिहार, 23 जनवरी 2017) - बिहार प्रदेष कांगे्रस उपाध्यक्ष व विधान पार्षद रामचन्द्र भारती ने बिहार भाजपा अध्यक्ष नित्यानंद राय के उस वक्तव्य की कड़ी आलोचना की है जिसमें उन्होंने कहा था कि अपराधियों के भय से लोग बिहार से पलायन कर रहे हंै। उन्होनें कहा कि आज राज्य में सख्त कानून व्यवस्था के कारण अपराधियों के हौसले पस्त हो गए हैं और कोई भी अपराधी, चाहे वह बड़ा से बड़ा अफसर या नेता ही क्यों न हो, पुलिस के शिकंजे से बच नहीं पा रहा। यही कारण है कि बिहार की छवि दिन प्रतिदिन बेहतर होती जा रही है। श्री भारती ने कहा कि आज नीतीश कुमार के अच्छे-अच्छे कामों के कारण पूरी दुनिया में बिहार का नाम रौशन हो रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा अध्यक्ष को तथ्यहीन बयानबाजी से पहले कम से कम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नीतीश कुमार के कामकाज की प्रशंसा का ख्याल रखना चाहिए और उनकी तरह सकारात्मक सोच के साथ राजनीति करनी चाहिए।

रेल हादसे पर मीसा ने जताया दुख, पूछे कई सवाल

पटना(अपना बिहार, 23 जनवरी 2017) - आंध्र प्रदेश में जगदलपुर भुवनेश्वर हीराखण्ड एक्सप्रेस दुर्घटना को लेकर राजद सांसद डा. मीसा भारती ने दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि रेल मंत्रालय निरन्तर घटित हो रही दुर्घटनाओं को गम्भीरता से ले। वर्तमान ढाँचे को सुदृढ़ और सुरक्षित बनाना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, एक छोटे से हिस्से पर इतना महँगा बुलेट ट्रेन, पर्दे इत्यादि बाद में भी आ जाएँगी । उन्होंने कहा कि जब यात्री ही नहीं रहेंगे, तो इन सुविधाओं का इस्तेमाल कौन करेगा? डा. भारती ने कहा कि अगर इसमें षड्यंत्र का कोण भी सामने आए, तब भी इनसे बचाव के उपाय करने की जिम्मेदारी रेल मंत्रालय की ही बनती है। अगर रेलवे सर्ज प्राइसिंग से दुगनी-चौगुनी रकम वसूल रहा है, तो इसके बावजूद सुरक्षा के इंतजाम जस के तस क्यों बने हैं?

माले ने शुरू की अधिकार रैली की तैयारी

पटना(अपना बिहार, 23 जनवरी 2017) - न्याय व अधिकार के लिए भाकपा-माले की आगामी 19 फरवरी की अधिकार रैली की तैयारी आरंभ हो गयी है. वरिष्ठ माले नेताओं ने जिलों का दौरा शुरू कर दिया है. माले राज्य सचिव कुणाल व पोलित ब्यूरो सदस्य ने स्वदेश भट्टाचार्य ने आज भोजपुर जिला कमिटी की बैठक में हिस्सा लिया और अधिकार रैली के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य पर बातचीत की. इधर पार्टी पोलित ब्यूरा सदस्य अमर ने पटना जिला कमिटी बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार में हाल के दिनों में दलित-गरीबों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों पर हमले की बाढ़ आ गयी है. अभी हाल में भूमि अधिकार की लड़ाई लड़ते हुए हमारे अररिया जिला सचिव सत्यनारायण सिंह यादव व कमलेश्वरी ऋषिदेव की बर्बरता से हत्या कर दी गयी. इसके पहले भी कई कार्यकतार्ओं की बर्बरता से हत्या की गयी. स्कूल के कैंपस में दलित छात्रा के साथ बलात्कार व हत्या हो रही है. इन गंभीर सवालों पर नीतीश सरकार एक शब्द तक नहीं बोल रही. संवेदनहीन नीतीश सरकार ने प्रशासन को शराबबंदी के अपने एकसूत्री अभियान में लगा रखा है. आज जबरदस्ती मानवशृंखला बनायी जा रही है. जबकि हर कोई जानता है कि ये नीतीश कुमार ही थे, जिन्होंने बिहार के गांव-गांव में शराब की दुकानें खुलवाईं. इसी परिस्थ्ति में हम यह अधिकार रैली करने जा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की जुमलेबाजी के खिलाफ सच्चे सामाजिक न्याय के सवाल पर हम पूरे बिहार में अधिकार आंदोलन चलायेंगे. 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर झंडोत्तोलन के उपरांत प्रत्येक गांव-टोले में जनता के हक-अधिकार के संघर्ष में शहीद साथियों की याद में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी. वैशाली की महादलित छात्रा डीका कुमारी से लेकर भूमि संघर्ष में शहीद सभी साथियों को श्रद्धांजलि देते हुए अधिकार अभियान की शुरूआत की जाएगी.

जेएनयू के गायब छात्र नजीब के लिए धरना पर बैठे पप्पू यादव

पटना(अपना बिहार, 23 जनवरी 2017) - जन अधिकार पार्टी (लो) के संरक्षक और सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्?पू यादव ने जेएनयू के लापता छात्र मो. नजीब को तलाशने की मांग की है। पटना में छात्र जन अधिकार परिषद द्वारा आयोजित धरना को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जेएनयू जैसे संस्थानों में भी छात्र सुरक्षित नहीं है। श्री यादव ने समान शिक्षा नीति को लागू करने की मांग करते हुए कहा कि दोहरी शिक्षा नीति का खामियाजा पूरा देश भुगत रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो गयी है। बिहारी डिग्री को बाहरी संस्थाएं मान्यता नहीं दे रही हैं। इससे बिहारी छात्रों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है।

बैठक में भाजपा ने सेट किया टारगेट, प्रदेश कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक संपन्न, महागठबंधन के खिलाफ जंग का एलान

सीवान / पटना(अपना बिहार, 23 जनवरी 2017) - प्रदेश भाजपा ने वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव और 2020 में विधानसभा चुनाव को लेकर अपना लक्ष्य निर्धारित कर लिया है. रविवार को सीवान में प्रदेश कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक की शुरूआत बिहार में अपनी सरकार बनाने और अगले लोकसभा चुनाव में सभी 40 सीटों पर जीतने के संकल्प के साथ हुई. बैठक में राज्य में बढ़ते अपराध और अपराधियों के खिलाफ महागंठबंधन सरकार की उदासीनता के खिलाफ जोरदार संघर्ष का एलान किया गया. अध्यक्षीय संबोधन में प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ने कहा कि पहले राज्य के लोग रोजगार की तलाश में बाहर जाते थे, अब अपराधियों के भय से बिहार छोड़ रहे हैं.

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि नीतीश कुमार सुशासन का लाख दावा करें, लेकिन वर्तमान हालात लालू-राबड़ी के जंगल राज से भी बदतर हो गये हैं. उन्होंने कहा कि हम जनता की ताकत को मजबूत करेंगे और अपराध के खिलाफ बिगुल फूकेंगे. उन्होंने चुनौती दी कि हम आज भी सरकार बनाने में सक्षम हैं, हिम्मत है तो नीतीश सरकार चुनाव करा कर देख ले. प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा में नेतृत्व का परिवर्तन नहीं होता, बल्कि नेतृत्व जुड़ता है और नेतृत्व की कड़ी को आगे बढ़ाता है. सीवान की धरती को महान बताते हुए उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में शहाबुद्दीन जैसे अपराधी ने भले ही बदनाम करने की कोशिश की, लेकिन यहां की धरती की पहचान राजेंद्र बाबू, जेपी व भिखारी ठाकुर जैसे लोग हैं. नीतीश कुमार व लालू प्रसाद पर जोरदार हमला करते हुए उन्होंने कहा कि अब ये दोनों नेता जेपी की जगह राहुल गांधी को याद करते हैं.

पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने राजनीतिक प्रस्ताव रखते हुए कहा कि पार्टी सात निश्चयों की पोल खोलने के लिए जनता के बीच जायेगी. साथ ही स्वयं सहायता भत्ता का सच भी जनता को बतायेगी. पार्टी अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को मिलनेवाली छात्रवृत्ति बंद करने के विरोध में भी जनता के बीच जायेगी. उन्होंने कहा कि आज से 12-13 साल पहले सीवान में आतंक व भय का माहौल था. जब प्रदेश में हमारी सरकार बनी, तो शहाबुद्दीन को जेल जाना पड़ा. पार्टी शहाबुद्दीन को बिहार से बाहर भेजने के लिए प्रयास करती रहेगी. राजनीतिक प्रस्ताव का समर्थन सांसद सीपी ठाकुर ने किया.

इसमें राज्य में बढ़ते अपराध, सरकार के समर्थन से हो रहीं आपराधिक घटनाएं, राज्य की शैक्षणिक अराजकता आदि की चर्चा की गयी है. मुख्य फोकस सात निश्चयों पर है. कहा गया है कि केंद्र की योजनाओं को बदल कर सात निश्चयों का नाम दिया गया है. यह जनता के साथ धोखा है. सात निश्चयों में न कृषि है और न शिक्षा. मानव विकास को भंग कर दिया गया है. स्वयं सहायता भत्ता का सरकार ढिंढोरा पीट रही है. 15 माह में सिर्फ तीन लोगों को ही स्वयं सहायता भत्ता मिला है और तीन नौजवानों को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड. शराबबंदी के बाद अपराध घटने का दावा भी झूठा हैं. केंद्र की कृपा से बिहार में बिजली की बेहतर स्थिति हुई है.

इसके पहले पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडेय ने कहा कि हमें सरकार बनाने के संकल्प के साथ काम करना है. आनेवाला समय चुनौतीपूर्ण है. हम पार्टी के कार्यक्रमों को जमीन पर उतारेंगे और संगठन को धारदार बनायेंगे. सभी कार्यकतार्ओं को इस बात की कसक है कि राज्य में अपनी सरकार नहीं बन पाये. बैठक में केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव व राजीव प्रताप रूडी, राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेणु देवी, विपक्ष के नेता प्रेम कुमार, नंद किशोर यादव, सीपी ठाकुर, अश्विनी चौबे, ओम प्रकाश यादव, जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, प्रदेश संगठन महामंत्री नागेंद्र जी, राष्ट्रीय मंत्री रजनीश कुमार आदि नेता मंच पर मौजूद थे.

स्कूली बच्चों, महिलाओं ने रचा इतिहास, बच गयी नीतीश की लाज, 11,400 किलोमीटर लंबी बनी मानव श्रृंखला, गांधी मैदान में नीतीश और लालू बने पहली कड़ी

पटना(अपना बिहार, 22 जनवरी 2017) - सूबे बिहार की जनता ने अपनी दृढ निश्चय के बूते इतिहास रच डाला। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आह्वान पर जनता ने 11, 400 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बना दी और इस तरह यह एक विश्व रिकार्ड बन गया। इसकी पुष्टि लिम्का बुक आफ़ वर्ल्ड रिकार्डस के अधिकारियों ने भी की। खास बात यह रही कि इस मानव श्रृंखला में अधिकांश स्कूली बच्चे और महिलायें रहीं। मुख्यमंत्री नीतीश के अनुसार इसमें तीन करोड़ लोगों ने हिस्सेदारी की. उन्होंने कहा कि इस सफल आयोजन के लिए सभी लोग बधाई के पात्र हैं. उन्होंने कहा कि इस मानव श्रृंखला के लिए जिला प्रशासन को जिम्मेवारी दी गयी थी और इसके लिए 11, 400 किलोमीटर लंबा रूट तय किया गया था. ड्यूटी से अबतक तो फीगर आये हैं, उसके अनुसार तीन करोड़ से ज्यादा लोगों ने इसमें भाग लिया. उन्होंने कहा कि लोगों में उत्साह था और उन्होंने स्वयं गांव-कस्बों में अन्य रूटों पर मानव श्रृंखला बनायी.

मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुत जगह एक लाइन से काम नहीं चल रहा था और लोग उसके आगे-पीछे भी कतार में खड़े थे. उन्होंने कहा कि एक क्यू में हाथ पकड़ कर खड़ा होना मुश्किल हो गया था. यह इस बात का परिचायक है कि बिहार के लोग शराबबंदी व नशामुक्ति के पक्षधर हैं. उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से उसका प्रकटीकरण किया गया है.

नीतीश कुमार ने कहा कि मानव श्रृंखला की शुुरुआत के लिए सवा बारह बजे का समय निर्धारित किया गया था, लेकिन उससे पहले से ही लोग खड़े थे. उन्होंने कहा कि यह सामाजिक अभियान के प्रति संकल्प था, आकलन से ज्यादा लोगों की भागीदारी थी. उन्होंने कहा कि जो कानून 2016 में लागू किया गया, उसके पक्ष में जोरदार जनसमर्थन है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले ही इसके लिए 1.19 करोड़ लोगों ने संकल्प पत्र भरा था. उन्होंने कहा कि वर्तमान में बिहार की आबादी साढ़े ग्यारह से 12 करोड़ के बीच है और उसमें तीन करोड़ का मानव श्रृंखला में शामिल होना अभूतपूर्व घटना है. इतिहास रचा गया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि इससे पहले बांग्लादेश एवं नेपाल की तराई में मधेशी समुदाय ने मानव श्रृंखला बनायी थी. उन्होंने कहा कि पहले 2000-1100 किमी लंबी मानव श्रृंखला बनायी गयी थी.

पहले की मानव श्रृंखला किसी चीज के विरोध में थी और यह किसी चीज के समर्थन में थी. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पॉजिटिव मानव श्रृंखला थी. उन्होंने इसे विलक्षण व अभूतपूर्व बताया. मुख्यमंत्री ने कहा कि हम मानव श्रृंखला बना कर ही रुकने वाले नहीं हैं. उन्होंने कहा कि 22 मार्च को इस संबंध में हमारा अभियान संपन्न होगा. नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार ने एक उदाहरण रखा है और जो राज्य अबतक राजस्व नुकसान के भय से शराबबंदी नहीं करते हैं, वे भी इस दिशा में आगे बढ़ेंगे.

बिहार ने दिया विश्व को संदेश : वशिष्ठ

पटना(अपना बिहार, 22 जनवरी 2017) - जदयू के प्रदेश अध्यक्ष सह सांसद बशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि शराबबंदी के समर्थन में बनी मानव शृंखला में जात, धर्म, मजहब, राजनीतिक मतभेद सभी समाप्त हो गए। सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार सरकार ने शराबबंदी के मसले पर मानव शृंखला बनाने का आह्वान किया तो सभी लोग आपसी कटुता, मनमुटाव, ऊंच-नीच का भेदभाव मिटाकर हाथ से हाथ डाले सड़क पर खड़े हो गए। बिहार ने एक बार फिर देश-दुनिया के सामने अग्रदूत बनकर नया संदेश दिया है। अपने दल के साथियों के साथ इको पार्क रोड में मानव शृंखला में शामिल जदयू अध्यक्ष ने कहा कि आज के दौर में आपसी प्रेम, सद्भाव व सामाजिक समरसता का होना बेहद जरूरी है। महात्मा गांधी ने शराब को न केवल सामाजिक समस्या बल्कि इसे सामाजिक बुराई भी बताया था। नीतीश कुमार ने इस सामाजिक बीमारी के खिलाफ लोगों को एकजुट करने का काम किया है। पूरी दुनिया में ऐसा आज तक नहीं हुआ है।

इको पार्क-हवाई अड्डा रोड में जदयू के प्रदेश अध्यक्ष के साथ जदयू प्रवक्ता विधान पार्षद संजय सिंह, विजय कुमार मिश्र, ललन सर्राफ व रणवीर नंदन, पूर्व मंत्री बागी कुमार वर्मा, जदयू के वरिष्ठ नेता अरविन्द कुमार सिंह उर्फ छोटू सिंह, नंद किशोर कुशवाहा, अजय आलोक, अनिल कुमार, डॉ. नवीन आर्य, लोक प्रकाश सिंह, ओम प्रकाश सिंह सेतू, अंजुम आरा, राजीव रंजन प्रसाद आदि मौजूद थे। वहीं जल संसाधन के अभियंता प्रमुख इंदु भूषण कुमार, आपदा प्रबंधन के संयुक्त सचिव अनिरुद्ध कुमार, ओएसडी संदीप कुमार व अविनाश कुमार आदि इको पार्क गोलम्बर के पास खड़े हुए।

बैठक छोड़ मानव श्रृंखला में भाग लेने पहुंचे भाजपाई, दो दिवसीय बैठक शुरू

पटना(अपना बिहार, 22 जनवरी 2017) - मानव श्रृंखला के आयोजन के बीच बिहार के सीवान जिले में भाजपा के प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक शुरू हुई. बैठक शुरू होने के तुरंत बाद मानव श्रृंखला में शामिल होने के लिये भाजपा के प्रदेश नेता बैठक रोककर बाहर सड़कों पर आ गये. बैठक में शामिल होने के लिए बिहार भाजपा के सभी वरिष्ठ नेता सीवान पहुंच चुके हैं. मिली जानकारी के अनुसार सीवान में प्रदेश भाजपा कार्यसमिति की बैठक में कई मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा. इसकी कवायद शुरू हो गयी है. दो दिवसीय इस बैठक में भाजपा प्रदेश सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू करने पर फैसला ले सकती है. प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय की अध्यक्षता में पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की यह पहली बैठक है. लंबे अरसे के बाद पटना से बाहर प्रदेश कार्यसमिति की बैठक हो रही है. सीवान पूर्व सांसद शहाबुद्दीन की वजह से राजनीतिक तौर पर भी चर्चित रहा है और यहां पहली बार भाजपा कार्यसमिति की बैठक हो रही है.

बैठक में पार्टी राज्य सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने का फैसला कर सकती है. दो दिवसीय कार्यसमिति की बैठक में नोटबंदी के फायदे गिनाने और इसको लेकर पार्टी कार्यकतार्ओं को गांव-पंचायतों तक पहुंचने का निर्देश दिया जायेगा. प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष मंगल पांडेय खुद कार्यसमिति की बैठक की कमान संभाले हुए नजर आये. इससे पूर्व शुक्रवार को उन्होंने कहा कि बैठक में केंद्र सरकार की योजनाओं को जनझ्रजन तक पहुंचाने पर चर्चा तो होगी ही, आमजनों की भागीदारी इसमें सुनिश्चित करने पर भी मंथन होगा . नोटबंदी के फायदे व कैशलेस योजना को जनझ्रजन तक पहुंचाने पर भी विचार होगा.

आरक्षण के सवाल पर मीसा ने भाजपा को घेरा, कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी ने भी बोला हमला

पटना(अपना बिहार, 22 जनवरी 2017) - आरएसएस प्रवक्ता द्वारा आरक्षण को लेकर दिये गये बयान पर राजद सांसद डा. मीसा भारती ने हमला बोला। शनिवार को अपने बयान में युवा सांसद ने कहा कि सादियों तक भारतवर्ष में 80% जनसंख्या को शिक्षण, सम्मान, सत्ता, संसाधन और अवसर से वंचित रखा गया। इस अन्यायपूर्ण सामाजिक व्यवस्था को पलटती आरक्षण से अब बमुश्किल 50 वर्ष में ही देश की 80% जनसंख्या के लिए मात्र 50% आरक्षण से इतनी पीड़ा हो रही है।

वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सह शिक्षा मंत्री डा. अशोक चौधरी ने भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य के उस बयान की कड़ी आलोचना की है जिसमें उन्होंने संविधान में दिये गये आरक्षण को समाप्त करने की बात कही है। उन्होने अपने बयान में कहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं भाजपा का दलित एवं पिछड़ा वर्ग विरोधी मानसिकता उजागर हो गया है। उन्होंने कहा कि दलितों एवं पिछड़ों के लिये आरक्षण का प्रावधान भारत के संविधान में किया गया है और केन्द्र की भाजपा सरकार इसे खत्म करना चाहती है। डा. चौधरी ने कहा कि बिहार विधान सभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक के प्रमुख मोहन भागवत ने भी आरक्षण की व्यवस्था पर समीक्षा कर इसे हटाने की मांग की थी।

नशामुक्ति के समर्थन में बिहार ने रचा इतिहास : सदानंद

पटना ब्यूरो । बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने आज मानव श्रृंखला की सफलता पर कहा कि शराबबंदी और नशामुक्ति के समर्थन में बिहार ने इतिहास रच दिया है। विश्व का सबसे लम्बा मानव श्रृंखला का आयोजन करने के लिए नीतीश के नेतृत्व में हमारी महागठबंधन की सरकार बधाई की पात्र है। श्री सिंह ने भी भागलपुर जिले के कहलगांव नगर पंचायत के पास एनएच - 80 पर जनता के साथ मानव श्रृंखला में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने स्वास्थ समाज के निर्माण के लिए नशामुक्ति को आवश्यक बताया। आनेवाली पीढ़ी को नशाखोरी के लत से बचाने के लिए भी यह जरुरी है। शराबबंदी से अनेक फायदे अबतक बिहार को मिल रहे हैें और अपराध का ग्राफ घटा है। इससे लोगों की जिंदगी खुशहाल हो रही है।

श्री सिंह ने कहा कि लोगों में शराबबंदी के प्रति जागरूकता जगाने के लिए बिहार में बने विश्व की सबसे लम्बी मानव श्रृंखला ने देश में नशामुक्ति के समर्थन में एक नजीर पेश किया है। बिहार के कालजयी शुरूआत से अब केंद्र की मोदी सरकार पर देश में नशामुक्ति के लिए जनमानस का दबाव बढ़ जायेगा।

सीएम ने की अपनी ब्रांडिंग : मांझी

पटना(अपना बिहार, 22 जनवरी 2017) - हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (से) के राष्ट्रीय अध्यक्ष-सह-पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मॉंझी ने कहा कि बिहार सरकार प्रायोजित मानव श्रृंखला आज दिनांक 21 जनवरी 2017 को सम्पन्न हुआ है। मानव श्रृंखला बिहार के गरीब जनता की गाढ़ी कमाई को खर्च कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपना ब्राण्डिंग करने में सफल रहे हैं। श्री मांझी ने कहा कि इस मानव श्रृंखला से बिहार की जनता को कोई फायदा नहीं होना है। शराबबंदी का कट्टर समर्थक होते हुए भी हम शराब बंदी के लिए वातावरण तैयार करने के (मानव श्रृंखला) का हम विरोध करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी आशंका शत-प्रतिशत सत्य साबित हुई की सारे सरकारी तंत्र को इस कार्य के लिए लगाने के बावजूद आम जन इस आयोजन से अपने को दूर रखा है। न्यायालय के निर्देश के बावजूद भी 5-10 वर्ष के छात्र-छात्राओं को घंटो सड़क पर रखने को बाध्य किया गया। दूसरी ओर जन वितरण प्रणाली के दुकानदार, विद्यालय, उच्च विद्यालय के छात्र-छात्राओं, आशा, ममता, विकास मित्र, टोला सेवक सहित अन्य लोगों को प्रलोभित कर एवं भयभीत कर श्रृंखला में शामिल होने को बाध्य किया गया। प्रजातंत्र में यह एक स्वच्छ परंपरा नहीं है।

भाजपा ने मानव श्रृंखला पर जताया एतराज

पटना(अपना बिहार, 22 जनवरी 2017) - विपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को शराबबंदी चिंता कम और अपनी ब्राडिंग ज्यादा कर रहे हैं। राज्य में अवैध शराब आए दिन पकड़े जा रहे हैं। भाजपा पूर्ण शराबबंदी का समर्थन करती है। डा. कुमार ने कहा कि शराबबंदी के बाद राज्य के अंदर अवैध शराब 5 लाख लीटर पकड़े गये, जिसमें 30 हजार लोगो को पकड़ा गया हैं। भाजपा पूर्ण शराबबंदी के पक्ष में लेकिन तालिबानी कानून के अंदर शराब कोई पीये और परिवार महिलएं एवं 18 साल के लोगों को जेल जाए, जब तक इस कानून को नीतीश कुमार हटाते नहीं हैं, तब तक भाजपा इस तालिबानी कानून का विरोध करती रहेंगी।

डा. कुमार ने कहा कि नीतीश जी ईमान्दारी से शराबबंदी कानून को लागू करें और तालिबानी कानून को हटाएं। शराबबंदी की चिंता नीतीश जी को नहीं है, बल्कि अपनी ब्रांिडग की चिंता ज्यादा है, जिस कारण पूरे राज्य के अंदर शराबबंदी विफल हो रहा है। लोगों को चोरी-छिपे अवैध शराब ऊचें दामों पर मिल रहे हैं, जिस से राज्य के राजस्व घाटा का हो रहा है, वहीं शराबबंदी भी विफल हो रहां है।

राजद ने मानव श्रृंखला को बताया सफल

पटना(अपना बिहार, 22 जनवरी 2017) - राजद के प्रदेश प्रवक्ता मनीष यादव ने शराबबंदी के समर्थन में बनी ऐतिहासिक मानव श्रृंखला के लिए महागठबंधन सरकार की ओर से राज्यवासियों का हार्दिक आभार व्यक्त किया और षराबबंदी को पूरे देष में लागू करने की मांग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से की। श्री यादव ने कहा कि मानव श्रृंखला की सफलता ने महागठबंधन की एकजुटता को प्रमाणित किया है वहीं विपक्ष की औपचारिक खानापूर्ति की पोल खुल गई है। ऐतिहासिक मानव श्रंखला के वर्ल्ड रिकार्ड महागठबंधन सरकार के निष्चय और नीतियों के प्रति विषाल जनसमर्थन का स्पष्ट प्रमाण है।

बिहार ने बनाया कीर्तिमान : चौधरी

पटना(अपना बिहार, 22 जनवरी 2017) - प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सह शिक्षा मंत्री डा. अशोक चौधरी ने मानव श्रृंखला की सफलता के लिए राज्यवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि महागठबन्धन सरकार की सात निश्चय में से एक शराब बन्दी एक साल के अन्दर ही पूर्ण रूपेण सफल होने के बाद सरकार ने बिहार सहित सम्पूर्ण देश को संदेश देने के लिए बिहार से ही पूर्ण नशा मुक्ति का अभियान चलाने का निश्चय लिया है। इसी क्रम में सरकार ने आज विष्व की सबसे बड़ी मानव श्रृंखला बना कर एक नया कृतिमान स्थापित किया है, वहीं सम्पूर्ण देश में नशा मुक्त का संदेश गठबन्धन सरकार ने दिया है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए सरकार ने षिक्षा विभाग को जिम्मेवारी सौंपी थी। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की चम्पारण यात्रा के शताब्दी वर्ष होने पर बिहार में शराबबन्दी कर एक सफल सामाजिक एवं आर्थिक क्रांति कर राज्य सरकार ने उनके विचारों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की है।

मानव श्रृंखला को नहीं मिला आम लोगों का समर्थन : जापलो

पटना(अपना बिहार, 22 जनवरी 2017) - जन अधिकार पार्टी (लो) ने शराबबंदी के समर्थन में आयोजित मानव श्रृंखला को नाकामयाब बताया है। पार्टी के राष्ट्रीय संरक्षक राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव और प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व मंत्री श्रीभगवान सिंह कुशवाहा ने जारी अपने संयुक्त बयान में कहा कि मानव श्रृंखला को राज्य के आमलोगों का समर्थन नहीं मिला। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मानव श्रृंखला के माध्यम से चेहरा चमकाने की मुहिम फेल हो गई। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी तंत्र और स्कूली बच्चे ही मानव श्रृंखला में शामिल हुए। उन्होंने पूछा कि क्या ये पतंगबाजी के बाद 24 मौत की नाकामियों को छुपाने की कोशिश नहीं है? पूर्ण शराबबंदी कहां है?

सरकार प्रायोजित मानव श्रृंखला विफल : माले

पटना(अपना बिहार, 22 जनवरी 2017) - माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि मानव शृंखला में स्कूली बच्चों को लगाकर नीतीश सरकार ने अपनी संवेदनहीनता का परिचय दिया है. एक तरफ लगातार आंदोलनों के बावजूद जहां वे हाजीपुर स्कूली छात्रा-बलात्कार हत्याकांड पर एक शब्द नहीं बोल रहे, वहीं दूसरी ओर अपनी राजनीति चमकाने के लिए स्कूली छात्रों को लाइन में लगवा रहे हैं. यह बेहद निंदनीय है. उन्होंने कहा कि शराबबंदी पर नीतीश कुमार के आज के इस ढकोसले के खिलाफ भाकपा-माले, ऐपवा, आइसा व इनौस द्वारा आगामी 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के दिन बलात्कार व हत्या की शिकार डीका कुमारी व रोहित वेमुला के लिए न्याय की मांग पर गांव-गांव में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाएगा और उपवास भी रखा जाएगा.

आरक्षण संविधान प्रदत्त अधिकार : लालू, पूछा सवाल - कोई गैर सवर्ण क्यों ने बना आजतक आरएसएस प्रमुख

पटना (अपना बिहार, 21 जनवरी 2017) - यूपी चुनाव के मद्देनजर आरक्षण की समीक्षा के संबंध में आरएसएस के एक प्रवक्ता द्वारा दिये गये बयान के बाद राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने एक बार फिर भाजपा पर करारा प्रहार किया। शुक्रवार को ट्वीटर पर जारी अपने संदेश में उन्होंने कहा कि आरक्षण संविधान प्रदत्त अधिकार है। आरएसएस जैसे जातिवादी संगठन की खैरात नहीं। इसे छिनने की बात करने वालों को औकात में लाना कमेरे वर्गों को आता है। उन्होंने कहा कि मोदी जी आपके आरएसएस प्रवक्ता आरक्षण पर फिर अंट-शंट बके है। श्री प्रसाद ने कहा कि बिहार में रगड़-रगड़ के धोया,शायद कुछ धुलाई बाकी रह गई थी जो अब यूपी जमकर करेगा। उन्होंने कहा कि आरएसएस पहले अपने घर में लागू 100फीसदी आरक्षण की समीक्षा करें। कोई गैर-स्वर्ण पिछड़ा/दलित व महिला आजतक संघ प्रमुख क्यों नही बने है?

बताते चलें कि जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल में आयोजित परिचर्चा के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रवक्ता मनमोहन वैद्य ने कहा कि आरक्षण पर पुनर्विचार होना चाहिए। उन्होंने कहा लंबे समय से देश में आरक्षण की व्यवस्था चली आ रही है। इससे अलगाववाद बढ़ता है। उल्लेखनीय है कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सरसंघचालक मोहन भागवत ने आरक्षण खत्म करने का बयान दिया था। इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में भूचाल आ गया था। कई जानकारों का मानना था कि सरसंघचालक का यह बयान बिहार में भाजपा के हार का कारण बनी।

अपराधियों ने व्यवसायी के एटीएम से उड़ाये पैसे, पुलिस ने किया एफ़आईआर दर्ज करने से इन्कार, किया पीड़ित को गुमराह

पटना (अपना बिहार, 21 जनवरी 2017) - राजधानी पटना में धोखे से एटीएम बदलकर रूपए निकालने की घटनायें बढ़ गयी हैं। ऐसा ही एक मामला बीते गुरूवार की शाम फुलवारी शरीफ इलाके के टमटम पड़ाव चौराहे पर ओरिएंटल बैंक आॅफ कामर्स के एटीएम में घटित हुई जब अपराधियों ने एक स्थानीय व्यवसायी कौशल किशोर कुमार का एटीएम बदल कर 28 हजार रुपए निकाल लिये। इससे पहले कि अपराधी और अधिक राशि निकाल पाते पीड़ित व्यवसायी ने बैंक शाखा में जाकर अपना एटीएम बंद करवाया। हालांकि पीड़ित व्यवसायी के मुताबिक जब उन्होंने इस मामले में जब स्थानीय थाने में एफआईआर दर्ज कराना चाहा तो एक स्थानीय अधिकारी ने यह कहते हुए एफआईआर दर्ज करने से इन्कार किया कि वह घटना की सूचना दे दें, समुचित कार्रवाई की जाएगी।

बिहार बनायेगा विश्व कीर्तिमान आज, पहली कड़ी में शामिल होंगे नीतीश-तेजस्वी, शराबबंदी के पक्ष में साढ़े ग्यारह हजार किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला, सेटेलाइट से ली जाएगी तस्वीरें

पटना (अपना बिहार, 21 जनवरी 2017) - राज्य में शराबबंदी के समर्थन में बनाये जानेवाली मानव शृंखला की पहली कड़ी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार होंगे. वह गांधी मैदान में मानव शृंखला के जरिये बननेवाले बिहार के नक्शे के केंद्र में होंगे. उनके बगल में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव खड़े होंगे. इसके बाद यह शृंखला बढ़ती जायेगी, जो चार टहनियों में बंट जायेगी. ये टहनियां जिलों की सीमाओं तक जायेगी. गांधी मैदान मानव शृंखला का केंद्र होगी. यहां कुल 2890 लोग मिल कर बिहार के नक्शे का निर्माण करेंगे. वहीं, मैदान में 4084 लोग इस कार्यक्रम में शामिल होंगे. पटना जिले में करीब 8 लाख लोग मिल कर मानव शृंखला का निर्माण करेंगे. इसके लिए तैयारी पूरी कर ली गयी है. इसको लेकर गुरुवार को गांधी मैदान में रिहर्सल का आयोजन किया गया था. जिसमें बिहार के नक्शे का निर्माण किया गया. गांधी मैदान में अधिकारियों की ज्वाइंट ब्रीफिंग में डीएम एसके अग्रवाल ने कहा कि मानव शृंखला की शुरूआत तय समय पर दोपहर 12.15 बजे आरंभ होगी. शुरूआत के लिए किसी तरह की घोषणा नहीं होगी.

साल 2010 में गांधी मैदान में हुए सीरियल बम विस्फोट को ध्यान में रख कर पुलिस विभाग ने हाइ अलर्ट जारी किया है. इसके लिए मुख्य कार्यक्रम स्थल पर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जायेगी. साथ ही पूरे इलाके में बम निरोधक दस्ता सक्रिय होगा. ज्वाइंट ब्रीफिंग में डीएम ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर प्रतिनियुक्त मजिस्ट्रेट की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए. शृंखला में भाग लेने के बाद लोग सुरक्षित घर पहुंचे, यह मजिस्ट्रेट की जिम्मेवारी होगी. उनके संबंधित इलाके में ट्रैफिक सुचारु रहे, यह भी उनके जिम्मे ही होगा.

मानव श्रृंखला को लेकर सुमो ने कसा तंज

पटना (अपना बिहार, 21 जनवरी 2017) - पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने शराबबंदी के पक्ष में मानव श्रृंखला पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि दुनिया के 150 से ज्यादा देशों में आयोजित अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस का नीतीश कुमार ने न केवल मजाक उड़ाया था, बल्कि बिहार में इसके आयोजन में बाधा भी डाली थी। इसके बावजूद भाजपा ने राज्य में पूर्ण शराबबंदी और मानव श्रृंखला का समर्थन कर सामाजिक मुद्दों को राजनीति से परे रखा है। हम जागरूकता कार्यक्रम के लिए जबरदस्ती न करने के हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत करते हैं।

श्री मोदी ने कहा कि अगर स्कूलों में प्रारंभ से ही योग शिक्षा दी जाए, तो बच्चों में शराब या किसी दूसरे नशे की आदत ही नहीं लगेगी, लेकिन मुख्यमंत्री ने राजनीतिक कारणों से योग का विरोध किया था। उन्होंने नोटबंदी के फैसले का समर्थन तो किया, लेकिन कम नकदी वाले लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए दूसरे राज्यों जैसी पहल नहीं की।

श्री मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार अगर प्रभावी शराबबंदी के लिए गंभीर हैं, तो बतायें कि उत्पाद विभाग के पूर्व प्रधान सचिव केके पाठक के समय बनी 1000 करोड़ रुपये की योजना ठंडे बस्ते में क्यों डाल दी गई? योजना के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों और राज्य उच्च पथों पर 600 चेकपोस्ट और 700 बैरियर बनने थे। 80-90 करोड़ की लागत वाले ट्रक स्कैनर की खरीद होनी थी और रेलवे स्टेशनों तथा हवाई अड्डों पर निगरानी के लिए 14 एक्स-रे मशीनें लगनी थीं। प्रत्येक जिले में विशेष न्यायालय बनाने का फैसला भी धरा रह गया।

उन्होंने कहा कि अब तक 30 हजार से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी और लगभग 5 लाख लीटर देसी-विदेशी शराब बरामद होने के बावजूद राज्य में शराब का अवैध धंधा जारी है। मुख्यमंत्री ने मानव श्रृंखला बनवाने और इसे ऐतिहासिक बनाने में जितनी दिलचस्पी ली है, उतनी गंभीरता उन्हें शराबबंदी योजना को लागू करने में भी दिखानी चाहिए।

मानव श्रृंखला में भाग लेगी लोजपा : पारस

पटना (अपना बिहार, 21 जनवरी 2017) - लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस ने कहा कि लोजपा हमेशा से ही शराबबंदी के पक्ष में रही है, परन्तु शराबबंदी के लिए नीतीष सरकार ने जो काला कानून बनाया है। पार्टी उसका विरोध करती है और आगे भी इस काले कानून का विरोध पार्टी करते रहेगी परन्तु 21 जनवरी 2017 को शराबबंदी के जागरूकता के लिए नीतीष सरकार द्वारा आयोजित मानव श्रृंखला में उनकी पार्टी भाग लेगी। श्री पारस ने कहा कि लोक जनशक्ति पार्टी के सभी प्रदेश से लेकर पंचायत स्तर तक के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता 21 जनवरी 2017 को आयोजित मानव श्रृंखला में भाग लेगी।

मानव श्रृंखला पर हाईकोर्ट का खतरा टला, मुख्य सचिव ने रखा सरकार का पक्ष , स्वेच्छा से शामिल होंगे लोगा, कोई जोर जबरदस्ती नहीं, डीजीपी ने भी लगायी कोर्ट में हाजिरी

पटना (अपना बिहार, 21 जनवरी 2017) - सूबे में 21 जनवरी को बनने वाले मानव श्रृंखला पर हाइकोर्ट की तलब के बाद आज राज्य सरकार की ओर से मुख्य सचिव और डीजीपी कोर्ट में उपस्थित हुए. डीजीपी और मुख्य सचिव ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा. दोनों ने कोर्ट को यह भरोसा दिलाया कि मानव श्रृंखला के आयोजन के दौरान ट्रैफिक की वैकल्पिक व्यवस्था की जायेगी. साथ ही उन्होंने कोर्ट को यह जवाब देकर आश्वस्त किया कि इस श्रृंखला में किसी को जबरन शामिल नहीं किया जा रहा है. इसमें लोग स्वेच्छा से ही शामिल होंगे. उन्होंने बताया कि इसमें शामिल होने के लिये लोगों पर किसी तरह का दबाव नहीं दिया जा रहा है और साथ ही दबाव नहीं है. शुक्रवार को पटना हाइकोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई. गुरुवार को कोर्ट ने मानव श्रृंखला में बच्चों को शामिल किये जाने को लेकर सख्त ऐतराज जताया था और बिहार के मुख्य सचिव और डीजीपी को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया था.

दोनों अधिकारियों ने कोर्ट को यह सुनिश्चित किया कि स्कूली छात्रों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी और उनपर स्कूल जाने का भी कोई दबाव नहीं होगा. साथ ही श्रृंखला में जो शामिल नहीं होेगे उनपर कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जायेगी. अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि कार्यक्रम के दौरान अदालतों से संबंधित न्यायाधीश और वकीलों के अलावा अधिकारियों के वाहनों की आवाजाही में कोई समस्या उत्पन्न नहीं होगी. कोर्ट ने सासाराम के उस जिला शिक्षा पदाधिकारी के पत्र का हवाला देते हुए पूछा कि किस आधार पर डीईओ की तरफ से स्कूलों के हेडमास्टर पर दबाव बनाया गया था कि सभी स्कूलों से एक निश्चित संख्या में बच्चों को इस कार्यक्रम में भेजा जाए, सरकार ने अपनी तरफ से इसका भी जवाब दिया. गौरतलब हो कि कोर्ट ने मानव श्रृंखला को लेकर राज्य सरकार से जवाब तलब किया था. इस मामले मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी को होगी.

फरक्का पर सीएम ने केंद्र को चेताया, पटना में 25 फरवरी को होगी पर्यावरणविदों की विशेष बैठक, कई योजनाओं का किया शुभारंभ, विकास कार्यों की हुई समीक्षा

भागलपुर / पटना (अपना बिहार, 21 जनवरी 2017) - निश्चय यात्रा के क्रम में भागलपुर पहुंचे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हरिदासपुर गांव में चेतना रैली को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ही बिहार में हर साल आने वाले बाढ़ की विभीषिका के लिये जिम्मेवार है. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में गंगा नदी पर बना फरक्का बांध बाढ़ को लाने में मदद करता है. नीतीश कुमार ने फरक्का बांध की उपयोगिता पर पूर्व की तरह सवाल खड़े करते हुए केंद्र की मंशा पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि केंद्र की गलती का परिणाम बिहार को भुगतना पड़ता है. नीतीश ने कहा कि वह इस मुद्दे को बार-बार उठाते रहे हैं लेकिन आज तक केंद्र सरकार ने उसपर ध्यान नहीं दिया. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में इस मसले को लेकर अभियान चलाया जायेगा.

उन्होंने कहा कि पटना में आगामी 25 फरवरी को होने वाली पर्यावरणविदो के साथ बैठक में इसकी चर्चा होने वाली है. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बैठक में इस मसले पर चर्चा होगी. नीतीश ने कहा कि बैठक में जल पुरुष के रूप में ख्याति पा चुके और मैग्सेसे आवार्ड विजेता राजेंद्र सिंह भी आ रहे हैं. अत: उनसे भी इस मसले पर चर्चा की जायेगी. नीतीश ने इस मसले को लेकर ठोस रणनीति बनाने और अभियान चलाने की बात कही.

इससे पहले भागलपुर जिले में निश्चय यात्रा के तहत पहुंचे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिला आइटीआइ का उद्घाटन किया. उन्होंने इस दौरान सात निश्चय योजना के तहत जिले के मॉडल गांव के रूप में चयनित हरिदासपुर का भ्रमण किया. वहां मुख्यमंत्री ने हर घर नल का जल योजना के तहत बने पानी टंकी का उद्घाटन किया. नीतीश कुमार ने गांव के साथ-साथ जिले में चल रहे सात निश्चय योजना की समीक्षा की और गांव में हो रहे विकास कार्यों का जायजा लिया. मुख्यमंत्री इस दौरान गांव की एक महिला के घर गये और उससे बातचीत कर फीडबैक लिया. मुख्यमंत्री के साथ सभी वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे.

बीजेपी नहीं चाहती राजदेव हत्याकांड का खुलासा : जदयू

पटना (अपना बिहार, 21 जनवरी 2017) - जदयू प्रवक्ता नवल शर्मा ने कहा है कि बीजेपी पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड का खुलासा नहीं चाहती है। उन्होंने कहा कि सीबीआई केंद्र सरकार की तोता बन चुका है और वह केंद्र के इशारे पर ही मो. कैफ के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी। उन्होंने कहा कि भाजपा नहीं चाहती पत्रकार राजदेव रंजन के हत्यारे सामने आये और इस हत्याकांड से पर्दा उठ सके । जिस कुख्यात शूटर मोहम्मद कैफ को बिहार पुलिस ने जेल की सलाखों में डाला उसे सीबीआई ने नियत अवधि में चार्जशीट फाइल नहीं कर जमानत दिलवाने में सहयोग दिया । इससे यह सिद्ध हो गया कि सीबीआई पूरी तरह सरकार के पिंजरे का तोता बन गयी है और बीजेपी पत्रकार राजदेव रंजन के हत्यारों के प्रति सहानुभूतिशील है। श्री शर्मा ने कहा कि अगर यही कोताही राज्य सरकार की ओर से होती तो बीजेपी आसमान सर पर उठा लेती । जिस हत्याकांड पर बीजेपी ने इतनी हायतौबा मचाई और राजनीतिक रोटी सेंकी थी अब इस जमानत के बाद उसका असली चरित्र उभरकर सामने आ गया है।

नोटबंदी के खिलाफ कांग्रेस करेगी जन वेदना सम्मेलन

पटना (अपना बिहार, 21 जनवरी 2017) - केंद्र द्वारा लागू नोटबंदी के खिलाफ आगामी 23 जनवरी को प्रदेश कांग्रेस जन वेदना सम्मेलन का आयोजन करेगी। इस आशय की जानकारी प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता एच. के. वर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डा. अशोक चौधरी के निर्देश पर प्रदेश मुख्यालय सदाकत आश्रम में पार्टी के प्रतिनिधि, जिला एवं प्रखण्ड कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष, कांग्रेस पार्टी के विधान सभा एवं विधान परिषद के सदस्य, विधान सभा एवं विधान परिषद के पूर्व सदस्य, सांसद एवं पूर्व सांसद, प्रदेष कांग्रेस कमिटी के पदाधिकारी, मोर्चा संगठन एवं प्रकोष्ठों के पदाधिकारी, राज्य स्तरीय एवं जिला स्तरीय कार्यान्वयन समिति के सभी सदस्य को इस एक दिवसीय जन-वेदना सम्मेलन में आमंत्रित किया गया है। दिनभर चलने वाले इस राज्य स्तरीय सम्मेलन में जिला एवं प्रखण्डों से आये प्रतिनिधि ग्रामीण स्तर पर नोटबन्दी से किसान, मजदूर, छात्र, छोटे व्यवसायी एवं साग-सब्जी बेचने वाले छोटे मजदूर की कमाई पर प्रतिकूल असर पड़ने की समस्या पर विचार-विमर्श करेंगे। इस एक दिवसीय सम्मेलन की अध्यक्षता डा. अशोक चौधरी करेंगे तथा बिहार प्रभारी डा. सी.पी. जोशी मुख्य अतिथि होंगे।

नीतीश को केवल रिकार्ड बनाने की चिंता : नंद किशोर

पटना (अपना बिहार, 21 जनवरी 2017) - भाजपा के वरिष्ठ नेता सह लोक लेखा समिति के सभापति नंदकिशोर यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जनसमस्याओं से बेफिक्र हैं। सरकार के अधिकारियों के तुगलकी फरमान से स्कूली बच्चों से लेकर आम जन परेशान है। पर नीतीश जी की चिंता चेहरा चमकाकर गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने की है। डंडे के जोर पर और हड़काकर मानव श्रृंखला में भागीदारी सुनिश्चित करवाना कहीं से उचित नहीं ठहराया जा सकता। दुर्भाग्यपूर्ण तो यह है कि मानव श्रृंखला के नाम पर रिकार्ड बनाने के चक्कर में सरकार अदालत को भी गुमराह करने में लगी है। एक तरफ अदालत को बताया जा रहा है कि बच्चों को मानव श्रृंखला में शामिल होने की अनिवार्यता नहीं है, वहीं कार्यक्रम के पूर्वाभ्यास में हड़काकर छात्र-छात्राओं की उपस्थिति कराने की खबरें लगातार आ रही हैं। परीक्षाओं का सीजन प्रारंभ होने को है। ऐसे में पठन-पाठन बाधित कर जबरन मानव श्रृंखला के पूर्वाभ्यास में शामिल कराये जाने से बच्चों में मानसिक तनाव भी पैदा हो रहा है।

श्री यादव ने कहा कि शराब के अलावा भी सूबे की कई समस्याएं हैं। अपराध चरम पर है। एके47 जैसे हथियार लहरा कर दहशत पैदा करने से लेकर हर रोज हो रही हत्याओं और लूट-पाट से बिहारवासी त्राहिमाम कर रहे हैं। पर सरकार अपनी पीठ थपथपाने में ही मस्त है। हाल ये है कि राज्य में अपराध नियंत्रण तो दूर , राजधानी के यातायात पर भी सरकार का नियंत्रण नहीं है। पूरा तंत्र ही अराजकता का शिकार है।

श्री यादव ने कहा कि भाजपा न तो शराबबंदी का विरोध करती है, न ही इसके लिए जनजागरण का। पर जागरूकता के लिए दूसरे उपाय भी हैं। सरकार अगर मानव श्रृंखला बनाना ही जरूरी समझती है तो इसके लिए जबर्दस्ती करने की कोई आवश्यकता नहीं। पर सच तो ये है कि सरकार की मंशा शराबबंदी के लिए जागरूकता से ज्यादा डंडे की जोड़ पर रिकार्ड बनाकर गिनीज बुक में शामिल होने की है।

सामाजिक न्याय के सवाल पर माले करेगी अधिकार रैली, कार्यकर्ता कन्वेंशन में बोले दीपंकर

पटना (अपना बिहार, 21 जनवरी 2017) - भाकपा माले सामाजिक न्याय के सवाल पर आगामी 19 फरवरी को राजधानी पटना में अधिकार रैली का आयोजन करेगी. इस आशय की घोषणा माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने शुक्रवार को कार्यकर्ता कन्वेंशन को संबोधित करते हुए कही. उन्होंने कहा कि पूरे देश और बिहार की गरीब जनता आज बेहद परेशान है. एक तरफ मोदी सरकार द्वारा की गयी नोटबंदी ने उनके जीवन को गहरे संकट में डाल दिया है, तो शराबबंदी पर नीतीश सरकार के काले कानून ने भी आम जनता के लिए मुसीबत खड़ी कर रखी है. नोटबंदी-शराबबंदी की इस जुगलबंदी में आम जनता जबरदस्त परेशानी झेल रही है. दूसरी ओर, सामाजिक न्याय का दंभ भरने वाली ये सरकारें आज उसके तीन मौलिक आधारों -शिक्षा, रोजगार व भूमि सुधार पर पूरी तरह खामोश हैं. उलटे, इन सवालों को लेकर लड़ने वाली ताकतों पर आज हमले हो रहे हैं, हत्यायें हो रही हैं.

उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की जुमलेबाजी के खिलाफ सच्चे सामाजिक न्याय के सवाल पर हम पूरे बिहार में अधिकार आंदोलन चलायेंगे. 26 जनवरी से इस अभियान की शुरूआत होगी. गणतंत्र दिवस के मौके पर झंडोत्तोलन के उपरांत प्रत्येक गांव-टोले में जनता के हक-अधिकार के संघर्ष में शहीद साथियों की याद में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी. वैशाली की महादलित छात्रा डीका कुमारी से लेकर भूमि संघर्ष में शहीद सभी साथियों को श्रद्धांजलि देते हुए अधिकार अभियान की शुरूआत की जाएगी. 11 फरवरी से बेगूसराय जिले से अधिकार यात्रा की शुरूआत होगी, जो भागलपुर, सीमांचल आदि इलाके से गुजरते हुए 17 फरवरी को पटना पहुंचेगी. इस अधिकार यात्रा में खुद दीपंकर भट्टाचार्य शामिल रहेंगे.

आज कटघरे में खड़े होंगे सरकार, मानव श्रृंखला मामले में हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव और डीजीपी को किया तलब

पटना(बिहार, 20 जनवरी 2017) - शराबमुक्त बिहार पर राज्यव्यापी मानव श्रृंखला को लेकर हाईकोर्ट ने चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी को तलब किया है। हाईकोर्ट ने शशिभूषण कुमार की ओर से दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई के बाद ये बात कही। हाईकोर्ट ने पूछा कि मानव शृंखला में कक्षा पांच से ऊपर के छात्र-छात्राओं के भाग लेने की बात कही गयी है। बताया गया है कि यह स्वैच्छिक है। यानी मानव शृंखला में यदि वे भाग नहीं लेंगे तो उनपर कोई कार्रवाई नहीं होगी। कोर्ट ने पूछा कि इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी कौन होगा। कौन अधिकारी यह बताएगा कि मानव शृंखला में भाग नहीं लेने वाले छात्र-छात्राओं पर कार्रवाई नहीं होगी। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता तथा न्यायमूर्ति सुधीर सिंह की खंडपीठ ने गुरुवार को लोकहित याचिका पर सुनवाई की।

शुक्रवार को इस मामले पर फिर सुनवाई होगी। सुनवाई में चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी मौजूद रहेंगे। बता दें कि मानव शृंखला को लेकर कल पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया था। अदालत ने सरकार से जानना चाहा था कि राष्ट्रीय राजमार्ग सहित स्टेट हाईवे पर मानव शृंखला में स्कूली बच्चों को किस नियम के तहत शामिल किया जा रहा है।

कोर्ट को बताया गया था कि 21 जनवरी को मानव शृंखला को लेकर मुख्य सचिव ने सुबह सवा दस बजे से शाम 3 बजे तक राष्ट्रीय राजमार्ग सहित स्टेट हाईवे पर वाहनों की आवाजाही बंद रखने का निर्देश दिया है। बंद के बाद जब उसे खोला जाएगा तब महाजाम की स्थिति रहेगी। बंद के दौरान आवश्यक सामानों की ढुलाई ठप रहेगी। मरीजों को होने वाली परेशानियों की ओर भी किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।

मो. कैफ को सीबीआई कोर्ट से मिली जमानत

पटना(बिहार, 20 जनवरी 2017) - सीवान के पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड के आरोपी मो. कैफ को जमानत मिल गयी है. मो. कैफ को सीबीआइ कोर्ट से जमानत मिल गयी है. बता दें कि इस मामले की जांच कर रही सीबीआइ को 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दायर करनी थी. सीबीआइ ने 90 दिनों के बाद भी चार्जशीट जमा नहीं किया. उसके बाद सीबीआइ कोर्ट ने मो कैफ को जमानत दे दी. मो. कैफ को राजदेव रंजन हत्याकांड में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

गौरतलब हो कि 13 मई 2016 को राजदेव रंजन की हत्या कर दी गयी थी. कैफ को सीबीआइ ने इससे पूर्व सीजेएम कोर्ट सीवान की अदालत में आवेदन देकर 29 सितंबर को पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड के मामले में कैफ को रिमांड किया था. मो कैफ पर आरोप था कि 13 मई, 2016 को शाम के सात बजे हत्या के समय वह ओवरब्रिज पर हथियार के साथ लैस होकर साजिशकर्ता लड्डन मियां, जिम्मी व जावेद के साथ खड़ा था.

बांका में सीएम ने पूरे किये कई वादे, शराबबंदी को लेकर जनता से किया आहवान

पटना(बिहार, 20 जनवरी 2017) - निश्चय यात्रा चौथे चरण में बांका पहुंचे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिले की बहुप्रतिक्षित मांग को पुरा करते हुए दिया तोहफा। सीएम ने बांका नगर पंचायत को नगर परिषद का दर्जा दिया। उन्होंने कहा कि दर्जा दिए जाने से संबंधित सारी प्रक्रिया एक माह के अंदर ही पूरी कर ली जाएगी। निश्चय यात्रा के चौथे चरण में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जमुई और मु्ंगेर के बाद बिहार-झारखंड की सीमा पर अवस्थित बांका जिले के बौंसी प्रखंड के कुडरो पंचायत के तहत आने वाले सिंहेश्वरी गांव में सीएम ने सात निश्चय योजना के तहत हो रहे विभिन्न विकास कार्यों का जायजा लिया। सीएम कार्यक्रम के दौरान ही कुडरो पंचायत को खुले में शौच मुक्त घोषित किया गया।

इसके बाद सीएम बांका के अनुमंडल स्थित लोक शिकायत केंद्र का निरीक्षण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारी संजय कुमार लाल से करीब आधे घंटे तक विभिन्न मुद्दों पर बात की। साथ ही मामलों और उसके निष्पादन के बारे में जानकारी लेकर जरुरी निर्देश भी दिए। जिले में चेतना सभा के दौरान सीएम ने बांका को नगर परिषद का दर्जा देने की घोषणा की। उल्लेखनीय है कि बांका फिलहाल नगर पंचायत के अधीन है। कई वर्षों से इसे नगर परिषद घोषित किए जाने की मांग की जा रही थी। सीएम ने प्रदेश में सात निश्चय योजना के तहत 2017 के अंत तक हर गांव और टोले में और 2018 तक हर घर में बिजली के कनेक्शन देने का ऐलान किया।

उन्होंने कहा कि शराबबंदी से बिहार में अपराध में कमी आई है साथ ही इसकी छवि भी विश्व पटल पर अच्छी बन रही है। 21 जनवरी को प्रस्तावित मानव श्रृंखला में जनभागिता का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि यह मानव श्रृंखला इतिहास रचेगा साथ ही विश्व के मानचित्र पर बिहार की खोई हुई प्रतिष्ठा को पुण:स्थापित करेगा।

पारस ने कहा सूबे में अपराध चरम पर

पटना(बिहार, 20 जनवरी 2017) - लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस ने कहा कि बिहार में अपराध चरमोत्कर्ष पर है और मुख्यमंत्री निश्चिन्त होकर अपने निष्चय यात्रा में पुरा बिहार भ्रमण कर रहे है जबकि लगातार अपराधियों का मनोबल बढता जा रहा है। अभी हाल में जिस तरह की घटनाए बिहार में हुई है उससे बिहार की आम आवाम डरी और सहमी हुई है।जहा प्रषासनिक पदाधिकारी ही डरे हुए हो वहा आम जनता का क्या हाल होगा। श्री पारस ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले तो एक निश्चय करे कि बिहार को अपराध मुक्त करे तब कही जाकर 7 निश्चय की बात करे अन्यथा जिस तरह से अपराधियों का मनोबल बढ रहा है और आम जनता का जीवन दूभर हो रहा है। ऐसे में 7 निश्चय की बात करना कोरा डपोरशंख लगता है ।

पचास हजारी इनामी के साथ नजर आये रामविलास के भाई

पटना(बिहार, 20 जनवरी 2017) - सोशल मीडिया पर लोजपा नेता और रामविलास पासवान के भाइयों के साथ एक कुख्यात अपराधी राम उत्तीर्ण पासवान की तस्वीरें वायरल हो रही हैं. फिलहाल मामले की जानकारी मिलने के साथ ही पुलिस ने कुख्यात की तलाश तेज कर दी है. मिली जानकारी के अनुसार मामला समस्तीपुर से जुड़ा है जहां दो जिलों समस्तीपुर और बेगूसराय जिले में अपराध का पर्याय बन चुके और जेल से फरार अपराधी राम उत्तीर्ण पासवान की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गयी है. इस तस्वीर में राम उत्तीर्ण पासवान दलित सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष और समस्तीपुर से लोजपा सांसद रामचंद्र पासवान तथा लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष पशुपतिनाथ पारस के साथ दिख रहे है. मालूम हो कि दोनों नेता यानि रामचंद्र पासवान और पशुपतिनाथ पारस केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के भाई हैं.

मिली जानकारी के अनुसार इलाके के कुख्यात और 50 हजार के इनामी अपराधी रामउतीर्ण पासवान उर्फ तेरे नाम को पुलिस सरगर्मी से ढूंढ रही है. लेकिन उसकी तस्वीरें लोजपा नेताओं के साथ सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं. चर्चा है कि 50 हजार का ईनामी अपराधी इन दिनों सोशल मीडिया पर नाम बदल कर राजनेताओं के साथ करीबी बढ़ा रहा है. रामउतीर्ण पासवान उर्फ तेरे नाम सोशल मीडिया पर राहुल पासवान के नाम से काफी सक्रिय है. राम उत्तीर्ण पासवान पर समस्तीपुर और बेगूसराय जिले के विभिन्न थानों में लूट, हत्या और रंगदारी के दर्जनों मामले दर्ज हैं. शातिर अपराधी पूर्व में भी कई बार जेल जा चुका है और जनवरी 2013 में उपकारा दलसिंहसराय से फरार हो चुका है. तब से आज तक यानि पुलिस चार साल से पुलिस उसे ढूंढने में लगी है.

मानव श्रृंखला के लिए बर्बरता और धमकी पर उतारू नीतीश : सुमो

पटना(बिहार, 20 जनवरी 2017) - पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि 21 जनवरी को प्रस्तावित मानव श्रृंखला में स्कूली बच्चों को शामिल कराने के लिए राज्य सरकार बर्बरता पर उतारू हो गई है। मुख्यमंत्री के गृह जिला में एकंगरसराय मध्य विद्यालय में जबरन रिहर्सल कराने के कारण 12 छात्राएं बेहोश हो गईं। दो छात्राओं की ऐसी पिटाई की गई कि उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भरती कराना पड़ा। स्कूली बच्चों और उनके अभिभावकों को साईकिल-पोशाक-छात्रवृत्ति जैसी सभी योजनाओं से वंचित करने की धमकी दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में जिला शिक्षा अधिकारियों के ऐसे मनमाने आदेश के जरिये प्राथमिक विद्यालय से प्लस-टू स्कूल तक के छात्रों को इसमें भाग लेने के लिए बाध्य करने के लिए उनका नामांकन रद करने तक का भय दिखाया जा रहा है। पांचवीं कक्षा से नीचे के बच्चों को श्रृंखला में शामिल नहीं किया जाना है, लेकिन उनसे भी रिहर्सल कराया जा रहा है। भाजपा मानव श्रृंखला का समर्थन करती है, लेकिन इसके लिए स्कूली बच्चों से जबरदस्ती करना और पांच घंटे तक पूरे राज्य में सड़क यातायात को बंद कराना अनुचित है।

उन्होंने कहा कि सरकार मानव श्रृंखला से जागरूकता का संदेश देने के बजाय इसे मुख्यमंत्री की छवि चमकाने का इवेंट बनाने में लगी है। भीड़ जुटाने के लिए आंगनबाड़ी की सेविका-सहायिका, शिक्षा मित्र, विकास मित्र और जीविका की महिला सदस्यों को वेतन काटने और पंचायती राज के प्रतिनिधियों को मुकदमे में फंसाने की धमकी दी जा रही है।

श्री मोदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी तरह के बंद को गैरकानूनी बताया है, जबकि मानव श्रृंखला बंद जैसा कार्यक्रम है। इससे कई घंटों तक राज्य भर में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाएगा। नीतीश कुमार ने सरकारी कार्यक्रम के लिए अदालत के आदेश को भी ताख पर रख दिया है। मानव श्रृंखला के लिए किसी के साथ जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए और यातायात बंद करने के बजाय इसकी वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए।

मानव श्रृंखला के दौरान तैनात रहेगा राजद का चिकित्सा प्रकोष्ठ

पटना(बिहार, 20 जनवरी 2017) - राजद चिकित्सा प्रकोष्ठ के मुख्य प्रवक्ता डॉ. के.डी. चौधरी ने बताया कि राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद के निर्देश पर राजद चिकित्सा प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों की एक आवश्यक बैठक नशाबंदी के खिलाफ महागठबंधन सरकार के होने वाली मानव श्रृंखला को सफल बनाने हेतु बुलाई गयी। जिसकी अध्यक्षता राजद चिकित्सा प्राकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय बाल्मिकी ने की एवं बैठक का संचालन चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. आदित्य नारायण यादव ने किया। बैठक में शराब बंदी मानव श्रृंखला को सफल बनाने हेतु चिकित्सको से बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने की अपील की गयी एवं चिकित्सों से अनुरोध किया गया कि वे अपने मेडिकल कीट के साथ मानव श्रृंखला में भाग ले और किसी भी आपातकालिन स्थिति से निपटने के लिए मुस्तैद रहें।

शराबबंदी गांधी-लोहिया-आम्बेडकर की राह : जदयू

पटना(बिहार, 20 जनवरी 2017) - जदयू के प्रदेश प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीति महात्मा गांधी, बीआर आम्बेडकर, राम मनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण जैसे विचारकों व नेताओं के आदर्शों से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि सुशासन, कानून का राज व न्याय के साथ तेज विकास उनकी सरकार के मूल मंत्र हैं। वे देश के अकेले मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने सत्ता में जन भागीदारी वाला लोक संवाद कार्यक्रम शुरू किया और जन शिकायतों के समयबद्ध निबटारे के लिए लोक शिकायत निवारण अधिकार कानून लागू किया।

श्री प्रसाद ने कहा कि पूर्ण शराबबंदी लागू कर उन्होंने नशा रूपी समाज की सबसे बड़ी बुराई और बीमारी पर लगाम लगाया है। जनता दल (यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में श्री नीतीश कुमार देशभर में नशा मुक्त समाज बनाने का आह्वान करते हैं। बिहार में शराबबंदी के उनके प्रयोग की सफलता सबको प्रेरित भी कर रही है। उन्होंने कहा कि उनका सपना महात्मा गांधी के सपनों का भारत बनाने का है। वे सत्ता का प्रयोग वंचित तबके को ऊपर उठाने के लिए करते हैं। उनका मकसद समता के सिद्धांतों को मूर्तरूप देना और लोक अधिकारों को सुनिश्चित करना है। वे झूठ और जुमलेबाजी के प्रखर विरोधी हैं। राजनेता के रूप में उन्होंने जनपक्षधरता और वचनबद्धता की मिसाल कायम की है। वे गांधी, आम्बेडकर, लोहिया और जेपी के सच्चे अनुयायी हैं।

डीका के इंसाफ के लिए सड़क पर उतरे वामपंथी, राज्य सरकार को सौंपा ज्ञापन

पटना(बिहार, 20 जनवरी 2017) - हाजीपुर की महादलित छात्रा डीका कुमारी के न्याय के सवाल पर पटना में ऐपवा-आइसा और इनौस ने संयुक्त बैनर से आक्रोशपूर्ण पद्रर्शन निकाला. मार्च गांधी मैदान स्थित भगत सिंह चौक से निकला, जिसे जेपी चौक पर पुलिस ने जबरन रोक दिया. प्रदर्शनकारियों ने उसी स्थान को जाम कर डीका कुमारी बलात्कार-हत्याकांड पर नीतीश सरकार की शर्मनाक चुप्पी के खिलाफ प्रतिरोध सभा आयोजित की. बाद में बिहार के गृह सचिव अमीर सुबहानी से ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की. प्रतिनिधिमंडल में उनके अलावा ऐपवा की बिहार राज्य सचिव शशि यादव, हाजीपुर राजकीय अंबेदकर राजकीय विद्यालय की पूर्व छात्रा मुस्कान, इनौस के बिहार राज्य अध्यक्ष शशि यादव, आइसा के बिहार राज्य अध्यक्ष मोख्तार और डीका कुमारी की मां कुुसुमी देवी शामिल थीं.

प्रतिरोध सभा को संबोधित करते हुए ऐपवा की राष्ट्रीय महासचिव मीना तिवारी ने कहा कि आज पूरा बिहार डीका कुमारी के लिए न्याय की मांग कर रहा है, लेकिन नीतीश कुमार इस सवाल पर चुप्पी साधे हुए हैं. छात्राओं को पंख लगाने का दावा करने वाले नीतीश कुमार को यह बताना होगा कि आखिर स्कूल कैंपसों के भीतर छात्राओं के साथ बलात्कार और उनकी निर्मम हत्या क्यों हो रही है? ऐसी जघन्य हत्या के बाद भी प्रशासन चुप क्यों बैठा है? उन्होंने आगे कहा कि 26 जनवरी को राज्य के गांवों में खासकर महादलित टोले पर श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जाएगा और इस दिन उपवास रखा जाएगा.

प्रतिरोध सभा को हाजीपुर विद्यालय की छात्रा व डीका कुमारी की सहपाठी काजल, अधिवक्ता अलका वर्मा, इनौस के बिहार राज्य सचिव नवीन कुमार, आइसा के बिहार राज्य सचिव शिवप्रकाश, इनौस नेता रविन्द्र यादव, मधुसूदन कुमार, ऐपवा नेता सुहैला गुप्ता, संगीता सिंह, इंदू सिंह, लीला वर्मा ने संबोधित करत हुए कहा कि कहा कि जहां पूरा प्रशासन अपराधियों के बचाव में खड़ा है. छात्रा की हत्या करने कोई बाहर से अपराधी नहीं घुसे थे, बल्कि ऐसे लोग शामिल हैं, जो स्कूल व्यवस्था से जुड़े हुए हैं. जिले के एसपी व डीएम ने ने केवल पहले लापरवाही बरती बल्कि अब भी गैरजिम्मेदार बने हुए हैं. बिहार सरकार को इस मसले पर त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए. संचालन ऐपवा की पटना नगर सचिव अनीता सिन्हा ने किया.

ऐपवा-आइसा व इनौस नेताओं ने कहा है कि गृहसचिव से वार्ता के दौरान 164 के तहत बयान दर्ज करने और अपराधियों को तत्काल गिरफ्तार करने के आश्वासन पर यदि त्वरित कार्रवाई नहीं होती, तो हम और भी बड़े आंदोलनों में जाने को तैयार हैं.

नौजवानों ने ली राजद की सदस्यता

पटना(बिहार, 20 जनवरी 2017) - राष्ट्रीय जनता दल के राज्य कार्यालय में राजद के विचारधारा, नीतियों, सिद्धांतों के साथ-साथ उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव के युवाओं के प्रति सोच तथा युवाओं के भविष्य निर्माण के लिए सरकार के स्तर पर चलाये जा रहे कार्यक्रमों से प्रभावित होकर भारी संख्या में युवाओं ने राजद के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामचन्द्र पूर्वे, युवा राजद के प्रदेष अध्यक्ष कारी सोहैब, राजद प्रवक्ता चितरंजन गगन, युवा राजद के मुख्य प्रवक्ता रणविजय साहू, प्रदेश प्रवक्ता प्रमोद कुमार सिन्हा के समक्ष राजद की सदस्यता ली।

सदस्यता दिलाते हुए राजद के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामचन्द्र पूर्वे ने कहा कि राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव जी के सामाजिक न्याय की जो विचार धारा रही है, उस पर चलकर ही देष में सामाजिक सद्भाव तथा भाईचारा का वातावरण कायम कर ही देष का विकास किया जाता है। यह अच्छी बात है कि युवा वर्ग उस विचारधारा पर चलने को दृढ संकल्पित रहे हैं। डॉ. पूर्वे ने युवाओं से कहा कि अनुषासित रहकर सामाजिक और राजनीतिक रूप से सशक्त बने तथा समाज के गरीब तबके दुख दर्द में सहभागी बने।

युवा राजद के प्रदेष अध्यक्ष कारी सोहैब ने कहा कि आज युवाओं के आदर्श बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव जी ने जिस प्रकार से युवाओं के भविष्य निर्माण के लिए सरकार के स्तर पर जो कार्यक्रम और योजनायें लाने का काम कर रहे हैं उससे आज बिहार ही नहीं देष के युवाओं में उनके प्रति आकर्षण बना है। सदस्यता लेने वालों में तंजील अहमद, ताबीस बीन तनवीर, मो. जुल्फीकार, मो. दानिष इकबाल, मो0 तहसीन रजा, फयान, मसूद सिराज खान, नदीम, सारिक इकबाल, मो. फरहान सहित कई युवा थे। इस मौके पर युवा राजद के प्रदेश महासचिव सारिक हासमी, सैनिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष विजय कुमार यादव, राज्य कार्यकारिणी के सदस्य भाई अरूण कुमार, शिवेन्द्र कुमार तांती, छोटे खान, नवनीत यादव, प्रमोद राम, इमदाद अहमद, विजय यादव, आदि मौजूद थे।

एनडीए अटूट, अपनी चिंता करें लालू : प्रेम

पटना(बिहार, 20 जनवरी 2017) - नेता प्रतिपक्ष डा. प्रेम कुमार ने कहा कि लालू प्रसाद अपने घटते जानाधार की वजह से डर गये हैं इसी वजह से वह बिना सिर-पैर की बातें करते हैं। महागठबंधन की नीव भी हिल चूकी है जिससे वह और घबरा गये हैं। एनडीए एक मजबूत और प्रभावशाली गठबंधन बनकर पूरे देश में खड़ा है। जिसकी एकता से राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद घबराकर अनाप-सनाप बोल रहे हैं। लालू जी को पता है कि एनडीए एक्सपायरी दवा नहीं है बल्कि महागठबंधन एक्स्पायरी दवा हो चुकी है।

डा. कुमार ने कहा कि एनडीए की एकता अटूट है, जिसे लालू जी कभी तोड़ नहीं सकते हैं। जबकि महागठबंधन को लालू जी सिर्फ राजनीतिक स्वार्थों के लिए ही बनाए हैं, जिसमें आपसी मतभेद लगातार चल रहे हैं।

डा. कुमार ने कहा कि महागठबंधन के अंदर कभी टिकट बंटवारे को लेकर, तो कभी शराबबंदी को लेकर, तो कभी नोटबंदी को लेकर आपसी टकराव चलता ही रहता है। महागठबंधन में किसी भी मुद्दे पर सहमती नहीं बनती है, जिस कारण महागठबंधन में टकराव चलता ही रहता है।

बिहार को फिर से विहार बनाने की जरुरत : सदानंद

पटना(बिहार, 20 जनवरी 2017) - बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने कहा कि बिहार में पर्यटन के क्षेत्र में सुनहरा भविष्य नजर आता है, क्योंकि यहाँ पर्यटन की भरपूर संभाव्यता मौजूद है , जिसे पूर्ण विकसित कर देशी - विदेशी पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके और पर्यटन को उद्योग के रूप में विकसित किया जा सकता है। बिहार को फिर से विहार बनाने की जरुरत है े

श्री सिंह ने कहा कि साल 2016 के 11 महीने में भारत आनेवाले विदेशी पर्यटकों की संख्या लगभग 79 लाख रही, जिससे देश को प्रति पर्यटक 1,76,828 रुपये की दर से कुल लगभग 1,39,000 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की प्राप्ति हुयी है। ये पिछले कुछ वर्षों से निरंतर बढ़े हैं। लेकिन विदेशी पर्यटकों का बड़ा हिस्सा बिहार तक नहीं पहुँच पाता है। जबकि बिहार में सभी धर्मों के तीर्थस्थलों के साथ - साथ ऐतिहासिक, पौराणिक, प्राकृतिक, शैक्षणिक आदि धरोहरों की संख्या बहुतायत है। जिसे पर्यटन के उद्देश्य से विकसित किया जाना चाहिए े ताकि बिहार आनेवाले पर्यटकों की संख्या बढ़े। जिससे यहाँ रोजगार के बहुत से रास्ते खुलेंगे े इससे बेरोजगारों को काम मिलेगा और प्रान्त की राजस्व प्राप्ति बढ़ेगी।

श्री सिंह ने कहा की मैं अपने महागठबंधन की नीतीश सरकार को सुझाव देता हूँ कि बिहार में पर्यटन उद्योग की संभावना को तलाश कर अमलीजामा पहनाया जाये और प्रदेश के विकास के एक और मार्ग को खोला जाये। ताकि यह प्राचीन और ऐतिहासिक प्रदेश पुन: पर्यटकों का विहार बन जाएँ।

मानव श्रृंखला पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा 24 घंटे के अंदर जवाब

पटना(अपना बिहार, 19 जनवरी 2017) - पूर्व में शराबबंदी के खिलाफ फैसला देने वाले पटना उच्च न्यायालय ने एक बार फिर शराबबंदी के पक्ष में 21 जनवरी को पूरे राज्य में बनने वाले मानव श्रृंखला को लेकर सरकार से जवाब तलब किया है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधीर सिंह की कोर्ट ने बुधवार को अधिवक्ता सुशील कुमार की जनहित याचिका पर सरकार से चौबीस घंटे के भीतर जवाब देने को कहा. इस मामले में पूरी रिपोर्ट के साथ गुरुवार को फिर सुनवाई होगी. कोर्ट ने कहा कि आखिर किस कानून के तहत 21 जनवरी को सभी नेशनल हाइवे पर पांच घंटे आवागमन को बंद कर दिया गया है. किस कानून के तहत स्कूली बच्चों को सड़क पर उतरने को कहा गया. कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी भी की. सुनवाई के दौरान कहा कि क्या सरकार बच्चों को शराब के बारे में जानकारी देना चाहती है.

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से कहा कि मानव श्रृंखला के नाम पर सरकार ने तमाशा मचा रखा है. स्कूली बच्चों को मानव श्रृंखला में शामिल होने का आदेश दिया गया है. सभी सरकारी कामकाज को बंद कर मानव श्रृंखला में शामिल होने को कहा गया है. पांच घंटे तक पूरा प्रदेश ठप रहेगा. इस दौरान किसी की मौत हो गयी या इलाज के लिए बाहर निकलना पड़ा तो इसके लिए सरकार ने क्या प्रबंध किया है. कोर्ट ने इन बिंदुओं पर सरकार से जवाब मांगा है. इस मामले की सुनवाई गुरुवार को होगी. गौरतलब है कि नशामुक्ति के पक्ष में सरकार 21 जनवरी को दुनिया की सबसे बड़ी मानव श्रृंखला बनाने जा रही है. इसमें दो करोड़ लोग शामिल होंगे. सेटेलाइट रिकार्डिंग के लिए इसरो और नासा से संपर्क किया जा रहा है.

बिहार सरकार के इस कार्यक्रम पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कोर्ट ने यह भी पूछा कि कोर्ट किस कानून के तहत 21 जनवरी को बिहार से गुजरने वाली सभी नेशनल और स्टेट हाइवे को वाहनों के परिचालन के लिए पांच घंटे तक बंद करेगी. बताते चलें कि पूरे बिहार में 21 जनवरी को विश्व की सबसे लंबी मानव श्रृंखला बनाने की तैयारी जोरों पर है. मानव श्रृंखला में बेहतर परफार्म करने वाले को बिहार दिवस पर सरकार की ओर से इनाम देने की घोषणा भी की गयी है. यह मानव श्रृंखला पूरे बिहार में निकाली जायेगी. इसकी फोटोग्राफी के लिये नासा और इसरो से भी संपर्क साधा गया है. तैयारियों पर स्वयं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नजर बनाये हुए हैं.

छात्रवृत्ति घोटाले में एक और अफसर पर गिरी गाज

पटना(अपना बिहार, 19 जनवरी 2017) - बहुचर्चित एससी, एसटी छात्रवृत्ति घोटाले में राज्य सरकार द्वारा वरिष्ठ आइएएस अधिकारी एसएम राजू को निलंबित करने के बाद अब एक और कड़ा कदम उठाते हुए बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी सुरेश पासवान को सस्पेंड कर दिया है. जानकारी के मुताबिक घोटाले में इस अधिकारी पर भी संलिप्त होने का आरोप है. इससे पूर्व छात्रवृत्ति भुगतान में अनियमितता के मामले में एससी-एसटी कल्याण विभाग के तत्कालीन सचिव एसएम राजू को निलंबित कर दिया गया है. इनकी अधिसूचना सामान्य प्रशासन विभाग ने गत गुरुवार को जारी की थी.

1991 बैच के आइएएस अधिकारी एसएम राजू पर राज्य से बाहर विभिन्न तकनीकी संस्थानों-कॉलेजों में पढ़नेवाले एससी-एसटी छात्र-छात्राओं को 2013-14 और इसके पूर्व के वर्षों में भी छात्रवृत्ति भुगतान में अनियमितता के आरोप प्रथमदृष्टया सही पाये गये थे. निगरानी ब्यूरो ने इनके खिलाफ धारा 406, 409, 420, 467, 468, 471 ए, 120 बी भादवि और धारा 13-2 सह पठित धारा 13-1, सी, डी, भ.नि.अधि. 1988 के तहत निगरानी थाने में मुकदमा दर्ज किया था. वर्तमान में राजस्व पर्षद के अपर सचिव एसएम राजू को निलंबन अवधि में मात्र जीवन निर्वाह भत्ता दिया जायेगा. उन्हें निलंबन की अवधि में सामान्य प्रशासन विभाग में मुख्यालय धारित किया गया है . सूत्र बताते हैं कि इस मामले में आरोपित बनाये गये बिहार प्रशासनिक सेवा के तीन पदाधिकारी भी निगरानी के घेरे में हैं.

जेल में ही रहेंगे अनंत, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

पटना(अपना बिहार, 19 जनवरी 2017) - हाइकोर्ट ने जेल में बंद विधायक अनंत सिंह की याचिका को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने अनंत सिंह की ओर से दायर उस याचिका को खारिज किया है जिसमें अनंत सिंह ने अपने ऊपर लगाये गये क्राइम कंट्रोल एक्ट को कोर्ट में चुनौती दी है. कोर्ट ने अनंत सिंह के ऊपर से सीसीए हटाने से इनकार किया है. सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. गौरतलब हो कि इससे पूर्व हाइकोर्ट ने मोकामा के विधायक अनंत सिंह पर राज्य सरकार द्वारा लगाये गये क्राइम कंट्रोल एक्ट पर अलग-अलग हलफनामा मांगा था. न्यायमूर्ति नवनीति प्रसाद सिंह व न्यायमूर्ति जीतेंद्र मोहन शर्मा की खंडपीठ ने नौ दिसंबर तक डीएम, एसपी को भी अलग-अलग हलफनामा देने के लिए कहा था.

विधायक अनंत सिंह ने अपने ऊपर लगाये गये सीसीए पर हाइकोर्ट में चुनौती दी थी. उसी मामले पर आज कोर्ट में सुनवाई हुई. पूर्व में हाइकोर्ट ने सरकार से जानकारी मांगी थी कि हाइकोर्ट की एडवाइजरी कमेटी में जो बात कही गयी, वह उसे किस तरह से मिली. जबकि वह गोपनीय होता है. पहली बार अनंत सिंह पर लगाये गये सीसीए को गृह विभाग ने असंवैधानिक कर दिया था. दूसरी बार डीएम ने अनुशंसा की. 15 दिनों के बाद गृह विभाग ने अनुशंसा की थी.

गांधी के वेश में नीतीश कर रहे शराबबंदी की अपील, जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने जारी किया पोस्ट

पटना(अपना बिहार, 19 जनवरी 2017) - केंद्रीय खादी विकास बोर्ड के कैलेंडर पर महात्मा गांधी की जगह चरखा चलाते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर जारी होने के विवाद के बाद जदयू के प्रदेश प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को महात्मा गांधी के रूप में पेश किया है। वह भी आधी धोती लपेटे। फेसबुक पर जारी अपने पोस्ट में श्री प्रसाद ने लिखा है - शराबबंदी से देश में घर-घर खुशहाली लाने वाले सामाजिक परिवर्तन के अगआ बने श्री नीतीश कुमार।

इतना ही नहीं उन्होंने लिखा कि मध्य प्रदेश में नर्मदा किनारे पांच किलोमीटर तक शराब की बिक्री बंद करने का निर्णय श्री कुमार के शराब मुक्त भारत बनाने के आह्वान की सुखद प्रगति है। कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी देशभर में हाइवे के किनारे शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू करने का साहसी निर्णय जिस प्रकार राज्य में सुखद परिणाम ला रहा है और इसके लिए उन्हें जो व्यापक जन समर्थन मिल रहा है, उससे उनके द्वारा बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी देशभर में लोगों और सरकारों को प्रेरित कर रही है। श्री प्रसाद ने कहा कि बिहार में न्याय के साथ तेज विकास करने वाले श्री कुमार राज्य में पूर्ण शराबबंदी के बाद अब देशभर में न्यायपूर्ण विकास और घर-घर खुशहाली लाने वाले सामाजिक परिवर्तन के अगुआ बन गए हैं। पूरा देश बिहार में उनकी सरकार के नए-पुराने कामकाज के सुखद परिणामों को देखकर उनका अनुसरण कर रहा है। यहां तक कि राजनीतिक रूप से धुर विरोधी होने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी नीतीश जी के कामकाज की प्रशंसा करने से खुद को नहीं रोक पाए। देश का मुखिया होने के नाते जनहित में मोदी जी को शराबबंदी समेत नीतीश जी के सभी अच्छे कामकाज को देशभर में मॉडल की तरह लागू करवाना चाहिए।

शराब की फैक्ट्रियां बंद करने का फैसला विपक्ष की जीते : सुमो

पटना(अपना बिहार, 19 जनवरी 2017) - पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि भाजपा तथा सहयोगी दलों के दबाव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को आखिरकार झुकना पड़ा और शराब फैक्ट्रियों को बंद करने का फैसला करना पड़ा। यह विपक्ष की जीत है, जिसके फलस्वरूप शराब की 21 फैक्ट्रियों के लाइसेंस का नवीकरण अब नहीं होगा। आगामी 21 जनवरी को मानव-श्रृंखला बनवाने से पहले मुख्यमंत्री को नये शराबबंदी कानून के तालिबानी प्रावधानों को समाप्त करने की घोषणा भी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शराब बरामद होने पर परिवार के सभी वयस्कों को जेल, सम्पत्ति जब्ती और सामूहिक जुमार्ना लगाने जैसे प्रावधानों को हटाने पर सर्वदलीय बैठक में सहमति बनी थी, लेकिन सवा महीने बाद भी मुख्यमंत्री चुप्पी साधे हुए हैं।

श्री मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार ने जब पहली अप्रैल 2016 से आंशिक शराबबंदी लागू की, तब भाजपा ने पूर्ण शराबबंदी की मांग की थी। इसके दबाव में पांच दिन बाद उन्होंने पूर्ण शराबबंदी तो लागू कर दी, लेकिन शराब फैक्ट्रियों पर रोक नहीं लगायी। एक तरफ पूर्ण शराबबंदी और दूसरी तरफ फैक्ट्रियों से न केवल विदेशी शराब का उत्पादन जारी रहा, बल्कि उसे कर-छूट के जरिये प्रोत्साहित भी किया गया ।

पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में बनी शराब दूसरे राज्यों में बेची जाती रही और नीतीश कुमार देश भर में शराबबंदी लागू करने के लिए धनबाद से लखनऊ-दिल्ली तक सभाएं कर रहे थे। भाजपा ने पूर्ण शराबबंदी का समर्थन किया, लेकिन अधकचरी नीति से उत्पन्न हास्यास्पद स्थिति के खिलाफ लगातार आवाज भी उठायी।

पूर्वांचल के बीस सीटों पर जदयू की नजर, बिहार की तरह यूपी में भी महागठबंधन की राह देख रहे नीतीश

पटना(अपना बिहार, 19 जनवरी 2017) - शराबबंदी के रथ पर सवार नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जदयू यूपी चुनाव में हाथ आजमाने को तैयार हैं। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो श्री कुमार की नजर पूर्वांचल की बीस सीटों पर नजर है। इससे भी अधिक दिलचस्प यह है कि श्री कुमार अखिलेश यादव नीत सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर अधिक आशावान हैं। माना जा रहा है कि एक बार सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन होने के बाद जदयू इस गठबंधन का हिस्सा बनेगा। बताते चलें कि बिहार में महागठबंधन का सबसे बड़ा घटक दल राजद द्वारा पहले ही यूपी चुनाव में भाग नहीं लेने का एलान किया जा चुका है। जबकि श्री कुमार ने जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पूर्वांचल में शराबबंदी के थीम पर आधारित कई कार्यक्रमों में भाग लिया। इनमें बनारस, गोरखपुर आदि कई इलाके शामिल हैं। बहरहाल इस पूरे मामले में जदयू ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

नोटबंदी के विरोध में सड़क पर उतरे कांग्रेसी

पटना(अपना बिहार, 19 जनवरी 2017) - नोटबंदी के खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने राजधानी में विशाल जुलूस निकाला। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अशोक चौधरी के नेतृत्व में रिजर्व बैंक के कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया। जिसमें काफी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। पहले सभी कार्यकर्ता गोलघर के समीप एकत्रित हुए। यहां से पीएम मोदी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए और नोटबंदी वापस करो का नारा लगाते हुए जुलूस की शक्ल में गांधी मैदान स्थित रिजर्व बैंक के समक्ष पहुंचे। यहां पर उन्होंने जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद सड़क पर ही सभा भी की। कांग्रेस पार्टी के बिहार प्रभारी एल शर्मा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि नोटबंदी से सबसे ज्यादा आम लोग प्रभावित हुए। मजदूर भुखमरी की कगार पर आ गए हैं। रोजगार कम हो गए व कईयों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। देश पर आर्थिक संकट गहरा गया है। केंद्र में बैठी सरकार जनता की विरोधी है। उसे आम जनता के हितों से कोई सरोकार नहीं।

यूपी चुनाव में भाजपा का सफाया तय : लालू, अखिलेश के पक्ष में झोंकेंगे पूरी ताकत

पटना(अपना बिहार, 19 जनवरी 2017) - जिस तरीके से बिहार की जनता ने भाजपा को हराने का काम किया है, उसी प्रकार यूपी की जनता भी भाजपा का सफाया कर देगी। ये बातें राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने बुधवार को राजद के प्रदेश कार्यालय में पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुनाथ झा की समाजवादी पार्टी से राजद में वापसी के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। इस मौके पर श्री झा के पुत्र व पूर्व विधायक अजीत झा ने भी राजद की सदस्यता ग्रहण की।

इस मौके पर अपने संबोधन में राजद प्रमुख ने कहा कि राजद उत्तर प्रदेश में चुनाव नहीं लड़ेगा, लेकिन समाजवादी पार्टी के पक्ष में वह और राजद कार्यकर्ता चुनाव प्रचार करेंगे। वहां सपा को जिताने के लिए पूरी ताकत झोकेंगे। जनता अखिलेश यादव के पक्ष में है। वह फिर सीएम बनेंगे। इसके लिए सोनिया गांधी, माकपा और सपा सबको साथ बुलाया है। अखिलेश को साइकिल चुनाव चिह्न मिलने से फिरकापरस्त ताकतों के चेहरे मुरझा गए हैं।

श्री प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी बनना चाहते हैं। झांसे में लोगों को डालकर हस्तिनापुर पर बैठ गए हैं, लेकिन यूपी देश का चुनाव है। अभी सांप्रदायिक ताकतों ने देश को खतरे में डाल दिया है। यूपी चुनाव के बाद देश फिर पटरी पर आ जाएगा। एनडी तिवारी के भाजपा में शामिल होने पर कहा कि वह एक्सपायरी दवा हैं। मानव शृंखला पर हाईकोर्ट में दायर अपील पर कहा कि राज्य सरकार जवाब देने में सक्षम है।

श्री प्रसाद ने कहा कि नोटबंदी से असंगठित क्षेत्र के 40 करोड़ लोग भुखमरी के कगार पर आ गए। नोटबंदी के खिलाफ बोलने वाले को देशद्रोही बताते हैं। अब 60 दिन हो गए, केन्द्र सरकार बताए कि कितना कालाधन पकड़ा है। कहा कि रघुनाथ झा घर वापस लौटे हैं। वह हमेशा समाजवादी विचार के रहे हैं। श्री झा ने कहा कि लालू प्रसाद राष्ट्र के नेता हैं। प्रदेश राजद अध्यक्ष रामचन्द्र पूर्वे, पूर्व सांसद जगदानंद सिंह और प्रधान महासचिव मुद्रिका सिंह यादव ने भी अपने विचार रखे। पूर्व मंत्री सीताराम यादव, विधायक अबु दोजाना और प्रवक्ता चितरंजन गगन एवं प्रगति मेहता आदि मौजूद थे।

चकाचक होगा सूबे का राजनीतिक गलियारा, दलों को मिलेंगी शानदार इमारतें

पटना(अपना बिहार, 19 जनवरी 2017) - आने वाले समय में सूबे की राजनीति तो बदलेगी ही, साथ ही राजनीतिक गलियारा भी चकाचक दिखेगा। राज्य सरकार ने अभी से इसकी तैयारी शुरू कर दी है। उल्लेखनीय है कि सूबे के अधिकांश राजनीतिक दल मसलन भाजपा, राजद, जदयू, रालोसपा, सीपीआई आदि के कार्यालय वीरचंद पटेल पथ पर अवस्थित हैं। सीपीआई को छोड़ अन्य सभी दलों का कार्यालय सरकारी भवन में चल रहा है। इन भवनों की स्थिति बहुत पहले से ही आवास विभाग और सरकार की नजर में जीर्णशीर्ण मानी जा रही है। इसे देखते हुए विभाग ने अब इन भवनों के कायाकल्प करने का निर्णय लिया है।

मिली जानकारी के अनुसार राज्य सरकार राजनीतिक दलों के कार्यालय भवनों का फिर से निर्माण करायेगी। इसके मुताबिक सभी भवन तीन मंजिले होंगे और सभी भवनों में आवश्यक सुख-सुविधायें उपलब्ध करायी जायेंगी। मिली जानकारी के हिसाब से अभी यह योजना प्रस्ताव के दौर में है। हालांकि आवास विभाग के मुख्य अभियंता (पटना) के द्वारा अपने मातहतों को एक पत्र भेजा गया है, जिसके मुताबिक राजनीतिक दलों के कार्यालय भवनों के नवनिर्माण की योजना है। इसके लिए सभी मान्यता प्राप्त दलों की सूची मांगी गयी है। बताते चलें कि इस योजना का लाभ केवल उन दलों को ही मिलेगा जिन्हें या तो राष्ट्रीय दर्जा हासिल है या राज्य स्तरीय पार्टी का तमगा हासिल है।

आरबीआई को कठपुतली न बनाये केंद्र : सदानंद

पटना(अपना बिहार, 19 जनवरी 2017) - प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने कहा कि आज मोदी सरकार के कार्यकाल में रिजर्व बैंक का इस्तेमाल कठपुतली के रूप में हो रहा है, जिसकी अभिव्यक्ति नोटबंदी विषय पर आरबीआई के कर्मचारी संगठनों के द्वारा उठाए गए सवालों और खुद उसके द्वारा एक संसदीय समिति को सौंपी 7 पेज के रिपोर्ट से होती है। इसके जवाब में वित्त मंत्री अरुण जेटली को 14 जनवरी को रिजर्व बैंक की स्वायतत्ता पर सफाई देनी पड़ी थी।

श्री सिंह ने कहा कि आरबीआई से मिले संकेतों से देश की जनता यह समझ चुकी है कि नोटबंदी के निर्णय में रिजर्व बैंक से दबाव में खानापूर्ति के लिए रिपोर्ट लिया गया था। वस्तुत: यह मोदी सरकार का ही निर्णय था जो भारत के लिए आत्मघाती साबित हो रहा है द्य अभी पीएसी के समक्ष 28 जनवरी को रिजर्व बैंक के गवर्नर का पेश होना बाकि है। इसके बाद यह और स्पष्ट हो जाएगा कि किस तरह से रिजर्व बैंक के काम दृ काज में दखल दिया गया है।

श्री सिंह ने कहा कि नोटबंदी के निर्णय में रिजर्व बैंक की स्वायतत्ता को पहुंचे चोट पर देश की सरकार से जवाब मांगने के लिए आज कांग्रेस ने देश भर में आरबीआई का घेराव कार्यक्रम आयोजित की थी, जो पूरे देश में पूर्णत: सफल रही। उम्मीद है कि कांग्रेस के आन्दोलन से रिजर्व बैंक की स्वायतत्ता बहाल होगी और कठपुतली की तरह इसका इस्तेमाल नहीं करेगी मोदी सरकार।

सूबे में शराब का निर्माण पूर्णत: बंद

राज्य मंत्रिपरिषद ने लिया राजगीर में फैसला, 32 प्रस्तावों पर लगी मुहर, मानव श्रृंखला के पहले रूठे शिक्षकों को मनाने हेतु बकाये वेतन का भुगतान, 23 फरवरी से बिहार विधानमंडल का बजट सत्र, 27 को पेश होगा बजट

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - मंगलवार को राजगीर की हरी-भरी वादियों के बीच कन्वेंशन सेंटर में राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित की गयी। बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के अलावा अन्य मंत्रियों सहित 40 लोगों ने भाग लिया। बैठक में ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए राज्य मंत्रिपरिषद ने सूबे में शराब निर्माण को पूर्णत: बंद करने का निर्णय लिया। मंत्रिमंडल सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा ने बताया कि मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के अन्तर्गत बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम, 2016 की धारा-24 में राज्य सरकार को प्रदत्त शक्तियों के आलोक में अनाज आधारित आसवनी से ईएनए निर्माण, विदेशी शराब विनिर्माणशाला/बोटलिंग प्लांट की अनुज्ञप्ति का वित्तीय वर्ष 2017-18 से नवीकरण नहीं करने की स्वीकृति दी गई।

श्री मेहरोत्रा ने बताया कि बैठक में कुल 32 प्रस्तावों को सहमति प्रदान की गयी।फैसले के मुताबिक खुले में शौच मुक्त पंचायतों में प्राथमिकता के आधार पर हाइस्कूल बनाये जायेंगे। सबसे महत्वपूर्ण यह कि मानव श्रृंखला कार्यक्रम के पहले शिक्षकों में भड़के आक्रोश को देखते हुए राज्य मंत्रिपरिषद ने उनके बकाया भुगतान के लिए 21 सौ करोड़ रुपये व्यय की स्वीकृति दी। साथ ही विधानमंडल के बजट सत्र की स्वीकृति भी प्रदान की गयी। श्री मेहरोत्रा ने बताया कि 23 फरवरी से 31 मार्च तक विधानमंडल के सत्र के आयोजन की स्वीकृति दी गयी। वहीं 27 फरवरी को बजट पेश करने की स्वीकृति पर मुहर लगी। कैबिनेट में पटना के डाकबंगला चौराहे पर आइटी पार्क बनाये जाने की स्वीकृति मिली। कैबिनेट में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव सहित दो दर्जन से अधिक मंत्रियों ने इसमें हिस्सा लिया। बैठक शुरू होने से पहले ही प्रधान सचिव ने सभी मंत्रियों को अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर को घुमाया।

बताते चलें कि राजगीर में करीब सात साल बाद कैबिनेट की बैठक हुई। सुबह साढ़े ग्यारह बजे बैठक शुरू हुई। बैठक में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव सहित 40 लोग और शामिल हुए, जिसमें मंत्री और विधायक के अलावा अधिकारी भी शामिल थे। उल्लेखनीय है कि पिछली बार शांति स्तूप परिसर में कैबिनेट की बैठक हुई थी।

मंत्री को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - जबरन घर खाली कराने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री मदन मोहन झा तथा उनके निजी सचिव अरुण पाठक को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। साथ ही मामले की सुनवाई के दौरान पटना के एसएसपी सहित पटना सिटी के एसडीओ तथा अगमकुआं थाना प्रभारी एवं दारोगा बबन प्रसाद को कोर्ट में हाजिर रहने का आदेश दिया।

न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की एकलपीठ ने मंगलवार को मुमताज अहमद की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई की। अदालत को बताया गया कि मंत्री की ओर से उनके निजी सचिव अरुण पाठक ने पुलिस में भूतनाथ रोड स्थित हाउसिंग कॉलोनी के फ्लैट नंबर 30 को खाली कराने की अर्जी दी थी। उनकी अर्जी पर पुलिस ने जांच कर अपनी रिपोर्ट दी और पटना सिटी एसडीओ ने दंडाधिकारी को प्रतिनियुक्ति कर फ्लैट खाली कराने का आदेश जारी कर दिया। उनका कहना था कि आवेदक का पक्ष जाने बिना सभी कार्रवाई की गई। अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए मंत्री एवं उनके सचिव को नोटिस जारी किया। साथ ही मामले की अगली सुनवाई की तारीख 20 फरवरी तय कर दी।

न्यायिक सेवा में आरक्षण मामले में हाईकोर्ट ने मांगा हलफनामा

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - न्यायिक सेवा में दिए गए आरक्षण को लेकर दायर मामले में पटना हाईकोर्ट ने मंगलवार को राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग सहित हाईकोर्ट प्रशासन व बीपीएससी से जवाब तलब किया है। अदालत ने सभी पक्षों को 30 जनवरी तक जवाबी हलफनामा दायर कर स्थिति स्पष्ट करने का आदेश किया है। न्यायमूर्ति नवनीत प्रसाद सिंह व न्यायमूर्ति विकास जैन की खंडपीठ ने शत्रुघ्न प्रसाद सिंह की ओर से दायर अर्जी पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। अदालत को बताया गया कि गत दिनों राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से न्यायिक सेवाओं में आरक्षण देने का अधिसूचना जारी की गई है। उनका कहना था कि आरक्षण के बारे में जो नीति निर्धारित की गई, उसे सही ठंग से से लागू किए बगैर आरक्षण दे दिया गया है। अदालत ने इस मुद्दे पर सामान्य प्रशासन विभाग सहित हाईकोर्ट प्रशासन व बीपीएससी को जवाब तलब किया है।

सड़क योजनाओं को सरकार ने खोला खजाना

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - मंगलवार को नालंदा के राजगीर कन्वेंशन सेंटर में मंत्रिपरिषद् की बैठक में कुल 32 प्रस्तावों पर निर्णय लिये गये। इनमें सबसे अधिक महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं के लिए वित्तीय व्यय के प्रस्ताव शामिल रहे। बैठक के बाद मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के प्रधान सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा ने जानकारी देते हुए कहा कि पथ निर्माण विभाग के अन्तर्गत पथ प्रमंडल, रोसड़ा के अन्तर्गत सिंघिया-हिरनी पथ (बिरौल-सिंघिया-पिपरा पथ) के किमी 0.00 से 10.00 तक (कुल 10.00 किमी पथांश लंबाई) में मिट्टी कार्य, पथ परत कार्य, सिमेन्ट कंक्रीट पथ कार्य, पथ फर्निचर कार्य, विविध कार्य, क्रॉस डेज्न कार्य, आकस्मिक कार्य, पथ संधारण कार्य, चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य कुल 2519.78 लाख (पच्चीस करोड़ उन्नीस लाख अठहत्तर हजार) रुपए के अनुमानित व्यय पर करने की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गयी। इसके अलावा बिहारशरीफ पथ प्रमंडल के अन्तर्गत पावापुरी-घोसरावां पथ के किमी 0 से 5.06 (कुल 5.06 कि०मी० पथांश लंबाई) में क्रॉस डेज्न, डेज्न, बचाव कार्य, भूमि अधिग्रहण तथा रोड साईनेज आदि कार्य सहित चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य कुल 2234.34 लाख (बाईस करोड़ चैंतीस लाख चैंतीस हजार) रुपए के प्रथम पुनरीक्षित अनुमानित लागत पर करने हेतु प्रथम पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति मंत्रिपरिषद ने प्रदान की।

श्री मेहरोत्रा ने बताया कि नाबार्ड ऋण योजना के तहत भागलपुर जिलान्तर्गत नवगछिया के विजयघाट के समीप कोशी नदी पर कुल 10.87 किमी लम्बाई में पहुँच पथ निर्माण कार्य, क्रॉस-डेनेज कार्य, गार्डड बाँध निर्माण कार्य, आरओबी निर्माण कार्य, रोड फर्निचर एवं बचाव कार्य सहित 1840 मीटर लंबाई का 4-लेन उच्च स्तरीय आरसीसी पुल का निर्माण कार्य कुल 46784.87 लाख (चार सौ सड़सठ करोड़ चौरासी लाख सतासी हजार) रुपए की प्रथम पुनरीक्षित अनुमानित लागत पर करने की प्रथम पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गयी। साथ ही बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के नियंत्रणाधीन राज्य पथों पर अवस्थित विक्रमशीला सेतु पर दिनांक-12.11.2016 से 14.11.2016 की मध्य रात्रि तक एवं सभी पुलों पर दिनांक-26.11.2016 से 02.12.2016 की मध्य रात्रि तक पथकर संग्रह स्थगित रखने की घटनोत्तर स्वीकृति दी गई।

प्रधान सचिव ने बताया कि पथ निर्माण विभाग के अन्तर्गत भारत-नेपाल सीमा के समानान्तर बिहार राज्य अन्तर्गत पश्चिम चम्पारण जिला के उत्तर प्रदेश राज्य सीमा पर राष्ट्रीय उच्च पथ सं-28 बी. के गोबरहिया ग्राम (मदनपुर के निकट) से प्रारंभ होकर पूर्वी चम्पारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया होते हुए किशनगंज जिला के पश्चिम बंगाल राज्य सीमा पर गलगलिया तक, कुल 552.293 किमी दो लेन पथ एवं पुल-पुलिया निर्माण कार्य, भू-अर्जन इत्यादि कार्य, कुल 3935.1304 करोड़ (तीन हजार नौ सौ पैंतीस करोड़ तेरह लाख चार हजार) रुपए के प्रथम पुनरीक्षित अनुमानित लागत पर करने हेतु प्रथम पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई।

सरकार चलाने में नीतीश अक्षम : प्रेम

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - नेता प्रतिपक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि नीतीश कुमार के पास जनता के लिए कोई संवेदना नहीं बचा है उन्हें सिर्फ अपने नाम और कुर्सी से लगाव है। उन्होंने कहा कि बिहार की राजधानी में इतनी बड़ी घटना होती है और मुख्यमंत्री जी के पास घटना स्थल पर जाने, घायलों से मिलने और मृतकों के परिवारों का आँसू पोछने का भी समय नहीं है। अपनी विफलता को छुपाने के लिए अब बयान देते हैं कि उन्हें कुछ पता ही नहीं था। घटना के 2 घंटे बाद तक उन्हें पता भी नहीं चलता है तो राजधानी के बाहर अगर कोई हादसा होता तो उन्हें दो दिनों तक पता नहीं चलता। इससे साफ होता है कि नीतीश जी का सरकार, प्रशासन किसी पर भी पकड नहीं है इसलिए उन्हें पद पर भी बने रहने का कोई हक नहीं है, नीतीश कुमार घटना की जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा दें।

शहाबुद्दीन मामले में फैसला सुरक्षित

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड और तेजाब कांड समेत कई मामलों में सीवान जेल से दिल्ली की तिहाड़ जेल शिफ्ट करने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. शहाबुद्दीन पर 45 मामले दर्ज हैं और पत्रकार हत्याकांड की जांच बिहार सरकार ने सीबीआइ से कराने की सिफारिश पहले ही कर चुकी है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायाधीश अमिताव राय की खंडपीठ के समक्ष सीबीआइ ने इस मामले में दलील देते हुए कहा था कि शहाबुद्दीन को तिहाड़ जेल हस्तांतरित करने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है. आरोपी के राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए ऐसा करना जरूरी है.

पहले हुई सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा था कि आरोपी पक्ष की ओर से बार-बार निष्पक्ष सुनवाई की बात कही गयी है, लेकिन हमें ध्यान रखना चाहिए कि आरोपी के साथ पीड़ित पक्ष के लिए निष्पक्ष सुनवाई काफी मायने रखती है. पीड़ित के साथ किसी प्रकार की नाइंसाफी को न्यायोचित नहीं माना जा सकता है. पीड़ित पक्ष को न्याय मिलना जरूरी है ताकि न्याय के प्रति लोगों का विश्वास बना रहे. सुनवाई के दौरान शहाबुद्दीन के वकील ने पहले कहा था कि सभी मामले राजनीति से प्रेरित है और अगर आरोपी को बाहर के जेल में भेजा गया तो यह उसके संवैधानिक अधिकारों का हनन होगा. इस मामले में बिहार सरकार, सीबीआइ, शहाबुद्दीन और पीड़ित पक्ष अपनी दलील खंडपीठ के सामने रख चुके हैं और उम्मीद है कि गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट इस मामले में फैसला सुना सकता है.

हाईकोर्ट ने बदला राजभवन का फैसला, दरभंगा संस्कृत विवि के बर्खास्त कुलपति को बहाल करने का आदेश

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विवि के बर्खास्त कुलपति डॉ. देवनारायण झा को पटना हाइकोर्ट में सुनवाई हुई. पटना हाइकोर्ट ने देवनारायण झा को पुन: बहाल करने का निर्देश दिया है. इससे पूर्व 10 अगस्त को राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने देवनारायण झा को बर्खास्त कर दिया था. देवनारायण झा पर फर्जी कागजात के आधार पर वीसी बनने और वित्तीय अनियमितता और अवैध बहाली में संलिप्तता का आरोप लगा था. राजभवन की चार सदस्यीय टीम ने 27 जून को कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विवि पहुंची थी और मामले की जांच की थी. देवनारायण झा के खिलाफ अवैध बहाली और आर्थिक अनियमितता का आरोप लगा था. टीम द्वारा जांच रिपोर्ट सौंपने के बाद देवनारायण झा को बर्खास्त कर दिया गया था. वहीं एक दूसरे सुनवाई में पटना हाइकोर्ट ने सब आॅर्डिनेट जूडिशियरी में आरक्षण नियमों के चुनौती की याचिका पर हाइकोर्ट में सुनवाई की. कोर्ट ने बिहार लोक सेवा आयोग को हाइकोर्ट में 2 सप्ताह के अंदर हलफनामा दायर करने का आदेश दिया.

भाजपा के परिवारवाद पर राजद ने बोला हमला

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - युवा राजद के प्रदेश अध्यक्ष कारी सोहैब ने उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनाव में भाजपा के द्वारा जारी उम्मीदवारों की सूची में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के परिवार को तथा केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे को टिकट दिये जाने पर कहा है कि एक ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते है कि लोग परिवार के टिकट के लिए दवाव नहीं बनावें और दूसरी ओर परिवारवाद को बढ़ावा देते है।

उन्होंने कहा कि यह भाजपा की दोहरी मानसिकता है तथा जनता को धोखा देने का प्रयास है। क्या भारत की भोली-भाली जनता को बेवकुफ समझती है? एक ओर भाजपा परिवारवाद पर दूसरे दलों को उपदेश देने का काम करती है तथा जनता के द्वारा चुने गये जनप्रतिनिधियों को अपमानित करने का काम करती है, भारत की जनता जानती है कि भाजपा स्वयं क्षेत्रवाद, अलगाववाद, साम्प्रदायवाद तथा परिवारवाद की राजनीति करती है। भाजपा के चाल, चरित्र एवं चेहरा को जनता जान चुकी है।

खुशहाल बिहार के लिए शराबबंदी जरूरी : मिश्र

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - पूर्व मुख्यमंत्री डा. जगन्नाथ मिश्र ने शराब मुक्त बिहार के लिए आगामी 21 जनवरी को आयोजित होने वाला मानव श्रृंखला में राज्य की जनता के जनहित में राज्य के मानवाधिकार संरक्षण प्रतिष्ठान के सभी 30 हजार सदस्यों से भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि 03 अप्रैल, 2016 हाजीपुर के चतुर्थ राष्ट्रीय सम्मेलन में शराब मुक्त खुशहाल बिहार बनाने हेतु शपथ के कार्यान्वयन, सामाजिक बदलाव, समाज को मजबूती प्रदान करने, के लिए सम्पूर्ण राज्य में मानव श्रृंखला को सफल बनाने के लिए प्रतिष्ठान के सभी सदस्यों और आम लोगों से सम्पर्क कर अधिक से अधिक संख्या में भाग लें।

हादसे में नाव नहीं, डूब गयी सरकार : पप्पू

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - जन अधिकार पार्टी (लो) के संरक्षक और सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने कहा है कि राज्य सरकार के पास आपदा प्रबंधन की कोई तैयारी नहीं है। राज्?य भर में अलग-अलग मौकों पर हुए हादसे बताते हैं कि सरकार हादसों को लेकर संवेदनशील नहीं है। मकर संक्रांति के दिन पटना के एनआइटी घाट में नाव नहीं, सरकार डूबी है।

पटना में पत्रकारों से चर्चा में उन्होंने कहा कि जिन आयोजनों से सरकार को श्रेय मिलता है, उसको लेकर सरकार व्यापक स्तर पर तैयारी करती है। प्रकाशोत्सव और कालचक्र पूजा की तैयारी और व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को श्रेय मिलने वाला था तो उन्होंने व्यापक तैयारी की। श्री यादव ने कहा कि आम लोगों के त्योहार मकर संक्रांति को लेकर पूरी व्यवस्था लापरवाह बनी रही। पूरा प्रशासनिक महकमा मानव श्रृंखला की तैयारी में जुटा रहा। दियारे में गए हजारों लोगों की चिंता सरकार को नहीं थी। उन्होंने इस हादसे की न्यायिक जांच की मांग की।

श्री यादव ने कहा कि नशाबंदी के नाम पर 21 जनवरी को बनने वाली मानवश्रृंखला का जन अधिकार पार्टी (लो) विरोध करती है। मानव श्रृंखला को लेकर पूरा बिहार खौफ में है। पूरा सरकारी महकमा के साथ निजी स्कूलों, संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों को भी जबरन मानव श्रृंखला बनाने को विवश किया जा रहा है। वहीं उत्तर प्रदेश की घटना की चर्चा करते हुए श्री यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साहसिक निर्णय से लोकतंत्र मजबूत हुआ है। जन अधिकार पार्टी अखिलेश यादव के निर्णय के साथ है। अखिलेश यादव ने नये समाजवादी सोच की शुरूआत की है। पत्रकार वार्ता में पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुपति प्रसाद सिंह, राष्ट्रीय महासचिव प्रेमचंद सिंह, मंजयलाल राय, राजेश रंजन पप्पू आदि मौजूद थे।

नोटबंदी के खिलाफ कांग्रेस का राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन आज

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - नोटबन्दी के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेसी बुधवार को प्रदर्शन करेंगे। इस क्रम मे राजधानी पटना में कांग्रेस के नेता व कार्यकर्ता भारतीय रिजर्व बैंक के सामने अपना विरोध प्रदर्शित करेंगे। इस आशय की जानकारी प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता डा. हरखु झा ने दी। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के वरीय सदस्य पूर्व विदेश मंत्री डा. सलमान खुर्शीद, प्रभारी सचिव के.एल. शर्मा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अध्यक्ष डा. अशोक चौधरी, कांग्रेस के सभी मंत्रीगण, प्रदेष कांग्रेस कमिटी के पदाधिकारीगण शाामिल होंगे।

उन्होंने बताया कि कि दूसरे चरण के क्रम में ही 23 जनवरी 2017 को राज्य स्तरीय जन-वेदना सम्मेलन का आयोजन पार्टी मुख्यालय, सदाकत आश्रम में दिन के 12 बजे किया गया है जिसकी अध्यक्षता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डा. अशोक चौधरी करेंगे। बताते चलें कि इससे पहले नोटबंदी के खिलाफ पहले चरण में 29 दिसम्बर को राज्यस्तरीय संवाददाता सम्मेलन, 2 जनवरी, 2017 को जिलास्तरीय संवाददाता सम्मेलन, 6 जनवरी को जिला स्तरीय धरना कार्यक्रम, 9 जनवरी को जिला मुख्यालय पर महिला कांग्रेस द्वारा थाली पीटो कार्यक्रम, राज्य स्तर पर कांग्रेस की ओर से कई कार्यक्रम आयोजित किये गये थे।

धूमधाम से मनाई जाएगी जननायक की जयंती : पूर्वे

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - राष्ट्रीय जनता दल की ओर से प्रदेश से लेकर पंचायत तक जननायक कपूर्री ठाकुर की जयंती समारोह धूमधाम से मनाई जाएगी। पटना में 24 जनवरी, 2017 को राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद जयंती समारोह का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही सभी जिला में जननायक कर्पूरी ठाकुर जयंती पखवारा मनाया जाएगा। मंगलवार को तैयारियों की समीक्षा के बाद आयोजित पे्रस कांफ्रेंस में प्रदेश अध्यक्ष डॉ0 रामचन्द्र पूर्वे एवं प्रधान महासचिव मुन्द्रिका सिंह यादव ने यह जानकारी दी। प्रदेष अध्यक्ष ने कहा कि 24 जनवरी, 2017 को राजद प्रदेश कार्यालय में भव्य समारोह का आयोजन किया गया है, जिसका उद्घाटन लालू प्रसाद करेंगे। समारोह में पार्टी के सभी मंत्री, सांसद, पूर्व सांसद, विधायक, विधान पार्षद, सभी पूर्व विधायक, सभी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष, सभी जिलाध्यक्ष, सभी पदाधिकारी और राज्य कार्यकारिणी के सदस्य सहित पार्टी के तमाम नेता उपस्थित रहेंगे। 28 जनवरी, 2017 से 12 फरवरी, 2017 तक सभी जिलों में जननायक कर्पूरी ठाकुर की जयंती पखवारा समारोहपूर्वक मनाना है। जयंती समारोह के लिए राजद अतिपिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेष अध्यक्ष प्रगति मेहता को तैयारी समिति का संयोजक बनाया गया है। सभी जिलों के लिए प्रभारी भी मनोनीत किये जा रहे हैं।

इसके पूर्व प्रदेश कार्यालय में मंगलवार को बैठक हुई जिसमें तैयारी की समीक्षा की गई। बैठक के अंत में पटना नाव हादसे में मारे गए सभी लोगों के प्रति गहरी शोक संवेदना प्रकट करते हुए दो मिनट का मौन धारन किया। साथ ही राजद के वरिष्ठ नेता पूर्व एमएलसी रामनंदन सिंह के निधन पर भी गहरी शोक संवेदना व्यक्त की गई। बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष रामनारायण मंडल, प्रदेश प्रवक्ता प्रगति मेहता पटना जिलाध्यक्ष देवमुनी सिंह यादव, प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन, मुनीलाल यादव, देवकिशुन ठाकुर, महताब आलम, सतीश गुप्ता सहित अन्य नेता उपस्थित थे।

विपक्ष पूरी तरह हताश और निराश : जदयू

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - जदयू प्रवक्ता नवल शर्मा ने कहा है कि सूबे में विपक्ष पूरी तरह हताश और निराश हो चुका है । केवल तथ्यहीन और भ्रामक आरोपों की बैसाखी के सहारे दिव्यांग विपक्ष अपने को जिन्दा रखे हुए है । उन्होंने कहा कि विपक्ष के इन आरोपों से घबड़ाये बिना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिस समर्पण भाव से बिहार के विकास में अपने को झोंक रखा है उसे भी लोग देख और समझ रहे हैं । सत्ता के भूख से बेचैन बीजेपी नेताओं के पेट में जिस तरह चूहे दौड़ रहे हैं उसे भी जनता देख रही है। श्री शर्मा ने कहा कि पटना नाव दुर्घटना को सरकार ने चुनौती के रूप में लिया है और दोषियों को दंडित कर सरकार न्यायप्रियता का कठोर उदाहरण पेश करेगी । पर बीजेपी ने जांच रिपोर्ट आये बिना ही अपना निष्कर्ष सुना दिया जो यह साफ दर्शाता है कि बीजेपी की मंशा दोषियों को दंडित करने की नहीं बल्कि राजनीतिक रोटी सेंकने की है।

नाव हादसा : सरकार ने मानी चूक

दियारा में अब नहीं होगा कोई आयोजन, मुख्य सचिव की अनुमति के बाद ही होगा कोई बड़ा आयोजन, विज्ञापन में अपने चित्र के इस्तेमाल पर जताया एतराज, डीएम नहीं डीआईजी शालीन और प्रत्यय अमृत करेंगे हादसे की जांच

पटना(अपना बिहार, 17 जनवरी 2017) - राज्य सरकार की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह मान लिया है कि मकर संक्रांति के मौके पर हुए हादसे का कारण प्रशासनिक चूक है। सोमवार को लोक संवाद कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हर आयोजन मेरे स्तर से नहीं होता है। हादसे के बाद चौतरफा आलोचनायें झेल रहे मुख्यमंत्री ने कहा कि इस घटना से उन्हें गहरा सदमा लगा है। इस घटना से सभी लोग दुखी हैं। उन्होंने कहा कि अब मुख्य सचिव की अनुमति के बगैर बड़ा आयोजन करने की अनुमति नहीं दी जायेगी। इसके लिए नियम बनायेंगे और तय एसओपी का पूरी तरह पालन होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के आयोजन में हर पहलू की जांच होनी चाहिए। हमारे स्तर पर होने वाले कार्यक्रम की मॉनेटरिंग और समीक्षा समय-समय पर की जाती है। इसी का परिणाम प्रकाश पर्व और काल चक्र पूजा का समापन सफलता पूर्वक किया गया। उन्होंने कहा कि हर कार्यक्रम तो मेरे स्तर पर होता नहीं है। एक चूक ने सारी चीजों को पीछे की ओर धकेल दिया। इससे आप मेरे मन: स्थिति की कल्पना कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि अब भविष्य में इस तरह की घटना न घटे इसकी तैयारी होगी। पहले से भी एसओपी (स्टैंडर आॅपरेटिंग प्रोसिड्योर)बना हुआ है। इसकी एक-एक बिंदु की जांच होगी, ताकि भविष्य में इस तरह की चूक न हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह घटना दुखद है. इसकी जांच के लिए आइपीएस अधिकारी शालीन और आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत को जिम्मेवारी सौंपी गयी है। जैसे ही हमें घटना की जानकारी मिली, हमने बचाव के आदेश दिये। घटना स्थल पर प्रत्यय अमृत और पटना के डीएम और एसपी को जाने का निर्देश दिया। पीड़ित परिवार को हम मदद कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब दियारा में इस तरह के आयोजन की अनुमति नहीं दी जायेगी। उन्होंने कहा कि घटना की गंभीरता पूर्वक जांच होगी, जिसमें देख जायेगा कि नदी के पार इस तरह के कार्यक्रम के लिए वापस लौटने का इंतजाम किया गया था कि नहीं? इस तरह के आयोजन कोई स्वयं कर सकता है कि नहीं? इस तरह के आयोजन के लिए किसी से अनुमति लेना है कि नहीं? जांच में यह देखा जायेगा कि कोई नाव पर कैसे चढ़ रहा था? एक-एक पहलू की जांच होगी। इस तरह की कोई घटना होगी तो सरकार पर आक्षेप तो आयेगा ही। मुख्यमंत्री ने कहा कि घटना की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को भरती हुए लोगों के इलाज की इंतजाम के लिए भेजा। लोगों का इलाज हुआ। एक की मौत हो गयी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम के आयोजन के लिए पूर्व से ही एसओपी बना हुआ है। देखा जायेगा कि इसमें और क्या परिवर्तन करना होगा? जांच में पता किया जायेगा कि नाव परिवहन एक्ट के तहत रजिस्टर्ड था कि नहीं? राज्य में नावों के परिचालन के लिए परिवहन में एक्ट बना हुआ है। देखना है कि परिवहन एक्ट के तहत राज्य में नावों का परिचालन होता है कि नहीं? जांच में दोषी पाये जाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई होगी. दियारा को लेकर मापदंड तय किया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आयोजन में मेरे तस्वीर का उपयोग किया गया है। यह साफतौर पर बता दिया गया है कि बिना अनुमति के मेरे फोटो का उपयोग नहीं किया जायेगा। हम आॅफिस से पता कर रहे हैं कि आखिर किसे आदेश से उस आयोजन में मेरे तस्वीर का उपयोग किया गया।

25 की मौत के बाद खुली डीएम साहब की नींद

पटना(अपना बिहार, 17 जनवरी 2017) - मकर संक्रांति की शाम 25 लोगों की मौत हो गयी। अब जबकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वीकार कर लिया है कि बीते शनिवार को घटित हादसे के पीछे चूक थी, और उन्होंने गंगा में नाव परिवहन को लेकर सख्ती बरतने का निर्देश दिया है। डीएम संजय कुमार अग्रवाल ने अपनी कुंभकर्णी निद्रा का त्याग करते हुए मंगलवार को गंगा में नौका परिवहन को लेकर निर्देश जारी किया। उन्होंने सभी अनुमंडल पदाधिकारी एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों को निदेश दिया कि किसी भी परिस्थिति में गैर निबंधित नाव का परिचालन न हो। इसके अलावा उन्होंने यह सुनिश्चित करने की जिम्मेवारी संबंधित थाना अध्यक्षों को भी दी। उन्होंने सभी अनुमंडल पदाधिकारियों को निदेश दिया कि वे कैंप लगाकर नावों का निबंधन सुनिश्चित करें। इसके अलावा उन्होंने जिला परिवहन को यह जिम्मेवारी सौंपी है कि वे परिचालन योग्य नावों की जांच करें। इसके अलावा उन्होंने सभी नावों पर सवारियों की क्षमता उल्लेखित करने का निर्देश भी दिया।

नौका हादसे की जांच के लिए सर्वदलीय समिति बनाये सरकार, सुमो ने की मांग

पटना(अपना बिहार, 17 जनवरी 2017) - पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि राज्य सरकार नाव हादसे की जांच के लिए सर्वदलीय समिति का गठन करे। उन्होंने कहा कि गंगा दियारा में नौका हादसे के 48 घंटे बाद भी राज्य सरकार ने एक भी अधिकारी के खिलाफ न प्राथमिकी दर्ज करायी, न किसी का तबादला किया और न किसी को निलंबित किया। बदनसीब नौका के मल्लाह और बंद पड़े डिज्नीलैंड के संचालक पर तो एफआईआर दर्ज करायी गई,लेकिन अफसरों को क्यों छोड़ दिया गया? क्या प्रशासन केवल उन्हीं कार्यक्रमों में मुस्तैदी दिखायेगा, जिनसे मुख्यमंत्री की राष्ट्रीय छवि चमकायी जाती है?

श्री मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार यदि घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को दंडित करना चाहते हैं, तो उन्हें किसी गांधीवादी नेता की अध्यक्षता में सर्वदलीय जांच समिति का गठन करना चाहिए। अधिकारियों की जांच समिति बिल्कुल भरोसेमंद नहीं है। शोक के माहौल में शराबबंदी के लिए प्रस्तावित मानव-श्रृंखला की तारीख भी बदली जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बतायें कि इससे पहले पटना के दशहरा उत्सव और छठ पूजा के दौरान हुए हादसों की जांच रिपोर्ट के आधार पर एक भी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या अधिकारियों की जांच समिति दोषी अफसरों को बचाने के लिए बनायी गई है?

प्रशासनिक लापरवाही ने ली लोगों की जान : सीपीआई

पटना(अपना बिहार, 17 जनवरी 2017) - भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य परिषद के सचिव सत्यनारायण सिंह ने मकरसंक्रांति के मौके पर 14 जनवरी को पटना में आयोजित पतंगबाजी महोत्सव के दरम्यान हुई नौका दुर्घटना में करीब 30 लोगों की मौत पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि यह दुर्घटना प्रषासनिक लापरवाही, कुव्यवस्था का परिणाम है। उन्होंने कहा है कि इस आयोजन में लोगों के स पार से उस पार लाने और वापस ले जाने के लिए पर्याप्त संख्या में नावों, स्टीमर आदि की व्यवसथा नहीं थी। पुलिस बल भी जरूरत के मुताबिक नहीं था। एनडीआरएफ को भी नहीं लगाया गया था। इसलिए हादसा के वक्त तुरंत राहत नहीं पहुंचाया जा सका। बचाव कार्य समय पर हो गया रहता तो इतनी जिंदगियां नहीं जाती ।

भाकपा राज्य सचिव ने कहा है कि बिहार सरकार ने अभी 10 दिन पहले प्रकाषपर्व पर देष-विदेश से आये लाखों श्रद्धालुओं के पटना में जुटने पर ऐसा शानदार इंतजाम किया था, जिसका सर्वत्र गुणगान हुआ था। यह अपने-आप में एक नजीर बन गया था। फिर सवाल यह उठता है कि बिहार सरकार इस छोटे से आयोजन के प्रति वेपरवाह क्यों हो गई? उसका पुलिस-प्रशासन सुस्त, निष्क्रिय क्यों रहा? मुख्यमंत्री या इसके किसी मंत्री ने इसकी तैयारी की समीक्षा क्यों नहीं की ? पर्यटन विभाग और उसके अधिकारी क्या कर रहे थे? ऐसे में हजारों की भीड़ को संभालने में विफलता के लिए सरकार और प्रशासन अपनी जिम्मेवारी से नहीं बच सकता।

देश का अपमान न करें प्रधानमंत्री : सदानंद

पटना(अपना बिहार, 17 जनवरी 2017) - बिहार प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने कहा कि वर्तमान केंद्र सरकार भारत में राष्ट्रपिता के अमूल्य योगदान को भूलाने का काम कर रही है। उन्होंने खादी ग्रामोद्योग के कैलेंडर और डायरी पर महात्मा गाँधी की तस्वीर की जगह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के फोटो छपने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह न सिर्फ राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का अपमान है बल्कि यह देश का भी अपमान है।

श्री सिंह ने कहा कि भाजपा और आरएसएस अपने को भारत की संस्कृति से जुड़ा हुआ संगठन कहता है जबकि उसके सिद्धंत और कारनामे देश को कबूल नहीं होता। इसलिए उसके हर कदम और कार्य का विरोध देश की जनता करती है। खादी भारत की आजादी से जुड़ा हुआ है, जिसे गाँधी जी ने विदेशी कपड़ो का विकल्प के रूप में सामने लाया था । जिससे महात्मा गाँधी का स्वाधीनता संग्राम में विदेशी कपड़ों का बहिष्कार, विदेशी कपड़ो का होलिका दहन आदि आन्दोलन सफल हुआ था। इसलिए चरखा पर सूत कातते हुए महात्मा गाँधी की तस्वीर राष्ट्र का प्रतीक बना, जिसे प्रधानमंत्री जी ने स्थानापन्न करने का प्रयास किया है।

श्री सिंह ने कहा कि मोदी सरकार के इस कार्य को देश की जनता कतई स्वीकार नहीं करेगी। यह केंद्र सरकार की छोटी सोच की ओछी हरकत है, जिससे भारत की जनता और राष्ट्रपिता दोनों का घोर अपमान हुआ है।

सरकारी बाबू बच्चों को पढ़ायें एक घंटा, लोक संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री को मिला सुझाव

पटना(अपना बिहार, 17 जनवरी 2017) - सोमवार को लोक संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को यह सुझाव पसंद आया कि सरकारी कर्मचारी सप्ताह में कम से कम एक दिन एक घंटा किसी सरकारी स्कूल में जाकर पढ़ायें। मुख्यमंत्री को यह सुझाव बाढ़ के विकास कुमार ने दिया। उनकासुझाव था कि सभी सरकारी विद्यालयों में पदाधिकारियों को सप्ताह में कम से कम एक घंटा जाकर बच्चों को पढ़ाना चाहिये, इससे बच्चों को पढ़ाई के प्रति प्रोत्साहन मिलेगा। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बहुत अच्छा सुझाव है। इसी तरह कृषि के क्षेत्र में श्री बषीर आलम द्वारा सब्जियों के कमर्ष