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Friday23 June 2017

Editor’s Column

1300 करोड़ की लागत से दिल्ली में शापिंग काम्पलेक्स बना रहे सुशील मोदी

पटना(अपना बिहार, 18 जून 2017) - भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी को बिहार से अधिक दिल्ली से प्यार है। यही वजह है कि आजकल वे दिल्ली में करीब 1300 करोड़ रुपए की लागत से शापिंग काम्पलेक्स बना रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गाजियाबाद में बन रहे इस काम्पलेक्स में उनके भाई राज कुमार मोदी मेसर्स अम्बुजा सीमेंट प्राइवेट लिमिटेड के साथ साझेदार हैं। बताते चलें कि पूर्व में भी सुशील मोदी ने गाजियाबाद और वैशाली में दो मकान खरीद रखा है।

 

देश के किसानों की सुध ले केंद्र

जब किसान नहीं रहेगा, उसका बच्चा नहीं रहेगा, तो कौन फौज में जाकर सीमा पर अपने सीने में गोली उतारेगा? किसी पूँजीपति का बेटा तो नहीं जाएगा? तो किसकी बहादुरी के दम पर हुए सर्जिकल स्ट्राइक पर सियासी रोटी गरम करेंगे? गरीब का क्या है, किसान रहे या जवान, विवश होकर आपके ही चुनावी बहकावे या सियासी उकसावे में आएगा! छाती तो उसी की फटेगी, छाती तो उसी की छलनी होगी, चाहे आपकी झूठी बोली से हो या दुश्मन की गोली से।

- लालू प्रसाद

मध्य प्रदेश के मंदसौर में 6 किसानों को वाजिब माँग उठाने के लिए मौत के घाट उतार दिया गया। मध्यप्रदेश और भाजपा शासित महाराष्ट्र के किसानों की दयनीय स्थिति और व्यथा को इससे भला बेहतर और क्या प्रदर्शित कर सकता है कि वे स्वयं अपनी ही उपज, जिसे किसान अपने सन्तान की तरह खून पसीने से सींचता है, देखभाल करता है, उसे ही हताशा में सड़कों पर फेंक दे रहे थे, दूध बहा दे रहे थे। भाजपा का ही चुनावी वादा था कि वे किसानों की कुल लागत पर 50% अपनी ओर से जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य के रूप में किसानों को देंगे। जो आपके लिए मात्र एक चुनावी रणनीति या हठखेली हो सकता है, वह देश के ग़रीब व मजबूर अन्नदाता के लिए जीवन और मृत्यु का प्रश्न है। देश की 70% आबादी अपने जीविकोपार्जन के लिए कृषि व कृषि आधारित उद्योगों पर ही आश्रित है, ऐसे में कोई खुद को प्रधान सेवक कहने वाला व्यक्ति देश की आबादी के इतने बड़े हिस्से की अनदेखी कैसे कर सकता है?

 

भाजपाई बादशाह इतने निष्ठुर ना बनें कि एक पखवाड़े से हताश कृषकों के चल रहे विरोध प्रदर्शन को समझने के लिए चन्द पल निकाल नहीं सकते! दूर दूसरे देश में एक आदमी मरता है तो मोदी जी को इतनी पीड़ा होती है कि उनकी उंगलियाँ स्वतः ही उनके स्मार्टफोन पर नाच कर ट्वीट के माध्यम से उनकी पीड़ा जाहिर देती है। पर आपके लोक कल्याण मार्ग स्थित सरकारी आवास से चंद मीटर और मिनट दूर हजारों किलोमीटर की यात्रा करके आए तमिलनाडु के किसान कभी सड़क पर परोस भोजन खा रहे थे, कभी मूत्र पी रहे थे तो चूहे मुँह में दबाए अपने दुर्भाग्य पर छाती पीट रहे थे, पर आपके कानों में भूखे किसानों के बच्चों की कराह नहीं गई। जब लोक ही नहीं रहेंगे तो किसका कल्याण और कैसा नामकरण?

 

जब किसान नहीं रहेगा, उसका बच्चा नहीं रहेगा, तो कौन फौज में जाकर सीमा पर अपने सीने में गोली उतारेगा? किसी पूँजीपति का बेटा तो नहीं जाएगा? तो किसकी बहादुरी के दम पर हुए सर्जिकल स्ट्राइक पर सियासी रोटी गरम करेंगे? गरीब का क्या है, किसान रहे या जवान, विवश होकर आपके ही चुनावी बहकावे या सियासी उकसावे में आएगा! छाती तो उसी की फटेगी, छाती तो उसी की छलनी होगी, चाहे आपकी झूठी बोली से हो या दुश्मन की गोली से।

 

प्रधानमंत्री जी, आप यह दावा करते नहीं थकते हैं कि आपने अपना बचपन गरीबी में काटा है। तो फिर आपको ग़रीबी की पीड़ा और उसके दुष्चक्र को समझने में इतनी दिक्कत क्यों हो रही है? दो जून की रोटी जुटाना अगर देश के अन्नदाता के लिए ही असम्भव होने लगे, तो देश की क्या स्थिति होगी?

 

हर साल हजारों की संख्या में किसान आत्महत्या कर रहा है, पर केंद्र के माथे पर इसे लेकर कोई शिकन नहीं है। आदिवासियों की ज़मीन हड़पी जा रही है, अनाप शनाप कानून बनाकर किसानों की हड़प पूंजीपतियों को देने के उपाय लगाए जा रहे हैं।

 

व्यापक तौर पर किसानों के लिए कर्ज़माफी की जाए। सिंचाई के लिए नहरों का जाल हो, और उसके अभाव में सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली की व्यवस्था हो। अगर परिस्थितियों पर काबू ना पाया गया तो किसान मरने पर सदैव विवश बने रहेंगे। अगर इस प्रकार ग़रीब किसानों को उनकी माँगो पर गोली मारते रहेंगे, तब तो आस लगाए हताश कृषकों के लिए आत्महत्या से भी अधिक वीभत्स मृत्यु सरकार द्वारा थोपा जाता रहेगा। किसान देश की रीढ़ है। इन्हें कुछ हुआ तो खड़े नहीं रह पाओगे। मत भूलों किसानों की दशा पर ही तरक़्क़ी की नींव टिकी हुई है।(राजद प्रमुख लालू प्रसाद के फ़ेसबुक से साभार)

सोशल इंजीनियरिंग के लिए इतिहास से छेड़छाड़ कर रही भाजपा

-राम पुनियानी

विभिन्न समुदायों को धार्मिक आधार पर ध्रुवीकृत करना और हिन्दू समुदाय में, नीची जातियों को गुलाम बनाकर रखना, हिन्दू राष्ट्रवाद का प्रमुख एजेंडा है। इसी एजेंडे के तहत, मुस्लिम राजाओं को विदेशी आक्रांताओं के रूप में प्रस्तुत कर उनका दानवीकरण किया जाता रहा है। यह भी कहा जाता है कि उन्होंने भारत के लोगों को जबरदस्ती मुसलमान बनाने का प्रयास किया और इसी के नतीजे में, जाति प्रथा अस्तित्व में आई। इसी एजेंडे का दूसरा हिस्सा है आर्यों का महिमामंडन और हिन्दू पौराणिक कथाओं की इतिहास के रूप में प्रस्तुति। हाल में ब्राह्मणवादी मूल्यों को बढ़ावा देना और दलितों व ओबीसी को राष्ट्रवादी खेमे में शामिल करना भी इस एजेंडे में शामिल हो गए हैं।

पिछले साल ओणम (सितंबर 2016) पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने ट्वीट कर यह कहा था कि ओणम, विष्णु के पांचवे अवतार वामन के जन्म का समारोह है। इसी के साथ, आरएसएस के मुखपत्र ‘केसरी’ ने एक लेख छापा जिसमें कहा गया कि पुराणों और अन्य हिन्दू धर्मग्रंथों में कहीं यह नहीं कहा गया है कि महाबली को वामन ने पाताललोक में धकेल दिया था। यह भी कहा गया कि धर्मग्रंथों में कहीं ऐसा वर्णित नहीं है कि महाबली, हर वर्ष मलयाली चिंगम माह में धरती पर आते हैं।

यह पटकथा, केरल में ओणम से जुड़ी कथा के एकदम विपरीत है। ओणम, फसल की कटाई का महोत्सव है और यह माना जाता है कि इस दौरान वहां के लोकप्रिय राजा महाबली अपनी प्रजा से मिलने आते हैं। केरल में ओणम सभी धर्मों के अनुयायियों का त्योहार बन गया है। भाजपा, इसे विष्णु के वामन अवतार से जोड़कर, उसे केवल ऊँची जातियों का त्योहार बनाना चाहती है।

इतिहास को संघ परिवार द्वारा किस तरह तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है, इसका एक उदाहरण है उत्तरप्रदेश के भाजपा कार्यालय, जिसकी हाल में नवीन साज-सज्जा की गई है, में टंगा एक तैलचित्र। एक नज़र देखने पर यह तैलचित्र राजपूत राजा महाराणा प्रताप का लगता है। परंतु असल में यह 11वीं सदी के एक राजा सुहैल देव का तैलचित्र है। महाराज सुहैल देव के बारे में बहुत कम लोगों ने सुना है। इन्हें पासी और भार, ये दोनों समुदाय अपना राजा मानते हैं। सुहैल देव, भाजपा के नायकों की सूची में शामिल कैसे हो गया? उत्तरप्रदेश के बहराईच में अमित शाह ने सुहैल देव की एक प्रतिमा का अनावरण किया और उस पर लिखी एक पुस्तक का विमोचन भी किया। सुहैल देव को एक ऐसा राष्ट्रीय नायक बताया जा रहा है जिसने स्वाधीनता के लिए संघर्ष किया। उसके नाम पर एक नई ट्रेन शुरू की गई है जिसका नाम ‘सुहैल देव एक्सप्रेस’ है।

इसी महीने (जून 2017), उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह घोषणा की कि लखनऊ के अंबेडकर पार्क में छत्रपति शाहू, जोतिराव फुले, अंबेडकर, काशीराम व मायावती के साथ-साथ सुहैल देव की प्रतिमाएं भी स्थापित की जाएगी। इस पार्क का निर्माण मायावती सरकार ने करवाया था और सुहैल देव को छोड़कर, अन्य सभी प्रतिमाएं वहां पहले से ही लगी हुई हैं। अब इस पार्क में अन्य जातियों के नायकों की प्रतिमाएं भी लगाई जाएंगी। यह कहा जा सकता है कि प्रतिमाएं लगाने के मामले में मायावती ने एक तरह की अति कर दी थी परंतु इसमें कोई संदेह नहीं कि अंबेडकर पार्क, लोक स्मृति में दलित पहचान को एक सम्मानजनक स्थान देने का प्रयास था। हाल में किया गया निर्णय, इतिहास के उस संस्करण का प्रचार करने का प्रयास है, जो हिन्दू राष्ट्रवादियों को सुहाता है। सुहैल देव के बारे में यह कहा जा रहा है कि उसने सालार महमूद (गाज़ी मियां) से मुकाबला किया था। गाज़ी मियां, महमूद गज़नी का भतीजा था, जो इस क्षेत्र में बसने आया था।

प्रो. बद्रीनारायण (‘फेसिनेटिंग हिन्दुत्व’, सेज पब्लिकेशंस) के अनुसार, लोकप्रिय आख्यान यह है कि सुहैल देव ने अपने राज्य में मुसलमानों और दलितों पर घोर अत्याचार किए थे। उसके दुःखी प्रजाजनों की मांग पर सालार महमूद ने सुहैल देव के साथ युद्ध किया, जिसमें दोनों राजा मारे गए। गाज़ी मियां की दरगाह पर जियारत करने मुसलमानों के अलावा बड़ी संख्या में हिन्दू भी जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि दरगाह पर ज़ियारत करने से रोगों से मुक्ति मिलती है। दरगाह की बगल में एक तालाब है, जिसके बारे में यह कहा जाता है कि उसमें नहाने से कुष्ठ रोगी ठीक हो जाते हैं।

इसके विपरीत, आरएसएस और उसके संगी-साथियों द्वारा यह कथा प्रचारित की जा रही है कि गाज़ी मियां एक विदेशी आक्रांता थे और सुहैल देव ने हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए उससे युद्ध करते हुए वीरगति प्राप्त की। अगस्त 2016 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषण में सुहैल देव का ज़िक्र किया। उन्होंने सुहैल देव को एक ऐसा राजा बताया जो गोरक्षक था और जो गायों को अपनी सेना के सामने रखकर युद्ध में भी उनका इस्तेमाल करता था।

जहां आम लोगों के ज़हन में गाज़ी मियां की छवि सकारात्मक है वहीं भाजपा, सिर्फ हिन्दू नायक बताकर अलग-अलग तरीकों से सुहैल देव का सम्मान करने की कोशिश कर रही है। सुहैल देव इस मामले में भाजपा की दोहरी रणनीति है। एक ओर वह उसे इस्लाम के विरूद्ध लड़ने वाला हिन्दू नायक बता रही है तो दूसरी ओर वह पासी-राजभर समुदायों का एक नया नायक पैदा करना चाहती है। भाजपा का लक्ष्य यह है कि दलितों की हर उपजाति के अलग-अलग नायक खड़े कर दिए जाएं - फिर चाहे उन्होंने दलितों की भलाई के कुछ किया हो या नहीं। इसका उद्देश्य दलित एकता को खंडित करना है और इससे भाजपा के नायकों में एक और राजा जुड़ जाएगा। हमें यह याद रखना चाहिए कि अंबेडकर पार्क में जिन व्यक्तियों की मूर्तियां लगी हैं, उनमें से कोई भी सामंत नहीं था और ना ही सामंती व्यवस्था का प्रतिपादक था। इन सभी ने दलित समुदाय को उसकी गुलामी से मुक्ति दिलाने के लिए अलग-अलग तरह से प्रयास किए। इन सभी ने दलितों की समानता की लड़ाई में भागीदारी की। राजाओं को तो केवल पहचान की राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए सामने लाया जा रहा है।

हिन्दू राष्ट्रवाद के लिए इतिहास बहुत महत्वपूर्ण है और इसलिए वह हिन्दू राजाओं का महिमामंडन करने के लिए कुछ भी करने को तैयार है। राज्यतंत्रों की शासन व्यवस्था का आज के युग में कोई भी समर्थन नहीं कर सकता। परंतु संप्रदायवादी राष्ट्रवादियों को सामंती काल के मूल्य प्रिय हैं और वे उन्हें पुनर्स्थापित करना चाहते हैं। केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह का यह कथन कि राणा प्रताप को ‘महान’ बताया जाना चाहिए, इसी रणनीति का भाग है। राजस्थान के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने अब यह दावा भी कर दिया है कि हल्दी घाटी की लड़ाई में अकबर नहीं बल्कि राणाप्रताप की विजय हुई थी। पहले तो संघ परिवार केवल इतिहास के तथ्यों के नई व्याख्या करता था। अब वह तथ्यों को ही बदल रहा है। एरिक हॉब्सबोन ने बिलकुल ठीक ही कहा था कि राष्ट्रवाद के लिए इतिहास वही है, जो कि नशाखोर के लिए अफीम। (अंग्रेजी से हिन्दी रूपांतरण अमरीश हरदेनिया) (लेखक आई.आई.टी. मुंबई में पढ़ाते थे और सन् 2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं।)

सवाल केवल एनडीटीवी पर हमले का नहीं

- नवल कु्मार के फ़ेसबुक वाल से साभार

एनडीटीवी की एंकर निधि राजदान द्वारा भाजपा के फ़ायरब्रांड प्रवक्ता संबित पात्रा को एक लाइव कार्यक्रम के दौरान बाहर निकाले जाने के बाद संस्थापक प्रणव राय के घर पर सीबीआई की छापेमारी को मीडिया पर हमले के रुप में देखा जा रहा है। लेकिन क्या यह सवाल केवल हमले तक सीमित है या फ़िर इसका कोई और पहलू भी है? सवाल यह भी कि विपक्षी दलों के जो नेता इस पूरे मसले पर हाय तौबा मचा रहे हैं, क्या वे अपने द्वारा शासित राज्यों में मीडिया को गुलाम नहीं मानते हैं? एक बड़ा सवाल यह भी कि क्या यह केवल आर्थिक और राजनीतिक हितों तक सीमित है या फ़िर इसके पीछे सामाजिक कारण भी हैं?

एक बड़ा उदाहरण बिहार की मीडिया का है। दिलचस्प यह है कि सभी प्रकार के सरकारी विज्ञापनों को सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के दायरे में जबरन शामिल करने के बाद भी जब मु्ख्यमंत्री नीतीश कुमार का हित नहीं सधा तब उन्होंने इस पूरे विभाग पर कब्जा बना रखा है। परिणाम है कि विधानसभा में सबसे बड़ा दल होने और सरकार में शामिल होने के बावजूद राष्ट्रीय जनता दल से जुड़ी खबरों को बिहार की मीडिया द्वारा चतुर्थ वरीयता मिलती है। अभी हाल ही में पटना से प्रकाशित एक बड़े अखबार समूह का विज्ञापन राज्य सरकार ने तबतक रोका जबतक कि उसके मालिक ने मुख्यमंत्री की चरणों में शीश नहीं नवाया। अखबार का कसूर केवल इतना था कि उसने अपने राजनीतिक पन्ने पर राजद की एक खबर को लीड बनाया था और जदयू की खबर को छोटा कर दिया गया था।

वैसे मीडिया में संक्रमण का सवाल कोई नया नहीं है। जब देश में ग्लोबलाइजेशन नहीं था तब भी मीडिया में खबरों को लेकर दांव-पेंच होते ही थे। सर्चलाईट जैसे अखबार भी तब अपने सामाजिक सरोकार के निर्वहन को लेकर पूरी तरह ईमानदार नहीं थे। दिनमान को लेकर भी तब कई तरह के सवाल उठते थे। हालांकि तब सवालों की आवृत्ति इतनी नहीं होती थी। एक वजह यह कि तब दलित और पिछड़ों में राजनीतिक चैतन्यता न्यून थी।

नब्बे के दशक में मंडल कमीशन लागू होने के साथ ही ग्लोबलाइजेशन ने मीडिया की परिभाषा को भी बदला। खबरें खबर से अधिक कारपोरेट उत्पाद बन गयीं तो बाद में मुकम्मिल तौर पर राजनीतिक हथियार भी। लेकिन राजनीति में वंचितों की हिस्सेदारी बढने के साथ अकुलाहट भी सामने आयी। मीडिया में हिस्सेदारी को लेकर सवाल इक्कीसवीं सदी में और भी मुखर हो गये जब वर्ष 2006 में अनिल चमड़िया ने राष्ट्रीय स्तर पर मीडिया में वंचितों की हिस्सेदारी को पूरे देश के साथ साझा किया। वहीं वर्ष 2009 में बिहार की मीडिया में हुए बदलाव की रुपरेखा प्रमोद रंजन ने सार्वजनिक किया।

अब सवाल यह है कि हम मीडिया से क्या अपेक्षा रखते हैं और हमारी अपेक्षायें क्यों हैं? क्या हम यह कबूलने को तैयार नहीं हैं कि मीडिया अब पूंजीपतियों की फ़ैक्ट्री है। हर फ़ैक्ट्री लगाने वाला मुनाफ़ा खोजता है फ़िर चाहे वह अडाणी हो या अंबानी या फ़िर प्रणय राय। सब का काम मुनाफ़ा कमाना ही है। लेकिन यह तय करना देश की जनता को है कि वह कम मुनाफ़ाखोर की मीडिया के साथ खड़ी है या फ़िर खुलेआम पत्रकारिता को तार-तार करने वालों की मीडिया के साथ। ऐसा नहीं हो सकता कि मीडिया वाले सरकारी विज्ञापनों के लिए सरकारों के आगे शीश भी नवायें और उनके उपर सरकारी दबिश न हो। फ़िर सरकार चाहे किसी की भी हो। हम्माम में सभी नंगे हैं।

 

मोदी सरकार के तीन साल

-राम पुनियानी

इस 26 मई को मोदी सरकार के तीन साल पूरे हो गए। इस अवसर पर विभिन्न शहरों में ‘मोदी फैस्ट’ के अंतर्गत धूमधाम से बड़े-बड़े समारोह आयोजित किए गए। इन समारोहों से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में देश समृद्धि की राह पर तेज़ी से अग्रसर हुआ है और कई उल्लेखनीय सफलताएं हासिल हुई हैं। मोदी को उनके प्रशंसक, ‘गरीबों का मसीहा’ बताते हैं। कई टीवी चैनलों और टिप्पणीकारों ने उनकी शान में कसीदे काढ़ने में कोई कसर बाकी नहीं रखी है।

असल में पिछले तीन सालों में क्या हुआ है?

एक चीज़ जो बहुत स्पष्ट है, वह यह है कि मोदी सरकार में सत्ता का प्रधानमंत्री के हाथों में केन्द्रीयकरण हुआ है। मोदी के सामने वरिष्ठ से वरिष्ठ मंत्री की भी कुछ कहने तक की हिम्मत नहीं होती और ऐसा लगता है कि कैबिनेट की बजाए इस देश पर केवल एक व्यक्ति शासन कर रहा है। यह तो सभी को स्वीकार करना होगा कि यह सरकार अपनी छवि का निर्माण करने में बहुत माहिर है। नोटबंदी जैसे देश को बर्बाद कर देने वाले कदम को भी सरकार ने ऐसे प्रस्तुत किया मानो उससे देश का बहुत भला हुआ हो। जहां लोगों का एक बड़ा हिस्सा सरकार द्वारा बिछाए गए विकास के दावों के मायाजाल में फंसा हुआ है, वहीं ज़मीनी स्तर पर हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। न तो महंगाई कम हुई है, न रोज़गार बढ़ा है और ना ही आम आदमी की स्थिति में कोई सुधार आया है। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में गिरावट आई है और किसानों की आत्महत्या की घटनाएं बढ़ी हैं। तमिलनाडु के किसानों द्वारा दिल्ली में किए गए जबरदस्त विरोध प्रदर्शन को सरकार के पिछलग्गू मीडिया ने अपेक्षित महत्व नहीं दिया। यही हाल देश के अन्य हिस्सों में हुए विरोध प्रदर्शनों का भी हुआ।

विदेशों में जमा काला धन वापस लाकर हर भारतीय के बैंक खाते में 15 लाख रूपए जमा करने का भाजपा का वायदा, सरकार के साथ-साथ जनता भी भूल चली है। पहले राम मंदिर के मुद्दे का इस्तेमाल समाज को धार्मिक आधार पर ध्रुवीकृत करने के लिए किया गया और अब पवित्र गाय को राजनीति की बिसात का मोहरा बना दिया गया है। गाय के नाम पर कई लोगों की पीट-पीटकर हत्या की जा चुकी है और मुसलमानों के एक बड़े तबके की आर्थिक रीढ़ तोड़ दी गई है। सरकार जिस तरह से गोरक्षा के मामले में आक्रामक रूख अपना रही है, उसके चलते, गोरक्षक गुंडों की हिम्मत बढ़ गई है और वे खुलेआम मवेशियों के व्यापारियों और अन्यों के साथ गुंडागर्दी कर रहे हैं। सरकारी तंत्र, अपराधियों को सज़ा दिलवाने की बजाए, पीड़ितों को ही परेशान कर रहा है।

सामाजिक स्तर पर पहचान के मुद्दे छाए हुए हैं। पिछली यूपीए सरकार भी अपनी सफलताओं का बखान करती थी परंतु कम से कम यह बखान लोगों के भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार संबंधी अधिकारों पर केन्द्रित था। अब तो चारों ओर झूठी वाहवाही और बड़ी-बड़ी डींगे हांकने का माहौल है। पाकिस्तान के मुद्दे पर सरकार जब चाहे तब आंखे तरेरती रहती है। सीमा पर रोज़ भारतीय सैनिक मारे जा रहे हैं परंतु आत्ममुग्ध सरकार, सर्जिकल स्ट्राईक का ढिंढोरा पीट रही है। कश्मीर के संबंध में सरकार की नीति का नतीजा यह हुआ है कि लड़कों के अलावा अब लड़कियां भी सड़कों पर निकलकर पत्थर फेंक रही हैं। कश्मीर के लोगों की वास्तविक समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। उनसे संवाद स्थापित करने में सरकार की विफलता के कारण, घाटी में हालात खराब होते जा रहे हैं।

हिन्दुत्ववादी देश पर छा गए हैं। शिक्षा के क्षेत्र का लगभग भगवाकरण हो गया है। विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर गंभीर हमले हुए हैं। ‘पारंपरिक ज्ञान’ को वैज्ञानिक सिद्धांतों पर तवज्ज़ो दी जा रही है और पौराणिक कथाओं को इतिहास बताया जा रहा है। यहां भी अतीत का महिमामंडन करने के लिए केवल ब्राह्मणवादी प्रतीकों जैसे गीता, संस्कृत और कर्मकांड को बढ़ावा दिया जा रहा है।

दिखावटी देशभक्ति का बोलबाला हो गया है। पूर्व केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री ने यह प्रस्तावित किया था कि हर विश्वविद्यालय के प्रांगण में एक बहुत ऊँचा खंबा गाड़ कर उस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाए। हर सिनेमा हॉल में फिल्म के प्रदर्शन के पहले राष्ट्रगान बजाया जाना अनिवार्य कर दिया गया है। एक अन्य स्वनियुक्त देशभक्त ने यह प्रस्तावित किया है कि हर विश्वविद्यालय में ‘देशभक्ति की दीवार’ हो, जिस पर सभी 21 परमवीर चक्र विजेताओं के चित्र उकेरे जाएं। समाज के सभी वर्गों का देश की उन्नति में योगदान होता है परंतु प्रचार ऐसा किया जा रहा है, मानो केवल सेना ही देश की सबसे बड़ी सेवा कर रही हो। जो किसान खेतों में काम कर रहे हैं और जो मज़दूर कारखानों में खट रहे हैं, क्या उनकी सेवाओं का कोई महत्व ही नहीं है? लाल बहादुर शास्त्री ने ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा दिया था। यह सरकार केवल जय जवान का उद्घोष कर रही है और किसान को विस्मृत कर दिया गया है।

देश में प्रजातंत्र सिकुड़ रहा है और बोलने की आज़ादी पर तीखे हमले हो रहे हैं। मीडिया का एक बड़ा तबका शासक दल के साथ हो लिया है और वह उन सब लोगों की आलोचना करता है, जो सरकार की नीतियों के विरोधी हैं। मीडिया ने प्रजातंत्र के चैथे स्तंभ और सरकार के प्रहरी होने की अपनी भूमिका को भुला दिया है। दाभोलकर, पंसारे और कलबुर्गी की हत्या के साथ देश में असहिष्णुता का जो वातावरण बनना शुरू हुआ था, वह और गहरा हुआ है। मुसलमानों के खिलाफ तो ज़हर उगला ही जा रहा है, दलित भी निशाने पर हैं।

आज देश में जिस तरह का माहौल बन गया है, उसे देखकर यह अहसास होता है कि केवल प्रचार के ज़रिए क्या कुछ हासिल नहीं किया जा सकता। लोगों के मन में यह भ्रम पैदा कर दिया गया है कि मोदी सरकार देश का न भूतो न भविष्यति विकास कर रही है और आम लोगों का भला हो रहा है।

परंतु हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि देश के कई हिस्सों में लोगों ने अपने विरोध, असंतोष और आक्रोष का जबरदस्त प्रदर्शन भी किया है। किसानों के एकजुट हो जाने के कारण, मजबूर होकर, सरकार को अपना भूसुधार विधेयक वापस लेना पड़ा। कन्हैया कुमार, रामजस कॉलेज, रोहत वेम्युला और ऊना के मुद्दों पर जिस तरह देश में वितृष्णा और आक्रोष की एक लहर दौड़ी, उससे यह साफ है कि सरकार की प्रतिगामी नीतियों को चुनौती देने वालों की संख्या कम नहीं है। जहां हिन्दुत्ववादी तत्वों का स्वर ऊँचा, और ऊँचा होता जा रहा है, वहीं देश भर में चल रहे कई अभियानों और आंदोलनों से यह आशा जागती है कि भारतीय संविधान के मूल्यों पर आधारित बहुवादी समाज के निर्माण के स्वप्न को हमें तिलांजलि देने की आवश्यकता नहीं है। (अंग्रेजी से हिन्दी रूपांतरण अमरीश हरदेनिया) (लेखक आई.आई.टी. मुंबई में पढ़ाते थे और सन् 2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं।)

संपादकीय : सामाजिक न्याय की नयी पीढी के नेता समझें अपनी जिम्मेवारी

दोस्तों, सत्ता चाहे लोकतांत्रिक हो या फ़िर प्रजातांत्रिक, उसका चरित्र एक जैसा ही होता है। भारत के इतिहास को देखें तो अब तक यही होता आया है। यहां तक कि आजादी के बाद जबकि देश में लोकतंत्र है, सत्तावर्ग ने अपना चरित्र नहीं बदला है। लेकिन 90 के बाद जबसे सत्ता पर दलितों और पिछड़ों ने कब्जा जमाया है, सामंती सत्ता वर्ग ने अपने आचरण में एक बदलाव किया है। वह यह साबित करने पर आमादा है कि दलित और पिछड़े सत्ता के योग्य नहीं हैं। भाजपा इसी ढर्रे पर काम कर रही है।

खासकर लालू प्रसाद के बारे में तमाम तरह की वैसी खबरें जिनके कारण उनकी छवि धूमिल हो सके, भाजपा ने बड़ी ही सुनियोजित तरीके से फ़ैलाना शुरु किया है। उसके इस प्रयास में सवर्ण मीडिया ने भी खूब साथ निभाया है। प्रमाण यह कि बीते दिनों श्री प्रसाद के 22 ठिकानों पर आयकर विभाग द्वारा छापेमारी की खबर फ़ैलायी गयी। लेकिन किसी भी मीडिया ने इसकी संपुष्टि नहीं की। भारत की पत्रकारिता के इतिहास में यह पहला मौका था जब एक साथ सभी सवर्ण मीडिया ने सुनियोजित ढंग से एक ही झूठ को प्रकाशित किया।

वैसे यह भी सही है कि लालू प्रसाद और नीतीश कुमार जैसे दलित व पिछड़े वर्ग के नेता अभी भी न तो भाजपा की नकारात्मक राजनीति का तोड़ खोज पा रहे हैं और न ही सवर्ण मीडिया का कोई विकल्प। इसलिए इनकी राजनीतिक विफ़लता की भी आलोचना की जानी चाहिए। इन नेताओं को यह समझ लेना चाहिए कि उन्हें जो सत्ता मिली है वह बहुसंख्यकों की उम्मीद पर आधारित है। इस उम्मीद की बुनियाद भाजपा व आरएसएस के निशाने पर है। वह धर्म के सहारे इसे खोखला कर रही है। दूसरी बात यह भी कि लालू-नीतीश जैसे नेताओं को चुनावी राजनीति से अधिक सामाजिक राजनीति को अपना आधार बनाना चाहिए।

बहरहाल देश के बहुसंख्यक यानी दलित-पिछड़ों के समक्ष संकट यह है कि सामाजिक न्याय की राजनीति करने वाली नयी पीढी के नेता सामाजिक न्याय के प्रति ईमानदार नहीं हैं। अखिलेश यादव को इसकी सजा भी मिल चुकी है।

डा. आंबेडकर को ठिकाने लगाने की आरएसएस एक और कोशिश

- कँवल भारती

दूरदर्शन पर खबर थी, रामानुजाचार्य की जयंती पर, प्रधानमंत्री मोदीजी ने कहा है कि रामानुजाचार्य के दर्शन से डा. आंबेडकर भी प्रभावित थे. यह जुमलेबाज मोदी जी का झूठ नहीं है, बल्कि यह वह एजेंडा है, जिसे आरएसएस ने डा. आंबेडकर के लिए तैयार किया है. इस एजेंडे के दो बिंदु हैं, एक- डा, आंबेडकर को मुस्लिम विरोधी बनाना, और दो, डा. आंबेडकर को हिन्दूवादी बनाना. वैसे, उन्हें मुस्लिम-विरोधी बनाना भी हिन्दूवादी बनाना ही है. यह काम वो नब्बे के दशक से ही कर रहे हैं. 1996 में मैंने ह्लडा. आंबेडकर को नकारे जाने की साजिशह्व किताब लिख कर आरएसएस के इस एजेंडे का खंडन किया था. उनका सबसे खतरनाक प्रचार, जिसे वे आज भी जोरशोर से कह रहे हैं, वह यह है कि डा. आंबेडकर ने अपने संघर्ष की प्रेरणा भगवद्गीता से ली थी. इस संबंध में 7 दिसम्बर 1944 की वह कतरन आज भी देखी जा सकती है, जिसे फ्री प्रेस आफ इंडिया ने जारी किया था. उसमें के. सुब्रामणियम ने लिखा है, ह्लडा. आंबेडकर ने गीता के अध्ययन में पन्द्रह वर्ष व्यतीत किये हैं. उनकी खोज यह है कि गीता का लेखक या तो पागल था, या मूर्ख था.ह्व भला, ऐसा व्यक्ति गीता से क्या प्रेरणा लेगा?

अब नया शगूफा यह छोड़ा गया है कि डा. आंबेडकर पर रामानुजाचार्य का प्रभाव पड़ा था. एक झूठ को अगर हजार बार हजार लोग एक साथ बोलेंगे, तो वह लोगों को सच लगने लगता है. आरएसएस के झूठे एजेंडे का यही मकसद है. आरएसएस के सामने वह दलित समाज है, जो हिन्दू रंग में रंगा हुआ है और जिसका पढ़ाई-लिखाई से कोई वास्ता नहीं है. वह बस आंबेडकर की माला जपने वाला समुदाय है. ऐसा समुदाय आरएसएस के बहुत काम का है, क्योंकि वह उसका ब्रेनवाश आसानी से कर सकता है.

रामानुजाचार्य जैसों के दर्शन पर डा. आंबेडकर की किताब ह्लरिडिलस आफ हिन्दुइज्मह्व को ही पढ़ना काफी होगा. रामानुजाचार्य वह दार्शनिक थे, जिन्होंने ब्रह्म में सगुण को प्रवेश कराया है, और नाम, रूप, लीला, धाम, वर्ण, का मार्ग प्रशस्त किया है. यादव प्रकाश उनके गुरु थे, जिनसे उन्होंने वेदों की शिक्षा ली थी. ऐसे वेद्मार्गी, सगुण मार्गी और वर्ण मार्गी रामानुजाचार्य अम्बेडकर को प्रभावित करेंगे. ऐसा सोचना भी हास्यास्पद होगा.

एक क्षण को अगर मान भी लिया जाये, कि रामानुजाचार्य से डा. आंबेडकर प्रभावित हुए थे, तो फिर उन्होंने हिन्दूधर्म का परित्याग क्यों किया? वेद-विरोधी, वर्ण-विरोधी और ईश्वर-विरोधी बौद्धधर्म को क्यों अपनाया था?  आरएसएस के लोग शायद इसका भी तोड़ निकाल ही रहे होंगे.(लेखक उत्तरप्रदेश के चर्चित दलित साहित्यकार व चिंतक हैं)

What is our Nationality: Indian or Hindu?

- Ram Puniyani

Debate around the words Hindu, Hinduism, Hindutva is not new. Recently the assertion by Mohan Bhagwat, the Sarsanghchalk (Supreme Dictator) of RSS that ‘everyone living in India is Hindu’ and that Muslims might be Muslim by religion but they are Hindus by nationality’, is yet another interpretation of Word Hindu. He said that this is Hindustan so all those living here are Hindu. Both these, Hindu is a nationality and we are Hindustan are erroneous formulations in today’s context and need to be examined from the point of view of Indian Constitution. 

Bhagwat at times says that Muslim’s way of worship-faith might have changed but their Nationality remains Hindu! Over nearly two decades ago when Murli Manohar Joshi, was the President of BJP, he had stated that we are all Hindus, Muslims are Ahmadiyya Hindus and Christians are Christi Hindus. These statements are part of the newer formulation of RSS which in a way are in tune with the ideology of RSS, which regards India as a Hindu nation. Their earlier ideologues had a different take on the issue.

 

Their current formulation is based on the confusion about the word Hindustan. Simply put the RSS ideologues state that this country is Hindustan, as all people living here are Hindus. This is a circular argument. The word Hindustan needs to be re-examined in today’s context as many words keep changing their usage historically. One knows that the word Hindu is not there in Holy Hindu scriptures. The word Hindu was coined by those coming from Western Asia. They identified this land in the name of the river Sindhu. They use the word H more often than the word S, so Sindhu became Hindu. The word Hindu thus begins as a geographical category. Built around this; the word Hindusthan comes up, the land on East of river Sindhu.

 

The religious traditions prevalent in this part of the World were multiple and diverse. Unlike in Islam and Christianity Hinduism has no prophet. Origin of the diverse traditions here are of local origin. In due course the word Hindu came to be used for conglomeration of diverse religious traditions prevalent here, and these traditions were lumped together as Hinduism. Within Hinduism there are two major types of traditions, the dominant Brahmanical one and the Shamanic traditions, like Nath, Tantra, Bhakti, Shaiva and Siddhanta. During colonial period the identity of Hinduism was constructed more around Brahmanical norms.

 

This historical identification of our region as Hindustan was not around religion, but around geographical area, Hind-Hindu. The confusion is due to the fact that same word Hindu was initially used for the ‘area’ and then for religious traditions. Today the word Hindustan is not appropriate, as per the Indian Constitution and as per the global recognition now we are India not Hindustan. ‘India that is Bharat’ to be more precise! That’s what our Constitution says we are. So what is our Nationality, is it Indian or Hindu? RSS refused to be part of the process of ‘India as a nation in the making’, it was not a part of freedom movement. The rise of RSS politics came to oppose the concept of India. Concept of India was brought up by the modern sections of society, the industrialists, workers and modern educated classes. This concept had parallel and integrated aspirations of women and Dalits. Here it is important to see that India stands for Liberty, Equality and Fraternity. Hindu nation stands for pre-Modern values in the modern garb. India has the Constitution which recognizes diversity and pluralism. Hindu nation harps back to imaginary glories of the past where birth based hierarchies of caste and gender were the core aspect of social laws. That’s how RSS ideologues are uncomfortable with Indian Constitution and always invoke Holy books (i.e. Manusmriti for example) as the model code for current times.

 

What about the religious minorities, Muslims and Christians being Hindus? As per the founder of Hindutva ideology, Vinayak Damodar Savarkar, Hindu is one who regards this land from Sindhu to seas as his father land and holy land. In his definition of Hindus, Christians and Muslims are not called Hindus, as per him they have different nationality. The second major Hindutva ideologue Golwalkar also follows this line and in his book ‘Bunch of Thoughts’, regards Muslims and Christians as ‘threat to ‘Hindu nation’. It is lately that RSS after gaining political strength wants to assimilate the religious minorities and wants to impose Hindu norms on these minority communities, so the assertion that they may be so and so but their nationality is Hindu. As per the Indian Constitution our nationality is Indian. So the contrast between RSS ideology and ideology of Gandhi, Nehru, Ambedkar and myriad other; who stood for Indian nationalism. Indian Constitution with its libertarian message of justice and equality is in contrast to the injustice inherent in Manu Smriti, the holy Hindu scripture.

 

To say that Muslims have merely changed their mode of worship is a deliberate move to co-opt them into the fold of Hindu nationalism. Adopting Islam not merely change in ways of worship, it is a faith in a different religion. This can apply to Christianity also. So Muslims have Islam, Christians have Christianity, Hindus have Hinduism, but their nationality is Indian not Hindu. To expect that Muslims will also have Aarti and chant ‘Bharat Mata ki Jai’ is not as per Indian Constitution. Aarti is a Hindu ritual. If people of different religions wish to adopt the holy rituals of other religions it’s their choice. It may relate to Aarti or Namaz or a prayer in Church. But to expect that they should do it; is anti democratic and against the norms of Indian Constitution. Many Muslims do feel that they can bow only to Allah and no other deity, so many of them are opposed to chanting ‘Bharat mata ki jai’ (Hail mother India), so be it. It’s what is in tune with our Constitution.

सवालों की आग...

- जाबिर हुसेन

आज की हमारी सभ्य दुनिया जिस सामाजिक अवस्था को विकास के नाम से जानती-पुकारती है, क्या वो करोड़ों लोगों के लिए मौत की खाई नहीं है?

मेरे जैसे लोगों को, आज की तारीख में, ऐसा मानने में, कोई परेशानी नहीं है। परेशानी इस कारण नहीं है कि विकास की इस सामाजिक अवस्था ने देश के सामने जो चुनौतियां खड़ी की हैं, उनसे हमारा समाज किसी तौर पर विचलित दिखाई नहीं देता। वो इंच-भर भी, आगे या पीछे, हिल-डोल कर, अपने इर्द-गिर्द मंडराती मौत की छाया को पहचानने की कोशिश नहीं करता। हम, जो इस समाज का एक अहम हिस्सा हैं, अपने दिमाग में पलने वाले सवालों की आग से खुद को, और एक प्रकार से, पूरे समाज को बिल्कुल अलग करके जीते-मरते हैं। हमारी अपनी दुनिया में इन सवालों के लिए कोई जगह कहां रह गई है!

दिमाग में सवालों की आग हमेशा-हमेशा के लिए बुझ जाए तो नए विचारों के बीज कहां फूटेंगे? उस सामाजिक अवस्था में, जिसका मैंने ऊपर जिक्र किया, विचारों की खेती आखिर कैसे हो सकेगी!

लेकिन विचारों से हमारी दूरी जितनी भी हो, क्या ये सही नहीं कि विचार ही संकट ही हर घड़ी में, अपनी साहसिकता के कारण, हमारा बचाव भी करते हैं? हमारी उपेक्षा, हमारे तिरस्कार के बावजूद, विचार ही आखिरकार हर लड़ाई में हमारे लिए कवच का काम करते हैं। और हम अपने दुश्मनों से दो-दो हाथ करके सुरक्षित अपनी दुनिया मे लौट आते हैं।

विचारों पर हमले कब रुके हैं, जो अब रुकेंगे। विचारों की सच्चाई को आंकने के लिए भी तो इन पर हमलों का जारी रहना जरूरी है। हमले न हों, हमले धीमे पड़ जाएं, तो दिमाग में पलने वाले सवाल क्या चैन की नींद नहीं सो जाएंगे?

इसलिए सवालों की आग को जिंदा रखना, और इस आग में विचारों के प्रति अपनी वफादारी का लहू डालते रहना निहायत जरूरी है! (लेखक पूर्व राज्यसभा सांसद सह विधान परिषद के पूर्व सभापति हैं)

भारत की कश्मीर नीतिः आगे का रास्ता

-राम पुनियानी

कश्मीर घाटी में अशांति और हिंसा, जिसने बुरहान वानी की जुलाई 2016 में फर्जी मुठभेड़ में हत्या के बाद से और गंभीर रूप ले लिया है, में कोई कमी आती नहीं दिख रही है। बल्कि हालात और खराब होते जा रहे हैं। अप्रैल 2017 में हुए उपचुनावों में बहुत कम मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मतदान का प्रतिशत सात के आसपास था। इन उपचुनावों के दौरान हिंसा भी हुई जिसमें कई नागरिक और सुरक्षाकर्मी मारे गए। हम सबने देखा कि किस तरह एक कश्मीरी युवक को सेना की गाड़ी से बांध दिया गया ताकि पत्थरबाज, गाड़ी पर पत्थर न फेंके। यह घटना दिल दहला देने वाली थी।

घाटी में पत्थरबाजी में कोई कमी नहीं आ रही है। पत्थर फेंकने वाले युवाओं को लोग अलग-अलग दृष्टिकोणों से देख रहे हैं। शेख अब्दुल्ला ने चुनाव की पूर्व संध्या पर कहा कि पत्थर फेंकने वाले अपने देश की खातिर ऐसा कर रहे हैं। उनके इस बयान की कटु निंदा हुई। कुछ लोगों ने इसे केवल एक चुनाव जुमला निरूपित किया।

मीडिया के एक तबके का कहना है कि पत्थर फेंकने वाले पाकिस्तान समर्थक हैं और हमारे पड़ोसी देश के भड़काने पर ऐसा कर रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि उन्हें ऐसा करने के लिए पैसा मिलता है। कश्मीर में पत्थरबाजी का इस्तेमाल विरोध प्रदर्शन के लिए लंबे समय से किया जाता रहा है परंतु हाल के कुछ महीनों में इस तरह की घटनाओं में जबरदस्त वृद्धि हुई है। युवा दो पाटों के बीच पिस रहे हैं। एक ओर हैं आतंकवादी और अतिवादी और दूसरी ओर, सुरक्षाबल। दोनों ही उन्हें डरा धमका रहे हैं और उनके खिलाफ हिंसा कर रहे हैं। यह साफ है कि जब भी दमनचक्र तेज़ होता है तब पत्थरबाजी की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं। मकबूल भट्ट को 1984 में फांसी दिए जाने के बाद, अफज़ल गुरू को 2013 में मृत्युदंड दिए जाने के बाद और अब बुरहान वानी की मौत के बाद इस तरह की घटनाओं में इजाफा हुआ है।

ये लड़के कौन हैं जो पत्थर फेंकते हैं? क्या वे पाकिस्तान से प्रेरित और उसके द्वारा प्रायोजित हैं? सुरक्षा बलों की कार्यवाहियों में घाटी में सैंकड़ों लोग मारे जा चुके हैं, हज़ारों घायल हुए हैं और कई अपनी दृष्टि गंवा बैठे हैं। मीडिया का एक हिस्सा चिल्ला-चिल्लाकर कह रहा है कि पत्थरबाजी के पीछे पाकिस्तान है और वही पत्थरबाजों को धन दे रहा है। जो प्रश्न हमें अपने आप से पूछना चाहिए वह यह है कि क्या कोई भी युवा, किसी के भड़काने पर या धन के लिए अपनी जान दांव पर लगा देगा। क्या वह अपनी आंखें खो देने या गंभीर रूप से घायल होने का खतरा मोल लेगा? पत्थरबाजों में से अनेक किशोरवय के हैं और आईटी का अच्छा ज्ञान रखते हैं। परंतु वे घृणा से इतने लबरेज़ हैं कि वे अपनी जान और अपने भविष्य को दांव पर लगाने के लिए तैयार हैं। इससे यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि वे कितने अधिक कुंठित हैं।

केवल मीडिया के एक छोटे से तबके ने इस मुद्दे की गहराई में जाकर पत्थरबाजों से बातचीत की। उन्होंने जो कुछ कहा उससे कश्मीर घाटी में कानून और व्यवस्था की स्थिति के बारे में हमारी सोच को पूरी तरह से बदल देने की क्षमता है। इनमें से कई ऐसे परिवारों से हैं, जिन्हें अब जिंदगी से कोई उम्मीद बाकी नहीं है। उन्होंने शारीरिक प्रताड़ना झेली है, उन्हें हर तरह से अपमानित किया गया है और उनके साथ मारपीट आम है। उनके लिए पत्थर फेंकना एक तरह से कुंठाओं से मुक्त होने का प्रयास है। उनमें से कुछ निश्चित तौर पर पाकिस्तान समर्थक हो सकते हैं परंतु मूल मुद्दा यही है कि घाटी के युवाओं में गहन असंतोष और अलगाव का भाव घर कर गया है और इसका कारण है वह पीड़ा और यंत्रणा, जो उनके क्षेत्र में लंबे समय से सेना की मौजूदगी के कारण उन्हें झेलनी पड़ रही है। बुरहान वानी की हत्या के बाद, पीडीपी और नेशनल कान्फ्रेंस, दोनों को ही यह अहसास हो गया था कि वहां स्थितियां बिगड़ सकती हैं। राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, असंतुष्टों के साथ बातचीत करना चाहती थीं परंतु सरकार में उनकी गठबंधन साथी भाजपा ने उनके इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। महबूबा मुफ्ती का मानना है कि केवल बातचीत से ही समस्या का हल निकल सकता है। इसके विपरीत, भाजपा, गोलाबारूद और सेना की मदद से असंतोष को कुचल देना चाहती है।

ऐसे समय में हमें घाटी में शांति स्थापना के पूर्व के प्रयासों को याद करना चाहिए। यूपीए-2 ने वार्ताकारों के एक दल को कश्मीर भेजकर समस्या का अध्ययन करने और उसका हल सुझाने की ज़िम्मेदारी सौंपी थी। इस दल में कई प्रतिष्ठित नागरिक शामिल थे। दल ने सुझाव दिया था कि कश्मीर विधानसभा की स्वायत्तता बहाल की जाए, जिसका प्रावधान कश्मीर की विलय की संधि में था। दल ने यह सुझाव भी दिया था कि असंतुष्टों के साथ बातचीत के रास्ते खोले जाएं, सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम को रद्द किया जाए और पाकिस्तान के साथ चर्चा हो।

आज ज़रूरत इस बात की है कि हम विलय की संधि की शर्तों को याद करें और वार्ताकारों की सिफारिशों को गंभीरता से लें। कश्मीर के भारत में विलय के 70 साल बाद भी हमें यह याद रखना चाहिए कि भारतीय राष्ट्र निर्माताओं का कभी यह इरादा नहीं था कि कश्मीर का भारत में जबरदस्ती विलय करवाया जाए या वहां व्याप्त असंतोष को सेना के बूटों तले कुचला जाए। भारत के तत्कालीन उपप्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने 30 अक्टूबर, 1948 को बंबई में एक आमसभा को संबोधित करते हुए कहा थाः ‘‘कुछ लोग यह मानते हैं कि हर मुस्लिम-बहुल इलाके को पाकिस्तान का हिस्सा होना चाहिए। वे यह पूछते हैं कि हमने कश्मीर को भारत का भाग बनाने का निर्णय क्यों लिया है? इस प्रश्न का उत्तर बहुत आसान है। हम कश्मीर में इसलिए हैं क्योंकि कश्मीर के लोग ऐसा चाहते हैं। जिस क्षण हमें यह एहसास होगा कि कश्मीर के लोग यह नहीं चाहते कि हम वहां रहें, उसके बाद हम एक मिनट भी वहां नहीं रहेंगे...हम कश्मीरीयों को दगा नहीं देंगे’’ (द हिन्दुस्तान टाईम्स, 31 अक्टूबर, 1948)।

कश्मीर में स्थिति अत्यंत गंभीर है और केन्द्र सरकार के मनमानीपूर्ण व्यवहार के कारण दिन प्रतिदिन और गंभीर होती जा रही है। अगर हम स्वर्ग जैसी इस भूमि पर शांति चाहते हैं तो हमें महबूबा मुफ्ती और शेख अब्दुल्ला जैसे व्यक्तियों के विचारों का भी सम्मान करना होगा। स्थायी शांति तभी स्थापित हो सकती है जब हम लोगों के दिलों को जीतें। अति-राष्ट्रवादी फार्मूलों से काम नहीं चलेगा। (अंग्रेजी से हिन्दी रूपांतरण अमरीश हरदेनिया) (लेखक आई.आई.टी. मुंबई में पढ़ाते थे और सन् 2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं।)

महात्मा गांधी और महात्मा फुले...

- प्रेम कुमार मणि

गाँधी का जीवन चरित एक संत सदृश था . कुछ केलिए वह साबरमती के संत थे ,तो कुछ केलिए महात्माजी . हमारे देश में संत -महात्माओं की एक समृद्ध परंपरा है .देश के सबसे बड़े सांस्कृतिक आंदोलन , भक्ति आंदोलन , में इन संतों ने ही ईश्वर के नाम पर समानता की गुहार लगाई थी . '-जात- पात पूछे नहीं कोई ,हरी को भजे सो हरी का होइ ' .

उन्नीसवीं सदी में इस संत -मत को एक सामाजिक - राजनीतिक आयाम दिया महाराष्ट्र के जोतिबा फुले(1827 -1891 ) ने .यही समय था जब बंगाली भद्रवर्ग का एक हिस्सा नवजागरण के फलसफे गढ़ रहा था .युवा फुले ने समाज के वंचित तबकों के लिए वास्तविक आजादी का उद्घोष किया . उन्होंने आतंरिक उपनिवेशवाद , यानि ब्राह्मणवाद ,के खिलाफ खुला जंग छेड़ दिया ,जैसा मध्यकाल में कबीर -रैदास ने किया था .वह भारतीय किसानों के लिए संघर्ष करने वाले प्रथम योद्धा भी थे .1848 में ,ठीक उस वक़्त जब तीस वर्षीय कार्ल मार्क्स यूरोप में कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो रख रहे थे ,तब भारत के एक कोने में इक्कीस वर्षीय फुले वंचितों के लिए स्कूल खोल रहे थे . प्रोमेथ्युस की तरह ज्ञान की ज्योति वंचितों के बीच बिखेर रहे थे . फुले को प्रिटोरिया में अंग्रेजों द्वारा नहीं ,अपने गाँव में ही कुछ लोगों द्वारा बैलगाड़ी से जबरन उतार दिया गया था ,क्योंकि वह शूद्र थे . गाँधी आधुनिक सभ्यता को भारत केलिए विनाशकारी मानते थे ,फुले ब्राह्मणवादी सभ्यता को .

फुले और गाँधी दोनों महात्मा थे .किन्तु गाँधी संतों की वैचारिकता से दूर हटते गए .वह अपनी धज में ही महात्मा रह गए सभी संतों ने वर्णवाद और जातिवाद को नकारा , गाँधी ने इसे स्वीकृति दी . शायद उनकी दृष्टि में बाह्य उपनिवेशवाद से लड़ने केलिए आंतरिक उपनिवेशवाद को नजरअंदाज करना आवश्यक था . और यदि यही सच है ,तब उनके संत -महात्मा होने पर प्रश्नचिन्ह है . क्या यह एक महात्मा की महात्मा से मुठभेड़ है ?(लेखक पूर्व विधान पार्षद सह साहित्यकार हैं)

 

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News Update

बिहार की बेटी मीरा कुमार बनीं राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार, पुनर्विचार को लालू ने दी नीतीश को सलाह

पटना(अपना बिहार, 23 जून 2017) - पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को विपक्ष ने अपने साझे उम्मीदवार के रुप में नामित किया है। विपक्ष ने गुरुवार को एक बैठक कर राष्ट्रपति पद के लिए लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। इस बैठक के बाद पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए नीतीश कुमार के फैसले पर राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने कहा कि जेडीयू को अपने फैसले पर एक बार दोबारा विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह विचारधारा का अंतर है अगर कांग्रेस भी उन्हें कहती कि बीजेपी के कैंडिडेट को समर्थन करने के लिए तो भी मैं ऐसा कभी नहीं करता। उन्होंने यह भी कहा कि जदयू के मुताबिक उसने व्यक्ति की सुंदरता व सज्जनता के आधार निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विचारधारा किसी व्यक्ति की सुंदरता पर निर्भर नहीं करती है।

लालू प्रसाद ने पत्रकारों से कहा कि बैठक में पहले फैसला हुआ था कि हम एनडीए के उम्मीदवार के खिलाफ अपना उम्मीदवार उतारेंगे। लालू ने कहा, फिर जाने क्या हुआ और नीतीश ने कोविंद को समर्थन दिया। उन्होंने कहा, नीतीश से फोन पर बात हुई थी और उन्होंने कहा कि ये मेरी निजी राय थी। मैंने उन्हें कहा था कि ये ऐतिहासिक गलती कभी ना करें। राजद प्रमुख ने पत्रकारों से कहा कि हमें बिहार में महागठबंधन तोड़ना नहीं है और इसलिए हम जेडीयू से मांग करेंगे कि वह अपने फैसले पर दोबारा विचार करें।

वहीं जेडीयू प्रवक्ता केसी त्यागी ने लालू के बयान पर कहा है कि रामनाथ कोविंद को समर्थन देने का फैसला कई बातों पर विचार करने के बाद लिया गया है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक फैसले मिनट और सेकेंड में नहीं बदले जाते हैं।

सरकार मेहरबान तो भूमिहार बना स्टेट टापर, नहीं उठ रहा कोई सवाल

पटना(अपना बिहार, 23 जून 2017) - कल मैट्रिक परीक्षा का परिणाम सार्वजनिक किया गया। खास खबर यह कि इस बार एक भूमिहार टापर बना तो किसी भी सवर्ण मीडिया ने उसपर कोई सवाल खड़ा नहीं किया। बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर के मुताबिक 2016 की तुलना में इस बार  रिजल्ट में 2.97% बढ़ोतरी हो पायी है। उन्होंने बताया कि 50.12% परीक्षार्थी पास हुए हैं। श्री गोविंद हाइस्कूल, मानो, लखीसराय के प्रेम कुमार स्टेट टॉपर बने हैं. उन्हें 500 में 465 यानी 93% अंक प्राप्त हुए हैं। वहीं, सेकेंड और थर्ड टॉपर  सिमुलतला आवासीय स्कूल की छात्राएं हैं। इस स्कूल की भाव्या कुमारी 464 अंकों के साथ सेकेंड और हर्षिता कुमारी 462 अंकों के साथ थर्ड टॉपर बनी हैं। भाव्या बेगूसराय और हर्षिता अरवल की रहनेवाली हैं। टॉप-10 में शामिल 22 परीक्षार्थियों में से 12 सिमुलतला आवासीय स्कूल के ही हैं।

गुजरात में कुर्सी बचाने के लिए नरेन्द्र मोदी ने बनाया रामनाथ कोविन्द को मोहरा

पटना(अपना बिहार, 23 जून 2017) - भाजपा द्वारा घोषित राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद कोली बिरादरी से आते हैं। कोली बिरादरी के अखिल भारतीय संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। यह बिरादरी गुजरात-महाराष्ट्र में पिछड़ी जातियों की सूचि में शामिल है।उत्तर प्रदेश में यह अनुसूचित जाति है। गुजरात में संख्या की दृष्टिकोण से यह ताक़तवर जाति है। गुजरात की कुल आबादी में यह 24 प्रतिशत है। वहाँ की आबादी में  यह 18 प्रतिशत है।अगर अठारह प्रतिशत भी माना जाय तो वोट की राजनीति में यह संख्या बहुत माने रखती है।

देश की राजनीति से रुचि रखनेवाले जानते हैं कि गुजरात में पटीदार बिरादरी के लोग संपन्न माने जाते हैं।किसानी के अतिरिक्त कपड़ा, शिक्षा, भवन निर्माण तथा छोटे और मध्यम कल कारख़ानो का स्वामित्व भी इनके पास रहा है।लेकिन किसानी की हालत ख़राब है।अर्थव्यवस्था में गंभीर मंदी की वजह से छोटे और मध्यम क्षेत्र के कल-कारख़ाने या तो बंद हैं या बीमार हैं।अपनी इस हालत के लिए सरकार की नीतियों को वे जवाबदेह मानते हैं।इसलिए यह बिरादरी गुजरात में सरकार के ख़िलाफ़ आंदोलन की राह पर है।इस आंदोलन में हार्दिक पटेल का नाम काफ़ी उछला।हार्दिक बिहार भी आकर नीतीश कुमार से मिले थे और अपने आंदोलन के लिए अपना समर्थन माँगा था।गुजरात की आबादी में पटीदार 12-13 प्रतिशत हैं।कांग्रेसी मुख्यमंत्री माधव सिंह सोलंकी ने जब गुजरात में पिछड़ों के लिए आरक्षण लागू किया था तब उसके विरोध की अगुवाई पटीदारों ने ही की थी।राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ उस आरक्षण विरोधी आंदोलन का रणनीतिकार था।केशो भाई पटेल उसी आंदोलन से उभर कर सामने आए थे।उसी आंदोलन के बाद भाजपा की सरकार बनी और केशो भाई उसके मुख्यमंत्री।कहा जा सकता है की गुजरात में भाजपा की सरकार बनवाने में पटेलों की मुख्य भूमिका रही है।

आज पटेल वहाँ की सरकार के ख़िलाफ़ दिखाई दे रहे हैं।अगले वर्ष होने वाले वहाँ के विधान सभा चुनाव में पटेलों का वोट मिलेगा या नहीं इसको लेकर भाजपा आश्वस्त नहीं है।गुजरात का चुनाव नरेंद्र मोदी और अमित साह के लिए उत्तर प्रदेश के चुनाव से कम महत्वपूर्ण नहीं है।वहाँ की हार इन दोनों की व्यक्तिगत हार मानी जाएगी।

बहरहाल रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति बनाने के पीछे उनका दलित होना या सज्जन और भद्र मानुष होना कोई मतलब नहीं रखता है।इसका असली मक़सद हर हाल में गुजरात का चुनाव जीतना है।इसलिए कोविंद की जाति कोलियों का अठारह प्रतिशत बहुत माने रखता है। वोट की राजनीति में येन केन वोट हासिल करना कोई अपराध नहीं है।सब यह कर रहे हैं।

सवर्ण मीडिया ने फ़िर फ़ैलाया लालू को लेकर यह अफ़वाह

पटना(अपना बिहार, 20 जून 2017) - देश की सवर्ण मीडिया ने एक बार फ़िर राजद प्रमुख लालू प्रसाद और उनके परिजनों को बदनाम करने के लिए अफ़वाह फ़ैलाया है। देश के लगभग सभी अखबारों में खबर प्रकाशित की गयी है कि आयकर विभाग ने राज्य सभा सांसद डा मीसा भारती, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव की कथित तौर पर दिल्ली और गुड़गांव के इलाके में अचल संपत्ति को अस्थायी तौर पर जब्त कर लिया गया है। हालांकि किसी भी अखबार ने इसकी पुष्टि नहीं की है कि इसकी सूचना उन्हें कहां से मिली है। बताते चलें कि इससे पहले सवर्ण मीडिया ने यह अफ़वाह भी फ़ैलाया था कि राजद प्रमुख लालू प्रसाद के 22 ठिकानों पर छापेमारी की गयी है, लेकिन तब किसी भी अखबार ने इसका खुलासा नहीं किया था कि किन जगहों पर छापेमारी हुई और क्या बरामद किया गया।

कोविन्द बने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार

पटना(अपना बिहार, 20 जून 2017) - राज्यपाल रामनाथ कोविन्द को भाजपा ने राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है। कल दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने इसकी घोषणा की। वहीं इस आशय की जानकारी मिलने के बाद श्री कोविन्द कल देर शाम दिल्ली पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व अमित शाह से मुलाकात की। इससे पहले कल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनसे मिलकर बधाई दी पत्रकारों से बातचीत में कहा कि श्री कोविन्द को उम्मीदवार बनाये जाने पर उन्हें व्यक्तिगत खुशी हुई है। बताते चलें कि यूपीए सहित संपूर्ण विपक्ष आगामी 22 जून को बैठक कर अपने साझा उम्मीदवार के बारे में फ़ैसला करेगी।

मेजबान बने सीएम, लालू सहित अनेक दिग्गज हुए इफ़्तार में शामिल

पटना(अपना बिहार, 18 जून 2017) - कल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पाक माह रमजान के मौके पर दावत-ए-इफ़्तार का आयोजन किया। इस मौके पर वे एक मेजबान के रुप में नजर आये। इस दावत में राज्यपाल रामनाथ कोविंद और राजद प्रमुख लालू प्रसाद, विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी सहित कई दिग्गज नेता मौजूद रहे। मु्ख्यमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा एवं उसके सहयोगी दलों के नेताओं को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे दावत में शामिल नहीं हुए। वहीं दावत के मौके पर मुख्यमंत्री ने रोजेदारों के साथ राज्य और देश में अमन-चैन व तरक्की की दुआयें मांगी।

तेजप्रताप के पेट्रोल पंप लाइसेंस रद्द करने के मोदी सरकार के फ़ैसले पर अदालत ने लगायी रोक

पटना(अपना बिहार, 18 जून 2017) - पटना व्यवहार न्यायालय की एक दीवानी अदालत ने बिहार के स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव के पेट्रोल पंप का आवंटन रद्द करने के भारतीय पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के फैसले पर अंतरिम रोक लगाते हुए उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

प्रभारी अवर न्यायाधीश (ग्यारह) जावेद अहमद खान ने मंत्री तेज प्रताप यादव की ओर से दाखिल किये गये टाइटल सूट में अलग से दाखिल निषेधाज्ञा आवेदन पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया है। अदालत ने बीपीसीएल को पेट्रोल आवंटन के मामले में 23 जून 2017 तक यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश देते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

गौरतलब है कि अवर न्यायाधीश की अदालत में मंत्री और लारा ऑटोमोबाइल के मालिक श्री यादव की ओर से टाइटल सूट दाखिल किया गया है जिसमें कहा गया है कि पेट्रोल पंप वाली जमीन ए. के इंफोसिस्टम प्राईवेट लिमिटेड की वैध खरीदगी भूमि है। उक्त जमीन का उनके छोटे भाई तेजस्वी यादव के नाम पर 32 सालों के लिए वैध किरायानमा है । दोनों भाइयों के बीच उक्त संपत्ति को लेकर एक करारनामा भी बना हुआ है। वाद में कहा गया है कि बीपीसीएल की ओर से उक्त जमीन पर सवाल खड़ा करते हुए पेट्रोल पंप के आवंटन को रद्द करने के लिए नोटिस जारी करना अवैध है।

किसानों के संग किसान के रुप में नजर आये नीतीश

पटना(अपना बिहार, 17 जून 2017) - राजधानी के ज्ञान भवन में शुक्रवार को आयोजित किसान समागम में राज्यभर से जुटे किसान खुल कर बोलते रहे और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार डूब कर सुनते रहे। उन्होंने कृषि योजनाओं की खूबियों और खामियों दोनों को समभाव से सुना। किसानों ने जहां खूबियों को रेखांकित किया, वहीं कमियों की ओर भी इशारा किया। माहौल बिल्कुल दोस्ताना था। दिनभर के समागम में मुख्यमंत्री किसानों के ही होकर रह गये।

उन्होंने बात-बात में किसानों के साथ मजे भी लिये, तो बीच में उनकी भूल का सुधार भी करते रहे। खास बात यह है कि लंच का समय आया तो मुख्यमंत्री ने खाना भी किसानों के साथ पंगत में ही बैठकर खाया। खाना भी अलग नहीं था। जो लंच पैकेट किसानों को दिया गया, वहीं सीएम को भी मिला। पूरे कार्यक्रम के दौरान सीएम बैठे रहे। इस दौरान वह सिर्फ दो मिनट के लिए एक बार मंच से उठे।

किसान भी मुख्यमंत्री को अपनी बात कहने को लेकर सजग थे। किसानों की किसी सलाह पर अगर सीएम बगल में बैठे मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह से बात करने लगते तो बोलने वाला किसान तब तक चुप रहता जब तक सीएम उनकी ओर मुखातिब न हो जाते। इस बीच सीएम ने किसानों के साथ हंसी-ठिठोली भी की। कार्यक्रम की शुरुआत में ही एक किसान ने नीलगाय की चर्चा की तो सीएम ने कहा कि ‘अरे घोड़परास न कहिये। इसी तरह एक किसान ने जौ की खेती की बात की तो उन्होंने कहा कि ‘जई कहिये ना। चर्चा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर शुरू हुई तो एक किसान ने कहा कि लागत का दूना समर्थन मूल्य देने को कहा गया था। मुख्यमंत्री ने इसे सुधार करते हुए कहा कि दूना नहीं भाई ड्योढ़ा।

खास खबर : रविशंकर ने अर्णव को दिया था आदेश, लालू आ रहा है, लगा दो अपने लोग

- रंजीत कुमार

कल दिल्ली एयरपोर्ट पर राजद प्रमुख लालू प्रसाद का अपमान करने की कोशिश रिपब्लिक न्यूज चैनल के पत्रकारों ने की। दिलचस्प यह है कि वे केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद थे, जिन्होंने लालू प्रसाद का अपमान करने का आदेश रिपब्लिक के मालिक पत्रकार अर्णव गोस्वामी को दी थी। बताते चलें कि रिपब्लिक न्यूज चैनल के प्रोमोटर भाजपाई सांसद हैं और इसमें रविशंकर प्रसाद की भी हिस्सेदारी है।

राजद प्रमुख के अपमान को लेकर जब इस पत्रकार ने रविशंकर प्रसाद से दूरभाष पर पूछा तो वे भड़क गये। उन्होंने कहा कि उनका इस पूरे प्रसंग से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि जब उनसे यह पूछा गया कि रिपब्लिक न्यूज चैनल के पत्रकार ने जिस तरीके से राजद प्रमुख से सवाल किये, क्या उसे वे जायज मानते हैं। रविशंकर प्रसाद ने दूरभाष संबंध विच्छेद कर दिया।

दरअसल कल पटना से दिल्ली आने पर पत्रकारों ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद को एयरपोर्ट पर घेर लिया। अधिकांश पत्रकारों के सवाल राष्ट्रपति चुनाव को लेकर रही तो रिपब्लिक न्यूज चैनल के पत्रकार ने उनसे इस अंदाज में पूछा मानों वह कोई जज है और सवाल के बजाय अपना न्यायादेश सुना रहा हो। उसने पूछा कि लालू जी आपको अपने किये घोटालों पर क्या कहना हैं? उसने यह भी पूछा कि आप घोटाले पर घोटाले करेंगे और हम आराम करे? उसके इन सवालों का कोई जवाब लालू प्रसाद ने नहीं दिया तब उसने यह कहा कि यह दिल्ली है आपका जंगलराज नहीं आपको जवाब देना होगा। हद तो तब हो गई जब उसने यह पूछा कि आपके किन किन लोगों से सांठगाठ हैं?

वहीं दिल्ली में रिपब्लिक न्यूज चैनल के द्वारा श्री प्रसाद के अपमान पर बिहार के भाजपाई नेताओं ने खूब चुटकी ली। इस संबंध में जब सुशील मोदी से पूछा गया तो उन्होंने हंसते हुए कहा कि लोकतंत्र का चौथा खंभा मजबूत हो रहा है। मीडिया की स्वतंत्रता पर कोई हमला नहीं होना चाहिए। वहीं भाजपा के एक और बड़े नेता नंद किशोर यादव ने कहा कि जो जैसा बोएगा, वैसा ही काटेगा।

जदयू नेता ने कहा - दलितों के घर भोजन भाजपाईयों का चोंचला

पटना(अपना बिहार, 15 जून 2017) - जदयू के प्रदेश प्रवक्ता नवल शर्मा के मुताबिक बीजेपी नेताओं द्वारा दलित बस्तियों में भोजन का चोंचला बेहद हास्यास्पद है । जो पार्टी मनसा, वाचा और कर्मणा दलित विरोधी है उसके नेताओं का दलितों के साथ भोजन करना सिवाय आडम्बर के और कुछ नहीं है । बिहार बीजेपी नेताओं को जवाब देना चाहिए की आज तक आरएसएस का प्रमुख कोई दलित क्यों नहीं बना ? भाजपाशासित छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में दलितों के कुवें से पानी भरने पर लगे प्रतिबंध पर रमण सरकार मौन क्यों है , सहारनपुर के शब्बीरपुर में दलित उत्पीड़न की घटना पर योगी सरकार के मुँह क्यों सिले हैं। उन्होंने कहा कि भाजपाशासित सारे राज्यों में दलितों पर जिस तरह के रोंगटे खड़े कर देनेवाले सामाजिक प्रतिबंध लगाए गए हैं और वहाँ की सरकारें जिस कदर  चुप्पी साधे बैठीं हैं उसपर बिहार बीजेपी नेताओं को जवाब देना चाहिए ।

राजद की मीडिया सेल होगी चुस्त, तेजस्वी ने दिये निर्देश

पटना(अपना बिहार, 15 जून 2017) - राजद के प्रदेश कार्यालय में हर रोज दो प्रवक्ता हर हाल में बैठेंगे। इसी के साथ उन्हें हर सप्ताह तीन से चार प्रेस कान्फ्रेंस आयोजित करनी होगी। उन्हें महागठबंधन को कमजोर करने की साजिश का मुहंतोड़ जवाब के टास्क सौंपा गया है। उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने बुधवार को अपने आवास पांच देशरत्न मार्ग पर पार्टी के प्रवक्ताओं के साथ बैठक में यह निर्देश दिए। बैठक में प्रवक्ताओं के अलावा प्रदेश अध्यक्ष रामचन्द्र पूर्वे भी थे। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा के एजेंडे को सफल नहीं होने देना है। पार्टी के प्रवक्ता हर समय सजग रहें और हर मुद्दे पर अपनी बात रखें। वह चाहे तो सीधे मुझसे संपर्क कर कोई जानकारी ले सकते हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस का नियमित आयोजन पार्टी कार्यालय में होना चाहिए। साथ ही अगर टीवी पर किसी बहस में जाना हो तो वरीय नेताओं से भी उस मुद्दे पर फीडबैक ले लें। बैठक में मीडिया प्रभारी प्रगति मेहता, विधायक और प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव, डॉ. अशोक कुमार सिन्हा और मृत्युजय तिवारी उपस्थित थे।

शत्रुघ्न की नजर में बाबरी का हत्यारा आडवाणी राष्ट्रपति का सुयोग्य उम्मीदवार

पटना(अपना बिहार, 15 जून 2017) - बीजेपी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने मंगलवार को ट्वीट कर पार्टी के वरिष्ठ नेता और बाबरी मस्जिद व भारत के धर्म निरपेक्षता के हत्यारे लालकृष्ण आडवाणी को राष्ट्रपति पद के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार बताया है। उन्होंने इस संबंध पर एक के बाद एक कई ट्वीट्स किए। शत्रुघ्न सिन्हा ने ट्वीट करते हुए लिखा कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए महत्वपूर्ण दिन करीब आ रहे हैं। मैं दृढ़ता से लालकृष्ण आडवाणी जी के प्रशंसकों की भावनाओं को दोहराता हूं। सिन्हा ने ट्वीट में आगे लिखा, 'लालकृष्ण आडवाणी सबसे प्रतिष्ठिति पद के लिए विद्वान, सम्मानित, अनुभवी व योग्य उम्मीदवार हैं। पटना साहिब से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा है कि पार्टी के अंदर व बाहर आडवाणी के अनुभव से कोई मुकाबला नहीं कर सकता है। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी देश व पार्टी के लिए समर्पित कर दी है।

फ़िर बददिमाग हुए सुशील मोदी, लालू की बेटी पर लगाया आरोप

पटना(अपना बिहार, 15 जून 2017) - भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने कल बददिमागी होने का सबूत देते हुए दावा किया है कि पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और उनकी पुत्री हेमा यादव को दान में करोड़ों की जमीन देने वाले ललन चौधरी विधान परिषद के कर्मी हैं। जिसे राबड़ी देवी के कार्यकाल में 2005 में सभापति जाबिर हुसैन ने एलडीसी के पद पर नियुक्त किया था। बुधवार को जारी बयान में श्री मोदी ने यह भी दावा किया कि हेमा यादव को 70 लाख की जमीन दान करने वाले हृदयानंद चौधरी की नियुक्ति लालू प्रसाद के रेलमंत्रित्व काल में पूर्व मध्य रेलवे के ग्रुप डी के पद पर 20 जून 2005 को हुई थी। मामला उजागर होने के बाद से खलासी हृदयानंद चौधरी अपने कार्यस्थल से फरार है। इस पूरे मामले में श्री मोदी की बददिमागी का अनुमान इसी मात्र से लगाया जा सकता है कि जब जाबिर हुसेन ने कथित तौर पर हृदयानंद चौधरी की नियु्क्ति विधान परिषद में कर दी फ़िर उसी वर्ष उसे रेलवे में नौकरी कैसे दी गयी।

सुशील मोदी ने लालू प्रसाद की बीमारी का उड़ाया मजाक

पटना(अपना बिहार, 14 जून 2017) - भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी ने पूर्व मुख्यमंत्री सह राजद प्रमुख लालू प्रसाद की बीमारी का मजाक उड़ाया है। उन्होंने कहा कि श्री प्रसाद घर पर डॉक्टरों की तैनाती पद का दुरूपयोग है। अगर लालू प्रसाद यादव की तबियत इतनी ज्यादा खराब थी तो उन्हें एयर लिफ्ट करना चाहिए था या कम से कम आईजीआईएमएस के आईसीयू में भर्ती करना चाहिए। उनके बेटे बिहार के स्वास्थ्य मंत्री हैं तो क्या पद का दुरूपयोग करते हुए केवल सर्दी, खासी और दस्त जैसी मामूली बीमारियों के लिए दर्जनों डॉक्टरों की तैनाती उचित है। बताते चलें कि मई में लालू यादव की तबीयत खराब हुई थी, जिसके बाद आईजीआईएमएस के तीन डॉक्टर और दो नर्स की टीम को इलाज के लिए उनके घर भेजा गया। टीम ने नौ दिनों तक पूर्व सीएम की देखभाल की। बताया जा रहा है कि तेज प्रताप यादव के सरकारी आवास पर डॉक्टरों की टीम को भेजा गया था।

पटना के एक गांव में दो नाबालिग बहनों के साथ दो-दो बार गैंगरेप, दहशत में पीड़ित

पटना(अपना बिहार, 14 जून 2017) - राजधानी पटना के शाहपुर थाने के दियारे के एक गांव में दो नाबालिग लड़की के साथ गांव के ही आधा दर्जन लड़कों ने दो-दो बार गैंगरेप किया। इतना ही नहीं, थाने में सूचना देने पर परिवार सहित जान से मारने की धमकी दी।

मंगलवार को पीड़ित लड़कियां अपने परिजनों के साथ थाने पहुंच कर चार युवकों को नामजद और पांच अज्ञात लड़कों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपित ज्योतिष कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, अन्य फरार हैं।

पीड़िता ने आरोप लगाया कि 27 मई को चचेरी दादी का श्राद्धकर्म था। रात 8 बजे अपनी चचेरी बहन और तीन चार छोटे-छोटे बच्चों के साथ घर लौट रही थी। बाजार से आगे निकली ही थी कि गांव के राहुल कुमार, गोलू कुमार, ज्योतिष कुमार, पोतक अपने चार-पांच दोस्तों के साथ पहले से खड़े थे। उन सभी को पिस्तौल दिखाते हुए जान मारने की धमकी देते हुए कब्जे में ले लिया। उसके बाद आरोपित युवकों ने उसे और उसकी चचेरी बहन को सूनसान जगह में ले जाकर दुष्कर्म किया। साथ किसी को बताने पर सारे परिवार को जान मारने की धमकी दी।

दो जून को एक बार फिर सभी आरोपितों ने दोनों बहनों से दुष्कर्म किया। युवकों से परेशान लड़की ने घटना की जानकारी अपने परिजन को दी। उसके बाद लड़की के परिजनों पर लड़के के परिजन केस नहीं करने के दबाव बनाने लगे। थाना जाने से भी रोक दिया। मंगलवार को किसी तरह लड़की ने परिजनों के साथ थाने पहुंच कर एफआईआर दर्ज करायी। एसएसपी मनु महाराज ने बताया कि लड़कियों के साथ दो-बार दुष्कर्म किया गया। नामजद आरोपितों में एक ज्योतिष कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है। फरार अन्य आरोपितों को दबोचने के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है।

सीएम के प्रहार के बाद बिलबिलायी भाजपा, बेशर्मी के साथ भूल गयी अपनी चुनौती

पटना(अपना बिहार, 14 जून 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक दिन पहले केंद्र और यूपी सरकार के भंग किये जाने संबंधी प्रहार पर भाजपाई बिलबिला गये हैं। उल्लेखनीय है कि 11 जून को यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने श्री कुमार को बिहार विधानसभा भंग करने की चुनौती दी थी। इसके जवाब में श्री कुमार ने कहा था कि केंद्र सरकार और यूपी सरकार भंग किया जाता है व चुनाव की घोषणा की जाय तो वे बिहार सरकार के भंग किये जाने की घोषणा करेंगे। इस पर बिलबिलाये भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ने कहा कि नीतीश कुमार की चुनौती स्वीकार है। वे अपना मंत्रिमंडल भंग करते हुए विधानसभा भंग करें। हमारे सांसद व विधायक इस्तीफा के लिए तैयार हैं। सबसे पहला इस्तीफा मैं दूंगा। हालांकि श्री राय ने यह नहीं कहा कि केवल बिहार के भाजपाई एमपी इस्तीफ़ा देंगे या पूरे देश के। वहीं उन्होंने यूपी विधानसभा के भंग करने के सीएम के कथन पर बेशर्मी के साथ कहा कि वे वहां की जनता और जनादेश का अपमान है। मानों बिहार विधानसभा के भंग किये जाने से बिहार की जनता के जनादेश का अपमान नहीं होगा।

पूरे देश में कृषि संकट में : नीतीश

पटना(अपना बिहार, 13 जून 2017) - कल आयोजित लोक संवाद कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मीडिया प्रतिनिधियों द्वारा किसानों के आंदोलन से संबंधित पूछे गये सवाल पर कहा कि आज एग्रेरियन क्राइसिस (कृषि संकट) की स्थित उत्पन्न हो गई है। उन्होंने कहा कि फसलों की उत्पादकता बढ़ी है, परंतु किसानों को उसका सही दाम नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि अकेले कर्ज माफी इस समस्या का समाधान नहीं है। अलग-अलग जगहों पर अलग-अगल समस्या है। उन्होंने कहा कि कृषि संकट का मुख्य कारण यह है कि किसानों की फसल उत्पादन लागत में वृद्धि हुई है, परंतु किसानों को उनकी फसल का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है, मूल समस्या यही है। उन्होंने कहा कि 2014 लोकसभा के पूर्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किये गये वादा जो भाजपा के घोषणा पत्र में भी था, कि किसानों को उनके लागत मूल्य के ऊपर 50 प्रतिशत मुनाफा जोड़कर फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया जायेगा को पूरा करना चाहिये। उन्होंने कहा कि मैं इस प्रश्न को निरंतर उठाते रहा हॅू, यही आज की समस्या का निदान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमनें बिहार में कृषि रोड मैप बनाया है। हमारा मुख्य उद्देष्य है किसानों की आमदनी बढ़े। सीमित दायरे में जो कर सकते है, हम कर रहे है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को पहल करनी पड़ेगी। किसी मंत्रालय का सिर्फ नाम बदलने से काम नहीं होगा। किसानों को दी जा रही समर्थन मूल्य में वृद्धि होनी चाहिये।

नीतीश ने स्वीकारी भाजपा की चुनौती, लेकिन पहले करें यूपी विधानसभा भंग 

पटना(अपना बिहार, 13 जून 2017) - उत्तप्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा बिहार में पुनः मतदान कराने की चुनौती के सवाल पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि हम बिहार में चुनाव के लिये तैयार हैं, परन्तु साथ ही साथ भाजपा यूपी में भी चुनाव कराये। यूपी और बिहार के लोकसभा सदस्य इस्तीफा दें और पुनः मतदान कराया जाये। हमें चुनौती स्वीकार है।

गोपाल कृष्ण गांधी को राष्ट्रपति उम्मीदवार के बतौर पेश करने का माले का प्रस्ताव, वाम दलों में सहमति

पटना(अपना बिहार, 13 जून 2017) - माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि यदि विपक्ष गोपाल कृष्ण गांधी को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार मानती है तो सभी वामदल साथ होंगे। कल पटना में एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि आज जब भाजपा देश में तमाम संवैधानिक पदों को हड़प कर फासीवाद को थोप देने के लिए बेचैन है, ऐसी स्थिति में हमें अगले महीन होने वाले राष्ट्रपति पद की गरिमा को बचाए रखने के लिए आगे आना होगा. भाकपा-माले का प्रस्ताव है कि महात्मा गांधी के परपौत्र, पूर्व राष्ट्रपति के आर नारायणन के नजदीकी व बंगाल के पूर्व गर्वनर तथा जनांदोलनों से गहरे सरोकार रखने वाले गोपाल कृष्ण गांधी को राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाया जाए. इस सवाल पर वामदलों के बीच चर्चा हुई है और हम चाहते हैं कि अन्य दल भी इस प्रस्ताव के साथ आगे आयें. आज जब भाजपा ने गांधी जी पर भी हमला बोल दिया है, ऐसी स्थिति में इस प्रस्ताव की साथर्कता काफी महत्वपूर्ण हो जाती है.

प्रारंभिक स्कूलों के बच्चों को नहीं मिली पाठ्य पुस्तकें, हाईकोर्ट ने किया शिक्षा विभाग को तलब

पटना(अपना बिहार, 13 जून 2017) - राज्य के प्रारंभिक स्कूलों के 2.20 करोड़ बच्चों को अब तक पाठ्य पुस्तक नहीं मिलने के मामले में पटना हाइकोर्ट ने शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आरके महाजन को तलब किया है. आनंद कौशल की जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए न्यायाधीश चक्रधारी शरण सिंह ने 13 जून को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया था.

राज्य में शैक्षिणिक सत्र 2017-18 की पढ़ाई शुरू हुए दो महीने से अधिक हो चुके हैं, लेकिन अब तक नि:शुल्क किताब उपलब्ध नहीं करायी जा सकी है. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मृत्युंजन कुमार ने इसे शिक्षा के अधिकार का हनन और बच्चों को मौलिक अधिकार से वंचित करने वाला कदम बताया. वहीं, याचिकाकर्ता आनंद कौशल सिंह ने बताया कि सरकार को लिखित आवेदन देकर उन्होंने बच्चों को किताब देने की मांग की थी, लेकिन अब तक बच्चों को किताबें उपलब्ध नहीं करायी गयी है. दोषी अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग की गयी थी, लेकिन उन पर भी कार्रवाई नहीं गयी. बच्चों का भविष्य खराब न हो  और जल्द से जल्द किताब मिले, इसके लिए जनहित याचिका दायर की गयी है.

आयकर विभाग को फ़िर दी मीसा ने चुनौती

पटना(अपना बिहार, 13 जून 2017) - राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की सांसद बेटी मीसा भारती ने कल फ़िर आयकर अधिकारियों के समक्ष पेश न होकर उन्हें खुली चुनौती दी। सुशील मोदी के एक बयान के आधार पर उनके उपर 1000 करोड़ रुपये की कथित बेनामी संपत्ति मामले की जांच की जा रही है। इस क्रम में एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार आयकर अधिकारियों के समक्ष पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुईं। विभाग की ओर से आगे की कार्रवाई तथा उनको उपस्थित होने का तीसरी बार मौका देने पर विचार किया जा रहा है। बताते चलें कि बीते छह जून को भी आयकर विभाग ने मीसा को सम्मन किया था लेकिन वह उपस्थित नहीं हुई थीं।

रंग लाया नीतीश कुमार का प्रयास, पटना नगर निगम पर महिलाओं का कब्जा, 75 में 49 पर काबिज हुई आधी आबादी

पटना(अपना बिहार, 10 जून 2017) - पटना नगर निगम पर आधी आबादी का कब्जा हो गया है। अभी तक 75 वार्डों के परिणाम घोषित किए गए हैं।  इसमें 49 पर महिलाओं की जीत हुई है। निगम चुनाव में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण है। इस बार मेयर का पद महिलाओं के लिए आरक्षित है। निगम चुनाव में कुल 1008 प्रत्याशी थे। इसमें 515 महिला प्रत्याशी थीं, वहीं पुरुष प्रत्याशियों की संख्या 493 थी।

पटना नगर निगम चुनाव का परिणाम कई दिग्गजों के लिए चौंकाने वाला रहा। कई दिग्गज हार गए। हालांकि कुछ दिग्गज जीतने में कामयाब रहे। निगम चुनाव परिणाम इस रूप में खास रहा कि अधिकतर नए चेहरे चुनकर आए हैं। निवर्तमान डिप्टी मेयर अमरावती को हार का मुंह देखना पड़ा। वह वार्ड 10 से चुनाव लड़ रही थीं। वहीं अमरावती के पति भी चुनाव हार गए हैं। पूर्व डिप्टी मेयर रूप नारायण मेहता भी चुनाव हार गए हैं। निगम की लगातार पांच बैठकों में भाग नहीं लेने के आरोप में सरकार ने इन्हें हटा दिया था।

वार्ड 39 से पूर्व मेयर संजय कुमार चुनाव हार गए हैं। इस वार्ड से पटना जल पर्षद के पूर्व अध्यक्ष स्व अशोक यादव की पत्नी भारती देवी चुनाव जीती हैं। इधर, महानगर योजना समिति के उपाध्यक्ष संजय सिंह भी अपने प्रतिद्वंद्वी से हार गए हैं। वह वार्ड छह से चुनाव लड़ रहे थे। वहीं सशक्त स्थायी समिति के सात में से पांच सदस्य चुनाव हार गए हैं।

पार्षद आभालता चुनाव हार गयी हैं। सबसे कम मतों के अंतर से वार्ड 7 से जय प्रकाश सहनी जीते हैं। इन्होंने  रामानंद शर्मा को 18 वोटों से पराजित किया है। सहनी को 868 और शर्मा को 850 वोट मिले हैं। सबसे अधिक मतों से वार्ड 66 से कांति देवी ने चुनाव जीता है। इन्होंने निकटतम प्रतिद्वंद्वी सीमा त्रिपाटी को 4453 मतो से हराया है। कांति को 5266 और सीमा को 813 वोट मिले हैं। वहीं पिंकी यादव ने संजू देवी को सबसे कम छह मतों से पराजित कर दिया है। जहां एक ओर दिग्गज हार गए वहीं कुछ ने जीत भी हासिल की है। मेयर अफलज इमाम की पत्नी महजबीं जीत गयी हैं। पूर्व डिप्टी मेयर और वार्ड नंबर 28 से खड़े विनय कुमार जीत गए हैं। वार्ड 2 से दीपक चौरसिया की पत्नी मधु चौरसिया को जीत हासिल हुई है। वार्ड 10 से सुनील कुमार की पत्नी गीता देवी जीती हैं। पूर्व पार्षद ज्ञानवती देवी वार्ड 24 से जीत गई हैं। वहीं वार्ड 13 से खड़े जीत कुमार ने भी जीत हासिल की है। जीत ने मेयर का चुनाव भी लड़ा था। 

चारा घोटाला मामले में अदालत में पेश हुए लालू

पटना(अपना बिहार, 10 जून 2017) - राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद शुक्रवार को चारा घोटाले से जुड़े दो मामलों की सुनवाई को लेकर रांची में सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश की अदालत में हाजिर हुए. वह आरसी 64ए/96 और आरसी 47ए/96 में हाजिर हुए. लालू प्रसाद सुबह सात बजे ही सिविल कोर्ट पहुंचे. वह सबसे पहले सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत में हाजिर हुए. यहां आरसी 64ए/96 मामले की सुनवाई चल रही है. साढ़े सात बजे न्यायाधीश के आने के बाद सुनवाई शुरू हुई.

अदालत के अंदर लालू लगभग आधे घंटे तक रहे. अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए अगली तिथि 16 जून निर्धारित की है. इसके बाद लालू सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार की अदालत में पहुंचे. यहां पर आरसी 47ए/96 मामले की सुनवाई चल रही है. यहां पर भी हाजिरी देने के बाद वह निकले. इन दोनों ही मामलों में लालू प्रसाद के अलावा अन्य आरोपित जगन्नाथ मिश्र, फूलचंद सिंह, त्रिपुरारि मोहन प्रसाद, आरके राणा, सुशील कुमार सिन्हा भी उपस्थित हुए.

लालू प्रसाद के अधिवक्ता प्रभात कुमार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में अदालत में उपस्थित हुए हैं. आरसी 64ए/96 में लालू प्रसाद पर से तीन धाराअों को हटा दिया गया था. ये धाराएं हैं आइपीसी की 420, 120 बी अौर पीसी एक्ट का 13 डी. सीबीआइ की अपील के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में इन धाराअों को फिर से जोड़ा गया है. प्रभात कुमार ने कहा कि हमने अदालत में कहा है कि अभियोजन की अोर से गवाह को रिकॉल करने की जरूरत हमें नहीं है. प्रभात कुमार ने बताया कि इन दोनों ही मामलों में लालू प्रसाद को जमानत मिली हुई है.

झमाझम हुई बारिश, टूटे सारे रिकार्ड

पटना(अपना बिहार, 8 जून 2017) - राजधानी पटना में बुधवार को हुई झमाझम बारिश ने पिछले छह साल का रिकॉर्ड तोड़ डाला। छह सालों के दौरान जून में 24 घंटे में अब तक दर्ज यह सर्वाधिक बारिश है। पटना में सुबह साढ़े आठ बजे तक 39.5 मिमी बारिश हुई जबकि शाम साढ़े पांच बजे तक 50.6 मिमी बारिश रिकार्ड की गई।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पिछले साल 22 जून को 24 घंटे में सबसे ज्यादा 21.2 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। जबकि पिछले छह सालों में 20 जून 2011 को 66.6 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई थी। इधर, बुधवार को दिनभर रुक-रुक कर बारिश होती रही जिससे पारा सामान्य से 10 डिग्री नीचे तक पहुंच गया। राजधानी का अधिकतम तापमान 27.4 डिग्री सेल्सियस रहा जबकि न्यूनतम तापमान 23.3 डिग्री रहा। बारिश का असर आम जनजीवन पर पड़ा और पटना के कई इलाकों में बिजली व्यवस्था चरमरायी रही। विशेषज्ञों ने बताया कि मौसम की यह स्थिति अगले एक दो दिनों तक बनी रहेगी।

मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो यूपी से बंगाल तक बिहार होते हुए टर्फ लाइन गुजर रही है। इससे पटना व अन्य जिलों में अपर साइक्लोनिक सर्कुलेशन की स्थिति है। अगले 24 घंटों में राजधानी व इसके आसपास के जिलों में बादलों का बरसना जारी रहेगा। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार आंधी व बारिश की स्थिति बनी हुई है। गुरुवार की शाम आसमान थोड़ा साफ होगा लेकिन शुक्रवार व शनिवार को भी राजधानी में बारिश होगी।

झमाझम बारिश के बीच बंपर वोटिंग

पटना(अपना बिहार, 8 जून 2017) - पटना में झमाझम बारिश के बीच वोट भी खूब बरसे। आठ नगर निकायों में बुधवार को हुए चुनाव में 62 फीसदी वोट पड़े। जबकि पटना नगर निगम के चार जून को हुए चुनाव में महज 45 फीसदी वोट पड़े थे। आज रुक-रुक कर हो रही बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में मतदाता अपने घरों से निकलकर मतदान केंद्रों तक पहुंचे। मतदान के साथ ही 222 वार्डो के 1256 उम्मीदवारों का भाग्य इवीएम में बंद हो गया। राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त अशोक कुमार चौहान ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि छिटपुट घटनाओं को छोड़कर मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया।पुलिस ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए  37 व्यक्ति को गिरफ्तार किया। वहीं 109 वाहनों को जब्त किया गया।

मध्य प्रदेश में पुलिस द्वारा किसानों की हत्या निंदनीय : माले

पटना(अपना बिहार, 8 जून 2017) - भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने मध्यप्रदेश के मंदसौर में 6 जून को भाजपा सरकार द्वारा आंदोलन कर रहे किसानों पर पुलिस फायरिंग, जिसमें 5 किसानों की निर्मम हत्या कर दी गयी और कई लोग घायल हुए हैं, की कड़ी निंदा की है. उन्होंने कहा कि आज देश के हरेक हिस्से में किसान आंदोलनरत हैं और मध्यप्रदेश में वे ऐतिहासिक हड़ताल पर हैं. महाराष्ट्र में भी किसान कर्ज की माफी और उत्पादों के न्यूनतम समर्थन मूल्य के सवाल पर आंदोलन कर रहे हैं. मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चैहान और उनके मंत्री निर्लज्जता के साथ किसानों को एंटी-सोशल करार दे रहे हैं. इस तरह का झूठ आरएसएस के प्रोपगंडा स्कूल की चारित्रिक पहचान है.

मध्य प्रदेश के मंदसौर में स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को लागू करने, कर्ज माफी, भमि अधिग्रहण कानून-2013 में किये गये बदलाव को वापस लेने जैसे मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों पर की पुलिस फायरिंग सें 5 किसानों की मौत से भाजपा का असली किसान विरोधी-लोकतंत्र विरोधी चेहरा उजागर हुआ है. विगत सप्ताह से ही महाराष्ट्र भी कमोवेश इन्ही मांगो को लेकर आंदोलित है और किसानों का आंदोलन तेजी से फैलता जा रहा है. स्वामीनाथन कमटी की सिफारिशों में सबसे महत्वपूर्ण बात किसानों की फसल की लागत मूल्य का निर्धारण कर उसमें 50 फीसदी जोड़ कर सरकार द्वारा खरीद की गारण्टी किया जाना है. किसानों की बदहाली और आत्महत्याओं में बेहताशा बढ़ोतरी के मद्देनजर साथ ही देश के विकास के लिए भी जरूरी था कि इन सिफारिशों को लागू किया जाता, परन्तु कांगे्रस ने लागू नहीं किया और लोक सभा चुनाव में अपने प्रचार अभियान में मोदी जी ने इसका वायदा किया था। परन्तु आज हम सभी जानते हैं कि पूरे देश में हालात् बद से बदतर होते जा रहे हैं, नोटबंदी से रही सही कसर भी पूरी कर दी थी।

मध्यप्रदेश में पुलिस द्वारा किसानों की हत्या, लालू-नीतीश ने की निंदा

पटना(अपना बिहार, 7 जून 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद प्रमुख लालू प्रसाद और उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने मध्यप्रदेश में किसानों पर की गई फायरिंग को लेकर बीजेपी पर करारा वार किया है। राजद्र प्रमुख ने आरोप लगाया है कि भाजपा की केंद्र सरकार को न तो जवानों की चिंता है और न ही किसानों की। राजद प्रमुख ने आरोप लगाया है कि भाजपा द्वारा किसानों की मांगों को कुचलने का प्रयास किया जा रहा है। हम ऐसा होने नहीं देंगे। हर हाल में हम गरीब, मजदूर और किसानों के साथ खड़े रहेंगे। इन्हें जहां भी जरूरत होगी हम मजबूती से खड़े मिलेंगे।

उन्होंने कहा है कि भाजपा सीमा पर जवानों पर तो देश के भीतर किसानों पर गोलियां चलवा रही है। क्या यही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अच्छे दिन हैं? किसानों को लागत का ड्योढ़ा लाभ दिलाने का वादा तो पीएम पूरा नहीं कर पाए, अब किसान अपनी जायज मांग उठा रहे हैं तो उनपर गोलियों की बौछार की जा रही है।

उधर, सीमा पर सेना के जवानों का भी यही हाल है। केन्द्र की गलत नीति के कारण रोज उनपर हमले हो रहे हैं। ट्विटर पर जारी बयान में राजद प्रमुख ने कहा है कि मध्यप्रदेश में अपना हक मांग रहे अन्नदाताओं पर भाजपा सरकार द्वारा गोली चलवाना निंदनीय है। यह दुखद घटना है। साथ ही सरकार का अमानवीय चेहरा भी इससे उजागर होता है।

उधर, उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने अपने ट्वीट में कहा है कि अच्छे दिन का सपना दिखाने वाली भाजपा अब किसानों पर भी गोली चलवाने लगी है। उन्होंने पीएम मोदी से सवाल किया है कि क्या यही उनका मेक इन इंडिया और न्यू इंडिया है।

 

चारा घोटाले के एक मामले में पेश हुए लालू,जगन्नाथ,शर्मा सहित 27 आरोपित

पटना(अपना बिहार, 7 जून 2017) - चारा घोटाला के एक मामले में आरोपित राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद व पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा मंगलवार को पटना के सीबीआई कोर्ट में पेश हुए। इनके अलावा पूर्व सासंद जगदीश शर्मा, पूर्व विधायक ध्रुव भगत, फूलचंद सिंह, बेकजुलियस, साधना सिंह समेत आपूर्तिकर्ता, पशु डॉक्टर समेत 27 आरोपित कोर्ट में पेश हुए।

पूर्व सांसद आरके राणा समेत दो आरोपित कोर्ट में पेश नहीं हुए। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के वकील प्रदीप कुमार तिवारी ने बताया कि सीबीआई कोर्ट ने चारा घोटाले के इस मामले के सभी आरोपितों को हाजिर होने का निर्देश दिया था। लालू प्रसाद 5 मिनट विशेष अदालत में रहे और विशेष न्यायाधीश के समक्ष अपनी हाजिरी लगाई। इसके बाद वो चले गए। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर जगन्नाथ मिश्रा सीबीआई कोर्ट पहुंचे और हाजिरी लगाई। चारा घोटाला का यह मामला भागलपुर कोषागार से जुड़ा है। फर्जी विपत्र के आधार पर भागलपुर कोषागर से 47 लाख रुपए की अवैध निकासी की गई थी।

सीबीआई भागलपुर कोषागार से फर्जी विपत्र के आधार पर अवैध निकासी के मामले में अब तक कुल 34 अभियोजन गवाह पेश कर चुकी है। सीबीआई ने कुल 44 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर किया था। इसमें से 15 आरोपितों की ट्रायल के दौरान मृत्यु हो गई।

सीबीआई कोर्ट पटना में पिछले 21 वर्ष से चारा घोटाला का यह मामला चल रहा है। ट्रायल के दौरान कई ऐसे आरोपित पेश होते हैं जो काफी उम्रदराज है। मंगलवार को सीबीआई कोर्ट पहुंचे फुलचंद सिंह और बेक जुलियस समेत कई आरोपितों की उम्र काफी हो गई है। प्रतिदिन कोर्ट आना उनके लिए संभव नहीं है। उनकी ओर से उनके वकील कोर्ट में उनका प्रतिनिधित्व करते हैं। चारा घोटाला का यह मामला वर्ष 1994 का है जिसमें एक आपराधिक षडंयत्र कर जानवरों को दिए जाने वाले दवा की फर्जी आपूर्ति कर कोषागार से रुपया निकालने का आरोप है।

एनडीटीवी के खिलाफ कार्रवाई राजनीतिक दुर्भावाना से प्रेरित: माले

पटना(अपना बिहार, 7 जून 2017) - भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने पिछले दिनों एनडीटीवी और उसके प्रोमोटरों पर सीबीआई द्वारा की गयी छापेमारी को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताते हुए उसकी कड़ी निंदा की है. उन्होंने कहा कि चूंकि एनडीटीवी मोदी सरकार की नीतियों की लगातार आलोचना करते रहती है, इसलिए उसे निशाना बनाया गया है. यह लोकतंत्र व मीडिया की स्वतंत्रता पर तीखा हमला है और देश में फासीवाद थोपने के चल रहे प्रयासों की अगली कड़ी है.

उन्होंने कहा कि आइसीआइसीआई बैंक के 48 करोड़ रुपये के मामले में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश रचने और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करते हुए सीबीआई ने यह छापेमारी की है, जबकि एनडीटीवी ने इसे पुराने व अंतहीन आरोपों के आधार पर बदले की कार्रवाई करार दिया है. एनडीटीवी का यह भी कहना है कि उसने सारे कर्ज चुकता कर दिए हैं.

वहीं, दूसरी ओर सरकारी बैंकों का हजारों-करोड़ रुपया डकार चुके विजय माल्या पर सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही है और वह आराम से ब्रिटेन में बैठकर मैच का आनंद ले रहे हैं. यह मोदी सरकार के दोहरे चरित्र और अपने विरोधियों को उत्पीड़ित करने के लिए सीबीआई का गलत इस्तेमाल करने का निंदनीय उदाहरण है. इसके पूर्व भी अरविंद केजरीवाल से लेकर लालू प्रसाद यादव के खिलाफ तो सीबीआई काफी सक्रिय दिखी, लेकिन भाजपा के भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे केंद्रीय मंत्रिया,ए मुख्यमंत्रियों और नेताओं पर सीबीआई ने आजतक कोई कार्रवाई नहीं की है. इससे प्रतीत होता है कि सीबीआई की कार्रवाइयां भ्रष्टाचार से लड़ने की बजाए पार्टी विशेष के संकीर्ण राजनीतिक हितों में की गयी कार्रवाइयां हैं, जो हमारे देश के लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है.

शिक्षा की बदहाल स्थिति के लिए राज्य सरकार जिम्मेवार : माले

पटना(अपना बिहार, 7 जून 2017) - माले के राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि बिहार में शिक्षा की बदहाल स्थिति के लिए पूरी तरह राज्य सरकार की गलत नीतियां जिम्मेवार है, लेकिन इस बदहाली के लिए वह छोटी मछलियों को दोषी बनाकर अपनी जिम्मेवारी से पल्ला झाड़ लेना चाहती है. पहले टापर्स और अब इंटर परीक्षा में हुई धांधली की मुख्य वजह शिक्षा के क्षेत्र में निजी पूंजी और वित्तरहित शिक्षा नीति को बढ़ावा देना है. वित्तरहित शिक्षा नीति को जारी रखते हुए नंबर के आधार पर जब से नीतीश सरकार ने वित्तरहित कालेजों व स्कूलों को सरकारी सहायता देने का कार्य आरंभ किया, तब से यह भ्रष्टाचार और संस्थागत हो गया है. ज्यादा सरकारी अनुदान के लालच में वित्तरहित कालेज गलत तरीके से टापर बनाने का खेल खेलने लगे हैं. इसमें बड़े शिक्षा माफिया शामिल हैं और भाजपा, जदयू, राजद, कांग्रेस जैसी तमाम पार्टियों के बड़े नेताओं का उन्हें संरक्षण हासिल है. हमने हर बार मांग की है कि सरकार यदि बिहार में शिक्षा की स्थिति में सुधार चाहती है, तो उसे इन नीतियों को वापस लेना होगा और शिक्षा माफियाओं के राजनीतिक संरक्षकों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए.

फ़र्जी इंटर कालेज चलाने वाले भाजपाई को छोड़ पुलिस ने हाईस्कूल की महिला प्रिंसिपल को पति व बेटे के साथ किया गिरफ़्तार

पटना(अपना बिहार, 5 जून 2017) - इंटर आर्ट्स टॉपर मामले में पुलिस ने गणेश के 9वीं स्कूल की हेडमास्टर देव कुमारी सहित तीन को रोसड़ा, समस्तीपुर से गिरफ्तार किया है। पटना पुलिस की विशेष टीम ने शनिवार की देर रात रोसड़ा से इन्हें पकड़ा। जबकि समस्तीपुर के ताजपुर के चकहबीब स्थित रामनंदन सिंह जगदीप नारायण इंटर कॉलेज से गणेश टॉपर बना था, उसके प्राचार्य व सचिव अब तक पुलिस के हाथ नहीं आए हैं। बताते चलें कि इस इंटर कालेज के संस्थापक और प्रिंसिपल सब भाजपाई हैं।

देव कुमारी के साथ पुलिस ने उनके पति राज कुमार चौधरी व बेटे गौतम कुमार को भी गिरफ्तार किया है। राज कुमार चौधरी स्कूल के पूर्व सचिव हैं। वहीं गौतम उसी स्कूल में किरानी है। इनके पास से पुलिस ने कई कागजात भी बरामद किए हैं। शनिवार की शाम पुलिस ने दलाल संजय कुमार को मुसल्लहपुर इलाके से गिरफ्तार किया था। गणेश ने संजय गांधी उच्च विद्यालय, लक्ष्मीणिया, शिवाजीनगर समस्तीपुर में 9वीं कक्षा में एडमिशन किया गया था। संजय उसका स्थानीय अभिभावक बना था।

गणेश प्रकरण में गिरफ्तारी से बचने के लिए देव कुमारी ने समस्तीपुर के कोतवाली थाने की पुलिस को चकमा देने का प्रयास किया। लेकिन उसकी जुगत काम नहीं आयी। छापेमारी करने आयी पुलिस के सख्त रवैये के कारण उसे अपने आप को पुलिस के हवाले करने को विवश होना पड़ा।

स्थानीय मुखिया प्रदीप कुमार महतो ने बताया कि तीनों को लेकर पुलिस स्कूल गयी  जहां रात में ग्रामीण भी जुट गए। पुलिस के कागजात मांगने पर पति -पत्नी ने कई बहाने भी बनाए। बाद में पुलिस पति, पत्नी के अलावा उनके बेटे को अपने साथ लेकर चली आयी। शारदानगर स्थित आवास पर भी पुलिस ने उनसे काफी देर तक पूछताछ की और कागजात खंगाले। उसके बाद रात करीब 12.30 बजे तीनों को पटना चली आई। गणेश का एडमिशन संजय द्वारा दिए गए घोषणापत्र के आधार पर किया गया था। गणेश की उम्र में हेराफेरी करने में संजय के साथ ही स्कूल के हेडमास्टर सहित अन्य कर्मी भी शामिल थे। शनिवार की देर रात कोतवाली थाने के दारोगा दरबारी चौधरी व माधुरी चौधरी के नेतृत्व में पुलिस टीम सैप जवान के साथ रोसड़ा में छापेमारी कर पत्नी, पति व बेटे को गिरफ्तार कर लिया।

पटना में 46 तो कटिहार के बारसोई में 71 फ़ीसदी मतदान

पटना(अपना बिहार, 5 जून 2017) - नगरपालिका आम चुनाव, 2017 के तहत दूसरे चरण में पटना नगर निगम एवं कटिहार के बारसोई नगर पंचायत के साथ ही मुंगेर के एक वार्ड के चुनाव को लेकर रविवार को वोट पड़े। पटना में 46 प्रतिशत एवं बारसोई नगर पंचायत में 71 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। वहीं, मुंगेर नगर निगम के वार्ड 32 के लिए चुनाव में 62 फीसदी वोटिंग हुई। मतदान के बाद पटना के 75 वार्डों के कुल 1008 उम्मीदवार एवं बारसोई नगर पंचायत के 17 वार्डों के कुल 146 उम्मीदवारों का भाग्य ईवीएम में बंद हो गया। वहीं, मुंगेर के वार्ड नंबर 32 के दो प्रत्याशियों में एक रोमा राज को तत्काल मतगणना के बाद विजयी घोषित कर दिया गया। राज्य निर्वाचन आयोग के अयुक्त अशोक कुमार चौहान ने रविवार को आयोग सभागार में आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस में बताया कि छिटपुट घटनाओं को छोड़कर पटना नगर निगम सहित अन्य क्षेत्रों के लिए मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन हुआ। किसी भी क्षेत्र में पुनर्मतदान कराने का निर्णय नहीं लिया गया है। पटना नगर निगम के वार्ड नंबर 08 के मतदान केंद्र संख्या 09, 10, 19, 20 एवं 21 के बाहर दो प्रत्याशियों के समर्थकों के बीच झड़प को लेकर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। उन्होंने बताया कि निरोधात्मक कार्रवाई के तहत 130 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया और 98 वाहन जब्त किए गए। गौरतलब है कि मुंगेर के एक वार्ड में मतदाता सूची में सुधार को लेकर पटना उच्च न्यायालय के निर्देश के आलोक में मतदान स्थगित किया गया था। हालांकि मुंगेर नगर निगम के शेष वार्डों में 21 मई को ही मतदान हो चुका है। पटना नगर निगम का चुनाव परिणाम नौ को : पटना नगर निगम को लेकर मतगणना नौ जून को सुबह आठ बजे से शुरू होगी और उसी दिन चुनाव परिणाम जारी कर दिया जाएगा। वहीं, बारसोई नगर पंचायत की मतगणना छह जून को होगी। प्रेस कान्फ्रेंस में आयोग के सचिव दुर्गेश नंदन सहित कई अधिकारी मौजूद थे।

राजद के बाद जदयू, जदयू के बाद अब भाजपाई बनेंगे सम्राट चौधरी

पटना(अपना बिहार, 5 जून 2017) - कभी सबसे कम उम्र में विधायक बनकर विवादों में रहने वाले पूर्व मंत्री राकेश कुमार उर्फ सम्राट चौधरी जल्द ही भाजपा में शामिल होंगे। इससे पहले वे राजद के सदस्य थे। लेकिन वर्ष 2013 में उन्होंने राजद में टूट करने की असफ़ल कोशिश की और जदयू की सदस्यता ग्रहण कर ली। अब वे भाजपाई बनेंगे। श्री चौधरी ने खुद रविवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि 11 जून को उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की उपस्थिति में पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित समारोह में वे भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। उन्होंने कहा कि उनके साथ बड़ी संख्या में समर्थकों के अलावा जदयू के कई कार्यकर्ता भी भाजपा में शामिल होंगे।

सच्चाई जान सुशील मोदी ने लगाये अपनी जुबान पर ताले

पटना(अपना बिहार, 5 जून 2017) - राजद प्रमुख लालू प्रसाद एवं उनके परिजनों पर एक के बाद कई संगीन आरोप लगाकर सुर्खियां बटोरने वाले पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने अब खामोशी की चादर ओढ ली है। हालांकि रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से एमएलए को-ऑपरेटिव के प्लॉट की लीज की शर्तों के उल्लंघन की जांच एवं दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर यह मांग की है। श्री मोदी ने मांग की है कि सहकारी समिति को अविलंब भंगकर प्रशासक नियुक्त किया जाए तथा आवासीय भू-खंडों का व्यावसायिक उपयोग करने वाले लोगों से यह राशि दंड सहित वसूल की जाए व एक से अधिक प्लॉट के आवंटन को रद्द किया जाए।

दलित गणेश के बदले ब्राह्म्णी नेहा बनी इंटर आर्ट्स टापर, सवर्ण मीडिया ने बजायी ताली

पटना(अपना बिहार, 4 जून 2017) - आखिरकार वहीं हुआ जिसकी पटकथा पूर्व में लिखी जा चुकी थी। इंटर आर्ट्स टापर रहे गणेश के रिजल्ट को निलंबित कर दिया गया। वहीं उसके बदले नेहा नामक एक छात्रा को टापर घोषित किया गया है। सवर्णों के मीडिया ट्रायल के बाद निलंबित इंटर टॉपर गणेश को शनिवार की देर शाम पुलिस ने सीजेएम के घर पर पेश किया। वहां से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में बेउर जेल भेज दिया गया। वहीं गणेश का समस्तीपुर के इंटर कॉलेज में एडमिशन करवाने वाले दलाल संजय कुमार को पुलिस ने शनिवार की शाम गिरफ्तार कर लिया। संजय की गिरफ्तारी कदमकुआं थाने के मुसल्लहपुर से की गयी। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। गणेश से शनिवार की सुबह कोतवाली थाने में एसएसपी मनु महाराज ने घंटेभर तक पूछताछ की। एसएसपी का कहना है कि जरूरत पड़ने पर इस मामले में भी एसआईटी गठित की जा सकती है। अभी विशेष टीम बनाकर छापेमारी की जा रही है। गणेश को शुक्रवार की रात बोर्ड ऑफिस से गिरफ्तार किया गया था।

एसएसपी ने बताया कि पूछताछ में गणेश ने कई खुलासे किए हैं। उसने कई लोगों के नाम बताए हैं। दलाल संजय के जरिए उसने समस्तीपुर के चकहबीब स्थित स्कूल में एडमिशन लिया था। वर्ष 2015 में गणेश ने दलाल के मार्फत समस्तीपुर के लक्ष्मीनिया स्थित संजय गांधी हाई स्कूल से मैट्रिक में एडमिशन कराकर परीक्षा पास की थी। वहीं, वर्ष 2017 में उसने समस्तीपुर ताजपुर के चकहबीब स्थित रामनंदन सिंह जगदीप नारायण इंटर कॉलेज से परीक्षा देकर आर्ट्स टॉपर बना था।

बहरहाल इस पूरे मामले में दिलचस्प यह है कि दलित गणेश का मीडिया ट्रायल करने वाली सवर्णों की मीडिया ने साईंस और कामर्स टापर का मीडिया ट्रायल करने से परहेज किया। इतना ही नहीं गणेश के बाद इंटर आर्ट्स टापर नेहा को लेकर भी सवर्ण मीडिया ने चुप्पी साध रखी है।

करुणानिधि के 94वें जन्मदिन पर दिखी धर्म निरपेक्ष दलों की एकजुटता, नीतीश ने दिया सामाजिक न्याय पर जोर

चेन्नई/पटना(अपना बिहार, 4 जून 2017) - द्रमुक प्रमुख एम करुणानिधि के 94वें जन्मदिन समारोह में विपक्ष के कई नेता एक मंच पर जुटे। वहीं इस मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि डीएमके नेता एम के स्टालिन तमिलनाडु में अगली सरकार का नेतृत्व करेंगे. इस मौके पर नीतीश ने बिहार में शराबबंदी के फायदे गिनाये और डीएमके को पुराने वायदों की याद दिलाते हुए कहा कि वे जब सत्ता में आये, तो तमिलनाडु में भी शराबबंदी लागू करे. समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी माकपा महासचिव सीताराम  येचुरी, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री  उमर अब्दुल्ला सहित विपक्ष के कई नेता शामिल हुए. हालांकि बीमारी की वजह से समारोह में खुद करुणानिधि शामिल नहीं हुए. करुणानिधि के संसदीय जीवन का 60 साल भी पूरा हुआ है. नीतीश कुमार ने करुणानिधि के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात भी की. नीतीश ने समारोह में कहा कि एम के स्टालिन के नेतृत्व में तमिलनाडु की अगली सरकार बनेगी. उन्होंने कहा, मैंने उनसे (स्टालिन से) कहा है कि वे अपने पिता एम करुणानिधि के शराबबंदी के वायदे को जरूर पूरा करें.  कुमार ने डीएमके के 2016  विधानसभा चुनाव में जारी घोषणा पत्र की याद भी दिलायी, जिसमें सत्ता में आने पर पूर्ण शराबबंदी लागू करने का वायदा किया गया था. उन्होंने कहा, इससे सामाजिक न्याय आंदोलन को मजबूती मिलेगी. नीतीश ने कहा कि बिहार में शराब बंदी से कई बदलाव देखने को मिल रहे हैं.  सड़क दुर्घटनाओं के मामले कम हुए हैं, ताकि घरेलू हिंसा और अपरराध की दर भी घटी है. समारोह में विपक्षी नेताओं की मौजूदगी पर नीतीश ने कहा कि यह राष्ट्रीय राजनीति में करुणानिधि के प्रभाव को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि हम सब अलग-अलग पार्टियों और देश के अलग-अलग हिस्सों से यहां आये हैं, जो करुणानिधि के भारतीय राजनीति पर पकड़ को साबित करता है. नीतीश ने मंडल कमीशन की सिफारिसों को लागू कराने में डीएमके प्रमुख की भूमिका को भी रेखांकित किया.

दो दिनों में अपना दावा पेश कर सकेंगे फ़ेल परीक्षार्थी

पटना(अपना बिहार, 1 जून 2017) - इंटर के परीक्षार्थियों को अपनी कॉपियों की दोबारा जांच कराने का मौका मिलेगा। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति अगले दो दिनों में अपना पोर्टल लांच करेगी। इंटर के वैसे परीक्षार्थी इस पर अपना आवेदन कर सकेंगे, जिन्हें लगता है कि उन्हें कम अंक प्राप्त हुए हैं।

परीक्षा समिति ऐसे छात्रों की कापियों की दोबारा जांच कराकर एक माह के अंदर रिजल्ट जारी करेगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इंटर के खराब रिजल्ट को लेकर बुधवार को शिक्षा मंत्री अशोक कुमार चौधरी, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आरके महाजन और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष आनंद किशोर को तलब किया। परीक्षा परिणामों की गहन समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि तत्काल कॉपी के दोबारा जांच की व्यवस्था कराएं। उन्होंने कंपार्टमेंटल परीक्षा भी जल्द आयोजित कराने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कैबिनेट की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इंटर के रिजल्ट पर हमने शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव और शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव से विस्तार से चर्चा की है।

उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र-छात्रा को लगता है कि उसकी कॉपी ठीक ढंग से नहीं जांची गई है, उसने बेहतर लिखा है, पर उस हिसाब से नंबर नहीं आया है, ऐसे में फिर से कॉपी जांच कराने का उसे अधिकार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन छात्रों को लगता है कि उन्हें कम अंक आया है, वे आवेदन करेंगे तो उनकी कॉपियों की फिर से जांच होगी। साथ ही कंपार्टमेंटल परीक्षा भी जल्द कराने के इंतजाम किये जाएंगे, ताकि अनुत्तीर्ण छात्रों को अवसर मिले।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटर की परीक्षा में किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं होने दी गई है, यह एक सकारात्मक पहलू है। साथ ही उन्होंने कहा कि हमारे दो तिहाई बच्चे इंटर की परीक्षा में अनुत्तीर्ण हो गए हैं, ऐसी स्थित में देखना होगा कि  शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार कैसे करना है। उन्होंने कहा कि इसके लिए कार्ययोजना बनाई जाएगी। ठीक से पढ़ाई हो, इसके लिए कहां पर क्या करने की आवश्यकता है, इसकी समीक्षा होगी।

तेल कंपनी ने तेजप्रताप को भेजा नोटिस, मांगी जानकारी

पटना(अपना बिहार, 1 जून 2017) - भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड ने स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव को पेट्रोल पंप आवंटन के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी की है। भारत पेट्रोलियम ने नोटिस में पेट्रोल पंप आवंटन को लेकर उनके द्वारा दी गयी जानकारी को स्पष्ट करने को कहा है। कॉरपोरेशन ने बताया है कि उनके द्वारा दी गई जानकारी को लेकर 28 अप्रैल 2017 को चंद्रशेखर व अन्य ने शिकायत दर्ज करायी है। उसमें कहा गया है कि जिस जमीन की जानकारी दी गयी है, वो आपके (तेजप्रताप यादव) के नाम पर नहीं है। इसके वास्तविक मालिक मेसर्स एके इन्फो सिस्टम है, जिसने कभी अपनी भूमि तेजप्रताप यादव के नाम लीज नहीं की है। जिस दिन यह शिकायत की गयी, उस दिन तक तेजप्रताप यादव मेसर्स इन्फो सिस्टम के न तो शेयर होल्डर थे और न ही निदेशक। शिकायत में यह भी कहा गया है कि मेसर्स इन्फो ने कभी उनके नाम से जमीन लीज भी नहीं की। कॉरपोरेशन ने शिकायत की एक प्रति तेजप्रताप यादव को भी उपलब्ध करायी है। कॉरपोरेशन ने यह भी सलाह दी है कि स्वास्थ्य मंत्री के पदभार को संभालते हुए वे पेट्रोल पंप का संचालन नहीं कर सकते हैं। भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने बुधवार को शिकायत पत्र को जारी किया और कहा कि पेट्रोलिय कंपनी के द्वारा दी गयी नोटिस का जवाब तेजप्रताप यादव को देना चाहिए।

इंटर की परीक्षा में बिहार फ़ेल

पटना(अपना बिहार, 31 मई 2017) - इंटर साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स तीनों संकाय के रिजल्ट में गिरावट हुई है।  इंटर साइंस में सिर्फ 30.11 फीसदी परीक्षार्थी ही सफल हो पाए हैं।  आर्ट्स में 37.13 फीसदी छात्र और कॉमर्स में 73.76 फीसदी छात्र ही उत्तीर्ण हुए हैं। पिछले साल की तुलना में रिजल्ट में भारी गिरावट आई है। वर्ष 2016 में साइंस में 66.16 फीसदी, आर्ट्स में 55.62 फीसदी और कॉमर्स में 79.37 फीसदी छात्र सफल हुए थे।

इस साल बिहार साइंस का 30 प्रतिशत रिजल्ट गया है। साइंस से टॉप खुशबू ने किया है। सिमलतला की खुशबू के 86.2 फीसद नंबर आए हैं। रिजल्ट घोषित होते ही अध्यक्ष और प्रधान सचिव ने टॉपर खुशबू को फोन कर बधाई दी।

बता दें कि इस साल बिहार बोर्ड की 12वीं की परीक्षा लाखों छात्रों ने दी है। वहीं, पिछले साल साइंस के छात्रों की संख्या 5,60,373 थी। इनमें 66.16% स्टूडेंट पास हुए थे। वहीं, साल 2015 में 6,35,049 छात्रों ने परीक्षा दी थी। पास होने वाले छात्रों का फीसद 88.64% था। आर्ट्स का रिजल्ट तकरीबन 45 फीसद गया है। आर्ट्स के टॉपर बने गणेश कुमार बने हैं। गणेश कुमार समस्तीपुर से हैं और उन्होंने 82.6 फीसदी अंक हासिल किए हैं।  बिहार बोर्ड की 12वीं आर्ट्स में इस साल 533915 छात्र शामिल हुए थे। इनमें 203324 छात्र थे और 330591 छात्राएं थीं। आर्ट्स में पास होने वाले 37.13 फीसदी छात्रों में लड़कों को पास प्रतिशत 38.08 फीसदी रहा जबकि कि पास होने वालों में 61.92 फीसदी छात्राएं रहीं।

बाबरी विध्वंस मामले में आडवाणी सहित कईयों को आज मिलेगी सजा

पटना(अपना बिहार, 30 मई 2017) - बाबरी विध्वंस मामले में आज सजा सुनायी जायेगी। लखनऊ स्थित सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एस के यादव ने भाजपा नेता विनय कटियार, विहिप नेता विष्णु हरि डालमिया और साध्वी रितंभरा से भी अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा है। अदालत ने कहा कि अब छूट या सुनवाई स्थगित करने का कोई आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। अदालत अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाये जाने से जुड़े दो अलग-अलग मामलों की सुनवाई कर रही है। महंत नृत्य गोपाल दास, महंत राम विलास वेदान्ती, बैकुण्ठ लाल शर्मा उर्फ प्रेमजी, चंपत राय बंसल, महंत धर्म दास एवं सतीश प्रधान को भी एक मामले में कल ही तलब किया गया है।

बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट ने 19 अप्रैल को निर्देश दिया था कि आडवाणी (89), जोशी (83) और उमा (58) के अलावा बाकी सभी आरोपियों पर बाबरी ढांचा ढहाये जाने के मामले में आपराधिक षडयंत्र का मुकदमा चलेगा। न्यायालय ने मामले की सुनवाई रोजाना कराने और दो साल में सुनवाई समाप्त करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि भाजपा नेता कल्याण सिंह जब तक राज्यपाल के पद पर हैं, उनके खिलाफ मुकदमा नहीं चल सकता। राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, उसी समय ढांचा ढहाया गया था। न्यायालय ने रायबरेली की अदालत में आडवाणी, जोशी, उमा और तीन अन्य आरोपियों पर चल रहे मुकदमे को लखनउ स्थानांतरित करने का आदेश दिया ताकि ढांचा ढहाये जाने के मामलों की एक साथ सुनवाई हो सके।

पूरी मजबूती के साथ जारी रहेगी सूबे में शराबबंदी : मुख्यमंत्री

पटना(अपना बिहार, 30 मई 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि हम जब तक हैं, शराबबंदी दृढ़ता और मजबूती से लागू रहेगी। कोई भ्रम में नहीं रहे। हम किसी चीज को शुरू करने के पहले काफी सोचते हैं, लेकिन जब काम शुरू कर दिया तो उसे अंजाम तक जरूर पहुंचाते हैं। मुख्यमंत्री ने सोमवार को पटना में महावीर वात्सल्य अस्पताल में स्वास्थ्य मेला के उद्घाटन के बाद ये बातें कहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में शराबबंदी जैसा सामाजिक सुधार हुआ है। कुछ लोग इसे अपनी लिबर्टी से जोड़कर देखते हैं और मानते नहीं हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई चल रही है। होम डिलिवरी के ग्राहक ही इसका खूब गलत प्रचार भी करते हैं कि शराबबंदी प्रभावी नहीं है। लेकिन वे भ्रम में नहीं रहें। सीएम ने कहा कि गंगा की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। यह बहुत ही चिंता का विषय है। महावीर वात्सल्य अस्पताल का उद्घाटन करने 2006 में मैं आया था। उस समय यहां से गंगा की धारा दिखती थी। 11 साल बाद इस अस्पताल के विस्तार कार्यक्रम में आया हूं। अब यहां से गंगा की सिर्फ गाद दिखती है।

उन्होंने कहा कि बिहार की प्रजनन दर 3.9 से घट कर 3.2 हुई है। हमने देखा है कि लड़कियां मैट्रिक पास हैं तो देश का और बिहार की प्रजनन दर दो-दो और  इंटर पास हैं तो देश की प्रजनन दर 1.7 और बिहार की 1.6 है। इसलिए हमने लड़कियों की शिक्षा पर जोर दिया। हर पंचायत में प्लस टू स्कूल स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। आगे इसमें और सुधार आएगा। बिहार राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचेगा। बिहार किसी भी क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर से नीचे नहीं होगा। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य मेला में लगे स्टॉलों का भी भ्रमण किया। कहा कि चिकित्सक लोगों की तकलीफ दूर करते हैं, पर तकलीफ हो क्यों रही है इस पर भी ध्यान देना चाहिए।

तीन साल से स्वर्ग लोक बना भारत : सुशील मोदी

पटना(अपना बिहार, 30 मई 2017) -पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार देश की तरक्की के लिए लगातार बेहतर काम कर रही है। पिछले तीन साल में महंगाई को नहीं बढ़ने दिया गया। बीते दो साल में खाद की कालाबाजारी नहीं हुई। इस प्रकार भारत पिछले तीन साल में स्वर्ग बन गया है। ये बातें भाजपा नेता पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने सोमवार को प्रखंड के नकनेमा में कहीं। वे पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्म शताब्दी सह महासंपर्क अभियान के दौरान लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार बिहार को एक हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली की आपूर्ति करती है। घर व खेती के लिए अलग-अलग फीडर बनाने के लिए छह हजार करोड़ रुपये मुहैया करा चुकी है। लेकिन बिहार सरकार इस दिशा में काम करने के बजाय राजनीति करने में लगी है।

गया की बिटिया बनी स्टेट टापर

सीबीएसई 12वीं रिजल्ट में पटना रीजन से झारखंड की मुस्कान खोवाल को सर्वाधिक 98.2 फीसदी अंक मिले हैं। मुस्कान ने रांची डीपीएस से कॉमर्स संकाय में परीक्षा दी थी। बिहार की टॉपर गया के क्रेन मेमोरियल स्कूल से साइंस की छात्रा शिवा है। शिवा को 97 फीसदी अंक मिले हैं। इस बार जारी रिजल्ट में छात्रों को अतिरिक्त अंकों का फायदा मिला है। रिजल्ट में 95 फीसदी से लेकर 100 फीसदी अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की संख्या बढ़ी है। एकबार फिर बिहार की बेटियों ने कमाल कर दिखाया है। यह लगातार चौथा साल है जब बेटियों ने बेटों को पीछे छोड़ दिया है। इसबार बिहार और झारखंड मिलाकर कुल सफलता का प्रतिशत 74.60 रहा है। इसमें लड़कियों की सफलता का प्रतिशत 81.70 रहा, वहीं लड़कों की सफलता का प्रतिशत 70.60 प्रतिशत रहा है।

ठनके और आंधी ने ली 27 की जान

पटना(अपना बिहार, 29 मई 2017) - उत्तर बिहार में रविवार को तेज आंधी, पानी व ठनका गिरने से कुल 27 लोगों की मौत हो गयी। दर्जनों लोग जख्मी हो गये। तेज आंधी में सैंकड़ों घरों के छप्पर उड़ गये। जगह-जगह पेड़ उखड़ कर गिर गये। इससे कई जगह आवागमन बाधित हो गया। इससे आम-लीची के साथ-साथ मक्के की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। आंधी-पानी का सबसे अधिक असर पश्चिमी व पूर्वी चम्पारण, समस्तीपुर, दरभंगा व सीतामढ़ी जिले में रहा। यहां जन-जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

पश्चिम चम्पारण में सुबह करीब नौ बजे आए आंधी-पानी से छह लोगों की मौत हो गयी। मरने वालों में योगापट्टी के ढढ़वा के मैनेजर चौधरी (50), चन्द्रावती देवी (55), दुधियवां की शंभा देवी (40), भरथापट्टी की रीमा कुमारी (14) व परमशीला कुमारी (16) तथा लौरिया अंचल के साठी, धोबनी वृत्ता टोला के मुकेश कुमार (16) शामिल हैं। गंडक दियारावर्ती पंचायत ढ़ढ़वा, खुटवनिया जरलपुर, चौमुखा व सिसवा मंगलपुर में सैंकड़ों घरों के छप्पर उड़ गये व दर्जनों विशाल पेड़ उखड़ गये। हजारों एकड़ में लगी मक्के की फसल नष्ट हो गई है। लाखों की कीमत के आम-लीची के फल भी बर्वाद हो गए हैं। योगापट्टी के सीओ शंभू नाथ राम ने बताया कि क्षति का आकलन किया जा रहा है। जिला प्रशासन को राहत सहायता का प्रतिवेदन भेजा जाएगा। इधर, पूर्वी चम्पारण जिले में आंधी-पानी के दौरान ठनका गिरने से एक छात्रा व दो महिलाओं की मौत हो गयी।

मरनेवालों में फेनहारा थाने की खानपिपरा पंचायत के कोदरियाअमी गांव निवासी रामनाथ साह की पुत्री इंटर की छात्रा वीणा कुमारी (18), कोटवा थाने के कोइरगांवा के अच्छेलाल साह की पत्नी सुनीता देवी (30) व तुरकौलिया थाने के तुरकौलिया पूरबारी टोला निवासी हीरा साह की पत्नी सोशिला देवी (40) शामिल हैं। चकिया के मधुबन रोड में भोला इंजीनियरिंग वर्क्स शॉप पर विशाल पेड़ गिर जाने से हजारों का नुकसान हुआ है। आंधी-पानी से कई जगह झोपड़ियां गिर गयी। इधर, समस्तीपुर में आंधी-पानी के दौरान सैलून संचालक समेत दो लोगों की मौत हो गयी। मुक्तापुर जूट मिल के पास सैलून पर पेड़ गिरने से सैलून संचालक वारिसनगर थाने के कुसैया गांव निवासी महेश ठाकुर (40) की मौत हो गयी, जबकि दो अन्य जख्मी हो गए। मोहिउद्दीननगर थाने के महमद्दीपुर के दियारा में भैस चरा रहे राजेश कुमार (28) की मौत ठनका गिरने से हो गयी। इस दौरान जिले में कई लोग जख्मी भी हो गए। समस्तीपुर स्टेशन रोड व माधुरी चौक पर रेलवे क्वार्टरों पर कई पेड़ गिर गये। इससे तीन क्वार्टर क्षतिग्रस्त हो गये। ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों व एनएच पर कई जगह पेड़ गिर गये, जिससे यातायात बाधित हो गया है।

इधर, दरभंगा में आंधी, पानी के दौरान ठनका की चपेट में आने से एक महिला समेत दो लोगों की मौत हो गयी। मरने वालों में केवटी थाने के शेखपुरा दानी गांव के चरितर साह (62) व चकतपुर थाने के कटहारा गांव निवासी सुनर सदाय की पत्नी शांति देवी (45) शामिल है। वहीं कई लोग जख्मी भी हो गये। इस दौरान दर्जनों घरों के छप्पर उड़ गये। इधर, सीतामढ़ी जिले के रून्नीसैदपुर, बाजपट्टी, पुपरी, चोरौत सहित कई प्रखंड क्षेत्रों में तेज बारिश हुई। इस दौरान बाजपट्टी थाने के रतवारा गांव के सरेह में ठनका गिरने से भैंस चरा रही रघुनाथ दास की पुत्री सुलेखा कुमारी (16) गंभीर रूप से जख्मी हो गयीं। ठनका से भैंस भी झुलस गयीं। जख्मी को सदर अस्पताल में भत्र्ती कराया गया। जहां चिकित्सकों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर रेफर कर दिया।

मुजफ्फरपुर में कई जगहों पर पेड़ उखड़ने से सड़क व रेल परिचालन बाधित रहा। बिजली के पोल व तार टूटने से आपूर्ति ठप पड़ गई। संचार व्यवस्था पर भी असर पड़ा रहा है। सकरा व मुरौल में दो दर्जन घर व एस्बेस्टस के मकान ध्वस्त हो गए। आधा दर्जन लोग घायल हो गए। सिहो-ढोली के बीच रेल ट्रैक पर पेड़ गिरने से दो घंटे तक रेल परिचालन ठप रहा। टाटा-छपरा एक्सप्रेस समेत पैसेंजर ट्रेनों को जहां-तहां खड़ा करना पड़ा। मीनापुर में कई जगहों पर तेज आंधी से पेड़ उखड़ गए। इससे प्रखंड में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है। हालांकि झमाझम बारिश से गर्मी से राहत मिली है। किसान बारिश से खुश हैं। धान का बिचड़ा गिरने के लिए इससे खेतों में पर्याप्त नमी हो गई है।

दावत को लेकर सवर्ण अखबारों ने मचाया भौकाल, नीतीश ने खोली पोल

पटना(अपना बिहार, 27 मई 2017) - सूबे के सवर्ण अखबारों ने अपने सामंती चरित्र के मुताबिक एक बार फ़िर दावत की राजनीति को लेकर भौकाल मचाया है। दरअसल कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने सभी विपक्षी दलों के नेताओं को भोज के लिये आमंत्रित किया। इस भोज में जदयू की तरफ़ से शरद यादव शामिल हुए। वहीं बिहार के अखबारों में यह प्रकाशित किया गया कि सीएम विपक्षी दलों की बन रही एकजुटता के खिलाफ़ हैं। वहीं अपनी झूठ को स्थापित करने के लिए अखबारों ने पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा मारीशस के पीएम को आज दिये जाने वाले भोज में श्री कुमार के शामिल होने की बात को आधार बनाया। जबकि इस मामले में श्री कुमार ने कल कैबिनेट की बैठक के बाद कहा कि इसका गलत अर्थ निकाला जा रहा है। प्रधानमंत्री कल मॉरिशस के प्रधानमंत्री के सम्मान में भोज की मेजबानी करेंगे। उन्होंने कहा, जाने या ना जाने जैसी कोई बात ही नहीं है। चार-पांच दिन पहले अहमद पटेल (कांग्रेस नेता) ने जब दोपहर भोज पर बैठक की खातिर जदयू को निमंत्रित करने के लिए मुझे फोन किया तो मैंने तब ही उन्हें इसके बारे में बता दिया था। जदयू को निमंत्रण दिया गया था और पार्टी प्रतिनिधि के तौर पर उसमें शरद यादव शामिल हुए। विपक्ष की बैठक से आज नीतीश के नदारद रहने को राष्ट्रपति पद के आगामी चुनाव में गैर भाजपा दलों द्वारा एक साक्षा उम्मीदवार खड़ा करने की कोशिशों को लगे क्षटके की तरह देखा जा रहा है, इसे लेकर नीतीश ने कहा, मैं पहले ही इसपर सोनिया गांधी से मिल चुका हूं और दूसरे दलों के प्रमुख नेताओं से फोन पर बात की है।

वहीं प्रधानमंत्री के भोज में शामिल होने के बारे में पूछे जाने पर नीतीश ने कहा कि उन्होंने यह निमंत्रण बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर स्वीकार किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मॉरिशस के लंबे समय से बिहार से भावनात्मक संबंध हैं। आज मॉरिशस की 52 प्रतिशत से ज्यादा आबादी का मूल बिहार में हैं। उन्होंने साथ ही कहा, मॉरिशस के पूर्व एवं मौजूदा प्रधानमंत्री की जड़ें बिहार में हैं।

सवर्ण सफ़ेदपोशों को राहत, बीएसएससी पेपर लीक मामले में दलित आईएएस सुधीर के खिलाफ़ चलेगा भ्रष्टाचार का मुकदमा

पटना(अपना बिहार, 27 मई 2017) - बीएसएससी पेपर लीक मामले में पूर्व अध्यक्ष दलित सुधीर कुमार और सचिव परमेश्वर पर भ्रष्टाचार का मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन स्वीकृति पुलिस ने प्राप्त कर लिया है। पुलिस ने इसे निगरानी कोर्ट में दाखिल कर दिया है। वहीं, एसआईटी ने गिरफ्तार किए गए 36 में से 31 आरोपितों के खिलाफ कोर्ट में गुरुवार तक आरोप-पत्र दाखिल कर दिया है। गिरफ्तार पांच अन्य के खलिाफ पुलिस जल्द ही आरोप पत्र दाखिल करेगी। पांच आरोपित अभी भी फरार हैं। इनके खिलाफ पुलिस ने वारंट व इश्तेहार चिपकाने का आदेश कोर्ट से लिया है।

आरोपियों के खिलाफ 40 हजार पन्नों में आरोप-पत्र दाखिल किया गया है। सबूत के तौर पर फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट, मोबाइल फोन कॉल रिकॉर्ड, एसएमएस, जमीन के कागजात, बैंक खाते सहित अन्य दस्तावेज हैं। बुधवार को एसआईटी ने सुधीर, बरार सहित आठ के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया था। एसआईटी सुधीर के साथ बरार को मास्टरमाइंड मान रही है।

राजदेव हत्याकांड मामले में सीबीआई ने शहाबुद्दीन को बनाया दसवां आरोपी, रिमांड पर लेने की मिली इजाजत

पटना(अपना बिहार, 27 मई 2017) - पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड में सीबीआई राजद नेता व सीवान के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। शुक्रवार को सीबीआई की विशेष अदालत ने इसकी मंजूरी दे दी। इससे पहले मामले में शहाबुद्दीन वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से शुक्रवार को विशेष अदालत में पेश किए गए। फिलहाल वे दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद हैं। विशेष मजिस्ट्रेट अनुपम कुमारी के समक्ष पेशी के बाद उन्हें हत्याकांड में 10वां अभियुक्त बनाया गया है। साथ ही इस मामले में उन्हें न्यायिक हिरासत में ले लिया गया है। मामले में पहली बार पूर्व सांसद को पेश किया गया। सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से जांच अधिकारी सुनील सिंह रावत ने दस दिनों के रिमांड के लिए विशेष अदालत में अर्जी दाखिल की। अदालत ने आठ दिनों के लिए रिमांड की मंजूरी दी। रिमांड के दौरान सीबीआई पूर्व सांसद से इस हत्याकांड के महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर पूछताछ करेगी। इस कांड में अगली सुनवाई के लिए नौ जून की तारीख मुकर्रर की गई है। 

मोदी सरकार के विश्वासघात के खिलाफ़ युवा राजद ने निकाला आक्रोश मार्च

पटना(अपना बिहार, 27 मई 2017) - केन्द्र में मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने पर केन्द्र सरकार के जनविरोधी एवं युवाओं के साथ किये गये विश्वासघात के विरोध में पार्टी के राज्य कार्यालय से आयकर गोलम्बर तक युवा राजद के द्वारा आक्रोश मार्च निकाला गया। इस आक्रोश मार्च का नेतृत्व युवा राजद के प्रदेश अध्यक्ष कारी सोहैब ने किया। मार्च में युवा राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह सांसद शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल एवं  लोकसभा पूर्व प्रत्याशी कृष्णा यादव शामिल थे। इस आक्रोश मार्च को संबोधित कर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डा रामचन्द्र पूर्वे ने केन्द्र सरकार की नाकामियों पर हमला करते हुए पार्टी कार्यालय से आक्रोश मार्च को रवाना किया। इस आक्रोश मार्च में युवा राजद के भारी संख्या में युवाओं ने हाथों में तख्ती लेकर ‘‘मोदी तेरे तीन साल, युवा हुआ बेहाल‘‘ का नारा लगाते हुए केन्द्र सरकार के युवा विरोधी नीतियों तथा उसके तीन साल की विफलता के खिलाफ मार्च किया। आक्रोश मार्च के बाद युवा राजद का ग्यारह सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल युवा राजद के प्रदेश अध्यक्ष कारी सोहैब के नेतृत्व में राष्ट्रपति के नाम का एक ज्ञापन राज्यपाल को सौपा।

इस मार्च में आकाश यादव, प्रभात रंजन, सतीश चन्द्रवंशी, रणविजय साहू, प्रमोद कुमार सिन्हा, विपुल यादव, अरूण कुमार यादव, ईकवाल अहमद, मुकेश यादव, मनीष गुप्ता, दिनेश पासवान सहित बड़ी संख्या में राजद नेता ओ कार्यकर्तागण उपस्थित थे।

चलती बस में लगी भीषण आग, दो दर्जन से अधिक जिंदा जले, सरकार कर रही 8 के मरने की पुष्टि

पटना(अपना बिहार, 26 मई 2017) - पटना से शेखपुरा जा रही एक बस में भीषण आग लग जाने से उसमें सवार आठ लोग जलकर मर गये। मरने वालों में सात वयस्क और एक बच्चा शामिल है। घटना हरनौत में शाम पौने छह बजे हुई। जिस समय यह घटना हुई उस समय बस हरनौत बाजार से गुजर रही थी। आग इतनी भयावह थी कि अंदर बैठे यात्री निकल नहीं पाये और जिंदा जल गये। लाशें इस कदर जल गई हैं कि यह पता करना मुश्किल है कि ये महिलाओं की हैं या पुरुषों की। लाशों को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा गया है।  जली हुई लाशें आपस में सट गई हैं।  लोगों का कहना है कि मृतकों की संख्या बढ़ भी सकती है। कुछ लोग 15 तो कुछ 20 भी बता रहे थे। इस बीच सीएम नीतीश कुमार ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। सीएम ने मृतकों के परिवार को चार-चार लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है।

इस घटना को लेकर लोगों ने हरनौत में जमकर बवाल किया। बस में आग लगने के आधा घंटे के बाद पुलिस पहुंची। इससे आक्रोशित लोगों ने पुलिस पर हमला बोल दिया और कई पुलिसकर्मियों को पीटा। प्रशासनिक अधिकारी लोगों को समझाने में लगे थे। घटनास्थल पर नालंदा के जिलाधिकारी और एसपी पहुंच गये थे। जेसीबी की मदद से जली हुई बस को रास्ते से हटाने की कोशिश की जा रही थी ताकि यातायात सामान्य हो सके। लोग इतने आक्रोशित थे कि लाशें निकालने का काम बाधित हो रहा था। हरनौत थाने से छोटा दमकल भेजकर आग पर काबू पाया गया। इससे पहले लोग बाल्टी से पानी फेंक कर आग बुझाने की कोशिश कर रहे थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पटना से शेखपुरा जा रही बाबा रथ नामक बस पौने छह बजे शाम में हरनौत बाजार पहुंची। वहां बस का ठहराव नहीं था। बाजार में भीड़ अधिक होने के कारण बस धीरे-धीरे चल रही थी। जैसे ही बस थाना मोड़ के विश्वकर्मा मोड़ के पास पहुंची अचानक बस की इंजन से आग की लपटें निकलने लगीं। जैसे ही बस के ड्राइवर की नजर उसपर पड़ी उसने बस रोक दी। इसके बाद वह खलासी के साथ बस से कूद कर भाग गया। हालांकि भागते हुए उसने बस में बैठे यात्रियों से भी जल्दी निकल जाने के लिए कहा। इधर देखते-देखते आग की लपटें भयावह तरीके से उठने लगीं और उसने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। पूरी बस आग के गोले में बदल गई। जो लोग बस के दरवाजे के पास थे वे लोग तो उतर गये लेकिन बीच में और पीछे बैठे लोग आग की चपेट में आ गये। बस से उतरकर भागने के क्रम में अठारह लोग झुलस गये हैं। 

जूनियर डाक्टरों की हड़ताल अविलंब समाप्त कराये सरकार: माले

पटना(अपना बिहार, 26 मई 2017) - भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने जूनियर डाक्टरों के हड़ताल पर जाने की वजह से पीएमसीएच में मची अराजकता की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि हड़ताल की वजह से न्यूनतम 17 मरीजों की मौत हो चुकी है, और अगर सरकार तत्काल कोई कदम नहीं उठाती तो मृतकों की संख्या और भी बढ़ सकती है. इमरजेंसी से ओपीडी तक अफरा-तफरी का माहौल मचा हुआ है और भीषण गर्मी में लोगों का धैर्य जबाव देने लगा है. उन्होंने कहा कि यह कोई पहली बार नहीं कि जूनियर डाक्टरों की हड़ताल की वजह से स्वास्थ्य सेवायें चरमरा गयी हैं, बल्कि अक्सर किसी न किसी बात पर जूनियर डाक्टर हड़ताल पर जाते रहते हैं और उसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है.

भाजपा नेताओं पर राजद प्रवक्ता ने लगाया झूठ बोलने का आरोप

पटना(अपना बिहार, 26 मई 2017) - राजद के प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन ने बिहार भाजपा नेताओं पर गलत बयानी करने का आरोप लगाया है। राजद नेता ने कहा है कि आज भाजपा के प्रदेष अध्यक्ष नित्यानन्द राय द्वारा यह दावा किया गया है कि विगत तीन वर्षो में केन्द्र सरकार द्वारा केन्द्रीय कर के अलावा बिहार को लगभग 95 हजार करोड़ रूपये दिये गये। जिसे राज्य सरकार द्वारा सही ढंग से खर्च नहीं किया गया। यदि इसमे सच्चाई है तो उन्हे यह बताना चाहिए कि केन्द्र सरकार द्वारा किस योजना में कितनी राषि किस वित्तिय वर्ष में दी गई है। राजद नेता ने कहा कि भाजपा नेताओं पर गलत आंकड़ों द्वारा बिहार के लोगों को गुमराह किया जा रहा है। कुषल नेतृत्व और सही वित्तिय प्रबंधन के बल पर अपने बुते बिहार का विकास दर आज 7.6 प्रतिषत है। जबकि राष्ट्रीय विकास दर 6.8 प्रतिषत है।

लालू से इसलिए भयभीत है भाजपा और डाल रही नीतीश पर डोरे

पटना(अपना बिहार, 25 मई 2017) - आगामी 27 अगस्त को राजद प्रमुख लालू प्रसाद द्वारा आहूत महारैली को लेकर बीजेपी की सांसें अभी से फ़ूलने लगी हैं। बीजेपी नेताओं के मन में दहशत का अनुमान इसी मात्र से लगाया जा सकता है कि वे लालू प्रसाद की बेटी और दामाद तक को परेशान करने में जुट गये हैं। बताते चलें कि केंद्र के इशारे पर आयकर विभाग ने राज्यसभा सांसद डा मीसा भारती व उनके पति शैलेश कुमार को नोटिस भेजा है। हालांकि यह एक सामान्य प्रक्रिया है। आयकर विभाग ने नोटबंदी के बाद लाखों लोगों को नोटिस भेजा है और उनसे उनकी आय व संपत्ति के बारे में जवाब मांगा है। सबसे अधिक दिलचस्प यह है कि चर्च की जमीन कब्जा कर उसपर करीब 600 करोड़ रुपए का शापिंग काम्प्लेक्स बनवाने वाले सुशील मोदी को लेकर आयकर विभाग ने चुप्पी साध रखी है।

सवाल उठता है कि आखिर लालू प्रसाद और उनके परिजनों पर सवाल क्यों उठाये जा रहे हैं। यह सवाल इसलिए भी कि बिहार की राजधानी पटना में ही भाजपा के कई बड़े नेताओं के पास अकूत संपत्ति है। मसलन भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय डाकबंगला चौराहा पर करीब 300 करोड़ रुपए मूल्य के शापिंग काम्प्लेक्स में एक पूर्व बाहुबली भूमिहार सांसद के पार्टनर हैं। डा सी पी ठाकुर की अकूत संपत्ति के बारे में सभी जानते हैं। यहां तक कि नंद किशोर यादव ने भी अपने मंत्रित्व काल में अरबों रुपए की संपत्ति अर्जित की है।

खैर केंद्र में बीजेपी की सरकार है और आयकर विभाग केंद्रीय एजेंसी। ऐसे में वह बीजेपी नेताओं के काले कारनामों की जांच करेगी, कहना बेमानी है। रही बात लालू प्रसाद व उनके परिजनों की तो यह पहला अवसर नहीं है जब आयकर विभाग ने पक्षपातपूर्ण कार्रवाई किया है। वर्ष 1996 में आयकर विभाग ने श्री प्रसाद और उनके परिजनों के घरों की जमीन तक खोद दी थी। लेकिन वर्ष 2006 में पटना हाईकोर्ट ने आयकर विभाग की अपील को खारिज कर दिया था।

बहरहाल लालू प्रसाद अपने मिशन में जुटे हैं। उनकी पहल पर अब देश में धर्म निरपेक्ष दलों के बीच एकजुटता बनती दिख रही है। ऐसे में नरेंद्र मोदी का होश फ़ाख्ता होना स्वभाविक ही है। फ़िलहाल तो यही कहा जा सकता है।

वंचित तबकों के उत्थान में संत गाडगे जी महाराज की अहम भूमिका : मुख्यमंत्री

पटना(अपना बिहार, 25 मई 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संत गाडगे जी महाराज के 141वीं जयंती के मौके पर आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि वंचित तबकों के उत्थान में संत गाडगे जी महाराज की अहम भूमिका थी। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि संत गाडगे जी महाराज की भूमिका समाज के वंचित तबकों के उत्थान में अहम रहा है। उन्होंने शिक्षा पर जोर दिया था तथा लोगों को इसके लिये प्रेरित किया था। वे गांव-गांव जाकर गीत सुनाते थे, लोगों को सीखाते थे, उन्हें प्रेरित करते थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि संत गाडगे जी महाराज गांव में चले जाते थे। गांव की पूरी सफाई करते थे, सफाई के बाद गांव वालों को बधाई देते थे कि उनका गांव काफी साफ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह वर्ष चम्पारण सत्याग्रह का सौंवा वर्ष है। साथ ही 2019 में गांधी जी जयंती का डेढ़ सौंवा साल होगा। गांधी जी ने स्वच्छता पर जोर दिया था। दक्षिण अफ्रीका के दिनों से ही गांधी जी स्वच्छता पर जोर देते थे। उन्होंने कहा कि राम मनोहर लोहिया जी के मन में भी स्वच्छता के प्रति जबर्दस्त भाव था। महिलाओं को घर से बाहर शौच जाना पड़ता है, इससे उन्हें काफी दुख होता था। वे इसका जबर्दस्त विरोध करते थे। लोहिया जी, पंडित नेहरू के घोर विरोधी थे। लोहिया जी ने कहा था कि अगर गांव की महिलाओं को घर से बाहर शौच के लिये जाने से नेहरू जी मुक्त कर देंगे, शौचालय बना देंगे तो मैं उनका विरोध करना छोड़ दूंगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के स्वच्छता मिषन का नाम राम मनोहर लोहिया जी के नाम पर लोहिया स्वच्छता अभियान रखा गया है। उन्होंने कहा कि संत गाडगे जी महाराज ने अपने जीवन में कई प्रकार की कठिनाइयों को झेलते हुये स्वच्छता का अभियान चलाया। समाज के नवनिर्माण में उनकी अहम भूमिका रही थी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र एवं प्रतीक चिह्न भेंट किया गया। इस अवसर पर पूर्व मंत्री श्याम रजक, विधायक नरेन्द्र सिंह उर्फ बोगो सिंह, पूर्व विधान पार्षद रूदल राय, अर्थशास्त्री  शैवाल गुप्ता, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति एवं वरीय अधिकारी उपस्थित थे।

महान समाजसेवी थे डा पी गुप्ता : मुख्यमंत्री

पटना(अपना बिहार, 25 मई 2017) - बेगूसराय में प्राख्यात चिकित्सक व वामपंथी चिंतक रहे डा पी गुप्ता की प्रतिमा का अनावरण करते हुए सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि वे महान समाजसेवी चिकित्सक थे। उन्होंने कहा कि वे गरीबों के रहनुमा थे। मुख्यमंत्री ने सूबे के चिकित्सकों को डा पी गुप्ता के जीवन से सीखने की सलाह दी कि किस तरह डा गुप्ता ने गरीबों की सेवा की। वहीं नमामी गंगे योजना का जिक्र करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा नदी की निमर्लता की बात होती है। मैंने यह स्पष्ट कहा है कि अविलरता के बिना निमर्लता संभव नहीं है। राष्ट्रीय जलमार्ग 1 के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय जलमार्ग 1 अगर बनाया जायेगा तो गंगा नदी पर कई बांध बनेंगे, जिससे गंगा नदी की अविलरता समाप्त हो जायेगी। उन्होंने कहा कि गंगा नदी के गाद के लिये गाद प्रबंधन का उपाय होना चाहिये। इसके लिये कमिटी तो बनी परंतु किसी ने गंगा का स्थल निरीक्षण नहीं किया, बल्कि कमरे में बैठकर रिपोर्ट तैयार कर दी गयी, इससे काम नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि वाटरवेज के अधिकारियों ने अपना प्रस्तुतीकरण दिया था। मैंने उन्हें गंगा नदी का स्थल निरीक्षण करने को कहा। बिहार सरकार के हेलीकाॅप्टर द्वारा उन्हें गंगा नदी का भ्रमण कराया गया। उनके द्वारा भी यह बात मानी गयी कि गंगा नदी की समस्या गंभीर है। उन्होंने कहा कि हम यह नहीं चाहते हैं कि फरक्का बराज को तोड़ दिया जाय। चाहते हैं कि गंगा नदी का अध्ययन हो तथा गाद की समस्या दूर करने के लिये कोई रास्ता निकाला जाय। उन्होंने कहा कि स्थिति गंभीर है, यह हर किसी को समझना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जलमार्ग के लिये रास्ता बनेगा तो गंगा नदी के किनारों पर और कटाव होगा। हम सभी लोगों से आग्रह करते हैं कि इस विषय पर एकजुटता के साथ काम करें।

इस अवसर पर समाज कल्याण मंत्री कुमारी मंजू वर्मा, सांसद भोला सिंह, बखरी के विधायक उपेन्द्र पासवान, पूर्व सांसद शत्रुघ्न सिंह, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय नेत्री अमरजीत कौर, पूर्व विधायक सत्यनारायण, पूर्व विधान पार्षद डा तनवीर हसन, डा पी गुप्ता के पुत्र शैवाल गुप्ता सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

तीन वर्षों में नरेंद्र मोदी ने बिहार को बनाया स्वर्ग : नंदकिशोर

पटना(अपना बिहार, 25 मई 2017) - बिहार विधान सभा में लोक लेखा समिति के सभापति और वरिष्ठ भाजपा नेता  नंदकिशोर यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तीन वर्षों के कार्यकाल में बिहार को स्वर्ग बना दिया है। अपने बयान में उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं के मद में भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों ने इतनी धन वर्षा की उसे समेटने में राज्य सरकार पूरी तरह विफल रही। आने वाले दिनों में भी यह क्रम जारी रहेगा। श्री यादव ने कहा कि घोषणाओं और नीतिगत निर्णयों से उपर उठकर प्रधानमंत्री ने अपने तीन वर्षों की कार्यावधि में बिहार को जितने उपहार, जितनी राशि और इन सबसे बढ़कर विशेष पैकेज का तोहफा दिया उतना आज कि कांग्रेस की किसी भी केन्द्र सरकार ने नहीं दिया।

पटना में बनेगा कलाम साइंस सिटी

पटना(अपना बिहार, 24 मई 2017) - राजधानी पटना में डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की  साइंस सिटी का निर्माण जल्द शुरू होगा। इसके लिए 397 करोड़ खर्च करने की प्रशासनिक स्वीकृत राज्य कैबिनेट ने मंगलवार को दी। 94 करोड़ जल्द ही बिहार काउंसिल ऑन साइंस सिटी एंड टेक्नोलॉजी को बिहार आकस्मिकता निधि से दिया जाएगा, ताकि काम जल्द शुरू हो।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में 11 प्रस्तवों पर सहमति दी गई। गौरतलब हो कि राजेंद्रनगर में स्थित मोइनुल हक स्टेडियम के नजदीक करीब 20 एकड़ भूमि में साइंस सिटी का निर्माण होना है। साइंस सिटी में वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित कई प्रदर्श दीर्घा का निर्माण होगा। इसमें वैज्ञानिक सिद्धांतों की अनुभूति और इनका आम जन-जीवन में हो रहे प्रोयोगों को भी दिखाया जाएगा। पर्यटन स्थल के रूप में भी इसका विकास होगा। वहीं एक दूसरे फ़ैसले के तहत राज्य सरकार अब संबंधित लाभुकों के खाते में सीधे राशि का भुगतान करेगी। ट्रेजरी से पहले बैंक और फिर लाभुकों के खाते में राशि जाने की व्यवस्था नहीं रहेगी। ट्रेजरी से सीधे संवेदकों, वेंडरों, आपूर्तिकर्ताओं और अन्य लाभुकों के खाते में राशि जाएगी। इसको लेकर कंप्रीहेन्सिव ट्रेजरी मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम के अंतर्गत ई-पेमेंट की व्यवस्था लागू करने की कैबिनेट ने सहमति दे दी।

एमटीएस के सभी चरणों की परीक्षा रद्द, अब होगी सभी परीक्षायें आनलाइन

पटना(अपना बिहार, 24 मई 2017) - एक बार फ़िर एसएससी की कार्यशैली पर सवाल उठा है। एसएससी एमटीएस के सभी चरणों की परीक्षा रद्द कर दी गयी। जब पेपरलीक हुआ था तब देश के अन्य शहरों के साथ पटना में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा था। छात्रों ने परीक्षा रद्द करने की मांग की थी। अब जब आयोग ने परीक्षा रद्द कर दी है इसे छात्रों की जीत मानी जा रही है।

केन्द्रीय कर्मचारी चयन आयोग ने एमटीएस (मल्टी टास्किंग स्टाफ) की सभी परीक्षाओं को रद्द कर दिया है। मंगलवार को इसकी सूचना वेबसाइट पर डाल दी गयी है। यह परीक्षा अब सितम्बर व अक्टूबर में संभावित है। इसकी आगे की परीक्षाएं ऑनलाइन ली जाएंगी। एमटीएस परीक्षा पांच चरणों में होनी थी। इसमें से दो चरण की परीक्षा 30 अप्रैल और 14 मई को हो चुकी है जबकि आगे के तीन चरणों में 28 मई तथा चार व 11 जून को परीक्षा प्रस्तावित थी। 30 अप्रैल को बिहार और 14 मई को आगरा और कानपुर में एमटीएस का पेपर आउट हो गया था। पटना में एक कोचिंग संचालिका ने परीक्षा शुरू होते ही फेसबुक पर प्रश्नपत्र और उत्तर अपलोड कर दिया था। आगरा में वाटसएप पर वायरल हुए पेपर के साथ जीजा और साले को पकड़ा भी गया था। इसके बाद छात्र सड़क पर उतर गए थे।

नकल माफियाओं से परेशान होकर एसएससी ने संयुक्त स्नातक स्तरीय भर्ती (सीजीएल) और संयुक्त हायर सेकेंड्री स्तरीय भर्ती (सीएचएसएल) सहित अन्य भर्ती परीक्षाओं को ऑनलाइन किया था। एमटीएस को ऑनलाइन इसलिए नहीं किया गया था क्योंकि इसमें आवेदकों की संख्या अधिक थी। लेकिन दो चरणों में पेपरलीक होने से सबक लेते हुए आयोग ने अब इसे भी ऑनलाइन कराने का फैसला लिया है।

आयकर मामले में फ़र्जी दस्तावेज देने पर भोजपुरी गायक भरत शर्मा व्यास को जेल

पटना(अपना बिहार, 23 मई 2017) - टीडीएस घोटाले के आरोपी भोजपुरी गायक भरत शर्मा व्यास ने सोमवार को धनबाद की अवर न्यायाधीश एमके त्रिपाठी की अदालत में सोमवार को सरेंडर कर जमानत अर्जी दायर की. अदालत ने दोनों पक्ष की दलील सुनने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया. वर्ष 1999-2000 व 2001-2002 में आरोपी भरत शर्मा ने आयकर रिटर्न दाखिल करने में  गड़बड़ी की थी. इस संबंध मेंआयकर अधिकारी शशि राजन ने 25 जनवरी, 05 व 28 जनवरी, 05 को मामला दर्ज कराया था. आयकर विभाग ने आरोप लगाया था कि वित्त वर्ष 1999 से 2002 के बीच भरत शर्मा ने अपने आप को सुपर कैसेट इंडस्ट्रीज का गायक बताकर टीडीएस रिफंड का दावा किया था.

अगलगी की घटनाओं को लेकर सख्त दिखे नीतीश, समीक्षा बैठक में दिये कई निर्देश

पटना(अपना बिहार, 23 मई 2017) - सूबे में अगलगी की घटनाओं के मद्देनजर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अधिकारियों से त्वरित बचाव एवं राहत कार्य चलाने संबंधी कई निर्देश दिये। श्री कुमार ने कल मुख्यमंत्री आवास 1 अणे मार्ग स्थित विमर्ष सभाकक्ष में राज्य में हो रहे अग्निकाण्ड की घटनाओं की रोकथाम हेतु समीक्षा बैठक की। बैठक में आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुतीकरण दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आग लग जाने पर दमकल भेजकर आग बूझा देना और राहत वितरण कर देने से काम नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि आग लगने की घटनायें न हो, इसके लिये तंत्र को मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि बड़े भवनों में ज्यादातर आग शाट सर्किट के कारण लगती है। उन्होंने कहा कि उन्हें निजी एवं सरकारी दोनों भवनों की चिन्ता है, इसके लिये तंत्र को स्पीडअप करना होगा। उन्होंने अग्निषमन, नगर विकास विभाग, ऊर्जा विभाग, भवन निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग को निर्देष दिया कि वे इसकी रोकथाम के लिये अविलंब एक्षन प्लान तैयार करें। उन्होंने कहा कि मल्टी स्टोरेज बिल्डिंग बढ़ते जा रहे हैं। बिल्डिंग बायोलाॅज में फायर सेफ्टी और इसकी नियमित जांच आवष्यक है। उन्होंने कहा कि इसके लिये पर्याप्त मशीनरी को विकसित करना होगा और सिस्टम को बिल्डअप करना होगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि मल्टी स्टोरेज बिल्डिंग के निर्माताओं से फायर सेफ्टी के संबंध में किये गये उपायों के संबंध में स्वप्रमाणित प्रतिवेदन प्राप्त करें और इसकी नियमित जांच भी करायी जाय। उन्होंने कहा कि निजी भवनों में रहने वाले लेागों को भी फायर सेफ्टी के संबंध में जागरूक करना होगा।

इस अवसर पर मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ब्यासजी, आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के पूर्व सदस्य डा उदय कांत मिश्र, प्रधान सचिव गृह आमिर सुबहानी सहित आपदा प्रबंधन विभाग के संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

शत्रुघ्न ने दी नेक सलाह तो उबल पड़े छोटके मोदी

पटना(अपना बिहार, 23 मई 2017) - सिने अभिनेता सह भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने सुशील मोदी को सलाह दी कि वे नकारात्मक राजनीति बंद करें। उन्होंने कहा कि राजनीति में एक मर्यादा होनी चाहिए। वहीं उनकी सलाह पर उबलते हुए श्री मोदी ने ट्वीट करते हुए कहा कि जो शख्स मशहूर है उस पर ऐतबार किया जाये, जितनी जल्दी हो घर से गद्दारों को बाहर किया जाये। वहीं दूसरे ट्वीट में उन्होंने कहा है कि जिस लालू की बेनामी संपत्ति के बचाव में नीतीश नहीं उतरे लेकिन उसके बचाव में  भाजपा  के ' शत्रु' कूद पड़े। इससे पहले भाजपा नेता और बॉलीवुड के सीनियर एक्टर शत्रुघ्न सिन्हा ने ट्वीट कर राजनेताओं को नसीहत दी है कि अब आरोपों की नकारात्मक राजनीति न करें। शत्रुघ्न सिन्हा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल की तारीफ की तो वहीं लालू यादव और सुशील मोदी को हिदायत दी है। उन्होंने अपने पहले ट्वीट में कहा कि' केजरीवाल, लालू यादव या सुशील मोदी आप लोगों ने नकारात्मक राजनीति को चरम पर पहुंचा दिया है, अब बस कीजिए। साथ ही उन्होंने कहा कि नकारात्मक राजनीति की इंतेहा हो गई है। अब एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप के सिलसिले पर विराम लगना चाहिए।

झूठ और फ़रेब की नौटंकी से मानसिक दिवालियेपन के शिकार हैं सुशील मोदी, राजद प्रवक्ता मनोज झा ने बोला हमला

पटना(अपना बिहार, 23 मई 2017) - राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रो. मनोज झा ने कहा है कि भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी झूठ, पाखंड और फरेब के आधार पर खुले के खुलासे की नौटंकी करते-करते मर्यादित विरोध की तमाम सीमाएं लांघ चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा करते-करते वे मानसिक संतुलन भी खोते जा रहे हैं। सोमवार को जारी अपने बयान में आरोप लगाया है कि दूसरों के सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेज पर गैर जिम्मेदाराना सवाल और अपने बेनामी मकड़जाल पर आपराधिक चुप्पी उनकी हताश राजनीति का केंद्रबिंदु हो चुकी है। प्रो. झा के मुताबिक भाजपा के वरिष्ठ सांसद शत्रुघ्न सिन्हा पर उनकी टिप्पणी घटिया और अमर्यादित है। यह पूरे लोकजीवन को शर्मसार कर गयी है। श्री सिन्हा द्वारा सिर्फ इतना आग्रह कि ‘हमें नकारात्मक राजनीति से बचना चाहिए सुशील मोदी की नकारात्मक राजनीति और स्वभाव को नागवार गुजरा। लोकजीवन और राजनीति में असहमति और विरोध स्वाभाविक है और होना भी चाहिए, लेकिन यह हमेशा मर्यादा और शालीनता की हदों में होना चाहिए। श्री झा ने कहा कि‘गद्दार और ‘गुंडे जैसे अशोभनीय शब्दों के प्रयोग से राजनीति कलुषित होती है। यह तो स्पष्ट है कि भाजपा में अपनी जगह और प्रासंगिकता खो चुके सुशील मोदी के साथ सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। जबरदस्त वैचारिक और राजनीतिक विरोध के बावजूद हम उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं, ताकि बिहार और पूरे मुल्क के लोक विमर्श को इस तरह की अवांछित टिप्पणियों से निजात मिल सके।

बीएसएससी पेपर लीक मामले में गुजरात के प्रिंटिंग प्रेस के मालिक के खिलाफ़ आरोप पत्र दाखिल

पटना(अपना बिहार, 23 मई 2017) - बीएसएससी पेपर लीक मामले में एसआईटी ने गुजरात के प्रिंटिंग प्रेस मालिक विनीत अग्रवाल व मैनेजर अजय कुमार के खिलाफ सोमवार को कोर्ट में आरोप-पत्र दाखिल कर दिया। वहीं बीएसएसपी के निलंबित अध्यक्ष सुधीर कुमार, उनके भाई, भाई की पत्नी सहित छह आरोपियों के खिलाफ मंगलवार को आरोप-पत्र दाखिल किया जाएगा। इनकी गिरफ्तारी की समय सीमा 90 दिन में पूरा होने वाली है। सुधीर को एसआईटी ने 24 फरवरी को गिरफ्तार किया था। विनीत व अजय को एसआईटी ने फरवरी महीने में गुजरात से गिरफ्तार किया था। विनीत के प्रिंटिंग प्रेस में ही बीएसएससी इंटर स्तरीय परीक्षा का प्रश्न-पत्र छपा था। इन दोनों पर प्रश्न-पत्र लीक करने का आरोप है। सुधीर के कहने पर इन दोनों ने ही अनंतप्रीत सिंह बरार को प्रश्न-पत्र उपलब्ध कराया था। बाद में इन्हीं प्रश्न-पत्र के आधार पर अनंतप्रीत ने आंसर सीट तैयार कर सुधीर को सौंपा था। बाद में आंसर सीट सुधीर के भांजे आशीष ने हजारीबाग से लाकर मास्टर माइंड नितिन उर्फ सनोज के मार्फत वाट्सएप पर वायरल कर करोड़ों की कमाई की थी। बीएसएससी के पूर्व अध्यक्ष सुधीर कुमार, उनके भाई अवधेश कुमार, भाई की पत्नी मंजू देवी, भांजा आशीष कुमार, बीएसएससी के आईटी मैनेजर निति रंजन प्रताप सिंह व सेटर सज्जाद अहमद को पुलिस ने 24 फरवरी को गिरफ्तार किया था।

संपादकीय : बड़ी जीत मुबारक हो भीम आर्मी

दोस्तों, रविवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर सहारनपुर के दलितों ने अपना शक्ति प्रदर्शन किया। वैसे इसे शक्ति प्रदर्शन से अधिक दलितों में प्रतिरोध क्षमता के विस्तार का सबूत कहा जाना चाहिए। हजारों की संख्या में दलित एकजुट हुए। मंच पर कोई स्थापित नेता नहीं बल्कि वे नौजवान थे जिन्हें देश के लोग जानते तक नहीं। हालांकि ये वे युवा थे जिन्होंने अपनी प्रतिबद्धता के बूते भारत के सियासी गलियारे में हल्चल मचा दी है। इनमें भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद रावण और गुजरात के दलित नेता जिग्नेश अहम रहे। सबसे अधिक दिलचस्प बात यह रही कि भारत के किसी भी न्यूज चैनल ने दलितों के इस महाजुटान को दिखाने की हिम्मत नहीं दिखायी। वैसे एक लिहाज से यह दलितों की जीत भी है।

यूपी में योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने के साथ ही वहां पूरे राज्य में सामंती ताकतों का मनोबल चरम पर है। इसकी एक वजह यह भी कि यूपी में सवर्णों को लंबे समय के बात सत्ता में वापसी का मौका मिला है। सत्ता मिलने के बाद ही राजनीतिक और सामाजिक आचरण भी बदला है। इसका ही परिणाम सहानरपुर की घटना है। दलित बहुत इस जिले के शब्बीरपुर गांव में राजपूतों ने दलितों पर कहर ढाया। लेकिन दलितों ने भी अपना प्रतिरोध दिखाया और परिणाम यह हुआ कि शब्बीरपुर के राजपूत बैकफ़ुट पर आये और इसके साथ ही योगी सरकार का राजपूत प्रेम भी पूरे देश में जगजाहिर हुआ। हालांकि भारतीय सवर्ण मीडिया ने सहारनपुर में राजपूतों की हार को दिखाने के बदले दलितों को ही कटघरे में साबित किया। लेकिन देश के दलितों और पिछड़ों पर इसका कोई असर नहीं हुआ।

बहरहाल सहारनपुर के दलितों ने अपनी ताकत दिखाकर यह साबित किया है कि सामंती ताकतें जितना दम लगा लें, लेकिन वे दलितों के उभार को रोक नहीं सकते हैं। यही वजह है कि दलितों ने अब पिछड़ी जाति के उन नेताओं को भी मजबूर कर दिया है कि वे उनके साथ खड़े हों। एक बड़ा उदाहरण लालू प्रसाद और मायावती का साथ आना है। यह एक बड़ा बदलाव है।

सीपीआई के पूर्व राज्य सचिव बद्री नारायण लाल का निधन, राजद सहित सभी दलों के नेताओं ने जताया शोक

पटना(अपना बिहार, 22 मई 2017) - भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व राज्य सचिव बद्री नारायण लाल का निधन रविवार को हो गया। उनके निधन पर राजद सहित अनेक दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। भाकपा-माले के राज्य सचिव कुणाल ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व राज्य सचिव व वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता बद्री नारायण लाल के निधन पर पार्टी परिवार की ओर से गहरा शोक व्यक्त किया है. उन्होंने भाकपा नेता के परिजनों के प्रति भी शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि दुख की घड़ी में हम सब साथ हैं.

माले राज्य सचिव ने कहा कि बद्री बाबू बिहार के वरिष्ठतम कम्युनिस्ट नेताओं में थे और काफी अनुभवसंपन्न थे. वे ऐसे मौके पर हमसे बिछड़ गये, जब देश में फासीवाद की ताकतें लगातार अपना सर उठा रही हैं और देश में लोकतंत्र व गंगा-जमुनी तहजीब को खत्म कर फासीवादी थोपने का प्रयास कर रही है. भाजपा के सांप्रदायिक उन्माद के उभार के इस दौर में हमें बद्री बाबू जैसे तपे-तपाये और जनता के आंदोलनों से निकले नेता की बेहत जरूरत थी. उनकी मृत्यु से वामपंथी आंदोलन को गहरा नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा कि भाजपा के सांप्रदायिक उन्माद को वामपंथी ताकतों की एकजुटता ही मुकम्मल जबाव दे सकती है. यही बद्री बाबू को सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की बिहार राज्य परिषद के पूर्व सचिव कामरेड बद्री नारायण लाल का आज 3 बजे अपराह्न वेल्लोर अस्पताल में निधन हो गया। वे काफी दिनों से गंभीर रूप से बीमार चल रहे थे, पहले उन्हें पेसमेकर लगाया गया था जिसके बाद वह प्रायः सामान्य जीवन जी रहे थे, परंतु पिछले महीने लगातार बुखार रहने और अनेक प्रकार की व्याधियों से ग्रसित होने के उपरांत उन्हें पुनः वेल्लोर अस्पताल में भत्र्ती कराया गया जहाँ मर्ज ने अंततः उनके प्राण ले लिए ।

बताते चलें कि बद्री नारायण लाल ने अपना राजनीतिक जीवन युवावस्था में ही हाई स्कूल षिक्षक की नौकरी छोड़कर शुरू किया और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पूरावक्ती कार्यकत्र्ता के रूप में बिहार के हजारीबाग जिले में ट्रेड यूनियन का दायित्व संभाला और पार्टी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा वर्षों तक भाकपा के जिला मंत्री का कार्यभार भी संभाला। वह पार्टी की अविभाजित बिहार राज्य परिषद, राज्य कार्यकारिणी, राज्य सचिवमंडल, राष्ट्रीय परिषद और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य के रूप में उल्लेखनीय भूमिका अनवरत निभाते रहे और बिहार विधान परिषद में दो टर्म तक भाकपा का प्रतिनिधित्व किया। उनके असामायिक निधन पर भाकपा की बिहार राज्य परिषद के सचिवमंडल ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके परिजनों के साथ-साथ बिहार-झारखंड के मर्माहत पार्टी सदस्यों को गहरी संवेदना प्रेषित की है और उनके निधन को पार्टी, मजदूर वर्ग, मेहनकष अवाम और समस्त दमित, उत्पीड़ित मानवता के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। 

सीएम ने की कृषि रोड मैप की समीक्षा, विपक्ष ने की राजनीति

पटना(अपना बिहार, 22 मई 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कृषि रोड मैप की समीक्षा की। इस मौके पर उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिये। वहीं विपक्ष ने इस मौके पर भी राजनीति की। बिहार विधान सभा में लोक लेखा समिति के सभापति और वरिष्ठ भाजपा नेता नंदकिशोर यादव ने कहा कि भाजपा के दबाव पर मुख्यमंत्री नीतीष कुमार को कृषि रोड मैप तैयार करने को मजबूर होना पड़ा है। उन्होंने बैठक में शामिल नहीं होने के लिये उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की भी आलोचना की।

लालू के ट्वीट पर योगी को लगी मिर्ची, झुंझलाहट में कहा - बिहार में तो रामराज है न!

पटना(अपना बिहार, 22 मई 2017) - राजद प्रमुख लालू प्रसाद के ट्वीट पर उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ को मिर्ची लगी। रविवार को ट्वीट के माध्यम से राजद प्रमुख ने भाजपा शासित राज्यों में बढ़ती आपराधिक घटनाओं की चर्चा की है। उधर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने झुंझलाते हुए कहा है कि बिहार में तो राम राज है ना? दरअसल राजद प्रमुख श्री प्रसाद ने अपने ट्वीट में कहा है कि देश नकारात्मकता और अराजकता के घनघोर अंधेरे में जी रहा है। उन्होंने कहा है कि भाजपा शासित राज्यों में भाजपाइयों का भगवा गमछा किसी को भी मारने का लाइसेंस बन चुका है। उन्होंने झरखंड के जमशेदपुर के पास शोभापुर में घटी उस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी, जिसमें ग्रामीणों ने मो. नीम समेत चार लोगों को पीट-पीटकर मार डाला। उल्लेखनीय है कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने राजद प्रमुख के ट्वीट पर तंज तब कसा है जब उनके बिहार आने की चर्चा गर्म है। भाजपा के एक कार्यक्रम में श्री योगी बिहार आने वाले हैं। इस कार्यक्रम में वह राज्य की जनता के बीच केन्द्र की उपलब्धियों की चर्चा करेंगे। उधर, लालू प्रसाद ने भाजपा पर हमला भी तेज कर दिया है। पटना में 27 अगस्त को वह गैर भाजपा दलों की एक संयुक्त रैली करने वाले हैं।

सवर्ण मीडिया ने फ़िर किया पत्रकारिता को दागदार, जैन बंधुओं के कारोबार को बताया लालू का कारोबार

पटना(अपना बिहार, 21 मई 2017) - एक बार फ़िर सवर्ण मीडिया ने पत्रकारिता को कलंकित किया है। पटना से प्रकाशित दैनिक जागरण ने लिखा है कि राज्य सभा सांसद डा मीसा भारती को जैन बंधुओं ने मुफ़्त में अपना फ़ार्म हाउस दे दिया और अब उसे जब्त कर लिया गया है। जबकि सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार के ईडी अधिकारियों ने जैन बंधुओं की विभिन्न प्रोपर्टीज को लेकर छापेमारी की है। इनमें से एक भाटी गांव में बने एक फ़ार्म हाउस को ईडी ने जब्त भी कर लिया है। लेकिन अखबार के मुताबिक ईडी के इस एक्शन से डा भारती और उनके पति की मुश्किलें बढ गयी हैं और इतना ही नहीं अपने इस झूठ को सच साबित करने के लिए दैनिक जागरण ने इस पहले पन्ने पर लीड बनाकर प्रकाशित किया है।

राजद की महारैली से भयभीत हुई भाजपा गयी कुख्यात योगी की शरण में

पटना(अपना बिहार, 20 मई 2017) - गैर भाजपाई दलों की एक्जुटता को लेकर आगामी 27 अगस्त को राजद प्रमुख लालू प्रसाद द्वारा आहूत महा रैली से भाजपा बुरी तरह घबरा गयी है। यही वजह है कि भाजपा ने अब यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की शरण ली है। बिहार को 1 लाख 65 हजार करोड़ रुपए के महा पैकेज व अन्य वायदों के पूरा नहीं होने की स्थिति में भाजपा ने केंद्र में शासित नरेंद्र मोदी सरकrर की तीन सालों की उपलब्धियों को गिनाने के लिए योगी आदित्यनाथ को बिहार में रैली करने को कहा है। हालांकि इस संबंध में अभी तक रैली की तारीख की घोषणा नहीं की गयी है। बताते चलें कि योगी आदित्यनाथ मुसलमान विरोधी उकसाने वाले बयानों के लिए कुख्यात हैं। 

कल से शुरु होगी महात्मा गांधी सेतु को तोड़ने की प्रक्रिया, 1-12 नंबर पाये तक वन-वे, लग सकता है भीषण जाम

पटना(अपना बिहार, 20 मई 2017) - लंबे समय से नव निर्माण की बाट जोर रहे महात्मा गांधी सेतु को तोड़ने की प्रक्रिया रविवार से शुरू हो जाएगी। रविवार यानी 21 मई से पुल की पश्चिमी लेन में पीलर नम्बर एक से 12 तक एक दर्जन स्पैन पर यातायात बंद कर दिया जाएगा। पुल को नीचे से सपोर्ट देने और पुलिस के लिए अस्थाई शेल्टर बनाने में दस दिन लगेंगे। उसके बाद पुल तोड़ना शुरू हो जाएगा। 

मुख्य सचिव अंजनि कुमार सिंह ने शुक्रवार को पुल निर्माण से जुड़े अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में डीजीपी पीके ठाकुर के अलावा पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव अमृत लाल मीणा और पथ मंत्रालय के क्षेत्रीय अधिकारी राजेश कुमार भी थे। बैठक में राज्य सरकार ने नवनिर्माण के लिए पुल तोड़ने को हरी झंडी दे दी। यातायात की नई व्यवस्था भी कर दी गई है। दीघा-सोनपुर पुल के चालू होने तक सभी वाहन गांधी सेतु से गुजरेंगे। लेकिन 11 जून को दीघा-सोनपुर पुल के उद्घाटन के बाद छोटे वाहन उस पुल से होकर जाएंगे और गांधी सेतु बड़े वाहनों के लिए खुला रहेगा। नवनिर्माण के दौरान कुछ दूरी में यातायात बंद करने से ट्राफिक पर पड़ने वाले प्रभाव का ट्रायल पटना और वैशाली जिला ने पहले ही कर लिया है। 

पुल को तोड़ने के लिए निर्माण एजेन्सी ने पूरी तैयारी पहले ही कर ली है। केवल उस मशीन का आना बाकी है, जिससे पुल के पानी के नीचे वाले भाग को तोड़ना है। लेकिन वह मशीन भी जून महीने में पटना पहुंच जाएगी। तब तक पुल के ऊपरी भाग को तोड़ा जाएगा। गांधी सेतु के पुराने कंक्रीट के सुपरस्ट्रक्चर को तोड़कर उस पर स्टील का सुपरस्ट्रक्चर लगाना है। पश्चिमी लेन का  काम दो साल में पूरा करना है। उसके बाद दूसरे लेन के लिए डेढ़ साल का ही समय तय किया गया है। 

लालू ने बीजेपी को ललकारा, 2019 में मार भगायेगी जनता

पटना(अपना बिहार, 20 मई 2017) - राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने केंद्र में सत्तासीन बीजेपी को ललकारते हुए कहा है कि देश की जनता उसका सच जान चुकी है और 2019 के चुनाव में उसे मार भगायेगी। अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि भाजपा की जवानी अब खत्म हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनता को चाहे जितना दिग्भ्रमित करने का प्रयास करें, उन्हें दोबारा मौका नहीं मिलने जा रहा है।

तीन साल में उन्होंने इतने गुनाह किए हैं कि उनकी सरकार पांच साल पूरा नहीं कर सकेगी। उन्होंने गांव की एक कहावत कहकर भाजपा के बारे मे बहुत कुछ कह दिया। उन्होंने कहा ‘गई जवानी फिर न लौटी चाहे घी मलीदा खाओ। उधर एक ट्वीट के माध्यम से उन्होंने कहा है ‘भाजपा और आरएसएस वाले सुन लें, लालू आप लोगों को दिल्ली की कुर्सी से हटाकर रहेगा, चाहे मेरी कोई भी परिस्थिति हो। इस बात को सीधे तौर पर समझ लें और मुझे धमकी देने का साहस न करें।

राजद प्रमुख ने कहा कि लालू किसी से डरने वाला नहीं हैं। 27 अगस्त को आयोजित होने वाली संयुक्त विपक्ष की रैली से भाजपा डर गई है। यही कारण है कि केन्द्र सरकार हमे परेशान करने के लिए आयकर और दूसरी केन्द्रीय एजेन्सियों का सहारा ले रही है। हमारे समर्थकों को डराया जा रहा है। पीएम नेपोलियन की नीति पर काम कर रहे हैं।

श्री प्रसाद ने मीडिया पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि मीडिया बताए कि हमारे किन 22 ठिकानों पर आयकर की छापेमारी हुई है। यह सब भाजपा के इशारे पर मुझे बदनाम करने के लिए किया जा रहा है। मेरे परिवार के दूसरे सदस्यों पर जो भी आरोप लगाये जा रहे हैं, वह सब बेबुनियाद हैं। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि पार्टी के जितने नेता हैं वह सब हमरे उत्तराधिकारी हैं।

मेरीडियन कंपनी के शापिंग मॉल के निर्माण पर लगी रोक, सुमो ने किया श्रेय लेने का प्रयास, कंपनी के मालिक ने कहा - राज्य सरकार की एजेंसी की आपत्ति का दिया जा चुका है जवाब

पटना(अपना बिहार, 20 मई 2017) - एक बार फ़िर भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी की चोरी पकड़ी गयी। कल संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने दावा किया कि राजधानी पटना के सगुना मोड़ में बन रहे राज्य के सबसे बड़े मॉल के निर्माण पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने तत्काल रोक लगा दी है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय की ओर से राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के प्रधान सचिव, राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के सचिव और सिया के अध्यक्ष के भेजे पत्र में तत्काल निर्माण पर रोक लगाने का आदेश दिया गया है। जबकि मॉल का निर्माण करा रही मेरेडियन कंस्ट्रक्शन के सीएमडी राजद विधायक अबु दोजाना ने इस संबंध में बताया कि मॉल के निर्माण के संबंध में उनकी कंपनी ने राज्य सरकार की एजेंसी स्टेट इनवायर्नमेंट इंपैक्ट असेसमेंट आथोरिटी यानी सेया को अप्रैल माह में क्लीयरेंस के लिए लिखा था। उसमें स्पष्ट किया गया था कि जमीन से कीचड़ हटाकर केवल सतह को ठीक किया गया है। निर्माण कार्य शुरु नहीं किया गया है। एजेंसी खुद आकर जांच कर ले। श्री दोजाना ने बताया कि उनके आवेदन पर सेया की ओर से कहा गया कि निर्माण कार्य जांच होने तक रोक दें। श्री दोजाना ने कहा कि यह निर्देश अप्रैल माह में ही दी गयी थी। उन्होंने कहा कि तीन हफ़्ते के अंदर कंपनी को अपना पक्ष रखना है। इसके बाद निर्माण कार्य शुरु हो सकेगा।

श्री दोजाना ने कहा कि मेरीडियन कंपनी से राजद प्रमुख लालू प्रसाद व उनके परिजनों का कोई संबंध नहीं है। उनकी कंपनी प्रोफ़ेशनल तरीके से सभी नियमों का पालन करते हुए उस कंपनी की जमीन पर मॉल बना रही है जिसमें श्री प्रसाद के परिजनों का शेयर है और यह कानून सम्मत है।

वहीं सुशील मोदी ने कल संवाददाता सम्मेलन में यह दावा किया कि उनके द्वारा उठाये गये सवाल को लेकर ही केंद्रीय वन व पर्यावरण मंत्रालय ने यह रोक लगाया है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने 15 मई को इस संबंध में पत्र जारी किया है। 

सुशील मोदी ने आरोप लगाया कि बिना सिया की अनुमति के इसका निर्माण हो रहा है। उन्होंने कहा कि दो लाख वर्गफीट से अधिक के निर्माण पर सिया की अनुमति आवश्यक है। उनकी शिकायत के बाद मॉल का निर्माण करा रही कंपनी के अनुमति के लिए आवेदन दिया।

वहीं, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के एल ए डिवीजन की ओर से 15 मई को जारी पत्र में कहा गया है कि पर्यावरण संरक्षण रूल 1985 रूल चार (पांच) के तहत तत्काल इसके निर्माण पर रोक लगाया जाता है। निर्माण स्थल पर यथा स्थिति बनाए रखने को कहा गया है।

गंगा की अविरलता राजनीतिक मुद्दा नहीं : नीतीश

पटना(अपना बिहार, 19 मई 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि गंगा नदी की अविरलता राजनीतिक मुद्दा नहीं है। वे कल दिल्ली में गंगा नदी में गाद की समस्या को लेकर राष्ट्रीय स्तरीय विचार गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम नरेश सहित कई पर्यावरणविद व समाजसेवी उपस्थित रहे। अपने संबोधन में श्री कुमार ने कहा कि गंगा नदी की अविरलता में गाद मुख्य कारक है। उन्होंने कहा कि फ़रक्का बन जाने के कारण गाद निस्तारण में बाधा आयी है, जिसके कारण गंगा नदी के जल संग्रहण क्षमता में कमी आयी है और इसका परिणाम बिहार को हर साल बाढ के रुप में झेलना पड़ता है। उन्होंने कहा कि गंगा नदी की समस्याओं को लेकर केंद्र सरकार गंभीरता दिखाये।

सामने आया रामदास अठावले का दोहरा चरित्र, एक ओर सामाजिक न्याय को लेकर सरकार की तारीफ़ तो दूसरी ओर बताया सरकार को हर मोर्चे पर फ़ेल, दैनिक जागरण ने नहीं दिया कोई भाव

पटना(अपना बिहार, 19 मई 2017) - दलित या पिछड़े चाहे कितनी भी सवर्ण पूजा कर लें, सवर्ण उनके साथ कभी समानता का व्यवहार नहीं कर सकते। यह बात केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री राम दास अठावले के मामले में चरितार्थ हुआ। भाजपाई अखबार दैनिक जागरण ने श्री अठावले के बिहार प्रवास से संबंधित खबरों को ठंढे बस्ते में डाल दिया। यह तब हुआ जबकि श्री अठावले ने पटना में दोहरे चरित्र का सफ़ल प्रदर्शन किया। एक ओर राज्य सरकार की समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि बिहार ने सामाजिक न्याय के क्षेत्र में अच्छा काम किया है। इस दिशा में बेहतर प्रयास हो रहा है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण कानून के क्रियान्वयन को लेकर राज्य में 40 थाना की स्थापना, विशेष कोर्ट की स्थापना इत्यादि कार्य किए गए हैं। श्री अठावले ने गुरुवार को मुख्य सचिवालय स्थित सभागार में समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभागों के कार्यो की समीक्षा के बाद प्रेस कांफ्रेंस में ये बातें कही। उन्होंने कहा कि दलितों में जागृति के कारण उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ी है। इसके पूर्व बिहार सरकार के एससी-एसटी कल्याण मंत्री संतोष निराला ने प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत गया के अतिरिक्त सात अन्य जिलों में लागू करने, बाबू जगजीवन छात्रावास योजना के तहत 36 बालिका छात्रावासों की मंजूरी देने व छात्रवृत्ति मद की बकाया राशि के भुगतान करने की मांग की।

दूसरी ओर भारतीय नृत्य कला मंदिर सभागार में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के तत्वावधान में आयोजित ‘सामाजिक भाईचारा सम्मेलन एवं अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए श्री अठावले ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में पिछली बार एनडीए को धोखा हुआ था, लेकिन अगली बार यह नहीं होगा। कहा कि राज्य सरकार गरीबों को न्याय दिलाए, ऐसा नहीं हुआ तो अगली बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं राजद प्रमुख लालू प्रसाद को धोखा होगा। उन्होंने कहा कि आरपीआई सभी जाति व धर्म के लोगों की पार्टी है। बिहार में भाजपा के साथ वह सहयोग करेगी। इसके पूर्व उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी संविधान में संशोधन कर देश में 75 फीसदी आरक्षण लागू करने की मांग करती है। कहा कि पटेल, जाट व अन्य वैसे समाज जो अनुसूचित जाति में शामिल नहीं हैं, वे आरक्षण की मांग कर रहे है। ऐसी सभी जातियों को अलग से आरक्षण दिया जा सकेगा।

समारोह में बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार देश के चहुंमुखी विकास में जुटी है, जबकि राज्य सरकार विकास योजनाओं को लागू करने में विफल रही है। समारोह में केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले को पार्टी कार्यकर्ताओं ने सम्मानित किया। समारोह को पार्टी की उत्तर भारत की अध्यक्ष मंजू छिब्बर, प्रदेश अध्यक्ष देव कुमार वर्मा, महासचिव आदिल असगर, जेपी वर्मा सहित अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया।

एमसीआई की आपत्तियों को दूर करेगा स्वास्थ्य विभाग, तेजप्रताप यादव के निर्देश पर जागा स्वास्थ्य महकमा

पटना(अपना बिहार, 19 मई 2017) - मेडिकल काउंसिल आफ़ इंडिया द्वारा सूबे के तीन मेडिकल कालेजों के संबंध में जतायी गयी आपत्तियों को विभाग जल्द दूर करेगा। स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव के निर्देश पर विभाग ने कहा है कि मेडिकल कालेजों में एमबीबीएस की सीटों में कोई कमी नहीं आयेगी। एमसीआई की आपत्तियों को दूर किया जायेगा।

स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि एमसीआइ द्वारा बतायी गयी सभी कमियों को तय समयसीमा में पूरा कर दिया जायेगा। नामांकन अगस्त माह में होता है। इसके पहले ही सभी आवश्यक संसाधन मेडिकल कालेज अस्पतालों उपलब्ध  करा दिये जायेंगे। स्वास्थ्य विभाग के उपसचिव अनिल कुमार ने बताया कि इस बार राज्य सरकार मेडिकल कालेजों की शैक्षणिक गतिविधियों को सुधारने के लिए ठोस कार्रवाई करने जा रही है।

दूसरे दिन भी सवर्ण मीडिया ने चलायी लालू के खिलाफ़ छापेमारी की खबर, लालू ने किया सवाल - यह तो बताओं कहां-कहां हुई है छापेमारी

पटना(अपना बिहार, 18 मई 2017) - लगातार दूसरे दिन सवर्ण मीडिया ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद के तथाकथित 22 जगहों पर छापेमारी की खबर चलायी। वहीं श्री प्रसाद मीडिया के इस झूठ को दरकिनार करते हुए कल अपने आवास पर सामान्य तरीके से आने वाले लोगों से मुलाकात करते दिखे। उन्होंने कल फ़िर सवाल किया कि मीडिया को इस बात का खुलासा करना चाहिए कि छापेमारी किन-किन जगहों पर की गयी है। वहीं श्री प्रसाद ने वीडियो काल के जरिए डा मीसा भारती के पुत्र से बात करते दिखे। इस मौके पर राबड़ी देवी और तेजस्वी प्रसाद यादव भी उनके साथ थे।

माले ने दिया लालू का साथ, केंद्र पर लगाया दुर्भावना के तहत कार्रवाई करने का आरोप

पटना(अपना बिहार, 18 मई 2017) - भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की बजाए राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित होकर अपने विरोधियों को निशाना बना रही है, जो कहीं से भी उचित नहीं है. अरविंद केजरीवाल के बाद पी चिदंबरम व लालू यादव को इस बार निशाना बनाया गया है. जबकि भ्रष्टाचार के मामले में भाजपा व उसके सहयोगी कहीं से पीछे नहीं हैं. लालू प्रसाद को घेरकर भाजपा भ्रष्टाचार से लड़ने का भले जितना दिखावा कर ले, वह इस वास्तविकता को छुपा नहीं सकती कि कई घोटालों का आरोप उसके केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, राज्य मंत्रियों, विधायकों व नेताओं पर है.

उन्होंने कहा कि भाजपा शासित मध्यप्रदेश में अब तक का सबसे बड़ा घोटाला व्यापम हुआ, जिसमें कई लोगों की हत्यायें तक कर दी गयीं, लेकिन उसके मुख्यमंत्री अब तक कुर्सी पर बने हुए हैं. यह बेहद शर्मनाक है. भाजपा नेता कीर्ति आजाद ने अपने ही नेता अरूण जेटली पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाये, लेकिन अरूण जेटली अब तक केंद्रीय मंत्री बने हुए हैं.

कुणाल ने कहा कि कुछ साल पहले भाजपा नेता गिरिराज सिंह के यहां करोड़ों रुपया कैश में पकड़ा गया था, लेकिन आज तक उसकी कोई जांच नहीं हुई. सुशील मोदी व नंदकिशोर यादव सरीखे नेताओं पर भी अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोप हैं. लेकिन इन नेताओं पर लगे आरोपों की जांच नहीं की जा रही है.

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के दलदल में धंसी भाजपा भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई लड़ाई नहीं लड़ सकती है, वह जनता को बरगलाने का काम कर रही है और अपने राजनीतिक विरोधियों को निशाना बना रही है. हमारी पार्टी इसका जोरदार विरोध करती है.

पटना में भिड़े भाजपा-राजद के कार्यकर्ता, भाजपा कार्यकर्ताओं पर बीयर की बोतलें फ़ेंक हमला करने का आरोप, राजद ने कहा - भाजपा कार्यालय में कहां से आयीं बोतलें

पटना(अपना बिहार, 18 मई 2017) - बुधवार को पटना का वीरचंद पटेल रोड रणक्षेत्र में बदल गया जब भाजपा कार्यालय के पास भाजपा-राजद कार्यकर्ता आपस में भिड़ गये। राजद कार्यकर्ता केंद्र सरकार द्वारा लालू प्रसाद के खिलाफ़ तथाकथित जांच के खिलाफ़ अर्द्धनग्न होकर विरोध मार्च निकाल रहे थे। दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प में दोनों ओर से पत्थर बाजी की गयी। इस घटना में दोनों दलों के एक दर्जन से अधिक कार्यकर्ता घायल हो गये। बाद में दोनों दलों के द्वारा एक-दूसरे के खिलाफ़ प्राथमिकी दर्ज कराया गया। राजद ने अपनी प्राथमिकी में सुशील मोदी, नित्यानंद राय, मंगल पांडे और नंद किशोर यादव को नामजद अभियुक्त बनाया तो भाजपा ने उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव और स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव के खिलाफ़ प्राथमिकी दर्ज कराया। वहीं इस मामले में एसएसपी मनु महाराज ने बताया कि दोनों दलों के द्वारा प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है। पुलिस सीसीटीवी फ़ुटेज के जरिए अनुसंधान कर कार्रवाई करेगी।

जबकि इस मामले में राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज झा व प्रदेश अध्यक्ष डा रामचंद्र पूर्वे ने संवाददाता सम्मेलन कर बताया कि छात्र राजद भाजपा के भ्रष्टतंत्र और मनुवादी भाजपा द्वारा सामाजिक न्याय के मसीहा लालू प्रसाद यादव एवं युवाओं के दिलों के धड़कन तेजप्रताप यादव व तेजस्वी प्रसाद यादव पर बेबुनियाद आरोप व प्रहार के विरोध में राजद प्रदेश मुख्यालय से छात्र राजद के कार्यकर्ता इनकम टैक्स गोलम्बर तक शांतिपूर्ण तरीके से आक्रोश मार्च निकाला गया। इस मार्च पर भाजपा के कार्यकर्ताओं ने पहले पत्थर, तलवार,  लाठी आदि से हमला किया। वहीं सुशील मोदी ने इस घटना को लालू प्रसाद का गुंडाराज बताया और सरकार से कार्रवाई की मांग की।

सुशील मोदी ने दी गीदड़भभकी, कहा - हम प्रतिक्रिया देंगे तो पूरा बिहार जल जायेगा, पासवान बोले - एनडीए में आ जायें नीतीश

पटना(अपना बिहार, 18 मई 2017) - बुधवार को भाजपा-राजद कार्यकर्ताओं के बीच भिड़ंत पर भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने गीदड़भभकी वाले अंदाज में कहा कि यदि हमने प्रतिक्रिया दी तो पूरा बिहार जल जायेगा। एक निजी चैनल को दिये बयान में उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यालय पर हमला लालू प्रसाद और उनके बेटों के इशारे पर की गयी है। वहीं केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने ट्वीटर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एनडीए में शामिल होने की सलाह दे दी। उन्होंने कहा कि यदि राजद के साथ श्री कुमार सरकार नहीं चला पा रहे हैं तो उन्हें एनडीए में शामिल हो जाना चाहिए।

 बिहार विरोधी बैंकों के समक्ष गिड़गिड़ाये नीतीश

पटना(अपना बिहार, 18 मई 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कल बिहार राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति की 60वीं बैठक में बैंकों के समक्ष गिड़गिड़ाते हुए नजर आये। बिहार में कार्यरत बैंकों की अनदेखी और साख जमा अनुपात में बार-बार चेतावनी के बावजूद अपेक्षित वृद्धि नहीं होने पर वे पूर्व में भी बैंकों के समक्ष गुहार लगा चुके है। बहरहाल कल बैठक को संबोधित करते हुये उन्होंने कहा कि राज्य में इस वर्ष साख जमा अनुपात में गिरावट आयी है। वर्ष 2016-17 में साख जमा अनुपात 43.94 प्रतिषत रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार में विकास की असीम संभावनायें हैं। बिहार के लोग बैंक खाता में पैसा जमा कराते हैं परन्तु अगर यहां के लोगों को विकास योजनाओं के लिये ऋण उपलब्ध नहीं होगा तो इससे विकास अवरूद्ध होगा। अभी यह मात्र 44 प्रतिशत तक गया है, जबकि बहुत सारे विकसित राज्यों में यह अनुपात 100 प्रतिशत से भी ज्यादा है। उन्होंने कहा कि देश के सर्वांगिण विकास के लिये पूरे मूल्क का विकास जरूरी है। आज देश में विकास के कुछ द्वीप बन गये हैं, यही कारण देष का विकास दर फलक्चुयेट करता है। आज देश का विकास दर कुछ राज्यों के विकास दर पर निर्धारित है। अगर देश के सभी भागों में एकरूपी विकास होगा तो देश का विकास दर हमेशा बढ़ता रहेगा।

मुख्यमंत्री ने बैठक में उपस्थित सभी बैंकों के वरीय अधिकरारियों को कहा कि आप अपने से नीचे के स्तर के कार्यप्रणाली को जब तक नहीं सुधारेंगे, तब तक विकास संभव नहीं होगा। आरटीजीएस के माध्यम से राशि के ट्रांसफर का उदाहरण देते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि आरटीजीएस के माध्यम से पैसे ट्रांसफर करने के लिये दी गयी राशि बैंकों में महीनों तक पड़ी रह जाती है। अगर समय पर लोगों का पैसा नहीं मिला तो यह पूरी प्रणाली बेकार साबित हो जायेगी। प्रक्रिया का ससमय अनुपालन होना चाहिये। उन्होंने कहा कि समय से पैसे नहीं मिलने पर लोगों को तकलीफ होती है। बैंकों द्वारा ब्रांच खोले जाने के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष 1,640 नये ब्रांच खोलने का लक्ष्य है, जिसमें से अब तक मात्र 139 ब्रांच खोले गयें हैं, यह काफी कम है। बैंको की नीति है 5 हजार की आबादी पर ब्रांच खोलने की। आप बिहार के प्रत्येक ग्राम पंचायत में तो ब्रांच खोलिये। ग्राम पंचायतों की आबादी 10 हजार से ऊपर रहती है। उन्होंने कहा कि 1/6 पंचायतों में पंचायत सरकार भवन का निर्माण कराया गया है। वैसे ग्राम पंचायतों में पहले ब्रांच खोलिये अगर स्थान चाहिये तो बंैकों को हम स्थान उपलब्ध करा देंगे। उन्होंने कहा कि लेन-देन की प्रक्रिया डिजिटली होनी है तो बैंकों को अपनी आधारभूत संरचनायें सुधारनी होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल ट्रांजेक्शन के लिये लोगों के बीच रूपे कार्ड को लोकप्रिय बनाइये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बैंकों के द्वारा राज्य सरकार के कर्मियों को पेंषन भुगतान किया जाता है। 15.11.2000 के पूर्व सेवानिवृत होने वाले अभिवाजित बिहार के राज्य कर्मियों एवं 15.11.2000 के पूर्व एवं बाद में सेवानिवृत होने वाले पेंषनरों को अलग-अलग शीर्ष से भुगतान किया जाता है ताकि झारखण्ड से दायित्वों का बटवारा हो सके। उन्होंने कहा कि बैंक द्वारा 15.11.2000 के पूर्व एवं बाद में सेवानिवृत होने वाले पेंषनरों का भुगतान नव बिहार राज्य खाते में बुक किया जा रहा है। इसी प्रकार पारिवारिक पेंशन मद में बैंक द्वारा अधिक भुगतान किया जा रहा है। महालेखाकार के आपत्ति के बाद बैंकों को राशि वसूल कर सरकार के खाते में जमा करना है, इसे इम्पलिमेंट कीजिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के जो युवा जितनी भी शिक्षा ग्रहण करना चाहते हैं, उसे पूरा करने के लिये बैंकों द्वारा चलाई जा रही पूर्व की शिक्षा ऋण योजना पूरी तरह से प्रभावी नहीं था। उसमें इतना सारा प्रावधान है कि आम छात्रों को उसका लाभ नहीं मिल पाता था। उन्होंने कहा कि बिहार का उच्च षिक्षा में ग्रोष इनरालमेंट रेशियो मात्र 13.9 प्रतिशत है। हम इसको बढ़ाना चाहते हैं, हम इसे 30 से 40 प्रतिषत पर ले जाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि गरीबी के कारण इच्छुक छात्र-छात्रायें 12वीं के आगे षिक्षा ग्रहण नहीं कर पाते थे। इसे देखते हुये स्टुटेंड क्रेडिट कार्ड योजना की शुरूआत की गयी। सात निश्चय के तहत एक निश्चय आर्थिक हल युवाओं को बल के पांच अवयव में से एक स्टुडेंट क्रेडिट कार्ड है। उन्होंने कहा कि स्टुडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत ऋण की मूल राषि एवं सूद पर सरकार ने पूरी गारंटी दी है। उन्होंने कहा कि स्टुडेंट क्रेडिट कार्ड का जो आवेदन बैंकों को भेजा जा रहा है, उसे बैंकों द्वारा तुरंत स्वीकृत करना चाहिये।

इस अवसर पर वित्त मंत्री अब्दुलबारी सिद्दीकी, कृषि मंत्री  रामबिचार राय, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, नगर विकास एंव आवास मंत्री महेश्वर हजारी, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह सहित विभिन्न विभागों के प्रधान सचिव/सचिव एवं बैंकों के वरीय अधिकारी उपस्थित थे।

लालू से संबंधित 22 जगहों पर छापा, बोले लालू - डरने वाला नहीं

पटना(अपना बिहार, 17 मई 2017) - मंगलवार को सूबे की सियासत में उस समय भूचाल आ गया जब पीटीआई ने यह खबर फ़ैलायी कि आयकर विभाग ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद से संबंधित 22 जगहों पर छापा मारा। हालांकि अभी तक इसकी अधिकारिक पुष्टि न तो आयकर विभाग द्वारा की गयी है और न ही राजद प्रमुख के द्वारा। ट्वीटर पर अपने संदेश में श्री प्रसाद ने सवर्ण मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि छापा किन-किन जगहों पर पड़ा, यह भी मीडिया को बताना चाहिए। उधर इसे लेकर मंगलवार को दिनभर तमाम तरह की कयासबाजियां चलती रहीं। भाजपा की ओर से सुशील कुमार मोदी ने कहा कि यह छापा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मांग पर किया गया है। हालांकि तथाकथित छापों का श्रेय लेते हुए उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद की बेनामी संपत्तियों का खुलासा उन्होंने किया है।

वहीं राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने केंद्र सरकार पर हमला बोला और कहा कि 'मैं गीदड़ भभकी से डरने वाला नहीं हूं।' मंगलवार को आयकर विभाग की दिल्ली मे छापेमारी के दौरान लालू ने ट्वीट कर कहा कि भाजपा में हिम्मत नहीं कि लालू की आवाज को दबा सके। लालू की आवाज दबाएंगे तो देशभर में करोड़ों लालू खड़े हो जाएंगे।

श्री प्रसाद ने कहा कि आरएसएस-भाजपा को लालू के नाम से कंपकंपी छूटती है। इनको पता है कि लालू इनके झूठ, लूट और जुमलों के कारोबार को ध्वस्त कर रहा है, तो दबाव बनाओ। उन्होंने कहा कि पूंजीपतियों के सरगनाओं सुनो, गरीबों का समर्थन व शुभ आशीर्वाद मेरे साथ है। लालू न हारा है , न थका है। अपराजेय योद्धा की तरह सदा लड़ा और जीता हूं।

उन्होंने एक अन्य री-ट्वीट में कहा कि भाजपा के अहंकारी एवं फासिस्ट नेता सावधान हो जाएं। लालू को धमकाने के पहले अपना चेहरा आईना में देख लें। बिहार में लालू जैसे हजारो-लाखों लोग हैं।

वहीं पटना स्थित मुख्य सचिवालय में मंगलवार को संपन्न मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद पत्रकारों द्वारा लालू के ठिकानों पर आयकर विभाग की छापेमारी को लेकर पूछे गए एक प्रश्न नीतीश ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट से पता चल रहा है 22 जगहों पर छापेमारी चल रही है। ये कहां कहां छापेमारी हो रही है क्या उद्देश्य है, क्या हो रहा है, जब तक पता नहीं चलता तब तक क्या कहा जा सकता है।

राज्य सरकार के कर्मियों की बल्ले-बल्ले, सातवां वेतन लागू, नियोजित शिक्षकों को भी मिलेगा लाभ

पटना(अपना बिहार, 17 मई 2017) - राज्यकर्मियों को एक अप्रैल, 2017 के प्रभाव से सातवां वेतनमान का आर्थिक लाभ मिलेगा। राज्य कैबिनेट ने मंगलवार को राज्य वेतन आयोग की अनुशंसा पर सहमति दे दी। इसका लाभ 9.65 लाख कर्मचारी और पेंशनधारी को मिलेगा। ग्रेच्यूटी की सीमा दस लाख से बढ़ा कर 20 लाख कर दी गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में 19 प्रस्तावों पर सहमति दी गई। बैठक के बाद वित्त विभाग के प्रधान सचिव रवि मित्तल ने बताया कि राज्यकर्मियों के हाउस, मेडिकल आदि भत्ते की वृद्धि पर बाद में निर्णय होगा। अभी सिर्फ वेतन वृद्धि पर निर्णय हुआ है। करीब 15 फीसदी की वृद्धि औसतन हुई है। राज्यकर्मियों के लिए सातवां वेतनमान वैचारिक रूप से एक जनवरी, 2016 से लागू है, पर आर्थिक लाभ एक अप्रैल, 2017 से मिलेगा। अब राज्यकर्मियों का न्यूनतम वेतनमान 18000-56900 और अधिकतम 144200-218000 हो गया है। 132 फीसदी महंगाई भत्ता व ग्रेड-पे इसमें मर्ज है।  इससे  5000 करोड़ का अतिरिक्त सालाना बोझ पड़ेगा। राज्य के 3.60 लाख नियोजित शिक्षकों को भी राज्यकर्मियों की तर्ज पर सातवें वेतनमान के तहत वेतन वृद्धि का लाभ मिलेगा। इसकी मंजूरी भी कैबिनेट ने दे दी। एक अप्रैल, 2017 से ही इनको आर्थिक लाभ मिलेगा।

कैबिनेट ने राज्य में दो निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और उनके संचालन को हरी झंडी दे दी। इनमें एक संदीप विश्वविद्यालय की स्थापनी मधुबनी जिले के सिजौल में की जाएगी। वहीं दूसरा नालंदा जिले के बिहारशरीफ में केके विश्वविद्यालय का संचालन होगा।

छापेमारी की खबर आते ही भाजपाईयों की टपकने लगी लार, श्रेय लेने की होड़

पटना(अपना बिहार, 17 मई 2017) - राजद प्रमुख लालू प्रसाद से संबंधित 22 जगहों पर छापेमारी की खबर आते ही भाजपाईयों की लार टपकने लगी। इसका श्रेय लेने की होड़ में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय, सुशील मोदी और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद भी शामिल हो गये। भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पिछले सप्ताह इस कथित खरीद-फरोख्त की जांच कराने की मांग की थी। उनका आरोप है कि यादव की बेटी मीसा भारती ने राज्यसभा चुनाव में दिये हलफनामे में इस कथित लेन-देन का खुलासा नहीं किया था। यह खरीद-फरोख्त उस दौरान की गयी जब लालू यादव पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार में रेल मंत्री थे। लालू यादव के खिलाफ आयकर विभाग की छापेमारी के बाद राजद नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह कार्रवाई लालू यादव को खत्म करने की भाजपा की चाल है। वहीं भाजपा नेता सुशील मोदी ने कहा है कि 40 दिनों से ये मुद्दा उठा रहा था। कल सोमवार को नीतीश कुमार ने भी कहा था कि केंद्र को जांच करनी चाहिए। अब छापे से सब कुछ साफ हो जाएगा।

सड़क दुर्घटना : गया में बीस, नवादा में पांच की मौत

पटना(अपना बिहार, 16 मई 2017) - सोमवार का दिन हादसों का दिन साबित हुआ। मिली जानकारी के अनुसार गया-मानपुर रोड में बस और ट्रक के बीच सीधी टक्कर में करीब 20 लोग मारे गये हैं। वहीं एक दर्जन से अधिक लोग गंभीर रुप से घायल हैं। विस्तृत रिपोर्ट अपेक्षित है।

उधर नवादा जिले के रजौली अनुमंडल में एनएच 31 पर सोमवार की सुबह करीब 6 बजे एक यात्री बस पलट गई, जिसमें 5 लोगों की मौत हो गई है। जबकि 30 लोग घायल हो गए हैं। इनमें कई लोगों की हालत गंभीर है। सभी को अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ड्राइवर की मौत अस्पताल में हुई है।

कोलकाता से एक यात्री बस बिहारशरीफ आ रही थी। एनएच 31 पर अंधरवाड़ी मोड़ के पास बस के आगे का चक्का अचानक टूट गया, जिससे बस असंतुलित हो गयी और सड़क किनारे गढ्ढे में पलट गई। घटना का पता चलते ही आसपास के गांव के लोग मौके पर पहुंचे और घायलों को बस से निकालने की कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली।

इसी बीच किसी ने पुलिस को मामले की सूचना दी। आनन फानन में पहुंची पुलिस ने घायलों को निकालने की कोशिश की, लेकिन सफलता मिलते नहीं देख पुलिस ने जेसीबी मंगवाई। जेसीबी की मदद से घायलों को बस से निकाला गया। इनमें से चार लोगों की मौत हो गयी। सभी मृतक बुधौल बेलदरिया (नवादा) के रहने वाले थे। इनमें रामखेलावन राम, रामदेव भुइयां, पिंकी कुमारी एवं राहुल कुमार शामिल हैं। घायलों को अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बस चालक इस्लाम मियां की हालत गंभीर रहने पर उसे पीएमसीएच रेफर कर दिया गया है।

सीएम ने दिखाया बड़प्पन, कहा - मैं पीएम की रेस में नहीं

पटना(अपना बिहार, 16 मई 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि 2019 में मैं प्रधानमंत्री पद का दावेदार नहीं हूं। उन्होंने कहा, इतने बड़े मूर्ख नहीं हैं हम। मेरी छोटी सी पार्टी है। लेकिन इसी नाम पर मेरे ऊपर प्रहार किया जाता है। मुख्यमंत्री लोक संवाद कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जनता ने जो काम करने का अवसर दिया है, वह करते रहते हैं। उसके आगे नहीं सोचते हैं। पार्टी ने अध्यक्ष बना दिया, इसका मतलब मेरी राष्ट्रीय चाहत हो गई? एक बार किसी ने पूछा तो मैंने कहा कि मेरी चाहत है कि अपनी पार्टी को राष्ट्र स्तर का बनाएं। यह गुनाह है क्या? लेकिन मेरी व्यक्तिगत चाहत दिखा-दिखा कर बहुत कुछ कहा गया। कृपा कर मुझे अपना काम करने दें। 2019 में नरेंद्र मोदी के खिलाफ कौन चेहरा होगा, किसमें लोगों को क्षमता दिखेगी, यह आज का विषय नहीं है। पांच साल पहले कौन जानता था कि मोदी पीएम होंगे। लेकिन लोगों को उनमें क्षमता दिखी और वे पीएम बने। मेरी समझ से मेरे अंदर यह क्षमता नहीं है।

राज्य वेतन आयोग ने मुख्यमंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंपी, आज कैबिनेट ले सकती है बड़ा फ़ैसला 

पटना(अपना बिहार, 16 मई 2017) - पूर्व मुख्य सचिव श्री जी0एस0 कंग की अध्यक्षता में गठित राज्य वेतन आयोग ने आज अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को 1 अणे मार्ग स्थित ‘संकल्प’ में सौंप दी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार को कैबिनेट की होने वाली बैठक में इस संबंध में अहम फ़ैसला लिया जा सकता है। मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपे जाने के मौके पर मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, प्रधान सचिव वित्त रवि मित्तल, प्रधान सचिव शिक्षा आर के महाजन, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, सचिव वित्त (व्यय) राहुल सिंह, सचिव ग्रामीण कार्य विनय कुमार, सचिव षिक्षा श्री जीतेन्द्र श्रीवास्तव उपस्थित थे।

दुल्हों को मिले यूनिक नंबर, सीएम को मिला यह अजीबोगरीब सुझाव

पटना(अपना बिहार, 16 मई 2017) - मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद सभाकक्ष में सोमवार को लोक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आज आयोजित लोक संवाद कार्यक्रम में स्वास्थ्य, षिक्षा, समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण, पिछड़ा वर्ग एवं अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण, श्रम संसाधन, ग्रामीण विकास (जीविका), कृषि, पशु एवं मत्स्य संसाधन, कला संस्कृति, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण, योजना एवं विकास तथा पर्यावरण एवं वन विभाग से संबंधित मामलों पर लोगों द्वारा मुख्यमंत्री को अपना सुझाव दिया गया। एक महिला ने मुख्यमंत्री को सुझाव दिया कि शादी करने वाले हर दुल्हे को यूनिक नंबर दिया जाना चाहिए ताकि वह एक से अधिक शादियां न कर सके।

आयोजित लोक संवाद कार्यक्रम में सीवान के विवेक तिवारी, पटना के राधा रत्न प्रभा, कटिहार के अमित गुप्ता, मुजफ्फरपुर के संतोष जायसवाल, पटना की श्वेता कुमारी ने अपने-अपने सुझाव एवं राय मुख्यमंत्री को दिया। प्राप्त सुझाव एवं राय पर संबंधित विभाग के प्रधान सचिव/सचिव ने वस्तुस्थिति को स्पष्ट किया। लोगों से प्राप्त सुझाव एवं राय पर मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों के प्रधान सचिव/सचिव को कार्रवाई करने हेतु निर्देषित किया। मुख्यमंत्री ने कुछ सुझावों को बहुत अच्छा सुझाव माना और उन सुझावों को ग्रहण करने के संबंध में कार्रवाई का भी निर्देष दिया। आयोजित लोक संवाद कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, योजना एंव विकास मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह सहित संबंधित विभागों के मंत्री व अधिकारी उपस्थित थे।

ईवीएम को लेकर नीतीश कुमार के बयान को मीडिया ने तोड़-मरोड़कर पेश किया

पटना(अपना बिहार, 16 मई 2017) - बिहार में पत्रकारिता दिनोंदिन गिरती जा रही है। सोमवार को लोक संवाद कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ईवीएम को लेकर बयान दिया, जिसे स्थानीय मीडिया ने तोड़ मरोड़कर पेश किया। जबकि मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों की ईवीएम के संबंध में जो आशंकायें हैं चुनाव आयोग को उन्हें दूर करना चहिये। उन्होंने चुनाव में वीवीपैट लागू करने की मांग की। वहीं ईवीएम पर राजद और जदयू की अलग राय पर मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों अलग पार्टी हैं। अलग पर्टियों का विभिन्न विषयों पर अलग-अलग राय होता है। बिहार के मुद्दों पर हमारा साझा कार्यक्रम है। शराबबंदी के संबंध में पूछे गये पष्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा नदी के साथ किसी भी नदी में शराब बहाना गलत है। शराब को बहाना नहीं नष्ट करना है। शराबबंदी में कोई भी पकड़ा जायेगा तो उसपर कड़ी कार्रवाई होगी। चाहे कोई भी हो, किसी को बख्शा नहीं जायेगा। कानून के सामने सभी बराबर हैं। उन्होंने कहा कि मैंने आज तक न किसी को फंसाया है न बचाया है।

मुबारक हो बिहारवासियों, मर गयी चंचला

दुख या शोक मनाने की जरुरत नहीं है। आपको मनाना भी नहीं चाहिए। न आपको न बिहार सरकार को। उसे मरना ही था। जैसे एक दिन सभी को मरना है। हां वह 23 साल की उम्र में तिल-तिलकर मर गयी। हो सकता है कि आपके दिल के एक कोने में आवाज उठे। वैसे यह आवाज उठनी भी चाहिए। वजह यह कि जो मर गयी वह बिहार की बेटी थी। उसका कसूर यह था कि उसके माता-पिता ने बड़े प्यार से उसका नाम चंचला रखा था। पासवान परिवार में जन्मी चंचला का सबसे बड़ा कसूर यह था कि उसने सपने देखे थे। सपने अपने लिये और अपने परिवार के लिए। तभी तो वह मनेर के छितनावा गांव से रोज दानापुर आती थी।

उसकी उंगलियां कम्प्यूटर पर थिरकना चाहती थीं। उसके मन में आईएएस बनने का अरमान था। उसकी इच्छा थी कि मुस्कराहट के लिए तरसती उसकी मां उसकी सफ़लता देख मुस्कराये। दिहाड़ी मजदूर के रुप में काम करने वाला उसका पिता शैलेन्द्र पासवान गर्व से जीना चाहता था। चंचला उसे यह तोहफ़ा देना चाहती थी। लेकिन दे न सकी। मर गयी। सवाल यह नहीं है कि वह मर गयी। सवाल इसलिए नहीं कि उसके ही गांव के शोहदों ने उसके चेहरे पर एसिड डालकर उसका जीवन बर्बाद कर डाला था।

सवाल इसलिए भी नहीं कि हम सभी एक अच्छा बिहारी और अच्छा इंसान खुद को साबित नहीं कर सके हैं। सवाल तो तब उठेगा जब हम संवेदनशील होंगे और हमारी बेटियां बिना किसी भय के सपने देख सकेंगी। जी सकेंगी। अपने माता-पिता के अरमानों को पूरा करेंगी। हां जबतक ऐसा नहीं होता है। हंसिए, मुस्कराइये। चंचला को मुस्कराहट के साथ विदा करिये। इतना तो कर ही सकते हैं न आप और हम सभी। मैं ठीक कह रहा हूं न?

कोविन्द की ताजपोशी : सहारनपुर का पश्चाताप

बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविन्द देश के नये राष्ट्रपति होंगे। 19 जून को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने उनके उम्मीदवारी की घोषणा की है। इस मामले में विपक्ष के सियासी उम्मीदों को झटका लगा। पहले यह माना जा रहा था कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भाजपा की ओर से देश के सर्वोच्च पद के लिए उम्मीदवार होंगे और उनके मुकाबले विपक्ष एकजुट होगा। लेकिन भाजपा ने विपक्ष से एकजुट होने का संभावित मौका भी छीन लिया। वैसे यह महज संयोग नहीं है कि बीते 5 मई को पश्चिमी उत्तरप्रदेश के सहारनपुर जिले के शब्बीरपुर में दलितों का घर फ़ूंके जाने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर दलितों का आक्रोश झेल रही भाजपा ने उत्तरप्रदेश के ही एक दलित को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है।

 

बताते चलें कि महाराणा प्रताप जयंती मनाने के बहाने बाबा साहब डा भीम राव आंबेडकर के खिलाफ़ नारा लगाने को लेकर शब्बीरपुर गांव में दलितों और राजपूत समाज के लोगों के बीच तीखी नोंक-झोंक हो गयी थी। इस दौरान सुमित राणा नामक एक नौजवान घायल हो गया था, जिसकी बाद में मौत हो गयी थी। प्रतिशोध में राजपूत समाज के लोगों ने दलितों का घर जला दिया और व्यापक तौर पर नुकसान पहुंचाया था। इस क्रम में संत रविदास की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाया गया था। इस मामले में 9 मई को भीम आर्मी के आह्वान पर सहारनपुर में बड़ी संख्या में दलितों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस के साथ नोंक-झोंक के बाद पूरे सहारनपुर में हिंसा हुई। इस मामले में भीम आर्मी के संस्थापक अधिवक्ता चंद्रशेखर आजाद उर्फ़ रावण को गिरफ़्तार किया जा चुका है और इसके विरोध में बीते 18 जून को बड़ी संख्या में दलित एक महीने के भीतर दूसरी बार जंतर-मंतर पर जुटे।

 

खैर वर्ष 1994 में राज्यसभा सांसद बनने से पहले रामनाथ कोविन्द मुख्य रुप से वकालत करते थे। हालांकि इससे पहले राजनीति में उनकी पहचान तब बनी जब वे 1977 में प्रधानमंत्री बने मोरारजी देसाई के निजी सचिव बने। वर्ष 1994 से लेकर 2006 तक राज्यसभा का सदस्य रहने वाले श्री कोविन्द को बाद में बीजेपी ने बिहार का राज्यपाल बनाया। सियासी गलियारे में उन्हें मुख्य रुप से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का समर्थक बताया जाता है। बताया जा रहा है कि उन्हें आगे कर संघ ने एक तीर से दो निशाना साधा है। पहला यह कि राष्ट्रपति पद पर संघ का कब्जा होने के साथ ही देश में दलितों और पिछड़ों को संघ से जोड़ने की कवायद।

 

बहरहाल रामनाथ कोविन्द देश के दूसरे दलित राष्ट्रपति होंगे। 1997 में कांग्रेस और संयुक्त मोर्चा ने केरल के वरिष्ठ सांसद रहे के आर नारायणन को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया था। तब कांग्रेस की इस सियासी चाल का भाजपा ने भी समर्थन किया था। हालांकि तब शिवसेना ने अलग रुख अख्तियार करते हुए भूतपूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त रहे टी एन शेषण को उम्मीदवार बनाया और मतदान की नौबत आयी थी। तब श्री नारायणन को कुल 9,56,290 मत और शेषण को केवल 50,631 मत मिले थे।(courtesy : www.forwardpress.in)

अपनी बात : जूते मारिये ऐसे पीएम को

आने वाले दिनों में भारतीय जनता की जेब और कटने वाली है। दिलचस्प यह होगा कि जेब काटने वाला कोई और नहीं देश का सिरफ़िरा प्रधानमंत्री होगा। इसका नमूना पीएम ने पहले ही दे दिया है। जनता को बुनियादी समस्यायों से भटकाने के लिए लागू की गयी नोटबंदी इसी जेबकतरी का उदाहरण है। अब जो होने वाला है, वह लोगों को चौंकाने वाला होगा। मसलन अब यदि 24 बार से अधिक बार बैंकों से लेन-देन करेंगे तो आपको टैक्स देना पड़ेगा। साथ ही सरकार के अधीन कार्य करने वाले बैंक भी निजी बैंकों के जैसे मिनिमम बैलेंस नहीं रहने पर अपने उपभोक्ताओं से राशि वसुलेंगे। मतलब यह कि अब आम आदमी अपनी ही कमाई के पैसों के इस्तेमाल के लिए सरकार को रंगदारी देगा। संभव है कि समस्या उनके लिए नहीं हो, जिनके पास अकूत धन हो। लेकिन सोचिए उनके बारे में जो किसी तरह पेट काटकर अपने लिए दो पैसा बचाते हैं। उनके इस बचत पर केंद्र सरकार सीधे डकैती करने जा रही है।

राजद प्रमुख ने मीडिया को दी नसीहत, पत्रकारिता करें, गुंडई नहीं

पटना(अपना बिहार, 17 जून 2017) - राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने मीडिया के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि प्रश्न पूछना किसी का अधिकार है तो ठीक उसी तरह उत्तर नहीं देना या देना किसी दूसरे का. इसके पहले अपने फेसबुक पर लालू प्रसाद ने एक पोस्ट के जवाब में लिखा कि ऐसे सड़क छाप चीं-चीं, चटर-पटर करने वाले पत्रकारों के अलोकतंत्रिक रवैये से ज्यादा भरोसा खुद के लोकतांत्रिक व्यवहार पर है. मैं हमेशा से प्रेस की स्वतंत्रता का पक्षधर रहा हूं, लेकिन आजकल की पत्रकारिता गुंडई में तब्दील हो रही है, हम लोगों ने इमरजेंसी वाला दौर देखा है. ये कल के लड़के हाथ में माइक थाम कर समझते हैं कि लोकतंत्र के वे सबसे बड़े रक्षक हैं. 

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने 6 पुलिस जवानों का सिर काटा

श्रीनगर। दक्षिण कश्मीर में अनंतनाग जिले के अचबल में एक पुलिस दल पर जिन आतंकवादियों ने घात लगा कर हमला किया है, उन्होंने हमले में मारे गये छह पुलिसकमर्यिों के चेहरे शुक्रवार को विकृत कर दिये और इसके बाद उनके हथियार लेकर भाग गये. पुलिस महानिदेशक एसपी वैद्य ने बताया कि पुलवामा निवासी फिरोज नाम का एक उप निरीक्षक, एक चालक और चार अन्य पुलिसकर्मी इस हमले में मारे गये. वे लोग अपनी जीप में नियमित गश्त पर थे.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस हमले के पीछे पाक आधारित आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा का हाथ होने का अनुमान है. संगठन अरवानी मुठभेड़ का बदला लेना चाहता था जिसमें उसका स्थानीय कमांडर जुनैद मट्टू के मारे जाने की बात मानी जाती है. बिजबेहरा इलाके के अरवानी में शुक्रवार की सुबह मुठभेड हुई और सभी तीनों आतंकवादियों के मारे जाने की बात समझी जा रही है. अब तक एक आतंकवादी का शव बरामद कर लिया गया है. बाकी दो आतंकियों के शव की खोज की जा रही है. अधिकारियों ने बताया कि सेना भेजी गयी है और इलाके में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है.

शुक्रवार को ही पाकिस्‍तान की ओर से सीजफायर उल्‍लंघन में सेना का जवान भी शहीद हो गया. सीमा पार से लगातार सीजफायर उल्‍लंघन की घटनाए हो रही हैं. अंदेशा है के आतंकवादियों को घुसपैठ कराने के लिए पाकिस्‍तानी सैनिक सीमा पार से गोलीबारी करते हैं. आतंकवादियों को मारे जाने की घटना पर एक अधिकारी ने बताया कि घर के अंदर छिपे आतंकवादियों ने सेना के जवानों पर फायरिंग शुरू कर दी. दक्षिण कश्मीर के बिजबहेडा इलाके के एक गांव में सुरक्षा बलों और प्रतिबंधित लश्कर ए तैयबा के तीन आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ चली. सुरक्षा बलों ने आतंकियों को एक घर में घेर लिया था. एक घर में तीन आतंकवादियों के मौजूद होने की खुफिया सूचना मिलने के बाद सेना सहित सुरक्षा बलों ने अरवानी गांव के मलिक मोहल्ले में एक घर की घेराबंदी की जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हुई थी.

भागवत बनाम मुलायम : राष्ट्रपति के रेस में

एक बार फ़िर से देश के सर्वोच्च पद को लेकर राजनीतिक बिसात बिछ चुकी है। अगले राष्ट्रपति का चुनाव 17 जुलाई को होगा और मतगणना 20 जुलाई को होगी। देश के 13वें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को होगा। उपराष्ट्रपति का कार्यकाल अगस्त के अंत में समाप्त हो रहा है। हालांकि इस बार की राजनीतिक लड़ाई का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि दलित और पिछड़ा वर्ग केंद्रीय भूमिका में है। केंद्र में सत्तासीन एनडीए के अंदर भी इस बार किसी गैर ब्राह्म्ण को राष्ट्रपति बनाये जाने की मांग उठ रही है। जबकि विपक्ष भी दलित और ओबीसी को ध्यान में रखकर मोहरे चलने की फ़िराक में है।

इसके बावजूद सूत्रों की मानें तो भाजपा और उनके सहयोगी घटक दल मोहन भागवत के नाम पर मुहर लगाने को तैयार हैं। इसके लिए मोदी-शाह की जोड़ी ने तीन सदस्यों की कमिटी का गठन किया है। हालांकि इसमें अन्य घटक दलों के नेताओं को बाहर रखा गया है। इसमें तीन केंद्रीय मंत्रियों राजनाथ सिंह, अरुण जेटली और वेंकैया नायडू शामिल हैं। ये तीनों नेता मोदी-शाह के अनुयायी होने के साथ आरएसएस के हार्डकोर सदस्य भी हैं।

इस प्रकार यदि भागवत के नाम पर मुहर लगती है तो एक बार फ़िर एक ब्राह्मण के बाद दूसरे ब्राह्म्ण की ताजपोशी मुमकिन है। जबकि उपराष्ट्रपति पद के लिए एक आदिवासी चेहरे की तलाश की जा रही है। सूत्रों के अनुसार इनमें झारखंड के खुंटी से सांसद करिया मुंडा भी रेस में सबसे आगे हैं। श्री मुंडा पूर्व में लोकसभा के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक 18 जून तक भाजपा के तीन नेताओं की कमेटी अपना सुझाव देगी।

उधर विपक्षी पार्टियां 14 जून को चर्चा करने के लिए बैठक करेंगी। सूत्र बताते हैं कि विपक्षी खेमे में मुलायम सिंह यादव रेस में सबसे आगे हैं। वैसे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाधी ने जुलाई में होने जा रहे राष्ट्रपति चुनाव के लिए सभी विपक्षी दलों को एक साझा मंच पर लाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। सोनिया गांधी ने चुनाव पर चर्चा के मद्देनजर इस महीने की शुरुआत में विपक्षी पार्टियों के दस सदस्यीय उपसमूह का गठन किया था।

विपक्षी पार्टियों के उपसमूह के सदस्यों की 14 जून को औपचारिक रूप से बैठक शुरू होगी और इस दौरान राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति चुनावों को लेकर चर्चा की जाएगी। इस उपसमूह में कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद और मल्लिकार्जुन खड़गे, जदयू नेता शरद यादव, राजद नेता लालू प्रसाद यादव, सीपी नेता सीताराम येचुरी, टीएमसी नेता डेरेक ओब्रायन, समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव, बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्रा, डीएमके नेता आर.एस.भारती और एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल हैं।

बहरहाल, इस पूरे राजनीतिक उठापटक के बीच संख्या बल से अलग सबसे महत्वपूर्ण यह है कि क्या विपक्ष इसी बहाने अपनी एकजुटता बना पायेगा। वजह यह है कि वामदल अभी से ही महात्मा गांधी के प्रपौत्र गोपाल कृष्ण गांधी के नाम का शोर मचा रहे हैं तो दूसरी ओर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अभी भी अपेक्षा है कि भाजपा अपनी ओर से राष्ट्रपति पद के लिए ऐसे उम्मीदवार की घोषणा करे जिनके नाम पर विपक्ष भी सहमत हो।(साभार : फ़ारवर्ड प्रेस डाट इन)

कृष्‍ण और यादवों का ब्राह्मणीकरण

- चंद्रभूषण सिंह यादव

इस देश की पिछड़ी जातियों में शुमार अहीर व यादव कृष्ण को अपना पूर्वज मानते हैं। इस जाति के बीच कृष्ण का नायकत्व ऐसा है कि अहीर और कृष्ण पर्यायवाची बन गए हैं। हिन्दू धर्मग्रंथों में इस यादव नायक का नाम कृष्ण, श्याम, गोपाल आदि आया है, जो यादवों के शारीरिक रंग एवं व्यवसाय से मेल खाने वाला है। बहुसंख्यक यादव सांवले या काले होते हैं, जो कि इस देश के मूल निवासियों अर्थात् अनार्यों का रंग है, के होंगे, तो निश्चय ही इनके महामानव या नायक का नाम कृष्ण या श्याम होगा, जिसका शाब्दिक अर्थ काला, करिया या करियवा होगा। देश एवं हिंदू धर्म की वर्ण-व्यवस्था सवर्ण-अवर्ण या काले-गोरे के आधार पर बनी है।

 

आर्यों और अनार्यों के संदर्भ में प्रसिद्ध इतिहासकार रामशरण शर्मा की प्रसिद्ध पुस्तक 'आर्य संस्कृति की खोज' का यह अंश उल्लेखनीय है: ''1800 ईसा पूर्व के बाद छोटी-छोटी टोलियों में आर्यों ने भारतवर्ष में प्रवेश किया। ऋग्वेद और अवेस्ता दोनों प्राचीनतम ग्रंथों में आर्य शब्द पाया जाता है। ईरान शब्द का संबंध आर्य शब्द से है। ऋग्वैदिक काल में इंद्र की पूजा करने वाले आर्य कहलाते थे। ऋग्वेद के कुछ मंत्रों के अनुसार आर्यों की अपनी अलग जाति है। जिन लोगों से वे लड़ते थे उनको काले रंग का बतया गया है। आर्यों को मानुषी प्रजा कहा गया है जो अग्नि वैश्वानर की पूजा करते थे और कभी-कभी काले लोगों के घरों में आग लगा देते थे। आर्यों के देवता सोम के विषय में कहा गया है कि वह काले लोगों की हत्या करता था। उत्तर-वैदिक और वैदिकोत्तर साहित्य में आर्य से उन तीन वर्णों का बोध होता था जो द्विज कहलाते थे। शूद्रों को आर्य की कोटि में नहीं रखा जाता था। आर्य को स्वतंत्र समझा जाता था और शूद्र को परतंत्र।''

 

इंद्र विरुद्ध कृष्ण

 

हिंदुओं के प्रमुख धर्मग्रंथ ऋग्वेद का मूल देवता इंद्र है। इसके 10,552 श्लोकों में से 3,500 अर्थात् ठीक एक-तिहाई इंद्र से संबंधित हैं। इंद्र और कृष्ण का मतांतर एवं युद्ध सर्वविदित है। प्रसिद्ध महाकाव्य महाभारत में वेदव्यास ने कृष्ण को विजेता बताया है तथा इंद्र का पराजित होना दर्शाया है। इंद्र और कृष्ण का यह युद्ध आमने-सामने लड़ा गया युद्ध नहीं है। इस युद्ध में कृष्ण द्वारा इंद्र की पूजा का विरोध किया जाता है, जिससे कुपित इंद्र अतिवृष्टि कर मथुरावासियों को डुबोने पर आमादा हैं। कृष्ण गोवर्धन पर्वत के जरिए अपने लोगों को इंद्र के कोप से बचा लेते हैं। इंद्र थककर पराजय स्वीकार कर लेता है। इस संपूर्ण घटनाक्रम में कहीं भी आमने-सामने युद्ध नहीं होता है लेकिन अन्य हिंदू धर्मग्रंथों, विशेषकर ऋग्वेद में इस युद्ध के दौरान जघन्य हिंसा का जिक्र है तथा इंद्र को विजेता दिखाया गया है।

 

ऋग्वेद मंडल-1 सूक्त 130 के 8वें श्लोक में कहा गया है कि - ''हे इंद्र! युद्ध में आर्य यजमान की रक्षा करते हैं। अपने भक्तों की अनेक प्रकार से रक्षा करने वाले इंद्र उसे समस्त युद्धों में बचाते हैं एवं सुखकारी संग्रामों में उसकी रक्षा करते हैं। इंद्र ने अपने भक्तों के कल्याण के निमित्त यज्ञद्वेषियों की हिंसा की थी। इंद्र ने कृष्ण नामक असुर की काली खाल उतारकर उसे अंशुमती नदी के किनारे मारा और भस्म कर दिया। इंद्र ने सभी हिंसक मनुष्यों को नष्ट कर डाला।''

 

ऋग्‍वेद के मंडल-1 के सूक्त 101 के पहले श्लोक में लिखा है कि: ''गमत्विजों, जिस इंद्र ने राजा ऋजिश्वा की मित्रता के कारण कृष्ण असुर की गर्भिणी पत्नियों को मारा था, उन्हीं के स्तुतिपात्र इंद्र के उद्देश्य से हवि रूप अन्न के साथ-साथ स्तुति वचन बोला। वे कामवर्णी दाएं हाथ में बज्र धारण करते हैं। रक्षा के इच्छुक हम उन्हीं इंद्र का मरुतों सहित आह्वान करते हैं।''

 

इंद्र और कृष्ण की शत्रुता की भी ऋणता को समझने के लिए ऋग्वेद के मंडल 8 सूक्त 96 के श्लोक 13,14,15 और 17 को भी देखना चाहिए (मूल संस्कृत श्लोक देखें शांति कुंज प्रकाशन, गायत्री परिवार, हरिद्वार द्वारा प्रकाशित वेद में)

 

ऋगवेद के श्लोक 13: शीघ्र गतिवाला एवं दस हजार सेनाओं को साथ लेकर चलने वाला कृष्ण नामक असुर अंशुमती नदी के किनारे रहता था। इंद्र ने उस चिल्लाने वाले असुर को अपनी बुद्धि से खोजा एवं मानव हित के लिए वधकारिणी सेनाओं का नाश किया।

 

श्लोक 14: इंद्र ने कहा-मैंने अंशुमती नदी के किनारे गुफा में घूमने वाले कृष्ण असुर को देखा है, वह दीप्तिशाली सूर्य के समान जल में स्थित है। हे अभिलाषापूरक मरुतो, मैं युद्ध के लिए तुम्हें चाहता हूं। तुम यु़द्ध में उसे मारो।

 

श्लोक 15: तेज चलने वाला कृष्ण असुर अंशुमती नदी के किनारे दीप्तिशाली बनकर रहता था। इंद्र ने बृहस्पति की सहायता से काली एवं आक्रमण हेतु आती हुई सेनाओं का वध किया।

 

श्लोक 17: हे बज्रधारी इंद्र! तुमने वह कार्य किया है। तुमने अद्वितीय योद्धा बनकर अपने बज्र से कृष्ण का बल नष्ट किया। तुमने अपने आयुधों से कुत्स के कल्याण के लिए कृष्ण असुर को नीचे की ओर मुंह करके मारा था तथा अपनी शक्ति से शत्रुओं की गाएं प्राप्त की थीं। ( अनुवाद-वेद, विश्व बुक्स, दिल्ली प्रेस, नई दिल्ली)

 

क्या कृष्ण और यादव असुर थे?

 

ऋग्वेद के इन श्लोकों पर कृष्णवंशीय लोगों का ध्यान शायद नहीं गया होगा। यदि गया होता तो बहुत पहले ही तर्क-वितर्क शुरू हो गया होता। वेद में उल्लेखित असुर कृष्ण को यदुवंश शिरोमणि कृष्ण कहने पर कुछ लोग शंका व्यक्त करेंगे कि हो सकता है कि दोनों अलग-अलग व्यक्ति हों, लेकिन जब हम सम्पूर्ण प्रकरण की गहन समीक्षा करेंगे तो यह शंका निर्मूल सिद्ध हो जाएगी, क्योंकि यदुकुलश्रेष्ठ का रंग काला था, वे गायवाले थे और यमुना तट के पास उनकी सेनाएं भी थीं। वेद के असुर कृष्ण के पास भी सेनाएं थीं। अंशुमती अर्थात् यमुना नदी के पास उनका निवास था और वह भी काले रंग एवं गाय वाला था। उसका गोर्वधन गुफा में बसेरा था।

 

यदुवंशी कृष्ण एवं असुर कृष्ण दोनों का इंद्र से विरोध था। दोनों यज्ञ एवं इंद्र की पूजा के विरुद्ध थे। वेद में कृष्ण एवं इंद्र का यमुना के तीरे युद्ध होना, कृष्ण की गर्भिणी पत्नियों की हत्या, सम्पूर्ण सेना की हत्या, कृष्ण की काली छाल नोचकर उल्टा करके मारने और जलाने, उनकी गायों को लेने की घटना इस देश के आर्य-अनार्य युद्ध का ठीक उसी प्रकार से एक हिस्सा है, जिस तरह से महिषासुर, रावण, हिरण्यकष्यप, राजा बलि, बाणासुर, शम्बूक, बृहद्रथ के साथ छलपूर्वक युद्ध करके उन्हें मारने की घटना को महिमामंडित किया जाना। इस देश के मूल निवासियों को गुमराह करने वाले पुराणों को ब्राह्मणों ने इतिहास की संज्ञा देकर प्रचारित किया। इसी भ्रामक प्रचार का प्रतिफल है कि बहुजनों से उनके पुरखों को बुरा कहते हुए उनकी छल कर हत्या करने वालों की पूजा करवाई जा रही है।

 

यदुवंशी कृष्ण के असुर नायक या इस देश के अनार्य होने के अनेक प्रमाण आर्यों द्वारा लिखित इतिहास में दर्ज है। आर्यों ने अपने पुराण, स्मृति आदि लिखकर अपने वैदिक या ब्राह्मण धर्म को मजबूत बनाने का प्रयत्न किया है। पद्म पुराण में कृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध एवं राजा बलि की पौत्री उषा के विवाह का प्रकरण पढ़ने को मिलता है। कृष्ण के पौत्र की पत्नी उषा के पिता का नाम बाणासुर था। बाणासुर के पूर्वज कुछ यूं थे-असुर राजा दिति के पुत्र हिरण्यकश्यप के पुत्र विरोचन के पुत्र बलि के पुत्र बाणासुर थे। उषा का यदुकुल श्रेष्ठ कृष्ण एवं रुक्मिणी के पुत्र प्रद्युम्न के पुत्र अनिरुद्ध से प्रेम हो गया। अनिरुद्ध अपनी प्रेमिका उषा से मिलने बाणासुर के महल में चले गए। बाणासुर द्वारा अनिरुद्ध के अपने महल में मिलने की सूचना पर अनिरुद्ध को पकड़कर बांधकर पीटा गया।

 

इस बात की जानकारी होने पर अनिरुद्ध के पिता प्रद्युम्न और वाणासुर में घमासान हुआ। जब बाणासुर को पता चला कि उनकी पुत्री उषा और अनिरुद्ध आपस में प्रेम करते हैं तो उन्होंने युद्ध बंद कर दोनों की शादी करा दी। इस तरह से कृष्ण और असुर राज बलि एवं बाणासुर और कृष्ण पुत्र प्रद्युम्न आपस में समधी हुए। अब सवाल उठता है कि यदि कृष्ण असुर कुल यानी इस देश के मूल निवासी नहीं होते तो उनके कुल की बहू असुर कुल की कैसे बनती? श्रीकृष्ण और राजा बलि दोनों के दुश्मन इंद्र और उपेंद्र आर्य थे। कृष्ण ने इंद्र से लड़ाई लड़ी तो बालि ने वामन रूपधार उपेंद्र (विष्णु) बलि से। राजा बलि के संदर्भ में आर्यों ने जो किस्सा गढ़ा है वह यह है कि राजा बलि बड़े प्रतापी, वीर किंतु दानी राजा थे। आर्य नायक विष्णु आदि राजा बलि को आमने-सामने के युद्ध में परास्त नहीं कर पा रहे थे, सो विष्णु ने छल करके राजा बलि की हत्या की योजना बनाई।

 

विष्णु वामन का रूप धारण कर राजा बलि से तीन पग जमीन मांगी। महादानी एवं महाप्रतापी राजा बलि राजी हो गए। पुराण कथा के मुताबिक वामन वेशधारी विष्णु ने एक पग में धरती, एक पग में आकाश तथा एक पग में बलि का शरीर नापकर उन्हें अपना दास बनाकर मार डाला। कुछ विद्वान कहते हैं कि वामन ने राजा बलि के सिंहासन को दो पग में मापकर कहा कि सिंहासन ही राजसत्ता का प्रतीक है इसलिए हमने तुम्हारा सिंहासन मापकर संपूर्ण राजसत्ता ले ली है। एक पग जो अभी बाकी है उससे तुम्हारे शरीर को मापकर तुम्हारा शरीर लूंगा। महादानी राजा बलि ने वचन हार जाने के कारण अपनी राजसत्ता वामन विष्णु को बिना युद्ध किए सौंप दी तथा अपना शरीर भी समर्पित कर दिया। वामन वेशधारी विष्णु ने एक लाल धागे से हाथ बांधकर राजा बलि को अपने शिविर में लाकर मार डाला। इस लाल धागे से हाथ बांधते वक्त विष्णु ने बलि से कहा था कि तुम बहुत बलवान हो, तुम्हारे लिए यह धागा प्रतीक है कि तुम हमारे बंधक हो। तुम्हें अपने वचन के निर्वाह हेतु इस धागा को हाथ में बांधे रखना है।

 

हजारों वर्ष बाद भी इस लाल धागे को इस देश केमूल निवासियों के हाथ में बांधने का प्रचलन है जिसे रक्षासूत्र या कलावा कहते हैं। इस रक्षासूत्र या कलावा को बांधते वक्त पुरोहित उस हजार वर्ष पुरानी कथा को श्लोक में कहता है कि : 'येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल: तेन त्वामि प्रतिबद्धामि रक्षे मा चल मा चल।'  (अर्थात् जिस तरह हमने दानवों के महाशक्तिशाली राजा बलि को बांधा है उसी तरह हम तुम्हें भी बांधते हैं। स्थिर रह, स्थिर रह।)

 

पुराणों के प्रमाण

 

दरअसल, इन पौराणिक किस्सों से यही प्रमाणित होता है कि कृष्ण, राजा बलि, राजा महिषासुर, राजा हिरण्यकश्यप आदि से विष्णु ने विभिन्न रूप धरकर इस देश के मूल निवासियों पर अपनी आर्य संस्कृति थोपने के लिए संग्राम किया था। इंद्र एवं विष्णु आर्य संस्कृति की धुरी हैं तो कृष्ण और बलि अनार्य संस्कृति की।

 

बहरहाल, कृष्ण को क्षत्रिय या आर्य मानने वाले लोगों को कृष्ण काल से पूर्व राम-रावण काल में भी अपनी स्थिति देखनी चाहिए। महाकाव्यकार वाल्मीकि ने रामायण में भी यादवों को पापी और लुटेरा बताया है तथा राम द्वारा किए गए यादव राज्य दु्रमकुल्य के विनाश को दर्शाया है।

 

वाल्मीकि रामायण के युद्धकांड के 22वें अध्याय में राम एवं समुद्र का संवाद है। राम लंका जाने हेतु समुद्र से कहते हैं कि तुम सूख जाओ, जिससे मैं समुद्र पार कर लंका चला जाऊं। समुद्र राम को अपनी विवशता बताता है कि मैं सूख नहीं सकता तो राम कुपित होकर प्रत्यंचा पर वाण चढ़ा लेते हैं। समुद्र राम के समक्ष उपस्थित होकर उन्हें नल-नील द्वारा पुल बनाने की राय देता है। राम समुद्र की राय पर कहते हैं कि वरुणालय मेरी बात सुनो। मेरा यह यह वाण अमोध है। बताओ इसे किस स्थान पर छोड़ा जाए। राम की बात सुनकर समुद्र कहता है कि 'प्रभो! जैसे जगत् में आप सर्वत्र विख्यात एवं पुण्यात्मा हैं, उसी प्रकार मेरे उत्तर की ओर दु्रमकुल्य नाम से विख्यात एक बड़ा पवित्र देश है, वहां आभीर आदि जातियों के बहुत-से मनुष्य निवास करते हैं जिनके रूप और कर्म बड़े ही भयानक हैं। वे सबके सब पापी और लुटेरे हैं। वे लोग मेरा जल पीते हैं। उन पापाचारियों का स्पर्श मुझे प्राप्त होता रहता है, इस पाप को मैं सह नहीं सकता, श्रीराम! आप अपने इस उत्तम वाण को वहीं सफल कीजिए। महामना समुद्र का यह वचन सुनकर सागर के बताए अनुसार उसी देश में वह अत्यंत प्रज्जवलित वाण छोड़ दिया। वह वाण जिस स्थान पर गिरा था वह स्थान उस वा